बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
एक मां दुनिया में सबसे ज्यादा अपनी संतान को प्यार करती है। अगर कभी उसके सामने पिता, पति और संतान में से किसी एक को चुनने की कठिन घड़ी आ जाए, तो वह निश्चित रूप से अपनी संतान को चुनेगी। ऐसी मान्यता है। कई मामलों में यह सत्य भी साबित हुआ है। एक बार की बात है। एक दंपति समुद्री जहाज पर यात्रा कर रहा था। समुद्री यात्रा के दौरान जहाज का निचला हिस्सा टूट गया।जहाज डूबने लगा। जहाज के कर्मचारियों ने लाइफ बोट निकाली। ज्यादातर यात्री लाइफबोट पर चले गए। दंपति ने देखा कि लाइफबोट पर अब केवल एक ही आदमी की जगह है। दंपति ने एक दूसरे को देखा। पति ने पत्नी को तत्काल छलांग लगाई और लाइफबोट पर जा गिरा। डूबते जहाज पर खड़ी पत्नी ने अपने पति से केवल इतना कहा, बेटी का ध्यान रखना। इसके बाद जहाज डूब गया।
उस महिला की मौत हो गई। लाइफबोट के सहारे पति किनारे पहुंचा। उसने अपनी बेटी का अच्छी तरह से पालन-पोषण किया। उसने अपनी बेटी के पालन-पोषण में किसी तरह की कमी नहीं रहने दी। एक दिन वह भी आया, जब उस आदमी की मौत हो गई। इस घटना को कई साल बीत गए। एक दिन जब उस आदमी की बेटी घर की सफाई कर रही थी, तो उसे एक डायरी मिली। उसको पढ़ने के बाद पता चला कि उसकी मां को एक गंभीर बीमारी हो गई थी। कुछ दिनों बाद उसकी मौत निश्चित थी।
उसके पिता ने सोचा कि यदि मैं जहाज पर रुकता हूं, तो मेरी मौत निश्चित हो जाएगी। उधर पत्नी की भी मौत निश्चित है। ऐसी स्थिति में यदि वह बच जाता है, तो वह अपनी बेटी का पालन-पोषण कर सकता है। यही सोचकर उसने पत्नी को जहाज में ही छोड़कर लाइफबोट में कूदने का फैसला किया। उसकी पत्नी भी उसके फैसले से सहमत थी। लेकिन उसे जीवन भर अपनी पत्नी की कमी खलती रही।