व्यंग्य
अशोक मिश्र
गुनाहगार उदास बैठे थे. मैंने उनसे पूछा, क्या हुआ, उस्ताद! किसी ने आपकी भैंस खोल ली है क्या? जो उदास बैठे हैं. उस्ताद ने जिराफ की तरह गर्दन उठाई और बोले, अच्छा यह बताओ? गधा तुम्हारी नजर में क्या है? मैंने अपनी छप्पन इंची छाती फुलाई और जोशीले स्वर में कहा, इस दुनिया का सबसे निकृष्टतम जीव अगर कोई है, तो वह गधा है. गधे से बड़ा गधा कोई दूसरा प्राणी हो ही नहीं सकता. मालिक ने जो बचा खुचा घास भूसा डाल दिया, तो उससे ही गधे ने संतोष कर लिया. न कोई विरोध, न कोई प्रदर्शन. अगर मालिक उसे दाना-पानी देना भूल गया, तो भी ढेंचू-ढेंचू करके आभार जता दिया. जब मालिक को काम लेना हुआ, तो लाद दिया गधे पर गधे भर का बोझ. ढोते रहो बिना कोई उज्र किए. इस संसार में गधा भी कोई प्राणी है.| आज ही प्रभात खबर के संपादकीय पेज पर प्रकाशित व्यंग्य |
काफी देर से उदास बैठे गुनाहगार के चेहरे पर अब क्रोध की लालिमा छाने लगी थी. उन्होंने तल्ख लहजे में मुझे घूरते हुए कहा कि तुम गधे की मेहनती प्रवृत्ति का अपमान कर रहे हो. जानते हो, गधा श्रम का प्रतीक है. दुनिया भर में गधा हमेशा सम्मान का पात्र रहा है. वह जीवन भर परिश्रम करता है. मालिक जिस दशा में रखता है, उसी दशा में रह लेता है, लेकिन मजाल है कि वह रत्ती भर चूं करे. यही उसकी खासियत है. श्रम की महत्ता सदियों से रही है, आगे भी रहेगी. गधे का अपमान करने का मतलब है कि श्रम का अपमान करना. श्रम की ही वजह से आज यह खूबसूरत दुनिया वजूद में है. श्रम चाहे इंसान का हो या गधे का, सम्माननीय है.
सांस लेने के लिए गुनाहगार पल भर के लिए रुके. फिर बोले, तुम जानते हो, डायनासोर की ही तरह कुछ दशकों बाद गधे विलुप्त हो जाएंगे. यदि गधे विलुप्त हो गए, तो तुम जैसे निकृष्ट इंसानों को गधे की उपमा कैसे दी जाएगी. गधों के विलुप्त होने का मतलब है कि श्रम का विलुप्त हो जाना है. ऐसा हुआ, तो यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं होगी. पूरी प्रकृति में वैसा ही बदलाव आएगा जैसा डायनासोरों के विलुप्त होने पर आया था. यही सोचकर सरकार ने गधों को पालने पर लाखों रुपये देने की घोषणा की है. सोचता हूं कि गांव में जितने भी खेत हैं, उनमें एक गधा बाड़ा बनवाऊं और सौ-सवा सौ गधे पाल लूं. उन गधों की देखभाल के लिए तुम जैसा कोई गधा नौकर रख लूं. गधों को विलुप्त होने से बचाना, इंसानी फर्ज है. गधे बचे रहेंगे, तो श्रम बचा रहेगा, मालिक के प्रति वफादारी बची रहेगी. यह हंसती-खिलखलाती दुनिया बची रहेगी. वरना सब चौपट ही समझो.