बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
बंगाल के महानतम समाज सुधारकों में गिने जाते हैं ईश्वर चंद्र विद्यासागर। वैसे उनका पूरा नाम था ईश्वर चंद्र बंध्योपाध्याय। उन्हें विद्यासागर की उपाधि प्रदान की गई थी। 26 सितंबर 1820 में पश्चिम बंगाल में पैदा हुए ईश्वर चंद्र ने आजीवन समाज सुधार में ही अपना जीवन खपा दिया था। वह उन्नीसवीं सदी के बहुमुखी प्रतिभा के धनी समाजसेवी थे जिनका भारत में महिलाओं की स्थिति को बदलने में योगदान उल्लेखनीय है। एक बार की बात है। उन दिनों बंगाल में अकाल फैला हुआ था।लोग भूखे मर रहे थे। रोजी-रोटी की तलाश में लोग बंगाल से बाहर निकलकर दूसरे प्रदेशों में जा रहे थे। उन दिनों गांव के गांव खाली हो गए थे। एक दिन विद्यासागर कहीं जा रहे थे। रास्ते में एक बच्चे ने उनसे कहा कि मुझे एक पैसा दे दो। उन्होंने देखा कि उसका मुंह सूख गया था। विद्यासागर ने पूछा कि अगर दो पैसा दे दूं, तो तुम क्या करोगे?
उसने कहा कि मैं खाना खरीदकर अपनी मां के पास जाऊंगा। विद्यासागर ने पूछा कि अगर तुम्हें चार आने दूं तो क्या करोगे? उस लड़के ने कहा कि मैं दो आने का सामान खरीदूंगा और दो आने के फल खरीदकर बेचूंगा। उससे पैसे कमाऊंगा। दयावान विद्यासागर ने उसे एक रुपया दिया और वहां से चले गए। पांच-छह साल बाद संयोग से एक दिन वहीं पहुंचे।
एक युवक ने उनके पास आकर प्रणाम किया और कहा कि क्या वह थोड़ी देर के लिए उसकी दुकान पर चलेंगे। विद्यासागर ने कहा कि मैं तो तुम्हें पहचानता नहीं हूं। तब उस युवक ने सारी बात बताई। यह सुनकर विद्यासागर बहुत खुश हुए और उसकी खूब प्रशंसा की। युवक की उद्यमशीलता ने उसे गरीबी से मुक्त कर दिया था।