Wednesday, August 12, 2026

दुखी जनों की सेवा से होगा आत्म कल्याण

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध को आत्मज्ञान प्राप्त होने के बाद उन्होंने प्रथम धर्म चक्र प्रवर्तन में जिज्ञासुओं को आत्म कल्याण मार्ग पर चलने को प्रेरित किया। नतीजा यह हुआ कि हजारों लोग ‘धर्मं शरणं गच्छामि’ का उद्घोष करते हुए आगे आए और इस तरह भिक्षु संघ का निर्माण हुआ। इस संघ में रहने वाले लोग भिक्षु कहे जाने लगे। मानव कल्याण ही इन भिक्षुओं का परम ध्येय था। महात्मा बुद्ध प्रत्येक भिक्षु का ध्यान रखते थे। तथागत के प्रिय शिष्यों में भदंत आनंद थे जो काफी विद्वान और ऊर्जावान थे। 

वह ज्यादातर बुद्ध के साथ ही रहते थे। एक दिन महात्मा बुद्ध ने एक भिक्षुक के बारे में पूछा कि वह आज नहीं दिखाई दिया। भदंत आनंद ने उत्तर दिया, भंते! वह अतिसार से पीड़ित है। इस वजह से वह आज दिखाई नहीं दिया है। महात्मा बुद्ध ने कहा कि चलो, उससे देख आएं। 

यह कहकर तथागत अपने शिष्य भदंत आनंद के साथ उस भिक्षुक की कुटिया में पहुंचे। कुटिया में पहुंचने पर बुद्ध ने देखा कि वह अपने ही मल-मूत्र में लिपटा हुआ पड़ा है। बुद्ध ने उससे पूछा कि तुम्हें क्या हुआ है? उस भिक्षुक ने बताया कि भगवन! मैं अतिसार से पीड़ित हूं। बुद्ध ने पूछा कि तुम्हारी सेवा करने कोई क्यों नहीं आया? उस भिक्षुक ने कहा कि सभी आत्म कल्याण की साधना में लगे हुए हैं। ऐसा वे कहते हैं। 

बुद्ध ने आनंद से घड़े में जल मंगाया और उस भिक्षुक का शरीर धोया। उसके मल-मूत्र को साफ किया। शाम को उन्होंने सभी भिक्षुओं को एकत्रित करके कहा कि तप साधना करने से मोक्ष या आत्म कल्याण की प्राप्ति होगी या नहीं, यह मैं नहीं जानता हूं। सच्चे हृदय से दुखी जनों की सेवा करने से आत्म कल्याण की प्राप्ति जरूर होगी। एक भिक्षुक के बीमार होने और किसी के उसकी सेवा न करने का प्रसंग जानकर सभी भिक्षुक लज्जित हो उठे।

पैदल चलने वालों के लिए कब सुरक्षित होंगी सड़कें?


अशोक मिश्र

तेज रफ्तार गाड़ियों से लोगों के कुचले जाने की घटनाएं अब लोगों में भय पैदा करने लगी हैं। सड़क पर चलने वाले लोग अब अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। कब और कहां सड़क पर चलती हुई गाड़ी कुचल दे, इसका कोई ठिकाना भी नहीं है। फरीदाबाद के मेवला महाराजपुर में सड़क के किनारे खड़े तीन लोगों को तेज रफ्तार थार ने रविवार को कुचल दिया था। यह तीनों लोग मार्निंग वॉक पर निकले थे। इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मार्निंग वॉक पर निकले इन तीन लोगों को सपने में भी यह अंदेशा नहीं रहा होगा कि उनके साथ ऐसी घटना होने वाली है। 

ऐसी घटनाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण गाड़ी को ताकत और स्टेटस सिंबल समझने की मानसिकता है। थार जैसी बड़ी एसयूवी युवाओं में काफी लोकप्रिय है। इन गाड़ियों से वह शो ऑफ, दबंगई और सड़क पर अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश करते हैं। थार जैसी गाड़ियों से स्टंट करने, खाई में गिरने, नशे में लोगों को कुचलने और ड्रिफ्ट करते हुए लोगों की जान जोखिम में डालने जैसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सड़क पर होने वाले ज्यादातर हादसों के पीछे वाहन चालकों का नशे में होना है। 

इसके साथ ही हमारे शहरों में बुनियादी ढांचे की कमी भी जिम्मेदार है। राज्य के कई जिलों की घनी आबादी वाले इलाकों में सड़क पर चलने वालों के लिए न तो सुरक्षित फुटपाथ है, न फुट ओवर ब्रिज, न स्पीड ब्रेकर और न ही स्पीड कैमरे। लोग मजबूरन मुख्य सड़क या सर्विस लेन पर ही चलते हैं। इसका समाज पर असर बहुत गहरा और खतरनाक है। जब सुबह टहलने निकला एक बुजुर्ग या एक आम कर्मचारी सड़क पर ही कुचल दिया जाता है, तो लोगों के मन में असुरक्षा बैठ जाती है। 

लोग अपने बच्चों को साइकिल चलाने या बुजुर्गों को पार्क तक अकेले भेजने से डरने लगते हैं। इससे एक पूरी पीढ़ी का खुली हवा में निकलना, पैदल चलना और स्वस्थ रहना बंद हो जाता है। ऐसी घटनाएं कानून और सिस्टम पर से भरोसा कमजोर करती हैं। लोग सोचने लगते हैं कि सड़क पर चलने वाला गरीब पैदल यात्री और बड़ी गाड़ी में बैठा अमीर चालक कानून की नजर में बराबर नहीं हैं। यह खाई जब बढ़ती है, तो गुस्सा, आक्रोश और सड़क पर ही बदला लेने की प्रवृत्ति पैदा होती है। 

ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल चालान काटना काफी नहीं है। सबसे पहले लाइसेंस सिस्टम को सख्त करना होगा। चालक की पहली गलती पर ही कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। टेस्ट के बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट-बेल्ट के गाड़ी चलाने वाले को गिरफ्तार करके जेल भेज देना चाहिए। शराब पीकर या नशे में गाड़ी चलाने पर गाड़ी को तुरंत सीज और लंबे समय के लिए लाइसेंस रद्द करने का नियम लागू हो ताकि लोगों को सबक मिल सके।

Tuesday, August 11, 2026

मत-मतांतर का समन्वय ही धर्म है


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

उत्तर प्रदेश में श्रावस्ती आज एक जिला है। पहले वह बहराइच जिले का ही एक अंग था। श्रावस्ती देश की एक प्राचीन नगरी है। यहां कई प्रतापी राजाओं ने राज्य किया था। कहते हैं कि श्रीराम के पुत्र कुश ने श्रावस्ती नगरी बसाई थी। इस बात की सत्यता तो इतिहासकार और पुरातत्वविद ही कर सकते हैं। बात उस समय की है, जब महात्मा बुद्ध श्रावस्ती में चौमासा बिताने के लिए आया करते थे। 

तथागत वर्षाकाल में किसी स्थान पर ठहर जाया करते थे, बाकी महीनों में वह भ्रमण किया करते थे। एक दिन महात्मा बुद्ध सघन एकांत में बने एक संघाराम में विश्राम कर रहे थे। तभी एक भिक्षु ने आकर महात्मा बुद्ध से निवेदन किया-भगवन! सम्राट चंद्रचूड आपके दर्शन करना चाहते हैं। वह समाज में फैले विभिन्न प्रकार के मत-मतांतर की वजह से धर्म को लेकर विभ्रमित हो रहे हैं। 

वह आपसे  उसका समाधान चाहते हैं। यह सुनकर बुद्ध ने कहा कि तात! चंद्रचूड एक महान धर्मात्मा सम्राट हैं। उनको तत्काल यहां लाओ। थोड़ी देर बाद चंद्रचूड आकर एक सामान्य व्यक्ति की तरह एक किनारे बैठ गए। महात्मा बुद्ध ने उनका कुशल क्षेम पूछा और उनके ठहरने की व्यवस्था कर दी। अगले दिन सम्राट चंद्रचूड ने  देखा कि कुछ दृष्टिविहीन लोगों के बीच एक हाथी खड़ा है और बुद्ध के निर्देश पर सब हाथी को स्पर्श कर रहे हैं। 

बुद्ध ने उन दृष्टिबाधित लोगों से हाथी के बारे में पूछा, तो जिसने जो अंग छुआ था, हाथी को वैसा ही बताया। यह देखकर चंद्रचूड हंस पड़े। तब बुद्ध ने कहा कि सम्राट! यह विभिन्न प्रकार के मत-मतांतर का समन्वय ही धर्म है। इसलिए आपको इन मत-मतांतरों के चलते भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। धर्म का सनातन स्वरूप भी ऐसा ही है। यह सुनकर चंद्रचूड संतुष्ट हुए और राज्य को लौट गए।

चार-पांच साल की बच्चियों को पीरियड्स आना गंभीर चेतावनी

अशोक मिश्र

यह  हरियाणा के लिए ही नहीं, पूरे उत्तर भारत के लिए गंभीर चेतावनी है कि अब चार-पांच साल की मासूम बच्चियों को पीरियड्स आने लगे हैं और पांच-छह साल के लड़कों को दाढ़ी मूंछ के लक्षण उभरने लगे हैं। यह कोई चिकित्सा संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि  पूरे समाज के लिए एक गहरी चेतावनी है। इसे चिकित्सा विज्ञान में प्रिकॉशियस प्यूबर्टी यानी असामयिक यौवन कहा जाता है। पीजीआई रोहतक के पीडियाट्रिक एंडो क्रायनोलॉजी विभाग में बच्चों को विशेष टीके लगाकर हार्मोन की गति को नियंत्रित किया जा रहा है। विभाग में हर महीने करीब छह नए बच्चे अपना इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। 

देश भर के पीडियाट्रिक एंडोक्राइन सेंटरों के आंकड़ों के अनुसार कोविड काल में इस तरह के मामलों में तीन गुना तक बढ़ोतरी देखी गई है, जहां पहले 4208 बच्चों में से 59 में ऐसे लक्षण थे, वहीं कोविड के दौरान 3053 में से 155 बच्चों में समय से पहले यौवन के लक्षण मिले। हरियाणा भी इस राष्ट्रीय प्रवृत्ति से अछूता नहीं है। यहां के शहरी जिलों जैसे गुड़गांव, फरीदाबाद, पानीपत में बाल रोग विशेषज्ञों के पास ऐसे केस लगातार आ रहे हैं। इसका असर केवल शारीरिक नहीं है। छोटी उम्र में हार्मोनल बदलाव से बच्चों की हड्डियों की ग्रोथ प्लेट जल्दी बंद हो जाती है जिससे उनकी अंतिम लंबाई कम रह जाती है। 

साथ ही मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, समाज से कटाव और बचपन छिनने जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी आती हैं। यह समय है कि हम इसे सामान्य समझकर अनदेखा न करें। समय से पहले बच्चों में यौवन के लक्षणों का प्रकट होने का सबसे बड़ा कारण बच्चों में बढ़ता मोटापा है। शोध बताते हैं कि हाई-फैट डाइट और बढ़ा हुआ बीएमआई लड़कियों में असामयिक यौवन का सबसे महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर है। हरियाणा में खान-पान की परंपरा में घी-दूध का अधिक उपयोग होता है।

साथ ही आजकल बाजार में मिलने वाला पशुओं से प्राप्त दूध जिसमें दूध बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं, यह लड़कियों में हार्मोनल गड़बड़ी पैदा कर रहा है। कई शोधों में पाया गया है कि तीन से सात साल तक के बच्चों को अधिक एनिमल फैट खिलाने से हार्मोनल असंतुलन और जल्दी प्यूबर्टी का खतरा बढ़ जाता है। हरियाणा के खेतों में कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, प्लास्टिक की बोतलों में गर्म दूध या पानी पीना, सैनिटाइजर और कॉस्मेटिक्स का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में यह लक्षण दिखने के प्रमुख कारण हैं। 

यह सब बच्चों के नाजुक अंत:स्रावी तंत्र को प्रभावित कर रहा है। यही नहीं, जीवनशैली में बदलाव, देर रात तक जागना, नींद की कमी, दिन भर स्क्रीन पर रहना, शारीरिक गतिविधि का अभाव भी बच्चों को जल्द युवा बना रहा है। यदि किसी भी मासूम बच्चे में हार्मोनल गड़बड़ी के संकेत मिलें, तो तुरंत चिकित्सक के पास जाकर इलाज कराएं।

Monday, August 10, 2026

बेटी क्षेम! आत्मोद्धार का मार्ग अवश्य मिलेगा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मगध के राजा बिंबसार का पूरा महल सजाया गया था। नगर का हर नागरिक महात्मा बुद्ध के दर्शन के लिए उत्साहित था। तथागत ने महाराज के अतिथि गृह की जगह बेलवन में रहना चुना था। महाराज बिंबसार भी अपनी सजधज के साथ तैयार हो चुके थे। नगर, महल और स्वयं राजा की सजधज के सामने राज्याभिषेक के समय हुई सजावट फीकी पड़ रही थी। महाराज अपने महल से निकल कर महारानी क्षेमा के रंग महल में पहुंचे। 

उन्होंने देखा कि महारानी क्षेमा अपने अंत:पुर के स्वाध्याय कक्ष में अन्यमनस्क सी लेटी आचार्य धर्मपाल का जीवन दर्शन पढ़ रही थीं। महाराज बिंबसार ने उन्हें अभी तैयार हुआ नहीं देखा, तो बोल पड़े, प्रियतमे! अभी तुम तैयार नहीं हुई? जिसके स्वागत को सारा नगर उमड़ पड़ा है, उसके स्वागत के लिए तुम अभी तक तैयार नहीं हो। क्षेमा सांगल नरेश की राज कन्या थी। 

सांगल नरेश महात्मा बुद्ध के परमप्रिय शिष्यों में से एक थे। महारानी क्षेमा का बुद्ध के प्रति यह उपेक्षा का भाव सम्राट बिंबसार को चकित कर रहा था। क्षेमा ने उपेक्षा भाव से करवट लेते हुए कहा कि बुद्ध के सामने जाने से क्या लाभ है। वह यही कहेंगे कि यह संसार मिथ्या है। संसार का सौंदर्य मिथ्या है। ऐसी स्थिति में हम सांसारिक जीव उनके सामने जाकर क्या करेंगे। 


महारानी को अपने सौंदर्य पर अत्यधिक अभिमान था। संयोग से इसी समय उन्हें झपकी आ गई। झपकी के दौरान ही उन्होंने देखा कि बुद्ध को एक अत्यंत रूपसी अप्सरा चंवर डुला रही है। उन्होंने एक ही पल में अप्सरा का बचपन, जवानी और बुढ़ापा तीनों देखा। 

बुढ़ापे में धंसी आंखें, सफेद केश, जर्जर काया देखकर वह कांप उठी। क्षेमा की नींद टूट गई। वह यह देखकर कांप उठी। उसके सौंदर्य का अभिमान चकनाचूर हो गया। क्षेमा दूसरे क्षण बुद्ध के चरणों में पड़ी क्षमा के साथ आत्मोद्धार का मार्ग पूछ रही थी। बुद्ध बोले, बेटी क्षेम, पहले वाह्य सौंदर्य से बाहर तो निकलो। आत्मोद्धार का मार्ग अवश्य मिलेगा।

परिवार में आया बिखराव बन रहा युवाओं में उग्रता का कारण


अशोक मिश्र

कोई यह सोच भी नहीं सकता है कि बच्चे! सिगरेट पीना तुम्हारे लिए हानिकारक है। इसे मत पियो कहने पर कोई नाबालिग थोड़ी देर बाद युवक पर चाकू से हमला कर दे। युवक की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। आरोपी नाबालिग केवल नौवीं कक्षा पास है और तीन-चार महीने पहले उसने अपने मोहल्ले में लोगों पर धाक जमाने के लिए दिल्ली से चाकू खरीदा था। हरियाणा में पिछले कुछ सालों में युवाओं से जुड़ी हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। कभी रील के लिए झगड़ा, कभी पुरानी रंजिश, कभी सिर्फ ‘तूने मुझे घूरा क्यों’ जैसी मामूली बात पर हत्या ऐसी घटनाएं अब अक्सर पढ़ने-सुनने को मिल रही हैं। 

सिगरेट पीने से मना करने पर एक नाबालिग के हाथ में चाकू आ जाना और एक हंसते-खेलते युवक की जान चले जाना हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर हमारे हाथों में पल रहे बच्चों के मन में इतना गुस्सा, इतनी हिंसा कहां से आ रही है। यह सवाल सिर्फ उस एक नाबालिग का नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा के बदलते युवा मानस का है। इस उग्रता के पीछे परिवार का बिखराव भी एक बड़ा कारण है। जब से परिवार बिखरने लगे हैं, तब से बच्चों और युवाओं के स्वभाव में तब्दीली आ रही है। 

पहले संयुक्त परिवार में दादा-ताऊ की एक नजर ही बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए काफी थी। वह उन्हें संस्कारित करते रहते थे। अब एकल परिवारों में माता-पिता अपनी नौकरी और संघर्ष में व्यस्त हैं। घर पर बच्चों के पास पूरा दिन मोबाइल और इंटरनेट है। लोगों का आपसी संवाद भी धीरे-धीरे कम या खत्म होता जा रहा है। घर में बच्चा क्या देख रहा है, क्या सोच रहा है, किससे मिल रहा है, यह जानने का समय ही अभिभावकों के पास नहीं है। जब घर में उसकी बात नहीं सुनी जाती, तो वह बाहर अपनी धाक जमाकर, डराकर अपनी बात मनवाना सीख जाता हैं। 

इस उग्रता को बढ़ावा देता है उन्हें सहजता से मिल जाने वाला नशा। बीड़ी-सिगरेट जैसी छोटी लत से शुरू होकर यह सिलसिला नशे की गोलियों और दूसरे सिंथेटिक नशे तक पहुंच रहा है। एनसीआर की बेल्ट में इन चीजों की उपलब्धता चिंताजनक रूप से आसान हो गई है। नशे की हालत में सही और गलत की समझ खत्म हो जाती है और छोटा सा गुस्सा भी जानलेवा बन जाता है।  

समाज में एक अजीब सा डर बैठ गया है। अब लोग पार्क में, गली में गलत होते देखकर भी टोकने से कतराते हैं, सोचते हैं कि कौन झगड़ा मोल ले, पता नहीं सामने वाले के पास क्या है। यह चुप्पी धीरे-धीरे पूरे समाज को कायर और असुरक्षित बना रही है। इससे बचने का यही तरीका है कि हम रोज आधा घंटा बिना मोबाइल के अपने बच्चों से बात करें, उनके दोस्तों को जानें, उन्हें खेल के मैदान तक फिर से ले जाएं। जहाँ पसीना बहेगा तो सड़क पर खून नहीं बहेगा, यही इसका इलाज है। यही तरीका उनकी उग्रता को कम कर सकता है। 

Sunday, August 9, 2026

कृपण का दान स्वीकार नहीं करते बुद्ध

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

वैशाली गणराज्य की विजय पताका चतुर्दिक फहरा रही थी। वैशाली राज्य के दंडनायक उग्रतेजा जिधर से घूम जाता, उस ओर सबके सिर भय से झुक जाते थे। लोगों में दंडनायक उग्रतेजा का इतना भय था कि बड़े बडेÞ राजा भी उसके सामने टिकने का साहस नहीं कर सकते थे। उन्हीं दिनों महात्मा बुद्ध वैशाली नगर में अपने संघ के भिक्षुओं के साथ भ्रमण कर रहे थे। 

महात्मा बुद्ध का मुखमंडल चमक रहा था। सब मौन साधे तथागत की वाणी का श्रवण कर रहे थे। इतने में संघ के आश्रम में तेज गति से अश्व पर सवार दंडनायक उग्रतेजा ने प्रवेश किया। कुछ दूर चलने के बाद दंडनायक पदाति चलकर गौतम बुद्ध के सामने प्रस्तुत हुए। तथागत ने अपनी दृष्टि उठाई। दंडनायक ने विनीत स्वर में कहा, प्रभु! भिक्षु संघ का स्वागत करने का सौभाग्य मांगने आपके समक्ष आया है यह जन आपके पास। 

महात्मा बुद्ध ने शांत स्वर में कहा, भंते! बुद्ध किसी कृपण की भिक्षा स्वीकार नहीं करते हैं। किसी भी बुद्ध ने आज तक किसी कृपण की भिक्षा स्वीकार नहीं की है। यह सुनकर जन समूह आश्चर्यचकित रह गया। लोगों को लगा कि अभी थोड़ी देर में बुद्ध का सिर कटकर नीचे गिर जाएगा। 

दंडनायक ने बुद्ध को सिर नवाया और वापस लौट पड़ा। जब वह अपने शिविर में पहुंचा, तब तक यह बात पूरे वैशाली में फैल चुकी थी कि उग्रतेजा को भिक्षुक ने कृपण कहा है। एक सैनिक ने कहा कि उस भिक्षुक का सिर काट लूं। दंडनायक ने सैनिक को डपट दिया। दंडनायक घर पहुंचा और उसने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ा और बुद्ध के आश्रम में आ खड़ा हुआ। अगले दिन संघ से भिक्षुओं में एक भिक्षु और एक भिक्षुणी की बढ़ोतरी हो गई।



हरियाणा में आपराधिक गिरोहों की बढ़ती सक्रियता से हाईकोर्ट चिंतित

अशोक मिश्र

हरियाणा के विभिन्न जिलों में आपराधिक गिरोहों और उनके स्लीपर सेल की सक्रियता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार के सामने काफी चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम जैसे जिलों में सक्रिय आपराधिक गिरोहों पर अंकुश लगाने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए, इसका विस्तृत ब्यौरा राज्य सरकार से मांगा है। हरियाणा में संगठित अपराध का इतिहास कोई बहुत पुराना नहीं है। पहले राज्य में असंगठित अपराध जरूर छिटपुट पढ़ने-सुनने को मिल जाते थे। 

अस्सी और नब्बे के दशक तक यहाँ अपराध मुख्य रूप से जमीन विवाद, आपसी रंजिश और जातिगत वर्चस्व तक सीमित था। ज्यादातर अपराध आनर किलिंग की वजह से होते थे। लेकिन पिछले दो दशक में जैसे-जैसे राज्य का औद्योगिक विकास होता गया, संगठित गिरोहों ने अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दीं। एनसीआर के विस्तार, रियल एस्टेट में अकूत पैसे के आने और राजनीतिक संरक्षण ने इसे पेशेवर गैंगस्टरवाद में बदल दिया। गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, झज्जर, सोनीपत और पानीपत जैसे जिले इस बदलाव के केंद्र बने, जहाँ जमीन की कीमतें रातों-रात करोड़ों में पहुँच गईं और कब्जा, वसूली और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग एक उद्योग बन गया। 

इस हालात ने अपराध के नए अर्थशास्त्र को जन्म दिया। राज्य में पैदा होने वाले आपराधिक गिरोहों ने शुरुआती दौर में पंजाब, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय गिरोहों की कार्यशैली को अपनाया।  हरियाणा और दूसरे राज्यों में सक्रिय गैंग्स की अर्थव्यवस्था चार स्तंभों पर टिकी होती है। पहला है जमीन पर जबरन कब्जा और प्रॉपर्टी विवादों में किसी एक पक्ष के लिए हथियारबंद मदद देना। दूसरा है व्यापारियों, बिल्डरों, शराब ठेकेदारों और बड़े किसानों से रंगदारी वसूलना। 

इनकार करने पर उनको डराना-धमकाना और जरूरत पड़ने पर हत्या कर देना। तीसरा है हथियारों की तस्करी, जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होती है। चौथा है सोशल मीडिया पर दहशत का प्रचार करना। सोशल मीडिया पर इनका जितना प्रचार होता है, वह अपनी पकड़ उतनी ही मजबूत करते चलते हैं। हरियाणवी गैंगस्टर खुद सामने आने के बजाय इंस्टाग्राम, फेसबुक पर हथियारों के साथ फोटो, गैंगस्टर रैप गानों और लाइव वीडियो के जरिए अपना खौफ बनाते हैं। 

यह कम उम्र के युवाओं को बहुत आकर्षित करता है, जो जल्दी पैसा, नाम और पहचान की चाह में इस रास्ते पर आ जाते हैं। राज्य सरकार और पुलिस ने इस चुनौती से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कड़ी मेहनत की है। सरकार ने हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स, साइबर सेल और स्पेशल सेल को मजबूत करके कई बड़े एनकाउंटर किए हैं। विदेशों में बैठे गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के प्रयास और गैंगस्टरों की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की है।


Saturday, August 8, 2026

शाश्वत आनंद तो शाश्वत सत्य में है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

घटना बहुत पुरानी है। इतनी पुरानी कि इस घटना का संबंध महात्मा बुद्ध से है। यह घटना उस समय घटी थी, जब उरुबल में महात्मा बुद्ध एक जंगल के भीतर हिस्से में तपस्यारत थे। कथा यह है कि उरुबल के ही कुछ धनी लोगों ने वन विहार का कार्यक्रम बनाया। सभी धनिक युवा थे। वन विहार का उद्देश्य मनोरंजन करना था। 

कुछ लोगों ने मनोरंजन के लिए गणिकाओं (वेश्या) की भी व्यवस्था की थी। इन धनिकों में से कुछ लोग अपनी पत्नी को भी वन विहार के लिए साथ लाए थे। वन विहार के दौरान सबने मदिरापान किया। आमोद प्रमोद के बीच में एक वेश्या को मौका लगा, तो उसने धनिकों के स्वर्ण आभूषण और मुद्राएं बटोरी और लेकर भाग खड़ी हुई। जब धनिकों को होश आया, तो वह परेशान हो उठे। वह उस गणिका की खोज में जंगल की ओर दौड़े। साथ में वह गणिका को कोसत हुए भी जा रहे थे। 

जब वह जंगल के लगभग बीच में पहुंचे, तो उन्हें वातावरण में शांति से महसूस हुई। उनके चित्त को भी शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने देखा कि एक कृशकाय व्यक्ति ध्यान की मुद्रा में बैठा हुआ है। उसके चेहरे पर कांति विराजमान है। उनके शीश अपने आप झुकते चले गए। उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा कि आपने किसी को इधर से भागते देखा है? वह व्यक्ति महात्मा बुद्ध थे। बुद्ध ने कहा कि आपको और अपने सिवा किसी को नहीं देखा। तब उन्होंने बुद्ध को सारी बात बताई। 

बुद्ध ने कहा कि वन विहार किसलिए? यह तो विषय भोग है, इसमें सुख कहां है। शाश्वत आनंद तो शाश्वत सत्य से ही मिलेगा। यदि तुम शाश्वत सत्य की खोज करो, तो तुम्हें स्वर्ण आभूषण के चोरी हो जाने का दुख नहीं होगा। यह सुनकर उन धनिकों को अपने कृत्य पर पश्चाताप हुआ और उन्होंने बुद्ध से कहा कि वह उन्हें प्रवज्या देने का अनुरोध किया।

सड़कों और गलियों में जमा पानी से डेंगू और मलेरिया का बढ़ा खतरा

अशोक मिश्र

पिछले दो दिनों से हरियाणा के अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश हो रही है। इससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिल गई है। तापमान में भी गिरावट आई है। लेकिन बरसात के कारण लोगों का घर से निकलना मुुश्किल हो रहा है क्योंकि मुख्य सड़कों से लेकर गलियों की सड़कों पर पानी भरा हुआ है। लोगों के घरों में भी बरसाती पानी जमा हो रहा है। इससे लोग परेशान हैं। सड़कें तालाब बन गई हैं। दो दिन की लगातार बारिश के बाद प्रदेश की अधिकतर सड़कों का नक्शा ही बदल गया है। 

फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, पानीपत से लेकर हिसार तक हर शहर में मुख्य सड़कों और अंदरूनी गलियों में घुटने तक पानी भर गया है। जहां सड़क थोड़ी ऊंची है वहां भी बड़े-बड़े गड्ढे पानी में छिप गए हैं, जो राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। सीवर ओवरफ्लो होने से सड़कों और गलियों में भरा पानी काला और बदबूदार हो गया है जिससे फैलने वाली दुर्गंध से यहां रहने वाले लोग काफी परेशान हैं। इनमें बीमारी फैलने का भी खतरा है। हर साल बरसात के मौसम में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा जलभराव और सड़कों परबने गड्ढे की वजह से बाधित हो रही है। सावन के पवित्र महीने में हरियाणा के लाखों शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रहे हैं, लेकिन उनके रास्ते में जगह-जगह पानी और कीचड़ भरा है। 

सड़कों के ठीकठाक न होने की वजह से नंगे पांव चल रहे कांवड़ियों का संतुलन बिगड़ रहा है। पैरों में छाले और संक्रमण की शिकायत बढ़ रही है। यह कांवडियों की अपने आराध्य भोलेनाथ के प्रति अगाध श्रद्धा ही है जो इतनी तकलीफ सहकर भी अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। आम आदमी के लिए यह बारिश किसी आफत से आफत से कम नहीं है। जब मई-जून में प्रचंड गर्मी पड़ रही थी, तो यही आम जनता बरसात के इंतजार में आकाश की ओर टकटकी लगाए निहार रही थी। 

अब जब बरसात हो रही है, तो वह अव्यवस्था का रोना रो रही है। भारी बरसात और सड़कों पर जमा पानी की वजह से एक तरफ स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ कांवड़ मार्गों पर लगाए गए डायवर्जन के कारण शहरों के अंदर का पूरा ट्रैफिक सिस्टम चरमरा गया है। बरसात के दिनों में जगह-जगह पानी भर जाने से लोगों को परेशानी का सामना करने पड़ रहा है। 

पानी में देर तक रहने से मच्छर और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, कई जगहों से डेंगू और वायरल बुखार के मामले भी सामने आने लगे हैं। सड़कों और गलियों में पानी भर जाने से डेंगू और मलेरिया के मच्छरों की तादाद बढ़ रही है। इससे लगभग सभी जिलों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कई जगहों से डेंगू और वायरल बुखार के मामले भी सामने आने लगे हैं। इससे निपटारा पाना आसान भी नहीं दिख रहा है।