Tuesday, April 21, 2026

नींद में ही दुनिया को अलविदा कह गए थे चैपलिन

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

लंदन में 16 अप्रैल 1889 को पैदा हुए चार्ली चैपलिन ने अपने दर्द को ही ताकत बनाकर दुनिया को हंसाया। फिल्मी परदे पर बिना कुछ कहे केवल अपनी भावभंगिमाओं से उन्होंने लोगों को न केवल हंसाया बल्कि रुलाया भी खूब। चैपलिन का जीवन बड़ी गरीबी में संघर्ष करते हुए बीता। 

उनके पिता शराबी थे और घर की जिम्मेदारी उठाने की जगह हमेशा शराब के नशे में धुत रहते थे। चैपलिन की माता और पिता दोनों संगीत क्षेत्र से जुड़े हुए थे। जब चैपलिन किशोरावस्था में पहुंचे तब तक उनके पिता की अत्यधिक शराब पीने की वजह से मौत हो गई। उनकी मां मानसिक रोगी हो गई थीं क्योंकि कंठनली में विकार आ जाने की वजह से गायिका और अभिनेत्री का करियर खत्म हो गया था। 

इसलिए उनकी मां का ज्यादातर समय अस्पताल में रहना पड़ता था। अभिनय से उनको बचपन से ही प्यार था। वह कम उम्र में ही थिएटर करने लगे। उससे जो आय होती थी, उसी से उनका खर्चा चलता था। जैसे-जैसे चैपलिन बड़े होते गए, उनके अभिनय में निखार आता गया। 

अंतत: फिल्मों में काम करने की नीयत से चैपलिन अमेरिका पहुंचे। जब उन्हें फिल्मों में काम करने मौका मिला, तो  उन्होंने दुनिया को खूब हंसाया। उन दिनों मूक फिल्मों का दौर था। चैपलिन का मशहूर किरदार द ट्रैंप छोटी मूंछ, ढीली ढाली पैंट, टोपी और छड़ी ही उनकी पहचान हो गई।   

उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ भोगा था, जिया था, उसको द माडर्न टाइम्स और द किड जैसी फिल्मों में अच्छी तरह व्यक्त किया। उनका एक वाक्य पूरी दुनिया में मशहूर था कि जिस दिन आप हंसे नहीं, वह दिन व्यर्थ गया। इस महान कलाकार की स्विट्जरलैंड के वेवे में 25 दिसम्बर 1977 को नींद में मृत्यु हो गई।

अरावली की पहाड़ियों में घटता वन क्षेत्र चिंता का विषय

अशोक मिश्र

अरावली क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप लगातार बढ़ता जा रहा है।नतीजा यह हो रहा है कि अरावली क्षेत्र में वन क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है। वन माफिया जहां अरावली क्षेत्र में अवैध पेड़ों की कटाई करके उसे खोखला बना रहे हैं, वहीं खनन माफिया भी वन क्षेत्र को कम करने के लिए जिम्मेदार हैं। अवैध रूप से होने वाले खनन के दौरान उस क्षेत्र में लगे पेड़ पौधे भी नष्ट हो रहे हैं जिसकी वजह से वन क्षेत्र काफी कम हो  रहा है। 

भारतीय वन सर्वेक्षण की ताजा द्विवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद, पलवल और नूंह जिलों में कुल मिलाकर करीब चार फीसदी तक वन क्षेत्र कम हुआ है। यह आंकड़ा किसी भी पर्यावरण प्रेमी के लिए चिंता की बात है। वन क्षेत्र कम होने से अरावली पहाड़ियों के इर्द-गिर्द बसे शहरों का तापमान बढ़ रहा है। रिकार्ड बताते हैं कि फरीदाबाद जिले में कुल 78.43 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से 1.08 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। वर्तमान में यहां 25.98 वर्ग किलोमीटर मध्यम घना जंगल और 52.45 वर्ग किलोमीटर खुला जंगल बचा है। 

इसी तरह पलवल जिले में भी 0.21 वर्ग किलोमीटर हरियाली कम हुई है। सबसे भयावह स्थिति नूंह जिले की है जहां 108.96 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से रिकॉर्ड 4.05 वर्ग किलोमीटर जंगल खत्म हो चुका है। जंगलों के इस तरह सिमटने का सीधा असर शहर की हवा और सेहत पर पड़ना तय है। वन क्षेत्र के घटने का कारण अरावली पहाड़ियों की गोद में बसाए जाने वाले मैरिज होम्स और रिसार्ट भी हैं। 

अरावली के जंगलों में काफी बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। कुछ महीने पहले सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर स्थानीय निकायों ने अरावली क्षेत्र में अवैध तरीके से बनाए गए रिसॉर्ट और मैरिज होम्स को ढहा दिया गया था। हालांकि इस दौरान भी कुछ रसूखदार लोगों के अवैध निर्माणों को छोड़ देने का आरोप भी लगा था। इसके बावजूद यह सच है कि अरावली क्षेत्र में कंक्रीट का जंगल उगाया जा रहा है। 

पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि कंक्रीट का जंगल इसी तरह उगता रहा, तो बहुत जल्दी अरावली क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित होगा। यदि वन क्षेत्र इसी तरह घटता रहा तो न केवल तापमान में बेतहाशा वृद्धि होगी बल्कि जैव विविधता और भू-जल स्तर पर भी इसके विनाशकारी परिणाम देखने को मिलेंगे। यह सच है कि अरावली की पहाड़ियां गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लिए फेफड़े की तरह काम करती हैं। 

यदि अवैध वन कटान और खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो जैव विविधता बुरी तरह प्रभावित होगी। चार राज्यों में तापमान वृद्धि के कारण आम जन जीवन बुरी तरह प्रभावित होगा। यदि अरावली क्षेत्र में वन क्षेत्र बढ़ाना है, तो अवैध निर्माण के साथ-साथ अवैध कटान और खनन को रोकना होगा।

Monday, April 20, 2026

पिकासो ने गर्टूड स्टाइन को भेंट की पेंटिंग

बोधिवृक्ष 
अशोक मिश्र 
 
बीसवीं शताब्दी के सबसे प्रसिद्ध चित्रकारों में पाब्लो रुइज पिकासो का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। इनका जन्म 25 अक्टूबर 1881 को दक्षिणी स्पेन में हुआ था। इनके पिता भी एक प्रसिद्ध चित्रकार थे। सात वर्ष की आयु में पिता ने इनका प्रारंभिक प्रशिक्षण शुरू कर दिया था। पिकासो ने कम उम्र में ही अपनी अद्वितीय कला का प्रदर्शन किया था। 
यही वजह है कि उन्हें कम उम्र में ही ख्याति मिलनी शुरू हो गई थी। एक बार की बात है। वह पेरिस की यात्रा पर गए हुए थे। पेरिस उन दिनों कला का एक बहुत बड़ा केंद्र हुआ करता था। वहां पर अपने समय के सबसे प्रसिद्ध चित्रकार और मूर्तिकार रहा करते थे। 
उन दिनों पिकासो की आजीविका का साथ चित्रकला ही था। एक दिन वह खाली बैठे थे, तो उनके पास गर्टूड स्टाइन नाम की लड़की आई। उसके मन में चित्र कला को लेकर ढेर सारे सवाल थे। उन्होंने बड़े धैर्य से उसकी बातें सुनी और उसके सवालों का जवाब दिया।  
उसी दौरान उन्होंने उसे एक चित्र बनाकर भेंट किया। बाद में दोनों के बीच दोस्ती हो गई। जब पिकासो की ख्याति ज्यादा हो गई, तो एक दिन अमेरिकी कला संग्रहकर्ता अल्बर्ट बान ने गर्टूड से पूछा कि उसने पिकासो को यह चित्र बनाने के लिए कितना भुगतान किया था। 
गर्टुड ने बताया कि यह चित्र पिकासो ने भेंट की थी। बान ने उस पेंटिंग को खरीदने की इच्छा जताई, लेकिन गर्टूड ने उसे बेचने से इनकार कर दिया। हालांकि उस पेंटिंग के उसे लाखों डॉलर मिल सकते थे। दरअसल, उन दिनों किसी द्वारा भेंट में दी गई चीजें अमूल्य हुआ करती थीं। लोग उसे अपने जी जान से ज्यादा सुरक्षा करते थे। भेंट में दी गई वस्तु का मूल्य नहीं, केवल भावना देखी जाती थी।

आखिर कब रुकेगी कापी-किताब, ड्रेस के नाम पर निजी स्कूलों की लूट

अशोक मिश्र

वैसे तो सरकार हर साल जब स्कूलों का नया सत्र शुरू होता है, तो दावा करती है कि अभिभावकों को स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी और लूट से बचाया जाएगा। अभिभावकों के साथ लूट नहीं होने दी जाएगी, लेकिन कुछ दिनों तक संबंधित अधिकारी चुस्ती-फुर्ती दिखाते हैं और फिर सब कुछ ठंडा पड़ जाता है। इस साल भी प्रदेश सरकार अभिभावकों को निश्चित दुकानों से ड्रेस और कापी-किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे निजी स्कूलों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है। 

सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि निजी स्कूलों में किसी बच्चे की पीठ पर लदे बैग में निर्धारित भार से अधिक कापी-किताबें पाई गईं, तो उस स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को ऐसी परेशानी से निजात दिलाने और स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए जिला शिक्षाधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारी की जवाबदेही तय कर दी गई है। सरकार ने पहली कक्षा से लेकर दसवीं तक के बच्चों के लिए एक मानक भार तय कर दिया है। 

लेकिन अकसर देखा गया है कि रेफरेंस बुक के नाम पर अभिभावकों को इतनी ज्यादा मात्रा में पुस्तकें खरीदने पर मजबूर किया जाता है कि वह परेशान हो जाते हैं। बस्ते का बोझ भी काफी हद तक बढ़ जाता है। छोटे-छोटे बच्चों की पीठ पर लदा भारी भरकम बस्ता उनके लिए कई तरह की मुसीबतें पैदा कर देता है। अधिकतर बच्चे छोटी ही उम्र में पीठ दर्द की शिकायत करते हुए पाए जाते हैं। उनकी रीढ़ की हड्डी भी पीठ पर भारी बस्ता लादने की वजह से थोड़ी झुक जाती है। 

यह स्थिति आगे चलकर उन्हें जीवन भर परेशान करती है। कई जिलों में स्कूल परिसर में स्कूल प्रबंधन ने मनमााने रेट पर पुस्तकों और ड्रेस आदि बेचना शुरू कर दिया है। माता-पिता को स्कूल से ही जरूरत की सारी चीजें लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। कई पुराने और अप्रासंगिक रेफरेंस बुक्स बच्चों पर थोपी जा रही हैं जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप नहीं बताई जाती हैं। वैसे तो शिक्षा विभाग ने ऐसे मामलों पर शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कुछ मामलों में कार्रवाई हुई भी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

 इसके लिए पूरे प्रदेश स्तर पर कम से कम डेढ़ दो महीने तक लगातार अभियान चलाने की जरूरत है। हालांकि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के सख्त आदेश दिए गए हैं। कुछ स्कूलों ने इस बार अपनी ड्रेस में भी बदलाव कर दिया है। हर साल स्कूल ड्रेस में बदलाव होने से अभिभावकों पर एक अतिरिक्त बोझ पड़ जाता है, जबकि पुरानी ड्रेस जारी रखकर अभिभावकों को अतिरिक्त खर्चे से बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में निजी स्कूलों को अतिरिक्त कमाई नहीं हो पाएगी।

Sunday, April 19, 2026

कभी अविश्वसनीय बात पर विश्वास मत करो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ग्रंथों में जितनी भी बातें लिखी हुई हैं, उनको पढ़ने के बाद अगर जीवन में उतारा न जाए, तो वह सारा ज्ञान मिथ्या होता है। ज्ञान का उपयोग ही सबसे उचित होता है। एक बार की बात है। एक राजा की बहुत सुंदर वाटिका थी। उस वाटिका में अंगूर की बेलें लगी हुई थीं। 

राजा को उस वाटिका से खाने के लिए ढेर सारा मीठा-मीठा अंगूर मिला करता था। कुछ दिनों बाद एक चिड़िया उस वाटिका में रोज आने लगी। वह मीठे-मीठे अंगूरों को खाकर खट्टे या अधपके अंगूरों को नीचे गिरा दिया करती थी। वाटिका का माली चिड़िया की इस करतूत से बहुत परेशान हो गया। उसने चिड़िया को पकड़ने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसे पकड़ने में सफल नहीं हुआ। 

एक दिन आजिज आकर माली ने यह बात राजा को बताई। अगले दिन राजा वाटिका में आकर छिप गया और जैसे ही चिड़िया आई, राजा ने उसे पकड़ लिया। राजा जब उसे मारने लगा, तो चिड़िया ने कहा कि हे राजा! तुम मुझे मत मारो। मैं तुम्हें ज्ञान की चार बातें बताती हूं। राजा ने कहा कि तुरंत बताओ। चिड़िया ने कहा कि पहली बात तो यह है कि हाथ आए शत्रु को कभी जिंदा मत छोड़ो। 

राजा ने कहा-दूसरी बात बता। चिड़िया ने कहा कि कभी असंभव बात पर विश्वास मत करो। तीसरी बात यह है कि अतीत को याद करके पश्चाताप मत करो। इतना कहकर चिड़िया ने कहा कि मेरा दम घुट रहा है। थोड़ा ढील दो, ताकि मैं चौथी बात कह सकूं। राजा ने जैसे ही हथेली ढीली की, चिड़िया उड़कर डाल पर जा बैठी और कहा कि मेरे पेट में दो अनमोल हीरे हैं। 

अब राजा पछताने लगा। तब चिड़िया ने कहा कि आपने मेरी चारों ज्ञान की बातें नहीं मानी। मैं आपकी शत्रु थी, आपने जिंदा छोड़ दिया। हीरे की काल्पनिक बात को जानकर पछता रहे हैं।

क्रॉस वोटिंग करने वाले पांचों एमएलए का निलंबन एक स्मार्ट फैसला


अशोक मिश्र

पिछले 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों पर हुए चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच कांग्रेसी विधायकों को निलंबित करके पार्टी ने अब गेंद इनके पाले में डाल दी है। निलंबित होने के बाद पुनहाना के विधायक मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल चौधरी, नारायण गढ़ से शैली चौधरी, रतिया से जनरैल सिंह और साढौरा से रेनू बाला पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकेंगे। पार्टी की गतिविधियों से एक तरह से इनका नाता टूट गया है। 

निलंबन के दौरान यदि किसी मामले को लेकर पार्टी ह्विप जारी करती है, तो इन पांचों विधायकों को पार्टी ह्विप को मानना ही पड़ेगा और उसके मुताबिक कार्य करना पड़ेगा। पार्टी ने इन पांचों विधायकों बर्खास्त न करके इन्हें अपने से अलग भी कर दिया है और इन्हें स्वतंत्र भी नहीं छोड़ा है। अब अगर पार्टी उन्हें बर्खास्त कर देती तो ह्विप मानने की बाध्यता ही खत्म हो जाती। वह किसी दूसरे दल में भी चले जाते तो उनकी विधायकी बरकरार रहती। दूसरे दल को अपना समर्थन भी दे सकते थे। 

लेकिन अब अगर उन्होंने ह्विप नहीं माना या दूसरे दल में चले गए, तो उनकी विधायकी चली जाएगी। ऐसी स्थिति में उनकी सीटों पर दोबारा उपचुनाव होंगे। पार्टी ने इन्हें निलंबित करके पार्टी से बर्खास्त करने और निलंबन खत्म करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रख लिया है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉास वोटिंग करने के आरोपी विधायकों का निलंबन कांग्रेस का स्मार्ट फैसला मानना जा रहा है। 

कांग्रेस ने यह फैसला करके एक तरह से दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्रॉस वोटिंग के बाद प्रदेश अनुशासन समिति ने पांचों कांग्रेस विधायकों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। इनमें से तीन विधायकों शैली चौधरी, जनरैल सिंह और रेनूबाला ने अपना जवाब समिति को समय पर ही सौंप दिया था। 

लेकिन मोहम्मद इसराइल चौधरी और मोहम्मद इलियास ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा। कांग्रेस से निलंबित किए गए लगभग पांचों विधायकों ने पार्टी के फैसले से ऐतराज जताया है। सभी का यही कहना है कि वह कुछ ही दिनों में अपने समर्थकों के पास जाएंगे, उनसे विचार विमर्श करेंगे, उसके बाद ही कोई फैसला लेंगे। स्वाभाविक है कि पांचों विधायकों को निलंबित करने का फैसला हाईकमान की मर्जी से लिया गया है। 

इसके बावजूद कहना उचित होगा कि हरियाणा कांग्रेस पर जिस तरह गुटबाजी हावी है, उसको देखते हुए करमवीर बौद्ध का राज्यसभा सांसद चुना जाना ही किसी चमत्कार से कम नहीं है। प्रदेश कांग्रेस में हुड्डा गुट की तूती बोलती है। ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता इनके साथ हैं, लेकिन कुमारी सैलजा प्रदेश में कांग्रेस की सबसे बड़ी दलित नेता हैं। इनके महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। 

Saturday, April 18, 2026

गैस और तेल की कमी भी बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण

अशोक मिश्र

पिछले एक महीने से दिल्ली एनसीआर को प्रदूषण से राहत मिली हुई थी। लेकिन प्रदूषण बढ़ने की वजह से एक बार फिर इमरजेंसी के लिए बनाए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान वन को फिर लागू कर दिया गया है। एनसीआर के अंतर्गत आने वाले जिलों सहित पूरे राज्य के अधिकतर जिले पिछले कई दिनों से प्रदूषण की चपेट में हैं। यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो दिन दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण की चपेट में रहेगा। हरियाणा में भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ रहा है। 

ग्रेप वन लागू होने के बाद दिल्ली एनसीआर में निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिन साइटों पर ऐसे कार्य चल रहे हैं, उन्हें सुरक्षात्मक कदम उठाने होंगे। सड़कों की सफाई करते समय पानी का छिड़काव करना होगा और सफाई मशीनों से करनी होगी ताकि किसी प्रकार से धूल न उड़े। निर्माण सामग्री लाने-ले जाने वाले ट्रकों को भी सामग्री ढक कर ही रखना होगा। इस बीच खुले में कूड़ा-करकट जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

हरियाणा में कई जगहों पर यह देखा गया है कि लोग घरों से निकला कूड़ा स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कूड़ा इकट्ठा करने वाली गाड़ियों में डालने की जगह रात में जला देते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ता है। होटलों और रेस्टोरेंट में तंदूर में लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इस बीच हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने का कारण एलपीजी की कमी को भी माना जा रहा है। 

जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई है, तब से एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा आई है। इस वजह से लोगों को छोटे सिलेंडर में गैस भरवाने में दिक्कत आ रही है। गैस के विकल्प में लोगों ने लकड़ी, कोयले और उपलों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस वजह से भी प्रदूषण का स्तर काफी हद तक बढ़ा है। 

वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की वजह से दिल्ली एनसीआर में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आंशिक राहत प्रदान की है। सीएक्यूएम ने गैस की कमी को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की इजाजत दे दी है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 13 मार्च 2026 को आदेश जारी किया था कि 13 अप्रैल के बाद वैकल्पिक ईंधन हाई स्पीड डीजल, बायोमास, रिफ्यूज्ड डेरिवेड फ्यूल पेलेट्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। 

लेकिन अब सीएक्यूएम ने अपने आदेश को थोड़ा ढीला किया है। हरियाणा और दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो रही हैं।  प्रदूषण के चलते बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।  आंखों में जलन और फेफड़ों में संक्रमण के रोगी ज्यादा अस्पताल पहुंच रहे हैं।

पहले खुद पर लागू करो, फिर उपदेश दो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा गांधी हमेशा कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते थे। वह सत्य बोलने और अहिंसा का पालन करने की शिक्षा देते थे। वह खुद झूठ नहीं बोलते और लोगों से भी अपेक्षा करते थे कि वह झूठ नहीं बोलेंगे। एक बार की बात है। एक बुजुर्ग महिला अपने पौत्र को लेकर महात्मा गांधी के पास पहुंची। 

उसने महात्मा गांधी से मुलाकात करने के बाद कहा कि बापू, मेरा यह पौत्र गुड़ बहुत खाता है। इसकी वजह से इसके दांत खराब हो रहे हैं। इतना ही नहीं, और भी कई तरह की परेशानियां इसे हो रही है। मैं इसे समझाते-समझाते थक गई हूं। आप इसे सीख दीजिए ताकि यह गुड़ खाना छोड़ दे। यह आपकी बात जरूर मानेगा। 

गांधी जी ने उस बुजुर्ग महिला की बात बड़े ध्यान से सुनी और थोड़ी देर बाद  उन्होंने कहा कि आप पंद्रह दिन बाद आएं, मैं इसे कुछ न कुछ सलाह दूंगा। वह बुजुर्ग महिला लौट गई। करीब पंद्रह सोलह दिन बाद वह महिला फिर गांधी के आश्रम में पहुंची। काफी देर इंतजार करने के बाद उसकी मुलाकात गांधी जी से हुई। 

गांधी जी ने उस बच्चे को समझाते हुए कहा कि बेटा, जरूरत से ज्यादा गुड़ खाना नुकसानदायक होता है। इसके बाद वह उस महिला से बोले, आप अब ऐसा करें कि घर में जितना भी गुड़ है। उसमें काली मिर्च पीसकर मिला दें। इससे जब आपका पौत्र उस गुड़ को खाएगा, तो उसे तीखा लगेगा। इससे उसकी आदत छूट जाएगी। काली मिर्च डालने से गुड़ भी लाभदायक हो जाएगा। 

तब उस बुजुर्ग महिला ने कहा कि आप यह बात तो पंद्रह दिन पहले भी बता सकते थे। मुझे दो बार आना पड़ा। तब गांधी जी ने कहा कि दरअसल, तब मैं भी गुड़ बहुत खाता था। पंद्रह दिन में मैंने गुड़ खाना छोड़ा है। अब मैं उसे उपदेश देने के काबिल हूं। किसी को उपदेश देने से पहले खुद पर लागू करना ही उचित होता है।

Friday, April 17, 2026

पोलियो नहीं तोड़ सका रूजवेल्ट का हौसला

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

30 जनवरी 1882 में न्यूयार्क में पैदा हुए फ्रेंकलिन डेलानो रूजवेल्ट अमेरिका के पहले और आखिरी राष्ट्रपति थे जिन्होंने चार बार राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया था। सन 1930 के बाद आई वैश्विक मंदी का उन्होंने बड़े नीतिपूर्ण ढंग से सामना किया और अमेरिका में महंगाई पर अंकुश रखा। 

इतना ही नहीं, उन्होंने मंदी के दौरान भी नौकरियों को सुरक्षित रखने में सफलता पाई थी। लोगों की जरूरतों का सामान नियंत्रित मूल्यों पर उपलब्ध कराया था। वह अपने जीवन काल में काफी लोकप्रिय राष्ट्रपति साबित हुए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट इनके चचेरे भाई थे जिन्हें वह अपना आदर्श मानते थे। सन 1921 में फ्रेंकलिन पोलियो रोग के शिकार हो गए। 

इसकी वजह से इनका चलना-फिरना बंद हो गया। काफी दिनों तक अवसाद में डूबे रहे। इनकी पत्नी एलेनोर और मित्रों के हौसला बढ़ाने पर इनका आत्मविश्वास दोबारा लौटा और व्हील चेयर पर बैठकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय से दुनिया भर को यह संदेश दिया कि यदि आप में कुछ कर गुजरने की आकांक्षा है, तो मुसीबतें आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकती हैं। 

जिस समय वह 1933 में राष्ट्रपति बने, वह समय अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए कठिन समय था। पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही थी। ऐसे कठिन समय में अमेरिका के राष्ट्रपति पद को संभालना काफी कठिन काम था। लेकिन उन्होंने जिस तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभाला, वह उनकी कुशल नीतियों और आर्थिक मामले में समझ का एक बेहतरीन उदाहरण है। यही वजह है कि वह चार बार राष्ट्रपति चुने गए।

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए लोगों में पैदा करनी होगी जागरूकता

अशोक मिश्र

देश में सबसे कम वन आवरण प्रतिशत वाले राज्यों में हरियाणा का नाम सबसे पहले आता है। राष्ट्रीय वन नीति के मुताबिक वन क्षेत्र का प्रतिशत का लक्ष्य प्रत्येक राज्य के लिए 20 प्रतिशत तय किया गया है। हरियाणा का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 44,212 वर्ग किमी है। हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1,614.26 वर्ग किमी है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 3.65 प्रतिशत है। इस हिसाब से देखें तो राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र 16 प्रतिशत से अधिक कम है। भारत राज्य वन रिपोर्ट 2023 का आंकड़ा बताता है कि राज्य में 2019 से 2023 के बीच केवल 12.26 वर्ग किमी की मामूली वृद्धि हुई है। 

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सैनी सरकार ने पर्यावरण संतुलन और जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिपूरक वनीकरण प्रबंधन और योजना प्राधिकरण के तहत 298.43 करोड़ रुपये वार्षिक कार्य योजना को मंजूरी दी है। योजना के मुताबिक, प्रदेश में 1882 हेक्टेयर में बीस लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं, प्रदेश में 4518 हेक्टेयर भूमि पर पहले से रोपे गए पौधों का संरक्षण और रखरखाव किया जाएगा। यह पौधे विभिन्न कार्यक्रमों और अवसरों पर  रोपे गए थे। 

सरकार की यह योजना प्रदेश में पहले से रोपे गए पौधों के संरक्षण के साथ ही साथ लोगों को पौधरोपण की ओर आकर्षित करना है। सरकारी स्तर पर सहायता और सुविधा मिलने पर आम नागरिक भी पौधरोपण और वनीकरण में रुचि लेने लगेंगे। इससे न केवल वन क्षेत्र में वृद्धि होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन पर भी रोक लग सकेगी। हरियाणा में तीन प्रकार के वनक्षेत्र पाए जाते हैं जिनमें आरक्षित वन क्षेत्र 24,962.98 हेक्टेयर, संरक्षित वन 1,20,282.08 हेक्टेयर और अवगीर्कृत वन क्षेत्र 1,292.62 हेक्टेयर है। सबसे अधिक वन क्षेत्र पंचकूला जिला (390.12 वर्ग किमी) और सबसे कम वन क्षेत्र पलवल जिले (13.82 वर्ग किमी) पाया गया है। 

हरियाणा में निर्दिष्ट वनों के बाहर लगभग 4.1 करोड़ पेड़ हैं जिनमें नीम, शीशम, पीपल, बरगद और नीलगिरी सबसे सामान्य प्रजातियां हैं। राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार बीस प्रतिशत वन क्षेत्र का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सबसे पहले तो अरावली और शिवालिक की पहाड़ियों पर होने वाले अवैध खनन और पेड़-पौधों की कटाई पर अंकुश लगाना होगा। 

इसके साथ ही साथ एक अभियान चलाकर पौधरोपण करना होगा। इसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों और स्कूल-कालेजों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। पौधरोपण के बाद पौधों की देख रेख और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी वन क्षेत्र में वृद्धि का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। पर्यावरण को बचाने का यही एक मात्र तरीका है जिस पर काम करके जलवायु परिवर्तन पर रोक लगाई जा सकती है।