Saturday, February 7, 2026

बिभा चौधरी जिसके नाम पर रखा गया तारे का नाम



बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

कलकत्ता के जमींदार परिवार में 1913 को जन्मी बिभा चौधरी ने अपना पूरा जीवन विज्ञान को समर्पित कर दिया था। बिभा के पिता बाकूं बिहारी चौधरी और मां उर्मिला ने ब्रह्म समाज की सदस्यता ग्रहण कर ली थी जिसकी वजह से हिंदू समाज ने उन्हें बहिष्कृत कर दिया था। उनके पिता एक चिकित्सक थे। उनके माता-पिता यह मानते थे कि लड़कियों को भी पढ़ने-लिखने का पूरा अधिकार है। 

बिभा की बचपन से ही विज्ञान में काफी रुचि थी। सन 1936 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में एमएससी करने वाली वह अकेली छात्रा थीं। पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद वह उसी भौतिकी विभाग में प्रोफेसर देवेन्द्र मोहन बसु की देखरेख में शोध करने के लिए जुड़ गईं। सन 1938 से 1942 तक दार्जिलिंग की ऊंची पहाड़ियों पर कास्मिक किरणों पर अध्ययन किया। उन्होंने मेसॉन नामक कण की पहचान की।

इससे जुड़े तीन शोधपत्र नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुए।इसके बात तो बिभा चौधरी का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो गया। इसके बाद कई अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलनों में भाग लेने का मौका मिला। वह भारत की प्रमुख महिला वैज्ञानिक के रूप में पहचानी जाने लगी थीं। उन्होंने वर्ष 1955 में इटली में पीसा में आयोजित मूल अणुओं पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी भाग लिया। 

विज्ञान के क्षेत्र में बिभा चौधरी ने बहुत अधिक योगदान दिया। यही वजह है कि अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने 2019 में पृथ्वी से 340 प्रकाश वर्ष दूर एक तारे का नाम बिभा रखा है। यह किसी वैज्ञानिक के लिए सबसे बड़े सम्मान की बात है। आजीवन शोध कार्य में ही लगी रहने वाली बिभा चौधरी ने विवाह नहीं किया। 2 जून 1991 में कोलकाता में ही इस महान महिला वैज्ञानिक ने 77 साल की आयु में दुनिया छोड़ दी। 

प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल नर्सरियों की संख्या बढ़ाएगी सरकार


अशोक मिश्र

हरियाणा की सैनी सरकार पिछले साल 28 जनवरी से 14 फरवरी तक उत्तराखंड में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करने जा रही है। पिछले साल हुए राष्ट्रीय खेल में हरियाणा के खिलाड़ियों ने 48 स्वर्ण, 47 रजत और 58 कांस्य पदक जीते थे। खेल चाहे अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हो या राष्ट्रीय स्तर का, हरियाणा के खिलाड़ी पदक जीतने में सबसे आगे रहते हैं। हरियाणा के खिलाड़ियों का जोश और जुनून खेल प्रतिस्पर्धाओं में देखते ही बनता है। 

वैसे भी अन्य राज्यों की अपेक्षा हरियाणा अपने खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने, उनके लिए सुविधाएं मुहैया कराने और उन्हें पुरस्कार देने के मामले में सबसे ज्यादा खर्च करने वाला राज्य है। सरकार ने तो पूरे राज्य में डेढ़ हजार खेल नर्सरियां खोल रखी हैं। इन नर्सरियों में 37 हजार से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। पांच सौ खेल नर्सरियों को खोलने की अनुमति खेल विभाग ने मांगी है। सैनी सरकार बहुत जल्दी राज्य में खेल नर्सरियों की संख्या तीन हजार से अधिक करने जा रही है। 

इन नर्सरियों में बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  यही वजह है कि सभी तरह की प्रतिस्पर्धाओं में हरियाणा के खिलाड़ी आगे रहते हैं। हरियाणा के सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने प्रदेश और देश का नाम विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में रोशन किया है जिनमें भाला फेंक में पानीपत के नीरज चोपड़ा, कुश्ती में सोनीपत के योगेश्वर दत्त और रवि कुमार दहिया, झज्जर के बजरंग पुनिया, रोहतक की साक्षी मलिक,  विनेश फोगाट, बबीता फोगाट, गीता फोगाट, संग्राम सिंह आदि प्रमुख हैं। 

मुक्केबाजी में विजेंद्र सिंह, विकास कृष्ण यादव, मनोज कुमार, अमित पंघाल, अखिल कुमार, स्वीटी बूरा, नीतू घनघस का नाम उल्लेखनीय है। हाकी में कुरुक्षेत्र की रानी रामपाल, सिरसा की सविता पूनिया, नवजोत कौर, नवनीत कौर, मोनिका मलिक, नेहा गोयल का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। निशानेबाजी में झज्जर की मनु भाकर, यशस्विनी देसवाल, अमन, सर्वजोत सिंह और पैरालिंपिक सुमित अंतिल, मनीष नरवाल, अमित सरोहा, प्रणव सुरमा, नितेश कुमार प्रमुख हैं। पर्वतारोहण में संतोष यादव, ममता सौदा, अनीता कुंडू आदि ने प्रदेश को गौरव दिलाया है। 

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 से लेकर अब तक लगभग 709 करोड़ रुपये करीब 17 हजार खिलाड़ियों को पुरस्कार देने पर खर्च किए हैं। पिछले साल से अब तक 662 खिलाड़ियों को 109 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जा चुकी है। हरियाणा की खेल नीतियां खिलाड़ियों को बहुत भा रही हैं। सरकार हर स्तर का पुरस्कार जीतने वाले खिलाड़ी को प्रोत्साहित जरूर करती है। यही कारण है कि दूसरे राज्यों ने भी हरियाणा की खेल नीतियों का अनुसरण करना शुरू कर दिया है, ताकि उनके यहां भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिले। 

Friday, February 6, 2026

परमाणु के बारे में पता लगाने वाले महर्षि कणाद


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महर्षि कणाद का जन्म कब हुआ था, इसके बारे में कोई ठोस प्रमाण तो नहीं मिलते हैं, लेकिन माना जाता है कि ईसा पूर्व छठी शताब्दी से दूसरे शताब्दी के बीच पैदा हुए होंगे। कुछ लोगों ने ईसा से तीन सौ साल पहले उनका जन्म माना है। कहते हैं कि जब किसान खेत से फसल काट लेते थे, तो खेत में फसल के दाने बिखर जाते थे, उन्हीं दोनों को इकट्ठा करके वह अपना काम चलाते थे। 

फसल के इन दानों को कन यानी कण कहा जाता था, इससे ही उनका नाम कणाद पड़ा। प्राचीन भारतीय प्रकृति वैज्ञानिकों और दार्शनिकों में उनका नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है क्योंकि वह भारतीय जगत में भौतिकी के जन्मदाता भी कहे जा सकते हैं। उन्होंने ही द्रव्य में परमाणु को मूल आधार मानते हुए परमाणु को अविभाज्य बताया था। 

कहा जाता है कि तत्कालीन राजा को जब यह जानकारी मिली कि कणाद खेतों से कन बीनकर अपना गुजारा करते हैं, तो उन्होंने बहुत सा धन देकर अपने मंत्री को कणाद के पास भेजा। कणाद ने धन लेने से मना करते हुए मंत्री से कहा कि इस धन को उन लोगों में बांट दो जिन्हें इसकी बहुत जरूरत है। इस प्रकार राजा ने तीन बार अपने मंत्री को भेजा, लेकिन कणाद ने धन नहीं लिया। 

आखिर में राजा खुद कणाद के पास पहुंचा, कणाद ने इस बार भी धन लेने से मना करते हुए कहा कि मैं इस धन को लेकर क्या करूंगा। मैं पहले से ही अमीर हूं। आपकी संपदा तो एक दिन नष्ट हो जाएगी, लेकिन मेरे पास जो संपदा है, वह कभी नष्ट नहीं होगी। कणाद की यह बात सुनकर राजा समझ गया कि कणाद के लिए भौतिक संपदा कोई मायने नहीं रखती है। वह उन्हें प्रणाम करके राजमहल लौट गया।

ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों के लिए साबित हो रही जानलेवा

अशोक मिश्र

आन लाइन गेमिंग की लत बच्चों के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। जरूरत से ज्यादा मोबाइल पर समय बिताने वाले बच्चों का मानसिक विकास तो रुक ही रहा है, वह उग्र भी होते जा रहे हैं। कई देशों ने तो बच्चों को कम से कम आॅन स्क्रीन रखने के लिए अपने यहां कठोर नियम बनाए हैं। आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने तो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को  सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है।

भारत में भी बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है। बच्चों के ज्यादा मोबाइल या कंप्यूटर पर समय बिताने की वजह से वह अवसाद के शिकार हो रहे हैं। गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में रहने वाली तीन नाबालिग लड़कियों निशिका, पाखी और प्राची ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। वह कोरियन गेम्स के पीछे दीवानी थीं। इन तीनों बहनों की दीवानगी इस हद तक थी कि वह हर समय कोरियन गेम्स खेलती रहती थीं। इन्होंने तो गूगल के सहारे कोरियन भाषा भी सीख ली थी और आपस में कोरियन भाषा में बातचीत भी करती थीं। 

तीन साल पहले फेल हो जाने की वजह से इनकी पढ़ाई छूट गई थी। पंद्रह दिन पहले इनके पिता ने इनका मोबाइल छीन लिया था जिससी वजह से यह तीनों बहनें परेशान थी और अंतत: मंगलवार की देर रात दो बजे तीनों बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने उन अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है जिनके बच्चे ज्यादा से ज्यादा समय आन स्क्रीन बिताते हैं। वैसे कुछ लोगों की आदत होती है, बच्चों को बिजी रखने के लिए वह अपना मोबाइल पकड़ा देते हैं।

 वह यह भी जांचने की जहमत नहीं उठाते हैं कि उनके बच्चों ने मोबाइल या कंप्यूटर पर क्या देखा, क्या पढ़ा? गेमिंग की लत ते चलते बच्चों के आत्महत्या कर लेने की बहुत सारी घटनाएं देश और विदेश में हो चुकी हैं। पिछले एक दशक से टॉरगेट देने वाले गेम्स बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ब्ल्यू वेल चैलेंज, द पास आउट चैलेंज, द सॉल्ट ऐंड आइस चैलेंज, द फायर चैलेंज और द कटिंग चैलेंज जैसे गेम्स बच्चों को टारगेट देकर आत्महत्या करने को प्रेरित करते हैं। वैसे तो ब्ल्यू वेल चैलेंज की शुुरुआत पिछले दो महीने से ही हुई है, लेकिन अब तक इस चैलेंज की वजह से 130 जानें जा चुकी हैं।

द पास आउट चैलेंज को चोकिंग गेम भी कहा जाता है। इसमें बच्चों को अपना गला दबाना होता है। हर साल अमेरिका में 250 से 1000 तक जानें चली जाती हैं। द साल्ट एंड आइस चैलेंज भी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। द फायर चैलेंज में युवाओं को अपने शरीर पर आग लगाना होता है। द कटिंग चैलेंज गेम में भाग लेने वाले को अपने शरीर पर घाव करना होता है। जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ता है, खेल अधिक से अधिक खतरनाक होता जाता है।

Thursday, February 5, 2026

जल्दी पीछा नहीं छोड़ती है बुराई

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

कहा जाता है कि बुरी आदतें बहुत आसानी से ग्रहण की जा सकती है, लेकिन अच्छी आदतों को ग्रहण करने में समय भी लगता है और परेशानी भी होती है। अच्छी आदतें बड़ी जल्दी छूट जाती हैं, लेकिन बुरी आदतों से छुटकारा बहुत मुश्किल से मिलता है। यही जीवन का कड़वा सच है। 

एक बार की बात है। एक धनी व्यापारी का पुत्र बुरी संगत में रहकर बिगड़ गया था। उसके पिता ने बड़ी ईमानदारी और मेहनत से काफी पैसा कमाया था। उसने जीवन भर लोगों की सहायता भी की थी। अपने बिगड़े हुए पुत्र को सुधारने की बहुत ज्यादा कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। अपने बेटे को लेकर वह काफी चिंतित रहने लगा। 

एक दिन उसने सुना कि नगर में एक महात्मा आए हैं जो लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। व्यापारी एक दिन जाकर महात्मा से मिला। उनसे अपनी समस्या बताई। महात्मा ने कहा कि कल अपने पुत्र को अमुक बाग में भेज दो। उसे समझाने का प्रयास करूंगा। अगले दिन व्यापारी ने अपने पुत्र को बताए गए बाग में भेज दिया। महात्मा से जाकर व्यापारी पुत्र मिला। दोनों बाग में टहलने लगे। महात्मा ने एक छोटे पौधे की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसे उखाड़ दो। व्यापारी पुत्र ने उस पौधे को बड़ी आसानी से एक झटके में उखाड़ दिया। थोड़ी दूर जाने पर महात्मा ने थोड़ा बड़े पौधे को उखाड़ने को कहा। उसे भी उसने उखाड़ दिया। बाद में थोड़ा बड़ा पौधा दिया, तो उसे उखाड़ने में थोड़ी मेहनत लगी, लेकिन उसे भी उखाड़ दिया। आखिर में महात्मा ने पेड़ को उखाड़ने को कहा, तो वह पेड़ को उखाड़ नहीं पाया। तब महात्मा ने कहा कि बुरी आदतों की भी यही स्थिति होती है। जब बुराई जीवन में अपनी जड़ें जमा लेंगी, तो उन्हें उखाड़ना मुश्किल हो जाएगा। यह सुनने के बाद व्यापारी पुत्र की आंख खुल गई।

नौकरी का झांसा देकर साइबर अपराध करवा रहे ठगों के एजेंट


अशोक मिश्र

साइबर क्राइम नेटवर्क कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। इसका संबंध बेरोजगारी से भी जोड़ा जा रहा है। जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, बेरोजगार युवा अपराध की ओर आकर्षित होते जा रहे हैं। अब तो हालात यह है कि कुछ साइबर ठग बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर दूसरे देशों में ले जाकर साइबर अपराध करवा रहे हैं। फरीदाबाद के एक युवक आकाश महादेव को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है जिस पर हरियाणा के पंद्रह युवकों को डंकी रूट से म्यांमार ले जाकर साइबर क्राइम करने वाले नेटवर्क को सौंप दिया था। 

इन युवकों को वहां मजबूर होकर यह अपराध करना पड़ता था। साइबर नेटवर्क खड़ा करने वाला आकाश महादेव दरअसल म्यांमार में दोबारा साइबर नेटवर्क खड़ा करना चाहता था। इससे पहले भी वह साइबर ठगी का नेटवर्क वह म्यांमार में खड़ा कर चुका था, लेकिन म्यांमार में पिछले कई साल से सैन्य शासन के खिलाफ चल रहे युद्ध के दौरान सेना ने इस आपराधिक नेटवर्क को छिन्न-भिन्न कर दिया था। 

महादेव पुराने आपराधिक नेटवर्क को फिर से खड़ा करना चाहता था। लेकिन म्यांमार पहुंचने से पहले ही मुंबई में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फरीदाबाद पुलिस ने पहले से ही उसके खिलाफ लुकआऊट सर्कुलर जारी किया था क्योंकि महादेव ने फरीदाबाद के एक युवक को नौकरी दिलाने के नाम पर म्यांमार बुलाकर साइबर ठगी के जाल में फंसा दिया था। पीड़ित युवक ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। दरअसल, साइबर ठगी के आरोपी आकाश महादेव महाराष्ट्र के शोलापुर का रहने वाला है। 

वह खुद भी साइबर ठगों के चंगुल में फंस चुका था। बाद में उसने साइबर ठगों से हाथ मिला लिया था। साइबर ठगों से उसने भारत से युवकों को सप्लाई का जिम्मा लिया था। देश में जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे बेरोजगार युवा निराश होकर अपराध की ओर उन्मुख हो रहे हैं। प्रदेश में लूटपाट, चोरी, छीनाछपटी जैसे अपराध भी बढ़ रहे हैं, लेकिन साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे अपराध करते समय  अपराधी का चेहरा सामने नहीं होता है, इसलिए अपराध करने वाला सोचता है कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। यही वजह है कि साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध में सभी अपराधी अपना भाग्य आजमाने की कोशिश करते हैं। 

साइबर ठग आधुनिक तकनीक का फायदा उठाकर अपने शिकार पर कुछ दिन तक निगाह रखते हैं। साइबर ठग एक ही समय में कई टारगेट पर निगाह रखते हैं। अपने शिकार का विश्वास जीतने के बाद वह पूंजी निवेश के नाम पर ठगते हैं, लिंक भेजकर बैंक एकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। एटीएम कार्ड की क्लोनिंग करते हैं। इसी तरह के न जाने कितने अपराध साइबर अपराधी करते हैं।

Wednesday, February 4, 2026

मां ने बेटे से कहा, देश प्रेम की परीक्षा लूंगी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हमारे देश को ब्रिटिश दासता से मुक्ति पाने के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। हजारों युवकों ने देश की स्वाधीनता संग्राम के लिए अपना बलिदान दिया। इन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे अशफाक उल्ला खां। अशफाक का जन्म शाहजहांपुर के एक पठान खानदान में हुआ था। इनके परिवार में सभी लोग सरकारी नौकरी में थे। इनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था, लेकिन बचपन से ही अशफाक को ब्रिटिश दासता कचोटती रहती थी। वह उन लोगों की सहायता करने में आगे रहते थे जो लोग गुलामी से मुक्त होने के प्रयास में लगे हुए थे।

 इनकी मां मजहूरुन्निशाँ बेगम को बहुत खुशी हुई, लेकिन उन्हें डर भी था कि कहीं यह पुलिस के हाथों गिरफ्तार हुआ, तो ऐसा न हो कि यह अपने साथियों के बारे में बता दे। एक दिन उन्होंने अपने बेटे से कहा कि मैं तुम्हारी परीक्षा लूंगी। उनकी मां मजहूरुन्निशाँ बेगम ने एक दीपक जला दिया और उसकी लौ पर अशफाक को हाथ रखने को कहा। 

लौ पर हाथ रखने के बाद जब मांस जलने लगा और अशफाक ने उफ तक नहीं किया, तो उनकी मां ने उन्हें गले से लगा लिया। बाद में अशफाक क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्कमें आए। क्रांतिकारियों की एक बैठक शाहजहांपुर में हुई जिसमें तय किया गया कि क्रांति को आगे बढ़ाने अंग्रेजी खजाना लूट लिया जाए। 9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन से जा रहा सरकारी खजाना लूट लिया। 

बाद में ज्यादातर क्रांतिकारी पकड़े गए। 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद की जेल में क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां को फांसी दे दी गई। इस तरह यह क्रांतिकारी भारतीय इतिहास में अमर हो गया।

अटल भूजल योजना को अतिरिक्त फंड मिलने से दूर होगा जल संकट


अशोक मिश्र

हरियाणा में पिछले दो दशकों से जल संकट धीरे-धीरे गहराता जा रहा है। इसका कारण बड़े पैमाने पर भूगर्भ जल दोहन है। यह जल दोहन 135 प्रतिशत से अधिक हो जाने की वजह से 143 ब्लॉक में से 91 ओवर-एक्सप्लॉइटेड की श्रेणी में हैं। राज्य के 17 जिलों में भूजल में फ्लोराइड और नौ में यूरेनियम की अधिकता पाई गई है जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। शहरों और गांवों में जहां पानी का उपयोग जनसंख्या बढ़ने से बढ़ा है, वहीं कृषि में पानी के अधिक उपयोग और सतही जल की कमी से सिरसा, भिवानी, हिसार और सोनीपत जैसे जिलों में पेयजल संकट बढ़ गया है। 

पिछले दो दशकों में हरियाणा के 22 में से 16 जिलों में भूजल स्तर काफी नीचे गिर गया है। अम्बाला, कैथल और करनाल में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट (अप्रैल 2025-जनवरी 2026) बताती है कि प्रदेश में लिए गए 25,240 नमूनों में से 396 खराब पाए गए, जिनमें 17 जिलों में फ्लोराइड और नौ में यूरेनियम की मात्रा अधिक पाया गया है। इन्हीं सब स्थितियों से निपटने के लिए केंद्रीय बजट में इस वर्ष वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हरियाणा को मूल बजट के अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण अतिरिक्त 144.85 करोड़ रुपये दिए है। इससे कुल प्रोत्साहन फंड 615.37 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। 

वैसे भी पिछले साल मिले बजट की बदौलत राज्य के पांच ब्लॉक और 90 से अधिक ग्राम पंचायतों ने भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। पिछले साल भी फंड बढ़ने से जल संरक्षण के कामों में तेजी आई है, जिसमें 1,647 वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ के जरिये सरकारी भवनों और स्कूलों में वर्षा जल संचयन स्थापित किए गए। हरियाणा तालाब और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। यमुनानगर जैसे जिलों में चेक बांधों को मजबूत और मरम्मत किया जा रहा है। 

लेजर लैंड लेवलिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। 'म्हारा पाणी म्हारी विरासत' योजना के तहत, पंचायतों को जल सुरक्षा योजनाएं बनाने के लिए सशक्त किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इस बार केंद्र सरकार से अटल भूजल योजना के लिए मिले 144 करोड़ रुपये का उपयोग प्रदेश के डार्क जोन में आए जल संकट को दूर करने में किया जा सकता है। 

 गांवों में जल बचाने, उसे सहेजन और भूजल का स्तर सुधारने के लिए तालाबों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसके लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाने की सरकार योजना बना रही है। गांवों में भूजल सुधरने से शहरी इलाकों में पड़ रहा दबाव भी कम होगा। इससे शहरों में लगे उद्योगों को भी आवश्यक पानी मिलेगा।

Tuesday, February 3, 2026

सन्त च्वांगत्सु ने खोपड़ी से मांगी क्षमा


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

लोगों को अपनी संपत्ति, अपने ओहदे और वैभव को लेकर बड़ा घमंड होता है। लेकिन वह नहीं जानते हैं कि यह सब कुछ इस जीवन भर के लिए है। मरने के बाद अमीर, अहंकारी, सदगुणी, गरीब सबकी गति एक जैसी होती है। मरने के बाद कुछ भी काम नहीं आता है। इस संबंध में चीन की एक रोचक कथा है। सन्त च्वांगत्सु चीन के लोकप्रिय संतों में माने जाते थे। 

एक बार की बात है। वह शाही मरघट की ओर से कहीं जा रहे थे। अंधेरी रात में उनका पैर एक खोपड़ी से टकराया। उन्होंने अंधेरे में टटोलकर देखा, तो वह उस खोपड़ी को अपने घर ले आए। उस खोपड़ी को अपने घर के दरवाजे पर रखकर उससे क्षमा मांगने लगे। उन्होंने कहा, मुझसे भूल हो गई। कृपया मुझे माफ करें। मेरा पैर आपकी खोपड़ी से गलती से टकरा गया था। 

अंधेरी रात होने की वजह से मुझे आपकी खोपड़ी नहीं दिखाई दी। सन्त च्वांगत्सु को ऐसा करते देखकर गांव के लोग जमा हो गए। उन्होंने सन्त च्वांगत्सु से कहा कि तुम पागल तो नहीं हो गए हो। इस खोपड़ी से क्षमा क्यों मांग रहे हो? सन्त च्वांगत्सु  ने कहा कि पागल मैं नहीं, तुम सब लोग हो गए हो। यह तो गनीमत है कि यह मर चुका है। यदि यह जिंदा होता और मेरा पैर इसकी खोपड़ी से लगा होता, तो न जाने यह मेरे साथ कैसा व्यवहार करता। जिस राजा की यह खोपड़ी है, उसने अपने जीवन में न जाने कितने लोगों को मौत की सजा दी होगी। 

इसी खोपड़ी में वह सारे विचार आए होंगे। इसी खोपड़ी की वजह से राजा जीवन भर अहंकारी रहा। लेकिन आज समय का फेर देखो कि इसकी खोपड़ी एक फकीर के ठोकर को सहने के लिए मजबूर है। आदमी को किसी तरह का अहंकार नहीं पालना चाहिए।

केंद्रीय बजट से हरियाणा के उद्योगों को बूस्टर डोज मिलने की उम्मीद


अशोक मिश्र

एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना नौवां बजट पेश किया। इस बजट में हरियाणा के औद्योगिक और कृषि विकास के लिए काफी बड़ी हिस्सेदारी मिली है। हरियाणा को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उससे यहां के उद्योगों को भारी भरकम निवेश मिलने की संभावनाएं पैदा हो गई हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्र में विकास की गति तेज होने के आसार दिखाई देने लगे हैं। केंद्र सरकार के बजट-2026 में हरियाणा के सात जिलों को सीधी तौर पर फायदा होता दिख रहा है। 

अंबाला, हिसार, करनाल की हवाई पट्टियां सी-प्लेन के लिए डेवलप होंगी। इसके अलावा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में विमान के पुर्जे बनाने वाले छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस) के लिए केंद्र बनेंगे। इतना ही नहीं, बड़े टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना की बजट में घोषणा होने से कपड़ा उद्योग को देशी-विदेशी पूंजी निवेश की भी संभावना है। परंपरागत टेक्सटाइल क्लस्टर्स के आधुनिकीकरण से रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे कई शहरों में रोजगार बढ़ेंगे। इससे बेरोजगारी की समस्या कुछ हद तक खत्म होगी। केंद्रीय बजट में जूते के अपर से इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी गई है। 

जूता उत्पादन में लगे उद्योगों को यह सबसे बड़ी राहत मानी जा रही है।  नान जूता लेदर इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारी अब चीन और वियतनाम से जूते के अपर का आयात कर सकेंगे और अच्छा खासा मुनाफा भी कमा सकेंगे। जूते के अपर से इंपोर्ट ड्यूटी खत्म हो जाने से जूते की कीमतों में कमी आएगी जिससे उपभोक्ताओं को भी जूतों की खरीदारी पर कम पैसा व्यय करना पड़ेगा। केंद्रीय बजट में 'बायोफार्मा शक्ति' के तहत दस हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे हरियाणा के फार्मा हब को सीधा लाभ मिलेगा। 

यह निवेश अनुसंधान और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा, जिससे हरियाणा का बायोफार्मा और फार्मास्युटिकल सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा। पंचकूला जैसे केंद्र एसोसिएटेड बायोफार्मा और मेडरूट्स बायोफार्मा जैसी कंपनियों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले टैबलेट, कैप्सूल और आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं, जिससे कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों के लिए सस्ती दवाएं बनाने में मदद मिलेगी। हरियाणा का इलेक्ट्रॉनिक्स, आॅटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पहले से मजबूत है, यह बजट नए निवेश, स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी हब बनाने में मदद करेगा। 

एमएसएमई, स्टार्टअप और बायोफार्मा पर फोकस से राज्य के युवाओं को बेहतर रोजगार मिलेंगे। हरियाणा में अमृत सरोवर बनने से मत्स्य पालकों को भी काफी फायदा होगा। गैर समुद्री क्षेत्र वाले राज्यों में  हरियाणा मत्स्य पालन में दूसरे नंबर पर है। प्रदेश सरकार ने इस बार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 166 करोड़ मछली के बीज तैयार किए हैं।