बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
शिवाजी राजे भोसले का राज्याभिषेक रायगढ़ में सन 1674 में हुआ था। यहीं पर उन्होंने मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी और राज्याभिेषक के बाद छत्रपति कहलाए। छत्रपति शिवाजी ने अपनी अनुशासित सेना और चतुर प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक खुशहाल राज्य की स्थापना की थी। उन्होंने मुगलों की भारी भरकम सेना का मुकाबला करने के लिए गुरिल्ला युद्ध नीति अपनाई थी जिससे मुगलों की सेना काफी खौफ खाती थी। एक बार की बात है। रात में वह अपने कक्ष में सो रहे थे।संयोग से उस समय सेनापति तानाजी पहरे पर थे। एक दस-बारह साल के एक बालक ने पहरेदारों की निगाह बचाकर शिवाजी के कक्ष में प्रवेश किया। उसने तलवार निकाली और शिवाजी पर हमला करने ही वाला था कि तानाजी की निगाह उस पर पड़ गई। तब तक शिवाजी की नींद भी खुल चुकी थी। बालक को बंदी बना लिया गया। शिवाजी ने उस बालक के हाथ में तलवार देखकर पूछा कि तुम मेरे कक्ष में इस तरह चोरी से क्यों आए थे। क्या तुम मेरी हत्या करना चाहते थे?
बालक शिवाजी को देखकर डर गया। उसने डरते हुए कहा कि हां, मैं आपकी हत्या करने आया था। तब शिवाजी ने पूछा कि तुम मुझे क्यों मारना चाहते थे? तब बालक ने कहा कि मैं आपकी सेना के एक सैनिक का पुत्र हूं। मेरे पिता की लड़ाई में मौत हो गई है। मेरी मां बीमार हैं। मैं काम की तलाश में निकला था। आपके दुश्मनों ने मुझे पैसे देकर आपकी हत्या करने को कहा था। अभी आप मुझे छोड़ दीजिए, मैं अपनी मां से मिलकर कल सुबह हाजिर हो जाऊंगा।
उस समय उसे छोड़ दिया गया। अगली सुबह नियत समय पर वह बालक दरबार में हाजिर हुआ। शिवाजी ने कहा कि यह हमारे वीर शहीद सैनिक का पुत्र है। भूल हमसे हुई। हम अपने सैनिकों के जीवन काल और उसके बाद उनके परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था करते हैं। मैं इस बालक की मृत्युदंड की सजा भी माफ करता हूं।