Sunday, April 19, 2026

कभी अविश्वसनीय बात पर विश्वास मत करो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ग्रंथों में जितनी भी बातें लिखी हुई हैं, उनको पढ़ने के बाद अगर जीवन में उतारा न जाए, तो वह सारा ज्ञान मिथ्या होता है। ज्ञान का उपयोग ही सबसे उचित होता है। एक बार की बात है। एक राजा की बहुत सुंदर वाटिका थी। उस वाटिका में अंगूर की बेलें लगी हुई थीं। 

राजा को उस वाटिका से खाने के लिए ढेर सारा मीठा-मीठा अंगूर मिला करता था। कुछ दिनों बाद एक चिड़िया उस वाटिका में रोज आने लगी। वह मीठे-मीठे अंगूरों को खाकर खट्टे या अधपके अंगूरों को नीचे गिरा दिया करती थी। वाटिका का माली चिड़िया की इस करतूत से बहुत परेशान हो गया। उसने चिड़िया को पकड़ने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसे पकड़ने में सफल नहीं हुआ। 

एक दिन आजिज आकर माली ने यह बात राजा को बताई। अगले दिन राजा वाटिका में आकर छिप गया और जैसे ही चिड़िया आई, राजा ने उसे पकड़ लिया। राजा जब उसे मारने लगा, तो चिड़िया ने कहा कि हे राजा! तुम मुझे मत मारो। मैं तुम्हें ज्ञान की चार बातें बताती हूं। राजा ने कहा कि तुरंत बताओ। चिड़िया ने कहा कि पहली बात तो यह है कि हाथ आए शत्रु को कभी जिंदा मत छोड़ो। 

राजा ने कहा-दूसरी बात बता। चिड़िया ने कहा कि कभी असंभव बात पर विश्वास मत करो। तीसरी बात यह है कि अतीत को याद करके पश्चाताप मत करो। इतना कहकर चिड़िया ने कहा कि मेरा दम घुट रहा है। थोड़ा ढील दो, ताकि मैं चौथी बात कह सकूं। राजा ने जैसे ही हथेली ढीली की, चिड़िया उड़कर डाल पर जा बैठी और कहा कि मेरे पेट में दो अनमोल हीरे हैं। 

अब राजा पछताने लगा। तब चिड़िया ने कहा कि आपने मेरी चारों ज्ञान की बातें नहीं मानी। मैं आपकी शत्रु थी, आपने जिंदा छोड़ दिया। हीरे की काल्पनिक बात को जानकर पछता रहे हैं।

क्रॉस वोटिंग करने वाले पांचों एमएलए का निलंबन एक स्मार्ट फैसला


अशोक मिश्र

पिछले 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों पर हुए चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच कांग्रेसी विधायकों को निलंबित करके पार्टी ने अब गेंद इनके पाले में डाल दी है। निलंबित होने के बाद पुनहाना के विधायक मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल चौधरी, नारायण गढ़ से शैली चौधरी, रतिया से जनरैल सिंह और साढौरा से रेनू बाला पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकेंगे। पार्टी की गतिविधियों से एक तरह से इनका नाता टूट गया है। 

निलंबन के दौरान यदि किसी मामले को लेकर पार्टी ह्विप जारी करती है, तो इन पांचों विधायकों को पार्टी ह्विप को मानना ही पड़ेगा और उसके मुताबिक कार्य करना पड़ेगा। पार्टी ने इन पांचों विधायकों बर्खास्त न करके इन्हें अपने से अलग भी कर दिया है और इन्हें स्वतंत्र भी नहीं छोड़ा है। अब अगर पार्टी उन्हें बर्खास्त कर देती तो ह्विप मानने की बाध्यता ही खत्म हो जाती। वह किसी दूसरे दल में भी चले जाते तो उनकी विधायकी बरकरार रहती। दूसरे दल को अपना समर्थन भी दे सकते थे। 

लेकिन अब अगर उन्होंने ह्विप नहीं माना या दूसरे दल में चले गए, तो उनकी विधायकी चली जाएगी। ऐसी स्थिति में उनकी सीटों पर दोबारा उपचुनाव होंगे। पार्टी ने इन्हें निलंबित करके पार्टी से बर्खास्त करने और निलंबन खत्म करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रख लिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉास वोटिंग करने के आरोपी विधायकों का निलंबन कांग्रेस का स्मार्ट फैसला मानना जा रहा है। 

कांग्रेस ने यह फैसला करके एक तरह से दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्रॉस वोटिंग के बाद प्रदेश अनुशासन समिति ने पांचों कांग्रेस विधायकों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। इनमें से तीन विधायकों शैली चौधरी, जनरैल सिंह और रेनूबाला ने अपना जवाब समिति को समय पर ही सौंप दिया था। 

लेकिन मोहम्मद इसराइल चौधरी और मोहम्मद इलियास ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा। कांग्रेस से निलंबित किए गए लगभग पांचों विधायकों ने पार्टी के फैसले से ऐतराज जताया है। सभी का यही कहना है कि वह कुछ ही दिनों में अपने समर्थकों के पास जाएंगे, उनसे विचार विमर्श करेंगे, उसके बाद ही कोई फैसला लेंगे। स्वाभाविक है कि पांचों विधायकों को निलंबित करने का फैसला हाईकमान की मर्जी से लिया गया है। 

इसके बावजूद कहना उचित होगा कि हरियाणा कांग्रेस पर जिस तरह गुटबाजी हावी है, उसको देखते हुए करमवीर बौद्ध का राज्यसभा सांसद चुना जाना ही किसी चमत्कार से कम नहीं है। प्रदेश कांग्रेस में हुड्डा गुट की तूती बोलती है। ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता इनके साथ हैं, लेकिन कुमारी सैलजा प्रदेश में कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित नेता हैं। इनके महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। 

Saturday, April 18, 2026

गैस और तेल की कमी भी बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण

अशोक मिश्र

पिछले एक महीने से दिल्ली एनसीआर को प्रदूषण से राहत मिली हुई थी। लेकिन प्रदूषण बढ़ने की वजह से एक बार फिर इमरजेंसी के लिए बनाए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान वन को फिर लागू कर दिया गया है। एनसीआर के अंतर्गत आने वाले जिलों सहित पूरे राज्य के अधिकतर जिले पिछले कई दिनों से प्रदूषण की चपेट में हैं। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो दिन दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण की चपेट में रहेगा। हरियाणा में भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ रहा है। 

ग्रेप वन लागू होने के बाद दिल्ली एनसीआर में निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिन साइटों पर ऐसे कार्य चल रहे हैं, उन्हें सुरक्षात्मक कदम उठाने होंगे। सड़कों की सफाई करते समय पानी का छिड़काव करना होगा और सफाई मशीनों से करनी होगी ताकि किसी प्रकार से धूल न उड़े। निर्माण सामग्री लाने-ले जाने वाले ट्रकों को भी सामग्री ढक कर ही रखना होगा। इस बीच खुले में कूड़ा-करकट जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

हरियाणा में कई जगहों पर यह देखा गया है कि लोग घरों से निकला कूड़ा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कूड़ा इकट्ठा करने वाली गाड़ियों में डालने की जगह रात में जला देते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ता है। होटलों और रेस्टोरेंट में तंदूर में लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इस बीच हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने का कारण एलपीजी की कमी को भी माना जा रहा है। 

जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई है, तब से एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा आई है। इस वजह से लोगों को छोटे सिलेंडर में गैस भरवाने में दिक्कत आ रही है। गैस के विकल्प में लोगों ने लकड़ी, कोयले और उपलों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस वजह से भी प्रदूषण का स्तर काफी हद तक बढ़ा है। 

वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की वजह से दिल्ली एनसीआर में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आंशिक राहत प्रदान की है। सीएक्यूएम ने गैस की कमी को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की इजाजत दे दी है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 13 मार्च 2026 को आदेश जारी किया था कि 13 अप्रैल के बाद वैकल्पिक ईंधन हाई स्पीड डीजल, बायोमास, रिफ्यूज्ड डेरिवेड फ्यूल पेलेट्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। 

लेकिन अब सीएक्यूएम ने अपने आदेश को थोड़ा ढीला किया है। हरियाणा और दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो रही हैं।  प्रदूषण के चलते बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।  आंखों में जलन और फेफड़ों में संक्रमण के रोगी ज्यादा अस्पताल पहुंच रहे हैं।

पहले खुद पर लागू करो, फिर उपदेश दो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा गांधी हमेशा कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते थे। वह सत्य बोलने और अहिंसा का पालन करने की शिक्षा देते थे। वह खुद झूठ नहीं बोलते और लोगों से भी अपेक्षा करते थे कि वह झूठ नहीं बोलेंगे। एक बार की बात है। एक बुजुर्ग महिला अपने पौत्र को लेकर महात्मा गांधी के पास पहुंची। 

उसने महात्मा गांधी से मुलाकात करने के बाद कहा कि बापू, मेरा यह पौत्र गुड़ बहुत खाता है। इसकी वजह से इसके दांत खराब हो रहे हैं। इतना ही नहीं, और भी कई तरह की परेशानियां इसे हो रही है। मैं इसे समझाते-समझाते थक गई हूं। आप इसे सीख दीजिए ताकि यह गुड़ खाना छोड़ दे। यह आपकी बात जरूर मानेगा। 

गांधी जी ने उस बुजुर्ग महिला की बात बड़े ध्यान से सुनी और थोड़ी देर बाद  उन्होंने कहा कि आप पंद्रह दिन बाद आएं, मैं इसे कुछ न कुछ सलाह दूंगा। वह बुजुर्ग महिला लौट गई। करीब पंद्रह सोलह दिन बाद वह महिला फिर गांधी के आश्रम में पहुंची। काफी देर इंतजार करने के बाद उसकी मुलाकात गांधी जी से हुई। 

गांधी जी ने उस बच्चे को समझाते हुए कहा कि बेटा, जरूरत से ज्यादा गुड़ खाना नुकसानदायक होता है। इसके बाद वह उस महिला से बोले, आप अब ऐसा करें कि घर में जितना भी गुड़ है। उसमें काली मिर्च पीसकर मिला दें। इससे जब आपका पौत्र उस गुड़ को खाएगा, तो उसे तीखा लगेगा। इससे उसकी आदत छूट जाएगी। काली मिर्च डालने से गुड़ भी लाभदायक हो जाएगा। 

तब उस बुजुर्ग महिला ने कहा कि आप यह बात तो पंद्रह दिन पहले भी बता सकते थे। मुझे दो बार आना पड़ा। तब गांधी जी ने कहा कि दरअसल, तब मैं भी गुड़ बहुत खाता था। पंद्रह दिन में मैंने गुड़ खाना छोड़ा है। अब मैं उसे उपदेश देने के काबिल हूं। किसी को उपदेश देने से पहले खुद पर लागू करना ही उचित होता है।

Friday, April 17, 2026

पोलियो नहीं तोड़ सका रूजवेल्ट का हौसला

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

30 जनवरी 1882 में न्यूयार्क में पैदा हुए फ्रेंकलिन डेलानो रूजवेल्ट अमेरिका के पहले और आखिरी राष्ट्रपति थे जिन्होंने चार बार राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया था। सन 1930 के बाद आई वैश्विक मंदी का उन्होंने बड़े नीतिपूर्ण ढंग से सामना किया और अमेरिका में महंगाई पर अंकुश रखा। 

इतना ही नहीं, उन्होंने मंदी के दौरान भी नौकरियों को सुरक्षित रखने में सफलता पाई थी। लोगों की जरूरतों का सामान नियंत्रित मूल्यों पर उपलब्ध कराया था। वह अपने जीवन काल में काफी लोकप्रिय राष्ट्रपति साबित हुए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट इनके चचेरे भाई थे जिन्हें वह अपना आदर्श मानते थे। सन 1921 में फ्रेंकलिन पोलियो रोग के शिकार हो गए। 

इसकी वजह से इनका चलना-फिरना बंद हो गया। काफी दिनों तक अवसाद में डूबे रहे। इनकी पत्नी एलेनोर और मित्रों के हौसला बढ़ाने पर इनका आत्मविश्वास दोबारा लौटा और व्हील चेयर पर बैठकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय से दुनिया भर को यह संदेश दिया कि यदि आप में कुछ कर गुजरने की आकांक्षा है, तो मुसीबतें आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकती हैं। 

जिस समय वह 1933 में राष्ट्रपति बने, वह समय अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए कठिन समय था। पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही थी। ऐसे कठिन समय में अमेरिका के राष्ट्रपति पद को संभालना काफी कठिन काम था। लेकिन उन्होंने जिस तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभाला, वह उनकी कुशल नीतियों और आर्थिक मामले में समझ का एक बेहतरीन उदाहरण है। यही वजह है कि वह चार बार राष्ट्रपति चुने गए।

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए लोगों में पैदा करनी होगी जागरूकता

अशोक मिश्र

देश में सबसे कम वन आवरण प्रतिशत वाले राज्यों में हरियाणा का नाम सबसे पहले आता है। राष्ट्रीय वन नीति के मुताबिक वन क्षेत्र का प्रतिशत का लक्ष्य प्रत्येक राज्य के लिए 20 प्रतिशत तय किया गया है। हरियाणा का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किमी है। हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1,614.26 वर्ग किमी है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 3.65 प्रतिशत है। इस हिसाब से देखें तो राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र 16 प्रतिशत से अधिक कम है। भारत राज्य वन रिपोर्ट 2023 का आंकड़ा बताता है कि राज्य में 2019 से 2023 के बीच केवल 12.26 वर्ग किमी की मामूली वृद्धि हुई है। 

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सैनी सरकार ने पर्यावरण संतुलन और जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिपूरक वनीकरण प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के तहत 298.43 करोड़ रुपये वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी है। योजना के मुताबिक, प्रदेश में 1882 हेक्टेयर में बीस लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं, प्रदेश में 4518 हेक्टेयर भूमि पर पहले से रोपे गए पौधों का संरक्षण और रखरखाव किया जाएगा। यह पौधे विभिन्न कार्यक्रमों और अवसरों पर  रोपे गए थे। 

सरकार की यह योजना प्रदेश में पहले से रोपे गए पौधों के संरक्षण के साथ ही साथ लोगों को पौधरोपण की ओर आकर्षित करना है। सरकारी स्तर पर सहायता और सुविधा मिलने पर आम नागरिक भी पौधरोपण और वनीकरण में रुचि लेने लगेंगे। इससे न केवल वन क्षेत्र में वृद्धि होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन पर भी रोक लग सकेगी। हरियाणा में तीन प्रकार के वनक्षेत्र पाए जाते हैं जिनमें आरक्षित वन क्षेत्र 24,962.98 हेक्टेयर, संरक्षित वन 1,20,282.08 हेक्टेयर और अवगीर्कृत वन क्षेत्र 1,292.62 हेक्टेयर है। सबसे अधिक वन क्षेत्र पंचकूला जिला (390.12 वर्ग किमी) और सबसे कम वन क्षेत्र पलवल जिले (13.82 वर्ग किमी) पाया गया है। 

हरियाणा में निर्दिष्ट वनों के बाहर लगभग 4.1 करोड़ पेड़ हैं जिनमें नीम, शीशम, पीपल, बरगद और नीलगिरी सबसे सामान्य प्रजातियां हैं। राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार बीस प्रतिशत वन क्षेत्र का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सबसे पहले तो अरावली और शिवालिक की पहाड़ियों पर होने वाले अवैध खनन और पेड़-पौधों की कटाई पर अंकुश लगाना होगा। 

इसके साथ ही साथ एक अभियान चलाकर पौधरोपण करना होगा। इसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों और स्कूल-कालेजों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। पौधरोपण के बाद पौधों की देख रेख और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी वन क्षेत्र में वृद्धि का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। पर्यावरण को बचाने का यही एक मात्र तरीका है जिस पर काम करके जलवायु परिवर्तन पर रोक लगाई जा सकती है।

Thursday, April 16, 2026

हेनरी ड्यूनेंट ने की रेडक्रॉस की स्थापना


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

रेडक्रॉस की स्थापना करने और शांति का पहला नोबल पुरस्कार पाने वाले जीन हेनरी ड्यूनेंट का जन्म 8 मई 1828 को जेनेवा में हुआ था। इनके माता-पिता जेनेवा के सम्मानित नागरिकों में गिने जाते थे। इनके पिता जीन जैक्स ड्यूनेंट एक जेल और अनाथालय में काम करते थे। 

वहीं, इनकी मां एंटोनेट ड्यूनेंट-कोलाडोन बीमार और गरीबों के लिए काम करती थीं। माता-पिता के कार्यों का प्रभाव बचपन से ही हेनरी पर पड़ा। एक बार की बात है। हेनरी के मन में आया कि नेपोलियन बोनापार्ट से मिला जाए। नेपोलियन बोनापार्ट की ख्याति उन दिनों एक महान सेनापति के रूप में थी। इसके लिए वह जेनेवा से पेरिस पहुंचा। 

वहां पहुंचने पर उसे पता चला कि नेपोलियन युद्ध के मोर्चे पर हैं। वह उनसे मिलने युद्ध के मोर्चे पर गया। उस समय भीषण युद्ध चल रहा था। वह पहाड़ी की चोटी से जंग देखने लगा। उसने देखा कि सैकड़ों सैनिक घायल पड़े हैं। कोई इधर कराह रहा है, तो कोई उधर रो रहा है। उनकी कोई देखभाल करने वाला नहीं है। यह देखकर हेनरी का मन द्रवित हो गया। 

वह बिना कुछ सोचे, युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा सुश्रषा करने लगा। वह भूल गया कि वह नेपोलियन से मिलने आया था। जंग खत्म होने के बाद उसने कुछ युवकों का दल रेडक्रॉस नाम से बनाया जो निस्वार्थ जंग के समय घायल सैनिकों की सेवा कर सकें। उसने रेडक्रॉस को अंतर्राष्ट्रीय जगत में मान्यता दिलाई। मानवता के प्रति उसकी सेवाओं को देखते हुए शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। 

यही नहीं बाद में रेडक्रॉस संस्था को भी तीन बार नोबेल पुरस्कार हासिल हुआ। 30 अक्टूबर 1910 को 82 साल की उम्र में हेनरी का निधन हो गया।

गर्मी बढ़ने के साथ अस्पतालों में बढ़ने लगे उल्टी-दस्त के मरीज


अशोक मिश्र

हरियाणा में गर्मी का असर अब दिखाई देने लगा है। बच्चे और बुजुर्ग गर्मी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित होकर अस्पतालों में पहुंचने लगे हैं। अस्पताल में पहुंचने वालों में ज्यादातर लोग उल्टी और दस्त से पीड़ित पाए गए हैं। डायरिया, वायरल फीवर और अन्य मौसमी बीमारियां भी प्रदेश में फैलने लगी हैं। दिन और रात के तापमान में लगभग बीस से तेईस डिग्री सेल्सियस का अंतर होने से लोगों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।  

आंखों में खुजली, पानी आना, पलकों का सूजना जैसी समस्याएं भी लोगों में देखने को मिल रही है। लोगों के बीमार पड़ने के और भी कई कारण सामने आ रहे हैं। दूषित पानी पीना, ज्यादा देर से कटे-फटे फल खाना, खुले में बिकने वाले पदार्थ का सेवन करना, साफ सफाई का ध्यान न रखना भी लोगों के बीमार होने का कारण है। छोटे बच्चे ऐसी परिस्थिति में जल्दी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। 

 गर्मियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। ऐसी स्थिति में हर आदमी को सावधानी बरतनी चाहिए। अप्रैल का महीना आधा बीत चुका है। हरियाणा का औसत तापमान 36 डिग्री के आसपास है। कुछ ही दिनों में राज्य में औसत तापमान चालीस डिग्री के आसपास पहुंचने की संभावना है। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में तो आज ही तापमान 42 डिग्री पहुंच चुका है। 

राजस्थान में भी कुछ इलाकों में तापमान 41 डिग्री है। ऐसी स्थिति में लोगों को चाहिए कि वह बहुत आवश्यक होने पर ही धूप में घर से बाहर निकलें। बाहर निकलते समय भी छाता जरूर साथ रखें। बदन का ढककर ही बाहर निकलें। इसके साथ ही साथ पानी जरूर साथ में रखना चाहिए ताकि गर्मी की वजह से पसीने के रूप में शरीर से निकलने वाले पानी की कमी को पूरा किया जा सके। बदलते मौसम में अपना ख्याल रखना बहुत जरूरी है। अभी मई और जून महीने की प्रचंड गर्मी आनी बाकी है। 

वैसे तो अप्रैल से लेकर जून-जुलाई तक हमेशा प्रचंड गर्मी पड़ती रही है। लेकिन आज से चार-पांच दशक पहले हरियाणा सहित उत्तर भारत में वन क्षेत्र का क्षेत्रफल अधिक हुआ करता था। इस वजह से हर थोड़ी-थोड़ी दूर पर लोगों को राहत देने के लिए कोई न कोई पेड़ अवश्य हुआ करता था। सड़कों के किनारे किनारे फल और छाया देने वाले पेड़ लगाए जाते थे ताकि हवा में मौजूद ग्रीन हाउस गैसों को पेड़-पौधे अवशोषित करते रहें और आक्सीजन को मुक्त करते रहें। 

उन दिनों प्रचंड गर्मी होते हुए भी लोगों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था। कस्बों  और गांवों में ज्यादातर लोगों के मकान घासफूस और मिट्टी के बने होते थे। इसकी वजह से ऊष्मा परावर्तित होकर लौट जाती थी। अब सीमेंट और शीशे के बने मकान ऊष्मा को अवशोषित कर लेते हैं। इसकी वजह से पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में वन क्षेत्र भी काफी हद तक घट गया है।

जनता बदलाव के मूड में आती है, तो कोई तिकड़म काम नहीं आता


संजय मग्गू

दो दिन से हंगरी में जश्न का माहौल है। हंगरी की सत्ता पर पिछले सोलह साल से काबिज विक्टर आॅर्बन चुनाव हार गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के प्रिय विक्टर आॅर्बन को उनके ही पुराने साथी पीटर मग्यार ने हरा दिया। अप्रैल में हंगरी में होने वाले चुनाव से पांच दिन पहले अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस तो विक्टर आर्बन के चुनाव प्रचार में भी गए थे और विक्टर को जिताने का आह्वान किया था। 

जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के पक्ष में कहा था, अबकी बार ट्रंप सरकार। विक्टर आर्बन की पराजय बताती है कि जब जनता बदलाव का मूड बना लेती है, तो वह कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेती है। पिछले 16 वर्षों में विक्टर ने न्यायपालिका से लेकर मीडिया तक अपने कब्जे में ले लिया था। हंगरी की न्यायपालिका वही बोलती थी जो विक्टर कहते थे या विक्टर के फायदे में होता था। मामला कुछ भी हो विक्टर की पार्टी फिदेस के ही पक्ष में न्यायालय का फैसला होता था। 

हंगरी के पीएम विक्टर ने पूरे सिस्टम पर कब्जा कर लिया था। देश की अस्सी फीसदी मीडिया पर विक्टर का कब्जा था। विक्टर के खिलाफ न कोई खबर छपती थी और न ही दिखाई जाती थी। दिन रात मीडिया पर विक्टर वंदना ही गाई जाती थी। उनकी साफ सुथरी छवि बनाने और दिखाने में मीडिया संस्थान एक दूसरे से होड़ लगाते थे। चुनाव आयोग को मजबूर कर दिया था कि वह ऐसे-ऐसे नियम बनाएं जिससे विक्टर और उनकी पार्टी फिदेस को ही फायदा हो। जनता के लिए फिदेस उम्मीदवारों को ही चुनने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं छोड़ा गया था। इस बार छद्म मिश्रित सदस्यीय बहुमत प्रणाली (सूडो मिक्स्ड मेंबर मेजोरिटी सिस्टम) से हुए चुनाव में भी तिस्जा पार्टी को दो तिहाई बहुमत हासिल हुआ है। 

विक्टर ने विपक्षी पार्टी तिस्जा के सदस्यों पर मुकदमे दर्ज कराए, उन्हें जेल भेजा। विरोधियों के प्रति अपनी घृणा को व्यक्त करने में उसे तनिक भी संकोच नहीं होता था। हंगरी की जनता में धार्मिक उन्माद पैदा करने के लिए यहां तक कहा गया कि ईसाई धर्म खतरे में है। लेकिन जब जनता बदलाव का मन बना लेती है, तो सारी तरकीबें धरी रह जाती हैं। अपने देश हंगरी को महान बनाने का दावा करने वाले विक्टर को अपनी कुटिलता और कब्जा किए गए पूरे सिस्टम पर बहुत अधिक भरोसा था। 

लेकिन जैसे ही हंगरी में बदलाव की आंधी चली और उनका सारा सिस्टम तिनके की तरह उड़ गया। विक्टर की करारी हार ट्रंप, नेतन्याहू और पुतिन जैसे तानाशाह प्रवृत्ति वाले शासकों के गाल पर एक करारे तमाचे के समान है। यह लोग भी अपने देश में अपने आपको सर्वशक्तिमान समझते हैं। इनकी इजाजत के बिना पत्ता तक नहीं हिलता है, लेकिन इन्हें यह याद रखना होगा कि जिस दिन जनता का मूड बदला, इन्हें इतिहास के कूड़ेदान में फेंकने में जनता तनिक भी देर नहीं लगाएगी।

Wednesday, April 15, 2026

अपने जूठे बर्तन धोने में कैसी शर्म?

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

फोर्ड मोटर कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड का जन्म 30 जुलाई 1863 में मिशिगन के एक फार्म हाउस में हुआ था। उन्होंने ही अमेरिका के मध्यम आयवर्ग के लोगों  के कार खरीदने के सपने को पूरा करने का रास्ता सुझाया था। हेनरी फोर्ड ने सन 1903 में फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की। 

आटोमोबाइल क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाकर उन्होंने सस्ती कारों को लांच करने साहस किया और देखते ही देखते कुछ वर्षों में हेनरी फोर्ड अमेरिका के सबसे अमीर आदमी बन गए। उनकी ख्याति दुनिया भर में फैल गई थी। भारत में भी फोर्ड कंपनी ने अपनी कार लांच की थी। उनकी सफलता से भारत के कई उद्योगपति काफी प्रभावित थे। ऐसे ही एक उद्योगपति ने देश में मोटर कारखाना लगाने का विचार किया। 

उन्होंने सोचा कि मोटरकार खाना लगाने से पहले अगर इस बारे में फोर्ड मोटर कंपनी के मालिक हेनरी फोर्ड से सलाह मशविरा कर लिया जाए, तो बेहतर होगा। यही सोचकर उन्होंने अमेरिका की यात्रा की। कई दिनों तक भागदौड़ करने के बाद फोर्ड से मिलने का समय तय हुआ।  

फोर्ड की कंपनी के अधिकारी ने भारतीय उद्योगपति से कहा कि दिन में तो आपके लिए समय निकाल पाना संभव नहीं है। कल शाम को आप घर पर मिल सकते हैं। अगले दिन शाम को उद्योगपति फोर्ड के घर पहुंचा तो देखा कि एक बुजुर्ग अपने जूठे बरतन धो रहा है। उन्होंने फोर्ड से मिलने की बात कही। उस बुजुर्ग ने उन्हें बिठाया और थोड़ी देर बाद उसने आकर कहा कि मैं ही फोर्ड हूं। 

उद्योगपति ने कहा कि आप अपने जूठे बरतन धो रहे थे। फोर्ड ने कहा कि जब मैं अमीर नहीं था, तब भी अपना काम खुद करता था। आज भी मैं अपना काम खुद करना पसंद करता हूं। अपना काम करने में कैसी शर्म।