बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
इंसान के पास जो कुछ उपलब्ध है, उस पर संतोष करना चाहिए। अगर उसके पास एक रोटी है और निकट भविष्य में दो रोटी मिलने की आशा है, तो दो रोटी के चक्कर में एक रोटी को त्यागना नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में यह भी हो सकता है कि एक रोटी हाथ से निकल जाए और दो रोटी भी नहीं मिले। लेकिन इंसान अक्सर ऐसे लालच में फंस जाता है कि वह अपने पास जो कुछ भी है, उसे भी गंवा बैठता है।किसी गांव में एक शिकार रहता था। उसके गांव के पास में ही एक बहुत बड़ा जंगल था। उस जंगल में हिंस्र पशुओं के साथ-साथ अन्य जानवर भी रहते थे। शिकारी दो-तीन दिन में एक बार जरूर शिकार करने जंगल में जाया करता था। लेकिन वह जंगल में बहुत देर तक नहीं ठहरता था। उसे अंदेशा था कि यदि वह जंगल में ज्यादा देर तक रुका तो शेर, चीता या तेंदुआ उसे मारकर खा जाएगा। इसलिए वह जंगल में बहुत अंदर भी नहीं जाता था।
एक दिन की बात है। वह जंगल में शिकार करने गया। काफी प्रयास के बाद भी उसके हाथ कोई शिकार नहीं लगा। वह काफी परेशान हो गया। अब वह थक भी गया था। तभी उसकी निगाह एक पेड़ पर पड़ी। उस पेड़ की डाल पर एक पक्षी बैठा था। उसने चुपके से जाकर पक्षी को पकड़ लिया। शिकारी पक्षी को लेकर जंगल के बाहर आया, तो उसने देखा कि एक हिरन सोया हुआ है।
उसके पास एक ही तीर बचा हुआ था। उसने सोचा कि यदि पक्षी को छोड़कर हिरन का शिकार कर लूं, तो दो दिन खाने की व्यवस्था हो जाएगी। उसने पक्षी को उड़ा दिया और हिरन का निशाना लगाया। उधर हिरन को भी शिकार की भनक लग गई थी। वह तीर लगने से पहले उठा और भाग गया। अब शिकारी के पास पछताने के सिवा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं बचा था।