Wednesday, June 24, 2026

एक दीपक से जले सैकड़ों दीपक

 बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

दुनिया में जितने भी बदलाव हुए हैं, उनकी शुरुआत एक छोटे से कदम से ही हुई है। किसी भी देश, समाज में जब भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है, तो उसके पीछे किसी व्यक्ति का छोटा सा प्रयास ही रहा होगा। इसके बाद उस व्यक्ति के साथ लोग जुड़ते गए होंगे और समाज, देश में बहुत भारी परिवर्तन आया होगा। यह बात ध्रुव सत्य है। बदलाव की प्रक्रिया किसी एक से शुरू होती है और वह पूरे समाज को प्रभावित करती है। 

इस संबध में एक बहुत ही रोचक प्रसंग है। किसी गांव में एक बुजुर्ग रहता था। वह घोर आशावादी था। निराशा के क्षणों में भी वह आशा का दामन नहीं छोड़ता था। वह शाम होने पर अपने घर के दरवाजे पर रोज एक दीपक जलाता था। लोग उसको पागल समझते थे। बुजुर्ग दीपक जलाने के बाद उसे देखता रहता था, जब तक दीपक बुझ नहीं जाता था। 

एक दिन एक युवक से रहा नहीं गया और वह बुजुर्ग के पास पहुंचकर उससे बोला, बाबा! केवल एक दीपक जलाने से क्या होगा? पूरे गांव में तो रोशनी नहीं हो जाएगी। बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा कि अंधेरा खत्म करना मेरा काम नहीं है। दीपक जलाने से कम से कम कहीं तो उजाला है। 

एक दिन गांव में बहुत तेज आंधी आई। लोगों ने देखा कि बुजुर्ग का दीपक तेज आंधी में भी जल रहा है। युवक फिर बुजुर्ग के पास गया और पूछा, बाबा! आपका दीपक कैसे जल रहा है? बुजुर्ग ने कहा कि मैंने अपने दोनों हाथों से दीपक को बुझने से बचाया था।  युवक ने कहा कि बाबा, इस एक दीपक से पूरी दुनिया का अंधेरा दूर नहीं हो सकता। 

बुजुर्ग ने कहा कि मेरे मन में तो अंधेरा नहीं है। इससे प्रभावित होकर युवक ने भी दीपक जलाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते कुछ दिनों में सभी गांव वालों ने दीपक जलाना शुरू कर दिया। कल तक जो गांव अंधेरे में डूबा रहता था, आज वह दीपकों की रोशनी से जगमगा रहा था।

किसी हादसे का इंतजार न करें बचाव की कर लें पूरी तैयारियां


 अशोक मिश्र

गरमी के दिनों में आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। मार्च से लेकर जून तक देश में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। सोमवार को ही लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित कोचिंग संस्थान में लगी आग से 15 लोगों की जान चली गई। इनमें सबसे ज्यादा छात्र-छात्राएं थीं। डिजिटल लॉक डोर नहीं खुलने और चारों ओर धुआं भर जाने की वजह से इन स्टूडेंट का दम घुट गया और मौत हो गई। 

कुछ स्टूडेंट्स ने जान बचाने के लिए बाहर छलांग लगा दी। बुरी तरह घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं। इसी तरह 3 जून को सुबह दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अवैध रूप से संचालित हो रहे फ्लोरिश होटल एवं गेस्ट हाउस में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें से ज्यादातर विदेशी नागरिक थे। गुरुग्राम के ही आठ लोगों की मौत हुई थी जो एक ही परिवार के थे। मई महीने में दिल्ली के विवेक विहार में कमरे में लगे एसी का कंप्रेशर फटने से लगी आग में नौ लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 

पिछले साल जुलाई 2025 में फरीदाबाद के सेक्टर-16 स्थित एक निजी कोचिंग सेंटर  में आग लगी थी। कोचिंग सेंटर में लगी आग का कारण शार्ट सर्किट बताया गया था। संतोष की बात यह है कि समय रहते आग बुझा ली गई और जनहानि नहीं हुई। मई 2025 में करनाल जिले के एक कोचिंग सेंटर में भी आग लगने की घटना हुई थी, लेकिन समय रहते आग पर काबू पा लिया गया था। कोचिंग सेंटर में जब आग लगी थी, तब पांच सौ स्टूडेंट वहां मौजूद थे। हरियाणा के प्रत्येक जिले में सैकड़ों कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ द ज्ञानम, आईसीएस कोचिंग सेंटर, करियर पॉवर, राइस एकेडमी जैसे चर्चित संस्थान हैं। 

जिलों में वैध-अवैध रूप से संचालित होने वाले कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हरियाणा सरकार ने 'हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन आॅफ प्राइवेट कोचिंग इंस्टिट्यूट्स बिल' लागू किया है। संस्थानों के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और उचित वेंटिलेशन वाले बुनियादी ढांचे का होना अनिवार्य है। संस्थानों में फर्स्ट-आइड किट और आपातकालीन चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। परिसरों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना और सुरक्षा गार्ड तैनात करना शामिल है। 

छात्रों की शिकायतों को सुनने और समाधान करने के लिए एक आंतरिक शिकायत निवारण समिति का गठन की बात भी कही गई। पूरे राज्य में हजारों संख्या में संचालित वैध-अवैध कोचिंग संस्थान नियमों का कितना पालन करते हैं, यह जांच का विषय है। कई जिलों में तो कोचिंग संस्थान ऐसी जगहों पर संचालित हो रहे हैं, जब पर आपदा आने पर फायर ब्रिगेड या पुलिस की गाड़ियों का पहुंच पाना असंभव है। कोचिंग संस्थानों में आपदा के समय निकलने के लिए दूसरा रास्ता भी नहीं है। ऐसे संस्थानों में कोई भी हादसा हो सकता है।

Tuesday, June 23, 2026

संन्यासी मार्टिन लूथर ने दिया अहिंसा का संदेश

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर किसी ने कोई पाप किया है, उसके पापों के परिणाम से छुटकारा पोप या चर्च नहीं दे सकते हैं। दुनिया में अगर किसी के पापों के लिए कोई माफी या सजा दे सकता है, तो वह ईसा ही पाप मुक्ति दे हैं। जर्मन संन्यासी, पादरी और धर्म प्रचारक मार्टिन लूथर ने खुलेआम पोप की आलोचना करते हुए यह बात कही थी। संन्यासी मार्टिन लूथर का जन्म  1483 को जर्मनी में हुआ था। 

उनके पिता हैंस लूथर एक खदान में मजदूर थे। हैंस लूथर के आठ बच्चे थे जिसमें मार्टिन दूसरे थे। उन्होंने चर्च के पादरियों के अविवाहित रहने का भी विरोध किया। और सन 1524 ई. में उन्होंने कैथरिन बोरा से विवाह किया। तब तक रोम सन 1520 में लूथर का कैथोलिक चर्च से बहिष्कार की घोषणा कर चुका था। इस बहिष्कार के बाद ही वह एक नए संप्रदाय का नेतृत्व करने लगे थे। 

इससे जर्मनी के लोग उनसे काफी नाराज रहते थे। वह जहां भी जाते उनका विरोध किया जाता था। एक बार की बात है। वह अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। उनकी धर्म की नई व्याख्या से नाराज लोगों ने उन पर और उनके शिष्यों का विरोध किया। इस दौरान उन पर पत्थर भी फेंके गए। वह लोग जहां भी जाते थे, लोग उनका विरोध करने के लिए आ खड़े होते थे। 

इससे परेशान एक शिष्य ने लूथर से कहा कि इन लोगों को इनकी ही भाषा में जवाब देना चाहिए। संत लूथर ने कहा कि यदि हम भी उनके जैसा ही व्यवहार करने लगे, तो फिर उनमें और हम में क्या फर्क रह जाएगा। वे हमसे नाराज हैं। हम अपने प्रेम, सद्भाव और सहिष्णुता से ही उनके क्रोध को कम या समाप्त कर सकते हैं। यह सुनकर शिष्यों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने हिंसा न करने का संकल्प लिया।

जल भंडार नहीं बचाया तो भविष्य में झेलना पड़ेगा गंभीर जल संकट

अशोक मिश्र

राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण के ताजा आंकड़े बहुत डराने वाले हैं। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की हालत आंकड़ों के मुताबिक काफी खराब हो चुकी है। देश में भूजल संकट के सबसे बड़े हॉटस्पॉट यही तीनों राज्य हैं। अगर हालात पर बहुत जल्दी काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में इन तीनों राज्यों की जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि करेगी और सरकार कुछ नहीं कर पाएगी। हरियाणा में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। प्रदेश में हर साल 14 अरब घन मीटर पानी की कमी हो रही है। 

राज्य साल दर साल सूखता जा रहा है। राज्य की औसत भूजल दोहन दर 135.96 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। कुरुक्षेत्र जैसे जिलों में भूजल दोहन की दर रिकॉर्ड 228 प्रतिशत तक पहुंच गई है। शहर में भूजल की उपलब्धता काफी चिंताजनक है। शहरों में पानी की कुल मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। गर्मी के दिनों हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करना स्थानीय निकायों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। लोगों को पीने का पानी भी टैंकरों से खरीदना पड़ता है। हरियाणा में शहर ही नहीं, 7,287 गांवों में से 3,041 गांव जल संकट से जूझ रहे हैं।

राज्य के कुल 141 ब्लॉकों में से 91 ब्लॉक अत्यधिक शोषित श्रेणी में आ गए हैं। 14 जिलों में पानी का स्तर 30 मीटर से भी ज्यादा नीचे गिर चुका है। प्रदेश की वार्षिक जल मांग लगभग 34.96 लाख करोड़ लीटर है, जबकि उपलब्ध जल भंडार सिर्फ 20.93 लाख करोड़ लीटर ही है। विशेषज्ञों का मनाना है कि हरियाणा में गंभीर जल संकट के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार खेतों में लगे ट्यूबवेल हैं। किसान इन कृषि ट्यूबवेलों का अंधाधुंध उपयोग करके बहुत सारा पानी बरबाद कर देते हैं। खेतों में जरूरत से कहीं ज्यादा पानी भर देते हैं जिसकी वजह से गर्मी के मौसम में बहुत सारा पानी वाष्पित हो जाता है। 

हरियाणा में वर्षा जल का संचयन भी कम हो पाता है। वैसे बरसात भी अन्य राज्यों की अपेक्षा कम होती है जिसकी वजह से भूजल रिचार्ज दर भी काफी कम है। राज्य में तेज होता शहरीकरण और अत्यधिक जनसंख्या का दबाव पानी के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। राज्य के जिलों में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों में भी पानी की भारी खपत होती है जिसकी वजह से भूजल स्तर काफी गिरता जा रहा है। 

गंभीर पानी संकट से बचने का एक ही उपाय है कि प्रदेश के किसान, उद्योगपति और नागरिक प्रदेश सरकार की नीतियों पर अमल करें। पानी का उपयोग करें, लेकिन उसे बरबाद होने से हर हालत में बचाएं। जहां तक संभव हो, बरसात के पानी का संरक्षण करें। इसके लिए जरूरी है कि सौ वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बने मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाएं। यदि वर्षा जल को बचाया नहीं गया, तो आने वाले दिनों भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

Monday, June 22, 2026

मछली ने भुगता जिद करने का परिणाम

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जिद हमेशा नुकसानदायक होती है। यदि कोई किसी काम से होने वाले नुकसान के बारे में बताए, तो उसकी बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि बताने वाले व्यक्ति की बात सही लगे, तो उस पर अमल करना चाहिए। ऐसे मामले में जिद नहीं करनी चाहिए। जिद करने से हमेशा नुकसान ही होता है। 

हठधर्मिता हर मामले में काम नहीं आती है। किसी गांव के तालाब में तीन मछलियां रहती थीं। इन तीनों मछलियों का जन्म भी इसी तालाब में हुआ था। एक ही तालाब में रहने की वजह से तीनों में काफी गहरी दोस्ती थी। इनमें से एक मछली काफी तेज तर्रार और बुद्धिमान थी। 

वह अपनी सहेलियों को समय-समय पर चेताती रहती थी ताकि वे किसी मुसीबत में न फंस जाएं। दूसरी मछली बुद्धिमान मछली से कम बुद्धि वाली थी। लेकिन उसे मूर्ख नहीं कहा जा सकता था। वह पहली मछली की बात मानती थी, लेकिन बात मानने से पहले वह अच्छी तरह से विचार कर लेती थी। उसे बुद्धिमान मछली की बातें अच्छी और सच्ची लगती थीं। 

तीसरी मछली काफी जिद्दी थी। वह अपनी ही धुन में लगी रहती थी। कई बार वह अपनी जिद की वजह से मुसीबत में फंसते-फंसते बची थी। लेकिन हर बार बुद्धिमान मछली ने उसे किसी न किसी तरह से बचाया था। इसके बावजूद उसकी आदत नहीं बदली थी। एक दिन बुद्धिमान मछली ने देखा कि तालाब के किनारे मछुआरा आया हुआ है। 

बुद्धिमान मछली ने अपनी दोनों सहेलियों को सचेत किया और तालाब के कोने में जाने से मनाकर दिया। जिद्दी मछली ने उसकी बात नहीं सुनी। वह जैसे ही तालाब में गई मछुआरे के फैलाए जाल में फंस गई। अब जिद्दी मछली पछताने लगी, लेकिन अब क्या किया जा सकता था। जिद्दी मछली ने लाख प्रयास किया, लेकिन जाल से बाहर न आ सकी।

फुटपाथ पर चलने का अधिकार लोगों को दिलाएगा कौन?

अशोक मिश्र

सड़कों पर पैदल चलने वालों का सुरक्षित घर पहुंचना भी करिश्मा है। सड़क हो, मेट्रो स्टेशन हो या रेलवे स्टेशन इनके अगल-बगल से गुजरने वाली सड़कों से फुटपाथ अक्सर गायब होता है। ऐसा नहीं है कि फुटपाथ बनाए नहीं जाते हैं। बनाए जाते हैं, लेकिन इन पर रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा होता है। दुकानदार अपनी दुकान के सामने सामान सजाकर बैठ जाते हैं जिससे पैदल चलने वालों के लिए जगही नहीं बचती है। पैदल चलने वालों को मजबूर होकर उस सड़क पर चलना पड़ता है जिस पर तेज रफ्तार गाड़ियां आ जा रही होती हैं। 

ऐसे में कई बार हादसे भी होते हैं। इन हादसों में कुछ लोग घायल होते हैं, तो कुछ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। कई जगहों पर फुटपाथ टूटे-फूटे होते हैं, चलने लायक ही नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में पैदल चलने वाला कहां जाए। उसके पास एक ही विकल्प बचता है, सड़क पर चले। इन्हीं सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 19 जून 2026 को सुप्रीमकोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि  पैदल चलने का अधिकार संविधान के भाग-3 में दिए गए मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। 

अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित और बाधा रहित फुटपाथ पर चलना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे मोटर वाहनों की सुविधा से पहले संरक्षण मिलना चाहिए। सवाल उठता है कि पैदल चलने वालों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा। यह जिम्मेदारी राज्य सरकार के अधीन आने वाले शहरी विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, नगरपालिकाओं और पंचायतों की है। इन संस्थाओं को फुटपाथों का निर्माण, रखरखाव और अतिक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, क्योंकि पैदल चलना सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इस अधिकार की रक्षा करना सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी होगी। यदि किसी नागरिक को सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध नहीं कराया जाता या उसके इस अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह संविधान और अन्य कानूनों के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। 

वैसे तो राज्य सरकार के अधीन काम करने वाली संस्थाएं सुप्रीमकोर्ट के फैसले से पहले भी फुटपाथों पर हुए अतिक्रमण को हटाने का काम करती रही हैं। स्थानीय निकायों द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए जाते रहे हैं, लेकिन फुटपाथों पर से रेहड़ी-पटरी को हटाया गया, फुटपाथ पर रखे दुकानदारों के सामान को जब्त किया गया,  कुछ ही समय बाद हालात पहले जैसे हो जाते हैं। 

इधर अतिक्रमण हटाने वाले गए, उधर फिर फुटपाथ पर रेहड़ी पटरी वालों ने कब्जा कर लिया। जैसे ही अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू होता है, खबर फैलते ही सारे कब्जाधारी सतर्क हो जाते हैं। अभियान चलाने वालों को कब्जे दिखाई ही नहीं देते हैं, लेकिन उनके जाते ही फिर फुटपाथ पर दुकानें सज जाती हैं।

Sunday, June 21, 2026

विन्या! तेरे दोस्त में अतिथि का रूप देखती हूं


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गांधीवादी नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनोबा भावे का वास्तविक नाम विनायक नरहरि भावे था। वह चित्तपावन ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे। बचपन से ही विनोबा भावे को गणित और रसायन विज्ञान में रुचि थी। उनकी सूझबूझ भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली थी। विनोबा भावे के दो भाई और थे। उन्हें विनोबा नाम महात्मा गांधी ने दिया था। 

बाद में यही नाम प्रचलित हो गया और विनायक नरहरि को लोग कालांतर में भूल गए। उनकी मां रुक्मिणी बाई विदुषी महिला थीं। लेकिन वह भक्तिभाव में हमेशा डूबी रहती थीं। इसका प्रभाव उनके तीनों बेटों पर पड़ा था। बाद में विनोबा भावे ने संन्यास ग्रहण किया और महात्मा गांधी ने उन्हें संत विनोबा कहकर संबोधित किया। विनोबा के बचपन की एक घटना है। 

बताया जाता है कि बचपन में विनोबा का एक साथी उनके साथ ही रहता था। वह उनके साथ ही पढ़ने जाता था। ऐसा कहा जाता है। उन दिनों रात में कुछ खाना बच जाया करता था। उनकी मां बासी भोजन को विनोबा को खाने के लिए दे दिया करती थीं। उनके दोस्त को हमेशा ताजा भोजन दिया करती थीं। यह देखकर एक दिन विनोबा ने अपनी मां से कहा कि मां, तू मेरे साथ भेदभाव करती है। मुझे रोज बासी खाना नाश्ते में देती है और मेरे दोस्त को ताजा व गरम खाना। 

उनकी मां दुखी हो गईं। उन्होंने कहा कि विन्या (मां का दिया नाम) मैं भी इंसान हूं और मुझसे भी गलती हो सकती है। तू मेरा बेटा है और तेरे दोस्त में मैं अतिथि वाला भाव देखती हूं। अतिथि को भला बासी भोजन कैसे दिया जा सकता है। वैसे विनोबा ने यह बात मजाक में कही थी, लेकिन मां को यह बात चुभ गई थी। विनोबा ने जीवन भर अपनी मां की सीख पर अमल किया।

हरियाणा में वर्षा जल संचयन के लिए सबको करनी होगी कोशिश

अशोक मिश्र

उत्तर भारत में मानसून आने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। वैसे भी हरियाणा के कुछ जिलों में छिटपुट बरसात हो भी रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य में जलभराव रोकने के लिए नाले, नालियों और सीवरेज सिस्टम आदि की सफाई करने के आदेश बहुत पहले ही दे दिए थे। सभी जिलों में इस पर काम चल भी रहा है। कुछ जिलों में काम पूरा हो गया है, तो कुछ जिलों में अभी काम जारी है। 

वहीं, बरसात के दिनों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाओं पर काम हो रहा है। राज्य सरकार ने सौ वर्ग मीटर या इससे अधिक छत वाले वाले प्लाट पर बने मकान के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर रखा है। इसके बाद भी ज्यादातर ऐसे मकानों में या तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे ही नहीं है या फिर दिखावे के लिए बीस-पच्चीस मीटर गहरा पाइप लगाकर खानापूर्ति कर ली गई है। इससे वर्षा जल ऊपरी सतह में ही रह जा रहा है और भूगर्भ जल रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। 

हरियाणा जैसे प्रदेश की आज हालत यह है कि राज्य में हर साल 14 अरब घन मीटर पानी की कमी हो रही है। राज्य साल दर साल सूखता जा रहा है। शहर में भूजल की उपलब्धता कम होती जा रही है और पानी की कुल मांग बढ़ती जा रही है, जिससे लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। राज्य के 7,287 गांवों में से 3,041 गांव जल संकट से जूझ रहे हैं। यदि वर्षा जल को नदियों में मिलने से बचाया नहीं गया, तो आने वाले दिनों हालात और भी बदतर होने की आशंका है। 

हरियाणा में जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने होंगे। ऐसे में वर्षा जल संचयन सबसे कारगर उपाय है। राज्य सरकार का दावा है कि जल संचयन के मामले में हरियाणा दूसरे राज्यों के मुकाबले में बेहतर काम कर रहा है।  जल प्रबंधन के शानदार प्रदर्शन के लिए हरियाणा को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट स्टेट इन वाटर मैनेजमेंट का पुरस्कार भी मिल चुका है। तो फिर हरियाणा में पानी की इतनी भारी कमी क्यों है? सरकारी आंकड़ा कहता है कि राज्य में 68,000 से अधिक जल संरक्षण ढांचे बनाए जा चुके हैं और लगभग 2,215 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। 

कुछ दिनों पहले सिंचाई एवं जल संसाधन तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा था कि पहली बार हरियाणा में लगभग 5,700 करोड़ रुपये की लागत से विश्व बैंक समर्थित एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना (इंटीग्रेटेड  वाटर प्लान) लागू की जा रही है, जो पूरे प्रदेश के लिए गेम चेंजर साबित होगी। इंटीग्रेटेड वाटर प्लान से यह उम्मीद तो पैदा होती है कि निकट भविष्य में प्रदेश को जल समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा, लेकिन यह भी सही है कि अभी हालात अच्छे नहीं हैं। इसके लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सबको मिलकर वर्षा जल संचयन में हाथ बंटाना होगा। तभी पानी की किल्लत को दूर किया जा सकता है।

Saturday, June 20, 2026

कुछ तुम्हारे जैसी, कुछ तुमसे अच्छी


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान अगर संतोषी हो, तो उसे किसी भी अवस्था में नींद आ सकती है। वह कहीं भी सो सकता है,लेकिन यदि संतोष नहीं है, तो उसे राजसी पलंग पर भी नींद नहीं आएगी। एक बार की बात है। एक साधु घूमते-घूमते किसी शहर में पहुंच गया। शहर में प्रवेश करते समय रात हो गई थी। सर्दी के दिन थे। लोग अपने घर का दरवाजा बंद करके सोने चले गए थे। अब रात में साधु किसके घर का दरवाजा खटखटाता। 

उसके पास ओढ़ने का कपड़ा भी नहीं था। उसने आसपास नजर दौड़ाई, तो भड़भूजे की दुकान नजर आई। भड़भूजे की भट्ठी थोड़ी गर्म थी। सो, साधु ने सोचा कि इसी भट्ठी में किसी तरह रात गुजार लूं। वह उसी में सो गया।  संयोग से पास में ही राजा का महल भी था। 

सुबह उठते ही राजा ने अपने नौकरों से पूछा, रात कैसे बीती? तब तक साधु भी जाग गया था। उसने राजा का प्रश्न सुना, तो बोला, कुछ तुम्हारे जैसी, कुछ तुम्हारे से अच्छी। राजा ने फिर एक बार यही प्रश्न दोहराया। साधु ने फिर वही उत्तर दिया। राजा चकित रह गया कि यह कौन है, जो उसके सवालों का उत्तर दे रहा है। राजा ने कहा कि सवालों का जवाब देने वाले को यहां ले आओ। 

सैनिक साधु को खोजते हुए जब भट्ठी के पास पहुंचे, तो उन्होंने कहा कि आपको राजा ने बुलाया है। साधु  के शरीर में राख और कालिख लगी हुई थी। राजा ने पूछा कि मेरे जैसी और मेरे से बेहतर रात कैसे बीती? साधु ने कहा कि आप राज महल में नर्म बिस्तर पर सोए। मैं भट्ठी की गर्म राख पर सोया। हम दोनों जब सो गए, तो एक समान हो गए। सुबह उठते ही आपको राज्य की चिंता सताने लगी, जबकि मैं जब सुबह उठा, तो चिंता मुक्त था। सो मेरी रात आपसे अच्छी बीती। राजा साधु की बात सुनकर संतुष्ट हो गया।

लोगों की लापरवाही के चलते बढ़ रहीं आग लगने की घटनाएं


अशोक मिश्र

फरीदाबाद के मेवला महाराज औद्योगिक क्षेत्र में गुरुवार को आग लगने से जूता फैक्टरी का गोदाम जलकर खाक हो गया। हालांकि राहत की बात यह है कि आग लगने से किसी की मौत नहीं हुई है। गर्मी के दिनों में हरियाणा में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। घर, फैक्टरी, होटल, दुकान, खेत में पड़ी फसल आदि में थोड़ी सी लापरवाही के चलते आग विकराल रूप धारण कर लेती है। गरमी के दिनों में आग लगने का कारण किसानों का गेहूं के अवशेष को खेत में ही जला देना भी है। 

किसान गेहूं के अवशेष का दूसरा उपयोग करने की जगह जब जला देते हैं, तो हवा के माध्यम से उड़ने वाली चिन्गारी दूसरे खेतों में रखी फसल, फसल के अवशेष आदि को भारी नुकसान पहुंचाती है। पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2026 में गेहूं की कटाई के मौसम में हरियाणा में खेतों में आग लगने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस वर्ष मामलों की संख्या 2025 की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। पिछले साल राज्य में 1,745 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इस साल 1,610 मामलों की यह वृद्धि मात्र एक वर्ष में लगभग 92 प्रतिशत की बढ़ोतरी  को दर्शाती है। इससे पर्यावरण प्रदूषण और पराली जलाने पर रोक लगाने संबंधी नियमों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 

हरियाणा में 2024 में 3077, 2023 में 1887 और 2022 में 2872 कृषि अग्निकांड हुए थे। खेतों में आग लगने के मामले में अधिकारी मानते हैं कि खेतों में आग लगने की अधिकतर घटनाएं आकस्मिक थीं और शॉर्ट सर्किट के कारण हुईं। हां, कुछ मामलों में किसानों ने जानबूझकर पराली में आग लगाई, जो बाद में तेज गर्म हवाओं और शुष्क मौसम के कारण आसपास के खेतों में तेजी से फैल गई। गर्मी के मौसम में वातावरण शुष्क होने की वजह सेआग बड़ी तेजी से फैलती है। 

घर, फैक्टरी, होटल या दूसरी जगहों पर लोगों की लापरवाही के चलते आग लग जाती है। कई बार बिजली के तारों की वजह से पैदा हुई चिन्गारी सब कुछ स्वाहा कर देती है। मार्च से लेकर जून-जुलाई तक सबसे ज्यादा आगजनी की घटनाएं होती हैं। ऐसी स्थिति में अग्नि शमन एवं आपातकालीन सेवाओं का महत्व काफी बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि वह दमकल विभाग को पर्याप्त कर्मचारी, आधुनिक संसाधन और मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराए। 

वर्तमान में प्रदेश में 89 फायर स्टेशन संचालित हैं, जो मुख्यत: शहरी क्षेत्रों तक सीमित हैं। कस्बों, उपमंडलों, ग्रामीण इलाकों और नए औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के संसाधन अपेक्षाकृत कम हैं। इस स्थिति से बचने के लिए सैनी सरकार ने 59 नए फायर स्टेशन खोलने का फैसला लिया था। इस योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इससे आपात स्थितियों में रिस्पॉन्स टाइम में उल्लेखनीय कमी आएगी। योजना का सबसे बड़ा प्रभाव एनसीआर क्षेत्र में दिखेगा, जहां 20 नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।