Wednesday, February 4, 2026

मां ने बेटे से कहा, देश प्रेम की परीक्षा लूंगी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हमारे देश को ब्रिटिश दासता से मुक्ति पाने के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। हजारों युवकों ने देश की स्वाधीनता संग्राम के लिए अपना बलिदान दिया। इन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे अशफाक उल्ला खां। अशफाक का जन्म शाहजहांपुर के एक पठान खानदान में हुआ था। इनके परिवार में सभी लोग सरकारी नौकरी में थे। इनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था, लेकिन बचपन से ही अशफाक को ब्रिटिश दासता कचोटती रहती थी। वह उन लोगों की सहायता करने में आगे रहते थे जो लोग गुलामी से मुक्त होने के प्रयास में लगे हुए थे।

 इनकी मां मजहूरुन्निशाँ बेगम को बहुत खुशी हुई, लेकिन उन्हें डर भी था कि कहीं यह पुलिस के हाथों गिरफ्तार हुआ, तो ऐसा न हो कि यह अपने साथियों के बारे में बता दे। एक दिन उन्होंने अपने बेटे से कहा कि मैं तुम्हारी परीक्षा लूंगी। उनकी मां मजहूरुन्निशाँ बेगम ने एक दीपक जला दिया और उसकी लौ पर अशफाक को हाथ रखने को कहा। 

लौ पर हाथ रखने के बाद जब मांस जलने लगा और अशफाक ने उफ तक नहीं किया, तो उनकी मां ने उन्हें गले से लगा लिया। बाद में अशफाक क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्कमें आए। क्रांतिकारियों की एक बैठक शाहजहांपुर में हुई जिसमें तय किया गया कि क्रांति को आगे बढ़ाने अंग्रेजी खजाना लूट लिया जाए। 9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन से जा रहा सरकारी खजाना लूट लिया। 

बाद में ज्यादातर क्रांतिकारी पकड़े गए। 19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद की जेल में क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां को फांसी दे दी गई। इस तरह यह क्रांतिकारी भारतीय इतिहास में अमर हो गया।

अटल भूजल योजना को अतिरिक्त फंड मिलने से दूर होगा जल संकट


अशोक मिश्र

हरियाणा में पिछले दो दशकों से जल संकट धीरे-धीरे गहराता जा रहा है। इसका कारण बड़े पैमाने पर भूगर्भ जल दोहन है। यह जल दोहन 135 प्रतिशत से अधिक हो जाने की वजह से 143 ब्लॉक में से 91 ओवर-एक्सप्लॉइटेड की श्रेणी में हैं। राज्य के 17 जिलों में भूजल में फ्लोराइड और नौ में यूरेनियम की अधिकता पाई गई है जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। शहरों और गांवों में जहां पानी का उपयोग जनसंख्या बढ़ने से बढ़ा है, वहीं कृषि में पानी के अधिक उपयोग और सतही जल की कमी से सिरसा, भिवानी, हिसार और सोनीपत जैसे जिलों में पेयजल संकट बढ़ गया है। 

पिछले दो दशकों में हरियाणा के 22 में से 16 जिलों में भूजल स्तर काफी नीचे गिर गया है। अम्बाला, कैथल और करनाल में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट (अप्रैल 2025-जनवरी 2026) बताती है कि प्रदेश में लिए गए 25,240 नमूनों में से 396 खराब पाए गए, जिनमें 17 जिलों में फ्लोराइड और नौ में यूरेनियम की मात्रा अधिक पाया गया है। इन्हीं सब स्थितियों से निपटने के लिए केंद्रीय बजट में इस वर्ष वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हरियाणा को मूल बजट के अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण अतिरिक्त 144.85 करोड़ रुपये दिए है। इससे कुल प्रोत्साहन फंड 615.37 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। 

वैसे भी पिछले साल मिले बजट की बदौलत राज्य के पांच ब्लॉक और 90 से अधिक ग्राम पंचायतों ने भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। पिछले साल भी फंड बढ़ने से जल संरक्षण के कामों में तेजी आई है, जिसमें 1,647 वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ के जरिये सरकारी भवनों और स्कूलों में वर्षा जल संचयन स्थापित किए गए। हरियाणा तालाब और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। यमुनानगर जैसे जिलों में चेक बांधों को मजबूत और मरम्मत किया जा रहा है। 

लेजर लैंड लेवलिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। 'म्हारा पाणी म्हारी विरासत' योजना के तहत, पंचायतों को जल सुरक्षा योजनाएं बनाने के लिए सशक्त किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इस बार केंद्र सरकार से अटल भूजल योजना के लिए मिले 144 करोड़ रुपये का उपयोग प्रदेश के डार्क जोन में आए जल संकट को दूर करने में किया जा सकता है। 

 गांवों में जल बचाने, उसे सहेजन और भूजल का स्तर सुधारने के लिए तालाबों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसके लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाने की सरकार योजना बना रही है। गांवों में भूजल सुधरने से शहरी इलाकों में पड़ रहा दबाव भी कम होगा। इससे शहरों में लगे उद्योगों को भी आवश्यक पानी मिलेगा।

Tuesday, February 3, 2026

सन्त च्वांगत्सु ने खोपड़ी से मांगी क्षमा


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

लोगों को अपनी संपत्ति, अपने ओहदे और वैभव को लेकर बड़ा घमंड होता है। लेकिन वह नहीं जानते हैं कि यह सब कुछ इस जीवन भर के लिए है। मरने के बाद अमीर, अहंकारी, सदगुणी, गरीब सबकी गति एक जैसी होती है। मरने के बाद कुछ भी काम नहीं आता है। इस संबंध में चीन की एक रोचक कथा है। सन्त च्वांगत्सु चीन के लोकप्रिय संतों में माने जाते थे। 

एक बार की बात है। वह शाही मरघट की ओर से कहीं जा रहे थे। अंधेरी रात में उनका पैर एक खोपड़ी से टकराया। उन्होंने अंधेरे में टटोलकर देखा, तो वह उस खोपड़ी को अपने घर ले आए। उस खोपड़ी को अपने घर के दरवाजे पर रखकर उससे क्षमा मांगने लगे। उन्होंने कहा, मुझसे भूल हो गई। कृपया मुझे माफ करें। मेरा पैर आपकी खोपड़ी से गलती से टकरा गया था। 

अंधेरी रात होने की वजह से मुझे आपकी खोपड़ी नहीं दिखाई दी। सन्त च्वांगत्सु को ऐसा करते देखकर गांव के लोग जमा हो गए। उन्होंने सन्त च्वांगत्सु से कहा कि तुम पागल तो नहीं हो गए हो। इस खोपड़ी से क्षमा क्यों मांग रहे हो? सन्त च्वांगत्सु  ने कहा कि पागल मैं नहीं, तुम सब लोग हो गए हो। यह तो गनीमत है कि यह मर चुका है। यदि यह जिंदा होता और मेरा पैर इसकी खोपड़ी से लगा होता, तो न जाने यह मेरे साथ कैसा व्यवहार करता। जिस राजा की यह खोपड़ी है, उसने अपने जीवन में न जाने कितने लोगों को मौत की सजा दी होगी। 

इसी खोपड़ी में वह सारे विचार आए होंगे। इसी खोपड़ी की वजह से राजा जीवन भर अहंकारी रहा। लेकिन आज समय का फेर देखो कि इसकी खोपड़ी एक फकीर के ठोकर को सहने के लिए मजबूर है। आदमी को किसी तरह का अहंकार नहीं पालना चाहिए।

केंद्रीय बजट से हरियाणा के उद्योगों को बूस्टर डोज मिलने की उम्मीद


अशोक मिश्र

एक फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना नौवां बजट पेश किया। इस बजट में हरियाणा के औद्योगिक और कृषि विकास के लिए काफी बड़ी हिस्सेदारी मिली है। हरियाणा को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उससे यहां के उद्योगों को भारी भरकम निवेश मिलने की संभावनाएं पैदा हो गई हैं। इससे औद्योगिक क्षेत्र में विकास की गति तेज होने के आसार दिखाई देने लगे हैं। केंद्र सरकार के बजट-2026 में हरियाणा के सात जिलों को सीधी तौर पर फायदा होता दिख रहा है। 

अंबाला, हिसार, करनाल की हवाई पट्टियां सी-प्लेन के लिए डेवलप होंगी। इसके अलावा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में विमान के पुर्जे बनाने वाले छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस) के लिए केंद्र बनेंगे। इतना ही नहीं, बड़े टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना की बजट में घोषणा होने से कपड़ा उद्योग को देशी-विदेशी पूंजी निवेश की भी संभावना है। परंपरागत टेक्सटाइल क्लस्टर्स के आधुनिकीकरण से रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे कई शहरों में रोजगार बढ़ेंगे। इससे बेरोजगारी की समस्या कुछ हद तक खत्म होगी। केंद्रीय बजट में जूते के अपर से इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी गई है। 

जूता उत्पादन में लगे उद्योगों को यह सबसे बड़ी राहत मानी जा रही है।  नान जूता लेदर इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारी अब चीन और वियतनाम से जूते के अपर का आयात कर सकेंगे और अच्छा खासा मुनाफा भी कमा सकेंगे। जूते के अपर से इंपोर्ट ड्यूटी खत्म हो जाने से जूते की कीमतों में कमी आएगी जिससे उपभोक्ताओं को भी जूतों की खरीदारी पर कम पैसा व्यय करना पड़ेगा। केंद्रीय बजट में 'बायोफार्मा शक्ति' के तहत दस हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे हरियाणा के फार्मा हब को सीधा लाभ मिलेगा। 

यह निवेश अनुसंधान और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा, जिससे हरियाणा का बायोफार्मा और फार्मास्युटिकल सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा। पंचकूला जैसे केंद्र एसोसिएटेड बायोफार्मा और मेडरूट्स बायोफार्मा जैसी कंपनियों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले टैबलेट, कैप्सूल और आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं, जिससे कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों के लिए सस्ती दवाएं बनाने में मदद मिलेगी। हरियाणा का इलेक्ट्रॉनिक्स, आॅटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पहले से मजबूत है, यह बजट नए निवेश, स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी हब बनाने में मदद करेगा। 

एमएसएमई, स्टार्टअप और बायोफार्मा पर फोकस से राज्य के युवाओं को बेहतर रोजगार मिलेंगे। हरियाणा में अमृत सरोवर बनने से मत्स्य पालकों को भी काफी फायदा होगा। गैर समुद्री क्षेत्र वाले राज्यों में  हरियाणा मत्स्य पालन में दूसरे नंबर पर है। प्रदेश सरकार ने इस बार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 166 करोड़ मछली के बीज तैयार किए हैं।

Monday, February 2, 2026

दारोगा ने संत दादू दयाल से मांगी क्षमा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

संत दादू दयाल को राजस्थान का कबीर कहा जाता है। कहा जाता है कि 1544 ईस्वी में गुजरात के अहमदाबाद में वह साबरमती नदी में बहते हुए एक ब्राह्मण लोधीराम को मिले थे। ब्राह्मण ने ही उनका पालन-पोषण किया था। उन्होंने दादूपंथी संप्रदाय की स्थापना की थी। 

संत दादू के गुरु स्वामी वृद्धानंद यानी बुड्डन बाबा को माना जाता है। वह पैदा भले ही गुजरात में हुए थे, लेकिन उनकी कर्मभूमि राजस्थान ही रही। कहते हैं कि किसी रियासत के एक दारोगा को संत दादू से मिलने और उन्हें अपना गुरु बनाने की इच्छा हुई। वह उस स्थान की ओर चला, जहां दादू रहते थे। दादू का निवास स्थान जंगल के आसपास था। वह जब बहुत आगे चला गया, तो उसने सोचा कि किसी से पूछ लिया जाए कि संत दादू कहां मिलेंगे? उसने इधर-उधर नजर दौड़ाई। 

उसे एक बुजुर्ग व्यक्ति काम करता मिला। उसने कहा कि ऐ बुड्ढे! संत दादू कहां मिलेंगे। वह व्यक्ति अपने काम में व्यस्त था, तो उसने जवाब नहीं दिया। अब दारोगा को बहुत गुस्सा आया। दारोगा ने उस बुजुर्ग को खूब गालियां सुनाई। उसका मन हुआ कि इस बुड्ढे की खाल खींच ली जाए, लेकिन उसने अपने गुस्से पर काबू किया और किसी दूसरे से दादू के बारे में पूछने की बात सोचकर आगे बढ़ गया। 

कुछ दूर ही एक व्यक्ति आता दिखाई दिया, तो उसने दादू के बारे में पूछा। उस व्यक्ति ने कहा कि मैं भी दादू से मिलने आया हूं, लेकिन वह तो उधर ही मिलेंगे, जिधर से तुम आए हो। वह दोनों उस बुजुर्ग के पास पहुंचे, तो दारोगा बहुत शर्मिंदा हुआ। उसने संत दादू से क्षमा मांगी। दादू ने कहा कि जब कोई मिट्टी का घड़ा खरीदता है, तो वह भी ठोक बजाकर देख लेता है। तुम तो गुरु बनाने निकले थे। यह सुनकर दारोगा दादू के पैरों पर गिर पड़ा और कभी ऐसा व्यवहार न करने की शपथ ली।

अनेकता में एकता की भावना को मजबूत करता है सूरजकुंड मेला


अशोक मिश्र

अरावली की वादियों में बसे फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प आत्मनिर्भर मेले का आगाज हो गया। मेले में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, सीएम नायब सिंह सैनी सहित भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक रहा है। यह उत्सव वसुधैव कुटुंबकम के उस शाश्वत भारतीय दर्शन को साकार करता है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है। 

यह मेला निर्माण करने वाले हाथों, नवाचार से भरे मस्तिष्कों और हमारी पहचान गढ़ने वाली परंपराओं को एक साझा मंच पर एकत्र करता है। यह सच है कि मेले भारतीय जीवन में सदियों से रचे-बसे हैं। पूरब से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक यदि प्राचीन इतिहास को खंगाला जाए,तो पता चलेगा कि भारतीय लोग सदियों से उत्सव प्रेमी रहे हैं। अपनी इसी उत्सव प्रियता के कारण तीन-तीन, चार-चार कोस के दायरे में मेले लगते रहे हैं। इन मेलों और हाट-बाजारों में लोग जहां अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भाग लेते थे, वहीं यह नाते-रिश्तेदारों के मिलन और उनसे जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान के केंद्र भी हुआ करते थे। 

तब सूचना संचार के माध्यम भी आज की तरह नहीं होते थे। गांव से मेले में गया व्यक्ति वहां लोगों से मेल-मुलाकात करता था, लोगों का हालचाल पूछकर संबंधित व्यक्ति तक सूचना पहुंचा देता था। गांवों और शहरों में लगने वाले मेलों के जरिये ही शहरी और ग्रामीण लोग अपनी जरूरतों के सामान खरीदा-बेचा करते थे। कृषि प्रधान देश होने के नाते इन मेलों में आकर किसान अपने उत्पादों को बेचकर नकदी प्राप्त करते थे और फिर उस नकदी से अपनी जरूरतों का सामान, कपड़ा, नमक, मिर्च-मसाले आदि खरीद लेता था। 

यह मेले साप्ताहिक भी होते थे और मासिक भी। कुछ तीज-त्यौहारों पर भी मेलों की परंपरा हमारे भारतीय समाज में रही है। जहां तक सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प आत्मनिर्भर मेले की बात है, इस मेले में दूसरे प्रदेशों के लोग भी भाग लेते हैं। वह हरियाणा की समृद्ध संस्कृति, कला और शिल्प आदि से परिचित होते हैं। इस सांस्कृतिक आदान प्रदान से लोगों में प्रेमभाव बढ़ता है। 

इससे लोगों में एकता की भावना मजबूत होती है। मेले के आयोजन के पीछे यही उद्देश्य है कि लोग एक दूसरे के सांस्कृतिक विरासत से परिचित हों, एक दूसरे की उन्नति में सहायक हों। वैसे तो सूरजकुंड का इतिहास दसवीं शताब्दी से जुड़ा है। तोमर वंश के शासक सूरजपाल ने इस कुंड का निर्माण करवाया था। पिछले लगभग चार दशक से यहां शिल्प मेला आयोजित किया जा रहा है।

Sunday, February 1, 2026

हमें कोई कष्ट नहीं है, महाराज!

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

कहा गया है कि गोधन, गजधन, बाजधन और रतनधन खान। जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान। इस बात से साधु प्रवृत्ति के लोग तो सहमत होंगे, लेकिन सामान्य वृत्ति के लोगों को यह सुहाएगा नहीं। हर व्यक्ति के मन में यह लालसा रहती है कि उनके पास जीवनयापन के लिए पर्याप्त धन जरूर रहे। धन की लालसा होना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन वह अपनी मेहनत से कमाया हुआ धन ही सार्थक है। 

काशी में एक पंडित रामनाथ रहते थे। उनकी कुटिया नगर के बाहरी हिस्से में बनी हुई थी जिसमें वह अपनी पत्नी के साथ रहते थे। वह गुरुकुल चलाते थे। उनके पास काफी दूर-दूर से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। एक दिन जब वह पढ़ाने जाने लगे, तो उनकी पत्नी ने कहा कि घर में एक मुट्ठी चावल है। आज खाना क्या बनेगा? पंडित जी ने पल भर पत्नी को देखा और फिर चले गए। 

प्रतीकात्मक चित्र

दोपहर में जब वह खाने बैठे, तो उनकी थाली में थोड़ा सा चावल और साग रखा हुआ था। उन्होंने अपनी पत्नी से पूछा कि यह स्वादिष्ट साग कहां से आया है? पत्नी बताया कि मेरे सवाल पर आने इमली की ओर देखा था, तो मैंने इमली के पत्तों का साग बना दिया। इस तरह सादगी पूर्ण जीवन बिता रहे थे। यह बात राजा के कानों तक पहुंची तो वह उनसे मिलने आए और नगर में रहने का प्रस्ताव रखा। रामनाथ ने मनाकर दिया। फिर राजा ने पूछा कि आपको किसी बात की परेशानी तो नहीं है। 

उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी से पूछिए। उनकी पत्नी ने जवाब दिया, महाराज! कोई कष्ट नहीं है। कपड़े अभी फटे नहीं हैं। खाने को कुछ न कुछ मिल जाता है। जरूरत के समय के लिए मेरे हाथों में थोड़ी चूड़ियां हैं। राजा ने मदद करने की बहुत कोशिश की लेकिन रामनाथ दंपति इसके लिए तैयार नहीं हुए।

सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी पोस्ट से करें परहेज

 


अशोक मिश्र

किसी भी तकनीक का जब आविष्कार किया जाता है, तो आविष्कारक की मंशा देश और समाज का भला करने की ही होती है। आविष्कारक यही सोचता है कि इस आविष्कर से समाज की उन्नति होगी, देश आगे बढ़ेगा। लोगों को सहूलियत होगी। लेकिन जब लोग इसका दुरुपयोग करने लगते हैं, तो वह देश और समाज के लिए घातक हो जाती है। सोशल मीडिया की खोज मानव समाज के लिए एक क्रांतिकारी घटना मानी गई। इसके जरिये लोगों को अभिव्यक्ति का एक क्रांतिकारी मंच हासिल हुआ। 

लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने विचारों को अभिव्यक्त करके दूसरों तक पहुंचाया। विचारों का आदान-प्रदान सुलभ हो गया। लेकिन कुछ अपराधी प्रवृत्ति के लोग इसका दुरुपयोग भी करने लगे हैं। अब तो इसका उपयोग अपराध करने में भी होने लगा है। सोशल मीडिया के माध्यम से आपराधिक प्रवृत्ति के लोग पहले युवतियों और महिलाओं से दोस्ती करते हैं, उसके बाद उनसे दुराचार करते हैं। पलवल के मुंडकटी गांव की युवती  से मुथरा के एक युवक ने इंस्टाग्राम पर दोस्ती की। 

एक दिन युवती को विश्वास में लेकर होटल में ले गया और उससे दुराचार किया। युवती ने जब विरोध किया, तो उससे शादी करने का झांसा दिया गया। दुराचार का सिलसिला करीब डेढ़ साल तक चला। युवक के परिजनों ने भी युवती को जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया। ऐसी ही एक और मामला सामने आया जिसमें एक व्यक्ति ने पीड़िता की अश्लील फोटो फर्जी आईडी बनाकर इंस्टाग्राम पर डाल दी। पीड़िता की छवि खराब किया गया। दरअसल, ऐसे मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। 

सोशल मीडिया पर बहुत सारे ऐसे लोग सक्रिय रहते हैं जो महिलाओं या युवतियों को अपने चंगुल में फंसाने की फिराक में रहते हैं। पहले युवतियों से दोस्ती करते हैं। फिर धीरे-धीरे प्रेमजाल में फंसाते हैं। जब उनको लगता है कि शिकार पूरी तरह उन पर विश्वास करने लगा है, तब वह उससे मिलने का दबाव डालते हैं। मिलने पर दुराचार करते हैं और उसकी वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करते हैं। यही नहीं, साइबर अपराधी भी सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। वह अपने शिकार पर निगाह रखते हैं। अपने शिकार के बारे में सोशल मीडिया पर मौजूद सारी जानकारियां इकट्ठी करते हैं। 

इसके बाद उनसे दोस्ती गांठते हैं और फिर पूंजी निवेश का झांसा देकर लूट लेते हैं। ऐसे लोग ही डिजिटल अरेस्ट के भी शिकार होते हैं। कुछ लोगों की यह बुरी आदत होती है कि वह अपने घर की बातें भी सोशल मीडिया पर डालते रहते हैं। जैसे वह कहां जा रहे हैं, पूरा परिवार कहीं घूमने जा रहा है या नहीं। परिवार की यह छोटी-छोटी बातें अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होती हैं। वह इसी का फायदा उठाकर घर में चोरी तक कर लेते हैं।

Saturday, January 31, 2026

सीने पर तलवार लटकी हो तो नींद कैसे आएगी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

दुनिया में मृत्यु ही शाश्वत सत्य है, लेकिन ज्यादातर लोग इस बात को भूल जाते हैं। धन, संपत्ति और वैभवशाली जीवन को ही वह जीवन की उपलब्धि मान बैठते हैं। वह इस बात को कतई ध्यान नहीं रखते हैं कि मृत्यु के बाद सारी संपदा और वैभव को यहीं छोड़कर जाना होगा। 

इस संबंध में एक बहुत ही रोचक कथा है। एक व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा हुई। वह सोचने लगा कि वह किससे मिले जिससे उसकी जिज्ञासा का शमन हो। काफी सोचविचार करने के बाद वह एक गुरुकुल के आचार्य के पास पहुंचा और उसने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। आचार्य ने कुछ देर सोच विचार के बाद उसे राजा के पास भेज दिया। 

वह व्यक्ति राजा के पास पहुंचा। राजा उसे अपने साथ लेकर राजदरबार में पहुंचा, जहां नर्तकियां उत्तेजक नृत्य कर रही थीं। वह आदमी घबरा गया। उसने राजा से कहा कि वह ऐसे माहौल में क्या ज्ञान प्राप्त करेगा। वह तो यहां पर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने आया था। राजा ने उससे कहा कि तुम बस केवल एक दिन यहां रुक जाओ, कल यहां से चले जाना। 

राजा ने उस व्यक्ति की खूब आवभगत की। इसके बाद जब रात हुई, तो उस व्यक्ति को महल के ही एक कमरे में आलीशान मुलायम गद्दे पर सोने के लिए भेज दिया। वह व्यक्ति लेटकर कुछ सोच ही रहा था कि उसकी निगाह छत की ओर गई। एक भारी भरकम तलवार सूत से बंधी हुई लटक रही थी। उस व्यक्ति को रातभर नींद नहीं आई। 

उसे आशंका थी कि कहीं धागा टूट गया, तो तलवार उसके सीने में घुस जाएगी। सुबह राजा ने उससे पूछा कि नींद तो आई होगी? उस व्यक्ति ने कहा कि जब मौत सामने हो, तो नींद कैसे आ सकती है। राजा ने कहा कि मैं भी हमेशा याद रखता हूं कि मृत्यु ही सत्य है, बाकी सब मिथ्या है।

जब भ्रूण लिंग जांच में लिप्त हों नेता, तो कैसे रुकेगी भ्रूण हत्या

अशोक मिश्र

सरकार और सरकारी मशीनरी अपनी पूरी ताकत से हरियाणा में लड़कियों की संख्या बढ़ाने का हरसंभव प्रयास कर रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने भ्रूण हत्या और लिंग जांच रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को हर अधिकार प्रदान किए हैं। आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य महिला कर्मियों को कन्या भ्रूण हत्या और लिंग जांच को लेकर सतर्क रहने को कहा ताकि प्रदेश में लिंगानुपात को बढ़ाया जा सके। सरकारी प्रयास का ही नतीजा है कि पिछले दिनों हरियाणा में लिंगानुपात बढ़ा है। इसके बावजूद भ्रूण लिंग जांच करने वाले मान नहीं रहे हैं। 

हिसार में जजपा नेता डॉ. अनंतराम बरवाला को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण लिंग जांच करते हुए पकड़ा है। कितने अफसोस की बात है कि जिस नेता को कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए समाज को जागरूक करना चाहिए था, वही नेता ऐसे जघन्य अपराध में लिप्त पाया गया है। अनंतराम पर पहले भी पीएनडीटी एक्ट में सात बार मुकदमा दर्ज किया गया है। 

पुराने मामले में जमानत पर बाहर आने के बाद डॉ. अनंतराम फिर पुराने धंधे में शामिल हो गया था। ऐसे ही लोगों की वजह से प्रदेश में लिंगानुपात संतोषजनक नहीं होने पा रहा है। डॉ. अनंतराम जैसे लोगों की  पिछड़ी और लालची सोच की वजह से कन्या भ्रूण हत्या नहीं रुक रही है। राज्य के हर जिले में अवैध रूप से खुले अस्पताल, क्लीनिक और भ्रूण की जांच करके लिंग बताने वाले समाज विरोधी डॉक्टर और उनके दलाल उठाते हैं। वह लिंग जांच करके कन्या भ्रूण हत्या जैसा पाप चंद पैसों की लालच में करते हैं। 

स्वास्थ्य विभाग, सीएम फ्लाइंग स्क्वाड और पुलिस के सहयोग से ऐसे तत्वों के खिलाफ अभियान चलते रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में कन्याभ्रूण हत्याएं हो रही हैं, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। कन्याभ्रूण हत्या को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इसके लाभ भी अब सामने आने लगे हैं। बिना पंजीकरण वाली गर्भवती महिलाओं को सरकारी और ज्यादातर निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। 

हर गर्भवती महिला की देखरेख की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को देकर लिंगानुपात सुधारने की दिशा में नई पहल की गई है। लाडो सखी योजना से लिंगानुपात सुधरेगा, ऐसी आशा है। प्रदेश की सैनी सरकार काफी प्रयास कर रही है कि किसी भी तरह लड़के-लड़कियों के जन्म का अनुपात लगभग बराबर हो जाए ताकि समाज में पैदा होने वाले असंतुलन को ठीक किया जाए। 

इसके लिए प्रदेश सरकार हर गर्भवती महिला पर नजर रखने का प्रयास कर रही है ताकि उसका सुरक्षित प्रसव हो जाए और वह कन्याभू्रण हत्या भी न करवा सके।