Tuesday, September 8, 2026

अच्छे काम का फल अच्छा ही मिलता है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ड्वाइड डेविड हाइजनहावर ने द्वितीय विश्व महायुद्ध के दौरान अमेरिकी और ब्रिटिश सेना का नेतृत्व किया था। हाइजनहावर का जन्म 1890 को टेक्सास शहर में हुआ था। वह अपने माता-पिता के सात पुत्रों में से तीसरे थे। बचपन में एक हादसा हुआ था जिससे उनके छोटे भाई की एक आंख चली गई थी जिसका पछतावा उन्हें जीवन भर रहा। 

पहले विश्व महायुद्ध में उन्हें बहुत ज्यादा अपने रणकौशल को दिखाने का मौका नहीं मिला, लेकिन जब दूसरा विश्व महायुद्ध छिड़ा, तो उन्हें मित्र राष्ट्रों की सेना का सर्वोच्च अधिकारी नियुक्त किया गया। युद्ध के दिनों में वह अपने घर से रोज एक निश्चित समय पर सफेद गाड़ी में पेरिस के मुख्य रास्ते से सेना के कैंप आया जाया करते थे। इस बात की खबर किसी तरह जर्मन सैनिकों को मिल गई। 

एक दिन अपने नियत समय पर सफेद गाड़ी निकली। रास्ते में फ्रांसीसी सैनिकों के वेश में जर्मन सैनिक खड़े हो गए। उन्होंने उस गाड़ी को बम से उड़ा दिया। जब यह देखा, तो फ्रांसीसी सैनिकों में हड़कंप मच गया। यह खबर फैल गई कि जनरल आइजनहावर मारे गए। थोड़ी देर बाद लोगों ने देखा कि आइजनहावर पैदल चले आ रहे हैं। लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ। 

सैनिक अफसरों ने उनसे पूछा कि आप बम धमाके से बच कैसे गए तो उन्होंने बताया कि जब मैं आ रहा था, तो मैंने रास्ते में देखा कि एक बुजुर्ग दंपति एक अस्पताल का पता पूछ रहे हैं। उनके बेटे का उस अस्पताल में आपरेशन हुआ था। मैंने ड्राइवर से कहा कि तुम गाड़ी लेकर जाओ, मैं इन्हें अस्पताल तक छोड़कर आता हूं। मैं उस बुजुर्ग दंपति को अस्पताल तक छोड़ने के बाद आ रहा हूं। मैं जानता हूं कि नेक काम का फल नेक ही मिलता है।

गरीबी और आवास की भारी कमी के चलते जर्जर इमारतों में रहने की मजबूरी

अशोक मिश्र

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को दोपहर में करीब पचास साल पुरानी एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। इसमें छात्रों के पेइंग गेस्ट आवास चल रहे थे। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए। मरम्मत कार्य और पानी जमा होने जैसी वजहें सामने आईं, लेकिन असल में यह घटना अवैध विस्तार, कमजोर संरचना और प्रशासनिक लापरवाही का जीता जागता नमूना थी। पिछले दो-तीन सालों में दिल्ली में ऐसी घटनाएं बार-बार हुई हैं। 

सोलह सालों में इक्कीस प्रमुख इमारत हादसों में एक सौ छत्तीस लोगों की मौत हो चुकी है। हरियाणा की तस्वीर भी इससे अलग नहीं है। मानसून के दिनों में हरियाणा की तस्वीर और भी भयावह हो जाती है। पिछले साल 8 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री सैनी ने बताया था कि भारी बारिश के कारण अलग-अलग जगहों पर मकान गिरने से 12 लोगों की मौत हुई है। इनमें फतेहाबाद और भिवानी में तीन-तीन, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में दो-दो, हिसार और फरीदाबाद में एक-एक मौत शामिल है। 

उसी साल भारी बारिश से छत गिरने की अलग-अलग घटनाओं में सात लोगों, जिनमें तीन बच्चे थे, की मौत की पुष्टि हुई थी। गुरुग्राम, मानेसर, बादशाहपुर, पटौदी जैसे निर्माण हब में हर साल मजदूरों की मौत का सिलसिला अलग चलता रहता है। हरियाणा में तेजी से हो रहा शहरीकरण, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इन घटनाओं को बढ़ावा देते हैं। नगर निगम अधिनियम और हरियाणा बिल्डिंग कोड दो हजार सत्रह में खतरनाक इमारतों के लिए प्रावधान हैं। 

आयुक्त या सक्षम अधिकारी जर्जर इमारत को मरम्मत या गिराने का आदेश दे सकते हैं। ऊंची जोखिम वाली इमारतों के लिए संरचनात्मक सुरक्षा उपाय, थर्ड पार्टी निरीक्षण और पोस्ट-कंस्ट्रक्शन आॅडिट अनिवार्य किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों को लागू नहीं किया जाता है। कई बार खतरनाक घोषित इमारतों की सूची बनती है, फिर भी समय पर कार्रवाई नहीं होती। पुरानी या कमजोर इमारतों में रहने की मजबूरी आर्थिक दबाव से जुड़ी है। गरीबी, आवास की भारी कमी और वैकल्पिक विकल्प न होना उन्हें जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर करता है। 

कई बार मालिक भी किराये की कमाई के लिए पुरानी इमारतों में अतिरिक्त मंजिलें चढ़ा देते हैं या मरम्मत टालते हैं। ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। यदि हर नगर निकाय हर साल मानसून से पहले ड्रोन और जूनियर इंजीनियरों से हर वार्ड की 30 साल से पुरानी इमारतों की जियो-टैगिंग करे। उसकी सूची सार्वजनिक करे, नोटिस चिपकाने से आगे बढ़कर बिजली-पानी काटकर खाली कराए और मालिक को नब्बे दिन में रेट्रोफिटिंग या री-डेवलपमेंट का विकल्प दे, जिसके लिए हरियाणा में पहले से मौजूद हाउसिंग बोर्ड की सब्सिडी को जोड़ा जा सकता है।

Monday, September 7, 2026

पापों के प्रायश्चित में जुट जाओ


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

पता नहीं यह कथा कितनी सही है, लेकिन कहते हैं कि बौद्ध ग्रंथों में इसका जिक्र है। राजगृह में एक चरवाहे की पत्नी बहुत सुंदर और नृत्य-संगीत कला में काफी निपुण थी। उसकी विद्या से राजगृह की अमीर घरों की महिलाएं और कन्याएं ईर्ष्या करती थीं। राजगृह में होने वाले आयोजनों में उस चरवाहे की पत्नी को नृत्य आदि के लिए आमंत्रित किया जाता था। एक बार उत्सव में उसे आमंत्रित किया गया, लेकिन उसने गर्भवती होने की वजह से नृत्य के लिए मना कर दिया। 

उसे सभा में अपमानित करके नृत्य के लिए मजबूर कर दिया गया। इस अपमान से उसके मन में क्रोध पनप उठा। वह जीवन भर इस घटना को मन में दबाए रही। कहते हैं कि अगले जन्म में वह हारीति नाम की यक्षिणी के रूप में पैदा हुई। उसके मन में पूर्व जन्म का प्रतिशोध इस जन्म में भी बना रहा। लेकिन संगीत और नृत्य की प्रतिभा भी बनी रही। प्रतिशोधवश वह राजगृह के अबोध बच्चों को चुराकर उनका खाने लगी। 


बहुत बाद में लोगों को यह पता चला, तो राजगृह नरेश ने उसे बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। जब यह बात महात्मा बुद्ध ने सुनी तो वह चौंक उठे। उन्होंने ध्यान लगाकर उसके पूर्व जन्म के बारे में जाना। उन्होंने राजगृह नरेश से कहकर हारीति को कारागार से मुक्त करवा लिया और उसके बच्चों को चुरा लिया। बच्चे चोरी हो जाने पर वह व्याकुल हो गई। 

अब उसकी समझ में आयाकि उसने जिनके बच्चों का वध किया था। वह कैसे जी रहे होंगे। शोक और व्याकुल अवस्था में वह बुद्ध के पास पहुंची। बुद्ध ने कहा कि तुमने अब तक बच्चों का वध किया है। पाप के प्रायश्चित के लिए बच्चों की रक्षा और विकास में जुट जाओ। इसी से तुम्हें शांति मिलेगी। अपने पाप का प्रायश्चित करने में वह आजीवन लगी रही। जब उसकी मृत्यु हुई तो उसके मन में काफी शांति थी।

मौसमी बीमारियां का खतरा, सफाई कर्मियों की हड़ताल बनी मुसीबत

अशोक मिश्र

इन दिनों बरसात का मौसम और सफाई कर्मियों की हड़ताल दोनों हरियाणा के लिए मुसीबत साबित हो रही है। सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। सड़कों पर कचरा फैला हुआ है। इनसे उठने वाली बदबू से जीना मुहाल हुआ जा रहा है। वहीं बरसात की वजह से हालत और बदतर हो गई है। नालियां जहां उफनाई हुई हैं, वहीं जगह-जगह जलभराव होने से परेशानी और बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में कई तरह के रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार जलभराव, बढ़ी हुई नमी, दूषित पेयजल और मच्छरों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण बीमारियां सबसे ज्यादा फैलती हैं। 

मच्छर जनित रोगों का खतरा ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा होता है जिसमें डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया प्रमुख हैं। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन के समय काटता है और साफ पानी में पनपता है, जबकि मलेरिया परजीवी से होने वाला रोग है। पानी और भोजन के जरिए फैलने वाले रोगों में टाइफाइड, हैजा, डायरिया, हेपेटाइटिस ए, पीलिया और पेट के संक्रमण शामिल हैं। दूषित पानी के सीधे संपर्क से होने वाले रोगों में लेप्टोस्पायरोसिस और त्वचा रोग सबसे अहम हैं। 

लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु रोग है जो बारिश में गंदे पानी और जानवरों के मलमूत्र के संपर्क से फैलता है। कूलर, पानी की टंकियां, गमले, टूटे बर्तन, पुराने टायर और निमार्णाधीन मकानों में जमा पानी मच्छरों के पनपने के सबसे बड़े ठिकाने बनते हैं। गंदे पानी में सीवर का मिश्रण होने से ऐसे संक्रमण बड़ी तेजी से बढ़ते हैं। कचरे के ढेर से मक्खियां भी बढ़ती हैं, जो भोजन को दूषित कर संक्रमण फैलाती हैं। त्वचा संबंधी संक्रमण और सांस की तकलीफ भी बढ़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है और मच्छर जनित रोगों पर विशेष निगरानी बढ़ाई गई है। घर-घर लार्वा जांच अभियान चलाए जा रहे हैं। फॉगिंग, ड्राई डे अभियान और जागरूकता कार्यक्रम जारी हैं। अस्पतालों में बाढ़ और गर्मी संबंधी नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। दवाओं, ओआरएस और आपातकालीन टीमों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर है। डेंगू और मलेरिया के मामलों की रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है। सरकार बरसाती बीमारियों से निपटने के लिए सतर्क है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का स्तर मिश्रित है। कई जिला अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन और डायलिसिस जैसी सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं। मुफ्त इलाज की योजनाओं के तहत गंभीर बीमारियों का उपचार उपलब्ध है। फिर भी कुछ जगहों पर डॉक्टरों की कमी, बुनियादी ढांचे की समस्या और भारी बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। प्रदेश को इस चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।


Sunday, September 6, 2026

बिंदुमती बोली, मैंने कभी किसी में भेद नहीं किया

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बौद्ध ग्रंथों और लोककथाओं में पाटलिपुत्र के संबंध में एक बड़ी ही रोचक घटना बताई गई है। उस समय सम्राट अशोक पाटलिपुत्र पर शासन कर रहे थे। कुछ लोग इस घटना के समय महात्मा बुद्ध की उपस्थिति बताते हैं, लेकिन सम्राट अशोक के शासनकाल से लगभग 180 साल पहले ही महात्मा बुद्ध परिनिर्वाण को प्राप्त हो चुके थे। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार बरसात के दिनों में पाटलिपुत्र के किनारे से होकर बहने वाली भागीरथी नदी के किनारे सम्राट अशोक अपने मंत्रियों के साथ खड़े प्रकृति का आनंद उठा रहे थे। 

तभी नदी का जल नगर की ओर बढ़ने लगा। ऐसा लगा कि गंगा नदी पूरी पाटलिपुत्र को डुबोकर ही मानेगी। तब सम्राट अशोक ने अपने मंत्रियों से कहा कि क्या हमारे राज्य में कोई ऐसा तपस्वी नहीं है, जो अपने तपोबल से वेगवती भागीरथी की धारा को उल्टा प्रवाहित कर दे। यह बात जब नगरवधू बिंदुमती ने सुना तो उसने कहा कि मैं अपने तपोबल से गंगा की धारा को लौटने को मजबूर कर सकती हूं। 

अशोक ने कहा कि तुम जैसी स्त्री जो शील और सदाचार से सर्वथा रहित है, वह ऐसा कैसे कर सकती है। सम्राट अशोक की अनुमति से बिंदुमती ने पूजा की थाल सजाया और उसने मन ही मन ईश्वर और गंगा मैया को साक्षी मानकर एक 'सत्य प्रतिज्ञा' की, हे गंगा मैया! यदि यह सत्य है कि मैंने अपने जीवन में अपने द्वार पर आने वाले हर व्यक्ति को समान माना है; चाहे वह कोई राजा हो, चोर हो, ब्राह्मण हो या कोई नीच जाति का व्यक्ति हो— मैंने कभी किसी में भेद नहीं किया और बिना किसी भेदभाव के अपनी कला और कर्तव्य का पालन किया है। यदि मेरा यह समभाव और व्यावसायिक सत्य निष्कलंक है, तो तुम उलटी दिशा में बहने लगो। 

तभी चमत्कार हुआ और गंगा वापस लौट गईं। अशोक ने उस नगरवधू के चरणों में झुकते हुए पूछा, आपने यह सब कैसे किया। बिंदुमती ने कहा कि सत्य और कर्तव्य निष्ठा से यह संभव हुआ है।

हनीट्रैप जैसी घटनाओं का सबसे बड़ा कारण दिखावे की संस्कृति

अशोक मिश्र

कुछ लोग हनीट्रैप और देह व्यापार जैसी घटनाओं को व्यक्तिगत नैतिक पतन मानकर बहुत हलके अंदाज में लेते हैं। वास्तविकता यह है कि हनी ट्रैप जैसी घटनाएं संगठित अपराध का रूप लेती जा रही हैं जो समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलावों का प्रतीक हैं। हनीट्रैप और देह व्यापार जैसी घटनाओं के पीछे आर्थिक असमानता और रोजगार का संकट जैसे कारण सामान्यत: दिखाई दे रहे हैं। हरियाणा में तेजी से बढ़ती आकांक्षाएं, शहरीकरण और दिखावे की संस्कृति ने कम समय में अधिक पैसा कमाने की लालसा को जन्म दिया है। 

जब वैध रोजगार के अवसर सीमित हों और सोशल मीडिया पर अमीरी का प्रदर्शन रोज दिखे तो कुछ लोग देह को या झूठे रिश्ते को कमाई का जरिया बना लेते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिंडर जैसे प्लेटफॉर्म पर अनजान पहचान बनाना, फर्जी प्रोफाइल से भावनात्मक जाल बुनना बेहद आसान हो गया है। ओल्ड फरीदाबाद थाना पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने ही मकान मालिक को हनी ट्रैप में फंसाकर 24 लाख रुपये ऐंठ लिए हैं। इसके बाद भी वह अपने मकानमालिक का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी। 

राज्य में ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसे मामले में तो सैनिक और सेना अधिकारी भी लिप्त पाए जाते हैं। कुछ मामलों में हनीट्रैप देश विरोधी गतिविधियों का माध्यम भी बनता है। सीमा से लगे हरियाणा जैसे संवेदनशील राज्य में तैनात सैनिकों, सैन्य अधिकारियों या रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े कर्मचारियों को भावनात्मक या यौन प्रलोभन देकर फंसाया जाता है। फिर उनसे गोपनीय जानकारी, तैनाती, अभ्यास या हथियारों से संबंधित सूचनाएं निकाली जाती हैं। यह तरीका अक्सर सीमा पार खुफिया एजेंसियों द्वारा अपनाया जाता है, जहां सोशल मीडिया पर सुंदर महिला की प्रोफाइल बनाकर सैनिक को प्रेम जाल में फंसाया जाता है। 

ऐसे में एक व्यक्तिगत कमजोरी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू पर सैन्य और खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया पर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। पारंपरिक सामाजिक ढांचे में पुरुषों की प्रतिष्ठा और परिवार की इज्जत को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। झूठे यौन उत्पीड़न या बलात्कार के आरोपों का डर कई पुरुषों को चुपचाप समझौता करने पर मजबूर कर देता है। 

पीड़ित अक्सर सार्वजनिक शर्म और परिवार के दबाव के कारण पुलिस के पास जाने से कतराते हैं, जिससे अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कठोर कानूनों का एक वर्ग ब्लैकमेल के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। शिकायत दर्ज कराने के नाम पर थाने में फोटो खिंचवाकर भेजना, झूठे रेप केस की धमकी देना, यह पैटर्न लगभग हर हरियाणा के हनीट्रैप गिरोह में दिखता है। इससे वास्तविक पीड़ितों की विश्वसनीयता भी कमजोर होती है।

Saturday, September 5, 2026

सबको आत्मसुधार का है अधिकार

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध और उनका परम प्रिय शिष्य आनंद एक जगह पर वार्तालाप कर रहे थे। आनंद ने कहा, आर्य श्रेष्ठ! श्रावस्ती परंपरावादियों का गढ़ है। वहां जाने की अपेक्षा राजगृह जाना ज्यादा उचित होगा क्योंकि राजगृह में संघ का विस्तार हो रहा है, लेकिन श्रावस्ती में तो अभी संघ की नींव ही पड़ी है। आनंद की बात सुनकर महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और बोले, आनंद! बिना संघर्ष किए कुछ भी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकती है। 

धर्म का प्रचार करना है, तो संघर्ष करना ही होगा। इसलिए श्रावस्ती जाना उचित होगा। जब लोगों को यह समाचार मिला कि तथागत श्रावस्ती आ रहे हैं, तो लोगों से उत्साह का संचार हुआ। उधर, महात्मा महात्मा बुद्ध  के विरोधियों ने भी अश्वलायन के नेतृत्व में अपना मोर्चा जमा लिया। 

नियत समय पर अश्वलायन अपने साथियों के साथ महात्मा महात्मा बुद्ध  के समक्ष प्रस्तुत हुआ और भर्त्सना करते हुए कहा कि तात! आप चारों वर्णों के उद्धार की बात करते हैं। क्या ब्राह्मणों के अलावा किसी को धर्म दीक्षा देने का अधिकार है? तथागत ने स्नेहपूर्वक कहा कि तात! ब्राह्मणों की श्रेष्ठता का आधार क्या है? 

अश्वलायन ने कहा कि ब्राह्मणों का ज्ञान, तप, निर्लोभ निरहंकारिता, साधना और ब्रह्मवर्चस ही उनकी श्रेष्ठता का आधार है। महात्मा बुद्ध ने फिर कहा, क्या ब्राह्मण चोरी नहीं करते, क्या ब्राह्मण झूठ नहीं बोलते। ब्राह्मण अगर नीच कार्य करेगा, तो क्या वह पापी नहीं माना जाएगा। श्रेष्ठ वही है जिसका मन निर्मल है। भले ही वह किसी भी वर्ण में पैदा हुआ हो। अब अश्वलायन के पास महात्मा बुद्ध की बात का कोई जवाब नहीं था। अश्वलायन ने बुद्ध के मत को स्वीकार कर लिया। बाद में वह धर्म चक्र प्रवर्तन कार्य में बहुत अधिक सहायक साबित हुआ।

जागरूक नागरिक रोक सकते हैं हरियाणा में फैला ड्रग्स कारोबार

अशोक मिश्र

हरियाणा की पहचान दूध-दही युक्त पौष्टिक भोजन और भारतीय सेना में अधिक से अधिक जवानों को भेजने वाले प्रांत के रूप में रही है। हरियाणा को सदियों पुरानी अपनी सभ्यता और संस्कृति पर हमेशा गर्व रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता से जुड़ाव का सौभाग्य देश के कम राज्यों को मिला है। हरियाणा को अपनी इस उपलब्धि पर हमेशा गर्व रहा है। लेकिन पिछले कुछ दशकों से हरियाणा में नशीले पदार्थों का चलन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश खामोश नशे की चपेट में है और इस चपेट का सबसे तीखा सिरा दिल्ली से सटा फरीदाबाद बन चुका है। फरीदाबाद का हॉटस्पॉट बनना कोई संयोग नहीं है। 

यह भूगोल और अर्थशास्त्र दोनों का परिणाम है। 135 किमी लंबा कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे अपने दस इंटरचेंज के साथ तस्करों के लिए खुला कॉरिडोर बन गया है, जहाँ से माल आसानी से गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में उतर जाता है। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में एक ही तरह का नशा नहीं है बल्कि एक पूरा बाजार है। एक तरफ पंजाब से सटा बार्डर और दिल्ली का नाइटलाइफ कल्चर सस्ती आपूर्ति बनाता है, दूसरी तरफ मांग के पीछे गहरी सामाजिक दरार है। 

हरियाणा में खेती का संकट, जमीन बंटती जा रही है, सरकारी नौकरी की दौड़ में लाखों युवा सालों तक कोचिंग में अटके हैं, और फरीदाबाद-गुरुग्राम के फैक्ट्री-मजदूरों और डिलीवरी ब्वॉय की अनिश्चित जिंदगी में थकान और अकेलेपन को सुन्न करने का सबसे सस्ता तरीका एक पुड़िया लगती है। आर्थिक रूप से यह कारोबार आसान मुनाफे का स्रोत बन गया है क्योंकि बेरोजगार युवा तस्करी या फुटकर बिक्री में लग जाते हैं। सामाजिक रूप से जातिगत प्रभाव, परिवारों का टूटना और खप पंचायतों की सीमित पहुंच ने समस्या को और गहरा दिया है। 

पुलिस और प्रशासन ने हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के माध्यम से कड़ी कार्रवाई शुरू की है। एनडीपीएस एक्ट के तहत बड़े पैमाने पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं, व्यावसायिक मात्रा की जब्ती पर जोर दिया जा रहा है, अंतर्राज्यीय नेटवर्क तोड़े जा रहे हैं और पीआईटी-एनडीपीएस के तहत आदतन अपराधियों को हिरासत में लिया जा रहा है। संपत्तियों की कुर्की और ध्वस्तीकरण के साथ-साथ जागरूकता अभियान, खेल आयोजन और नशा मुक्त गांव घोषित करने के प्रयास चल रहे हैं। 

हरियाणवी संस्कृति जो कभी सामूहिक श्रम और फौजी अनुशासन पर टिकी थी, वह अब तात्कालिक नशे के आराम और दिखावटी हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल की नकल में उलझ गई है। बेरोजगारी, कृषि संकट, युवाओं में निराशा और विदेश जाने की असफल कोशिशें नशे की ओर धकेल रही हैं। यह समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं सुलझेगी। रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार, परिवारों की भागीदारी और दीर्घकालिक पुनर्वास बिना यह संकट गहराता रहेगा। 

Friday, September 4, 2026

वक्कलि! यह सब कुछ क्षणभंगुर है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

श्रावस्ती में वक्कलि नाम का ब्राह्मण रहता था। कहने को तो वह ब्राह्मण था, लेकिन गुण, कर्म और स्वभाव में ऐसी कोई बात नहीं थी जिससे उसका ब्राह्मणत्व झलकता हो। उसके मन मस्तिष्क में हमें रूप, यौवन और धन संबंधी बातें ही आती रहती थीं। उन्हीं दिनों श्रावस्ती के वेलुवन में महात्मा बुद्ध पधारे। वेलुवन में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया। जिसने भी सुना कि श्रावस्ती में तथागत आए हुए हैं, वह उनके दर्शन को दौड़ा चला गया। 

धर्म सभा में अपार भीड़ उमड़ती थी। लेकिन तथागत की वाणी को सुनने के लिए वक्कलि नहीं गया। एक दिन उसके गांव के एक व्यक्ति ने उससे धर्म सभा में महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए चलने को कहा, तो वह बेमन से धर्म सभा में चला गया। महात्मा बुद्ध को देखते ही वह अचंभित रह गया। उसने अपने मन में कहा कि यही तो है जिसे वह खोज रहा था। 

वक्कलि ने उसी दिन महात्मा बुद्ध से बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की। महात्मा बुद्ध ने उसे दीक्षा तो दे दी, लेकिन वह समझ गए कि इसकी मनस्थिति धर्म की दीक्षा लेने लायक नही है। एक दिन वक्कलि ने तथागत से कहा कि भगवन! आप मुझे योगसाधना सिखाएं जिससे मैं भी आपकी तरह रूपवान हो जाऊं। आप जैसी ओजस्विता मुझ में भी आ जाए। आप जैसा नवयौवन मुझ में भी फूट पड़े। 

बुद्ध ने कहा कि रूपवान होने के लिए उपाय किए जा सकते हैं, शरीर को मजबूत करने के लिए योगासान सिखाया जा सकता है। लेकिन वक्कलि यह सब कुछ क्षणभंगुर है। एक दिन मिट जाएगा। आत्मोत्सर्ग का स्थायी साधन तो धर्म धारण है। वक्कलि को अपनी भूल का पता चल गया। उसने उसी दिन से आत्म सुधार और आत्म निरीक्षण की ओर ध्यान देना शुरू किया और एक दिन महान भिक्षु बन गया।

सड़कों पर डिवाइडर तोड़कर बनाए गए अवैध कट साबित हो रहे जानलेवा


अशोक मिश्र

हरियाणा की सड़कों पर लगे अवैध कट हादसों का प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। प्रदेश में जितनी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, उनमें से लगभग आधी दुर्घटनाएं इन अवैध कटों के कारण होती हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में यह कहीं दर्ज नहीं की जाती हैं। स्टेट हाईवे, एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, डिस्ट्रिक्ट रोड्स और शहरों की सड़कों पर जगह-जगह बने अवैध कट तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के लिए अचानक खतरा पैदा कर रहे हैं। ये कट होटल, ढाबों, पेट्रोल पंपों, गोदामों या स्थानीय लोगों द्वारा सुविधा के नाम पर बनाए जाते हैं। 

नतीजा यह होता है कि आने वाली गाड़ियां अचानक सामने आने वाले वाहनों या पैदल यात्रियों से टकरा जाती हैं। पूरे प्रदेश में सड़क हादसों से सालाना लगभग ढाई हजार से तीन हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। 2023 में करीब पांच हजार, 2024 में सवा अड़तालीस सौ और 2025 में तीन हजार से अधिक मौतें दर्ज हुईं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा अवैध कट, अनधिकृत एंट्री-एग्जिट और मेडियन तोड़ने से जुड़ा है। ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि उन परिवारों की कहानियां हैं जिनके कमाने वाले अचानक चले गए या अपंग हो गए। 

औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर पैदल हाईवे पार करते हुए या अनधिकृत कट से निकलते हुए अक्सर शिकार बन जाते हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य के विभिन्न विभाग अवैध कट बंद करने के अभियान चलाते रहे हैं। पानीपत-अंबाला स्ट्रेच पर चार सौ से अधिक अनधिकृत कट बंद किए गए। गुरुग्राम में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर दर्जनों कट बंद किए गए। करनाल में ढाबा और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुईं। कई जगहों पर क्रैश बैरियर, थ्री बीम बैरियर, रेलिंग और फेंसिंग लगाई गई। 

ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए और कुछ जगहों पर फुट ओवर ब्रिज या उचित एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाने की योजनाएं बनीं। यातायात पुलिस ने चेतावनी दी कि अवैध कट से हादसा होने पर एनएचएआई अधिकारियों पर भी केस दर्ज हो सकता है। कुछ जिलों में हादसों की संख्या में मामूली कमी भी आई है जहां इंजीनियरिंग सुधार और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। हरियाणा पुलिस ने माना है कि ढाबों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास बनाए गए अनधिकृत कट हादसों का बड़ा कारण हैं और एनएचएआई को उन्हें स्थायी रूप से बंद करने और दोबारा बनने पर एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। 

इसके बावजूद लोग सड़कों पर अवैध कट लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वह अपनी थोड़ी सी सुविधा के लिए सड़क पर चलने वालों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। लोगों का ऐसा करना, जहां कानूनी रूप से गलत है, वहीं इंसानियत के नाते भी गलत है। यह समस्या तब तक खत्म नहीं हो सकती है, जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होते हैं। जागरूकता ही बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।