Sunday, September 6, 2026

बिंदुमती बोली, मैंने कभी किसी में भेद नहीं किया

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बौद्ध ग्रंथों और लोककथाओं में पाटलिपुत्र के संबंध में एक बड़ी ही रोचक घटना बताई गई है। उस समय सम्राट अशोक पाटलिपुत्र पर शासन कर रहे थे। कुछ लोग इस घटना के समय महात्मा बुद्ध की उपस्थिति बताते हैं, लेकिन सम्राट अशोक के शासनकाल से लगभग 180 साल पहले ही महात्मा बुद्ध परिनिर्वाण को प्राप्त हो चुके थे। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार बरसात के दिनों में पाटलिपुत्र के किनारे से होकर बहने वाली भागीरथी नदी के किनारे सम्राट अशोक अपने मंत्रियों के साथ खड़े प्रकृति का आनंद उठा रहे थे। 

तभी नदी का जल नगर की ओर बढ़ने लगा। ऐसा लगा कि गंगा नदी पूरी पाटलिपुत्र को डुबोकर ही मानेगी। तब सम्राट अशोक ने अपने मंत्रियों से कहा कि क्या हमारे राज्य में कोई ऐसा तपस्वी नहीं है, जो अपने तपोबल से वेगवती भागीरथी की धारा को उल्टा प्रवाहित कर दे। यह बात जब नगरवधू बिंदुमती ने सुना तो उसने कहा कि मैं अपने तपोबल से गंगा की धारा को लौटने को मजबूर कर सकती हूं। 

अशोक ने कहा कि तुम जैसी स्त्री जो शील और सदाचार से सर्वथा रहित है, वह ऐसा कैसे कर सकती है। सम्राट अशोक की अनुमति से बिंदुमती ने पूजा की थाल सजाया और उसने मन ही मन ईश्वर और गंगा मैया को साक्षी मानकर एक 'सत्य प्रतिज्ञा' की, हे गंगा मैया! यदि यह सत्य है कि मैंने अपने जीवन में अपने द्वार पर आने वाले हर व्यक्ति को समान माना है; चाहे वह कोई राजा हो, चोर हो, ब्राह्मण हो या कोई नीच जाति का व्यक्ति हो— मैंने कभी किसी में भेद नहीं किया और बिना किसी भेदभाव के अपनी कला और कर्तव्य का पालन किया है। यदि मेरा यह समभाव और व्यावसायिक सत्य निष्कलंक है, तो तुम उलटी दिशा में बहने लगो। 

तभी चमत्कार हुआ और गंगा वापस लौट गईं। अशोक ने उस नगरवधू के चरणों में झुकते हुए पूछा, आपने यह सब कैसे किया। बिंदुमती ने कहा कि सत्य और कर्तव्य निष्ठा से यह संभव हुआ है।

हनीट्रैप जैसी घटनाओं का सबसे बड़ा कारण दिखावे की संस्कृति

अशोक मिश्र

कुछ लोग हनीट्रैप और देह व्यापार जैसी घटनाओं को व्यक्तिगत नैतिक पतन मानकर बहुत हलके अंदाज में लेते हैं। वास्तविकता यह है कि हनी ट्रैप जैसी घटनाएं संगठित अपराध का रूप लेती जा रही हैं जो समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलावों का प्रतीक हैं। हनीट्रैप और देह व्यापार जैसी घटनाओं के पीछे आर्थिक असमानता और रोजगार का संकट जैसे कारण सामान्यत: दिखाई दे रहे हैं। हरियाणा में तेजी से बढ़ती आकांक्षाएं, शहरीकरण और दिखावे की संस्कृति ने कम समय में अधिक पैसा कमाने की लालसा को जन्म दिया है। 

जब वैध रोजगार के अवसर सीमित हों और सोशल मीडिया पर अमीरी का प्रदर्शन रोज दिखे तो कुछ लोग देह को या झूठे रिश्ते को कमाई का जरिया बना लेते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिंडर जैसे प्लेटफॉर्म पर अनजान पहचान बनाना, फर्जी प्रोफाइल से भावनात्मक जाल बुनना बेहद आसान हो गया है। ओल्ड फरीदाबाद थाना पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने ही मकान मालिक को हनी ट्रैप में फंसाकर 24 लाख रुपये ऐंठ लिए हैं। इसके बाद भी वह अपने मकानमालिक का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं थी। 

राज्य में ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसे मामले में तो सैनिक और सेना अधिकारी भी लिप्त पाए जाते हैं। कुछ मामलों में हनीट्रैप देश विरोधी गतिविधियों का माध्यम भी बनता है। सीमा से लगे हरियाणा जैसे संवेदनशील राज्य में तैनात सैनिकों, सैन्य अधिकारियों या रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े कर्मचारियों को भावनात्मक या यौन प्रलोभन देकर फंसाया जाता है। फिर उनसे गोपनीय जानकारी, तैनाती, अभ्यास या हथियारों से संबंधित सूचनाएं निकाली जाती हैं। यह तरीका अक्सर सीमा पार खुफिया एजेंसियों द्वारा अपनाया जाता है, जहां सोशल मीडिया पर सुंदर महिला की प्रोफाइल बनाकर सैनिक को प्रेम जाल में फंसाया जाता है। 

ऐसे में एक व्यक्तिगत कमजोरी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू पर सैन्य और खुफिया एजेंसियों को सोशल मीडिया पर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। पारंपरिक सामाजिक ढांचे में पुरुषों की प्रतिष्ठा और परिवार की इज्जत को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। झूठे यौन उत्पीड़न या बलात्कार के आरोपों का डर कई पुरुषों को चुपचाप समझौता करने पर मजबूर कर देता है। 

पीड़ित अक्सर सार्वजनिक शर्म और परिवार के दबाव के कारण पुलिस के पास जाने से कतराते हैं, जिससे अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कठोर कानूनों का एक वर्ग ब्लैकमेल के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। शिकायत दर्ज कराने के नाम पर थाने में फोटो खिंचवाकर भेजना, झूठे रेप केस की धमकी देना, यह पैटर्न लगभग हर हरियाणा के हनीट्रैप गिरोह में दिखता है। इससे वास्तविक पीड़ितों की विश्वसनीयता भी कमजोर होती है।

Saturday, September 5, 2026

सबको आत्मसुधार का है अधिकार

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध और उनका परम प्रिय शिष्य आनंद एक जगह पर वार्तालाप कर रहे थे। आनंद ने कहा, आर्य श्रेष्ठ! श्रावस्ती परंपरावादियों का गढ़ है। वहां जाने की अपेक्षा राजगृह जाना ज्यादा उचित होगा क्योंकि राजगृह में संघ का विस्तार हो रहा है, लेकिन श्रावस्ती में तो अभी संघ की नींव ही पड़ी है। आनंद की बात सुनकर महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और बोले, आनंद! बिना संघर्ष किए कुछ भी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकती है। 

धर्म का प्रचार करना है, तो संघर्ष करना ही होगा। इसलिए श्रावस्ती जाना उचित होगा। जब लोगों को यह समाचार मिला कि तथागत श्रावस्ती आ रहे हैं, तो लोगों से उत्साह का संचार हुआ। उधर, महात्मा महात्मा बुद्ध  के विरोधियों ने भी अश्वलायन के नेतृत्व में अपना मोर्चा जमा लिया। 

नियत समय पर अश्वलायन अपने साथियों के साथ महात्मा महात्मा बुद्ध  के समक्ष प्रस्तुत हुआ और भर्त्सना करते हुए कहा कि तात! आप चारों वर्णों के उद्धार की बात करते हैं। क्या ब्राह्मणों के अलावा किसी को धर्म दीक्षा देने का अधिकार है? तथागत ने स्नेहपूर्वक कहा कि तात! ब्राह्मणों की श्रेष्ठता का आधार क्या है? 

अश्वलायन ने कहा कि ब्राह्मणों का ज्ञान, तप, निर्लोभ निरहंकारिता, साधना और ब्रह्मवर्चस ही उनकी श्रेष्ठता का आधार है। महात्मा बुद्ध ने फिर कहा, क्या ब्राह्मण चोरी नहीं करते, क्या ब्राह्मण झूठ नहीं बोलते। ब्राह्मण अगर नीच कार्य करेगा, तो क्या वह पापी नहीं माना जाएगा। श्रेष्ठ वही है जिसका मन निर्मल है। भले ही वह किसी भी वर्ण में पैदा हुआ हो। अब अश्वलायन के पास महात्मा बुद्ध की बात का कोई जवाब नहीं था। अश्वलायन ने बुद्ध के मत को स्वीकार कर लिया। बाद में वह धर्म चक्र प्रवर्तन कार्य में बहुत अधिक सहायक साबित हुआ।

जागरूक नागरिक रोक सकते हैं हरियाणा में फैला ड्रग्स कारोबार

अशोक मिश्र

हरियाणा की पहचान दूध-दही युक्त पौष्टिक भोजन और भारतीय सेना में अधिक से अधिक जवानों को भेजने वाले प्रांत के रूप में रही है। हरियाणा को सदियों पुरानी अपनी सभ्यता और संस्कृति पर हमेशा गर्व रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता से जुड़ाव का सौभाग्य देश के कम राज्यों को मिला है। हरियाणा को अपनी इस उपलब्धि पर हमेशा गर्व रहा है। लेकिन पिछले कुछ दशकों से हरियाणा में नशीले पदार्थों का चलन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश खामोश नशे की चपेट में है और इस चपेट का सबसे तीखा सिरा दिल्ली से सटा फरीदाबाद बन चुका है। फरीदाबाद का हॉटस्पॉट बनना कोई संयोग नहीं है। 

यह भूगोल और अर्थशास्त्र दोनों का परिणाम है। 135 किमी लंबा कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे अपने दस इंटरचेंज के साथ तस्करों के लिए खुला कॉरिडोर बन गया है, जहाँ से माल आसानी से गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में उतर जाता है। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में एक ही तरह का नशा नहीं है बल्कि एक पूरा बाजार है। एक तरफ पंजाब से सटा बार्डर और दिल्ली का नाइटलाइफ कल्चर सस्ती आपूर्ति बनाता है, दूसरी तरफ मांग के पीछे गहरी सामाजिक दरार है। 

हरियाणा में खेती का संकट, जमीन बंटती जा रही है, सरकारी नौकरी की दौड़ में लाखों युवा सालों तक कोचिंग में अटके हैं, और फरीदाबाद-गुरुग्राम के फैक्ट्री-मजदूरों और डिलीवरी ब्वॉय की अनिश्चित जिंदगी में थकान और अकेलेपन को सुन्न करने का सबसे सस्ता तरीका एक पुड़िया लगती है। आर्थिक रूप से यह कारोबार आसान मुनाफे का स्रोत बन गया है क्योंकि बेरोजगार युवा तस्करी या फुटकर बिक्री में लग जाते हैं। सामाजिक रूप से जातिगत प्रभाव, परिवारों का टूटना और खप पंचायतों की सीमित पहुंच ने समस्या को और गहरा दिया है। 

पुलिस और प्रशासन ने हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के माध्यम से कड़ी कार्रवाई शुरू की है। एनडीपीएस एक्ट के तहत बड़े पैमाने पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं, व्यावसायिक मात्रा की जब्ती पर जोर दिया जा रहा है, अंतर्राज्यीय नेटवर्क तोड़े जा रहे हैं और पीआईटी-एनडीपीएस के तहत आदतन अपराधियों को हिरासत में लिया जा रहा है। संपत्तियों की कुर्की और ध्वस्तीकरण के साथ-साथ जागरूकता अभियान, खेल आयोजन और नशा मुक्त गांव घोषित करने के प्रयास चल रहे हैं। 

हरियाणवी संस्कृति जो कभी सामूहिक श्रम और फौजी अनुशासन पर टिकी थी, वह अब तात्कालिक नशे के आराम और दिखावटी हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल की नकल में उलझ गई है। बेरोजगारी, कृषि संकट, युवाओं में निराशा और विदेश जाने की असफल कोशिशें नशे की ओर धकेल रही हैं। यह समस्या केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं सुलझेगी। रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार, परिवारों की भागीदारी और दीर्घकालिक पुनर्वास बिना यह संकट गहराता रहेगा। 

Friday, September 4, 2026

वक्कलि! यह सब कुछ क्षणभंगुर है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

श्रावस्ती में वक्कलि नाम का ब्राह्मण रहता था। कहने को तो वह ब्राह्मण था, लेकिन गुण, कर्म और स्वभाव में ऐसी कोई बात नहीं थी जिससे उसका ब्राह्मणत्व झलकता हो। उसके मन मस्तिष्क में हमें रूप, यौवन और धन संबंधी बातें ही आती रहती थीं। उन्हीं दिनों श्रावस्ती के वेलुवन में महात्मा बुद्ध पधारे। वेलुवन में एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया गया। जिसने भी सुना कि श्रावस्ती में तथागत आए हुए हैं, वह उनके दर्शन को दौड़ा चला गया। 

धर्म सभा में अपार भीड़ उमड़ती थी। लेकिन तथागत की वाणी को सुनने के लिए वक्कलि नहीं गया। एक दिन उसके गांव के एक व्यक्ति ने उससे धर्म सभा में महात्मा बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए चलने को कहा, तो वह बेमन से धर्म सभा में चला गया। महात्मा बुद्ध को देखते ही वह अचंभित रह गया। उसने अपने मन में कहा कि यही तो है जिसे वह खोज रहा था। 

वक्कलि ने उसी दिन महात्मा बुद्ध से बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की। महात्मा बुद्ध ने उसे दीक्षा तो दे दी, लेकिन वह समझ गए कि इसकी मनस्थिति धर्म की दीक्षा लेने लायक नही है। एक दिन वक्कलि ने तथागत से कहा कि भगवन! आप मुझे योगसाधना सिखाएं जिससे मैं भी आपकी तरह रूपवान हो जाऊं। आप जैसी ओजस्विता मुझ में भी आ जाए। आप जैसा नवयौवन मुझ में भी फूट पड़े। 

बुद्ध ने कहा कि रूपवान होने के लिए उपाय किए जा सकते हैं, शरीर को मजबूत करने के लिए योगासान सिखाया जा सकता है। लेकिन वक्कलि यह सब कुछ क्षणभंगुर है। एक दिन मिट जाएगा। आत्मोत्सर्ग का स्थायी साधन तो धर्म धारण है। वक्कलि को अपनी भूल का पता चल गया। उसने उसी दिन से आत्म सुधार और आत्म निरीक्षण की ओर ध्यान देना शुरू किया और एक दिन महान भिक्षु बन गया।

सड़कों पर डिवाइडर तोड़कर बनाए गए अवैध कट साबित हो रहे जानलेवा


अशोक मिश्र

हरियाणा की सड़कों पर लगे अवैध कट हादसों का प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। प्रदेश में जितनी सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, उनमें से लगभग आधी दुर्घटनाएं इन अवैध कटों के कारण होती हैं, लेकिन सरकारी रिकार्ड में यह कहीं दर्ज नहीं की जाती हैं। स्टेट हाईवे, एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, डिस्ट्रिक्ट रोड्स और शहरों की सड़कों पर जगह-जगह बने अवैध कट तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के लिए अचानक खतरा पैदा कर रहे हैं। ये कट होटल, ढाबों, पेट्रोल पंपों, गोदामों या स्थानीय लोगों द्वारा सुविधा के नाम पर बनाए जाते हैं। 

नतीजा यह होता है कि आने वाली गाड़ियां अचानक सामने आने वाले वाहनों या पैदल यात्रियों से टकरा जाती हैं। पूरे प्रदेश में सड़क हादसों से सालाना लगभग ढाई हजार से तीन हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। 2023 में करीब पांच हजार, 2024 में सवा अड़तालीस सौ और 2025 में तीन हजार से अधिक मौतें दर्ज हुईं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा अवैध कट, अनधिकृत एंट्री-एग्जिट और मेडियन तोड़ने से जुड़ा है। ये मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं बल्कि उन परिवारों की कहानियां हैं जिनके कमाने वाले अचानक चले गए या अपंग हो गए। 

औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर पैदल हाईवे पार करते हुए या अनधिकृत कट से निकलते हुए अक्सर शिकार बन जाते हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य के विभिन्न विभाग अवैध कट बंद करने के अभियान चलाते रहे हैं। पानीपत-अंबाला स्ट्रेच पर चार सौ से अधिक अनधिकृत कट बंद किए गए। गुरुग्राम में दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे पर दर्जनों कट बंद किए गए। करनाल में ढाबा और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुईं। कई जगहों पर क्रैश बैरियर, थ्री बीम बैरियर, रेलिंग और फेंसिंग लगाई गई। 

ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए और कुछ जगहों पर फुट ओवर ब्रिज या उचित एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाने की योजनाएं बनीं। यातायात पुलिस ने चेतावनी दी कि अवैध कट से हादसा होने पर एनएचएआई अधिकारियों पर भी केस दर्ज हो सकता है। कुछ जिलों में हादसों की संख्या में मामूली कमी भी आई है जहां इंजीनियरिंग सुधार और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। हरियाणा पुलिस ने माना है कि ढाबों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास बनाए गए अनधिकृत कट हादसों का बड़ा कारण हैं और एनएचएआई को उन्हें स्थायी रूप से बंद करने और दोबारा बनने पर एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है। 

इसके बावजूद लोग सड़कों पर अवैध कट लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। वह अपनी थोड़ी सी सुविधा के लिए सड़क पर चलने वालों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। लोगों का ऐसा करना, जहां कानूनी रूप से गलत है, वहीं इंसानियत के नाते भी गलत है। यह समस्या तब तक खत्म नहीं हो सकती है, जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होते हैं। जागरूकता ही बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है।

Thursday, September 3, 2026

अपनी धुन के पक्के निकले बोधिसत्व

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जातक कथाओं में बुद्ध के संबंध में एक कथा कही गई है। कहते हैं कि पूर्ण बुद्ध के पैदा होने से पहले बोधिसत्व ने काशी नरेश ब्रह्मभद्र के यहां कनिष्ठ पुत्र के रूप में हुआ। जब वह बड़े हुए तो उन्हें राजा बनने की इच्छा हुई। काशी में वह बन नहीं सकते थे क्योंकि छोटे पुत्र थे। उन्होंने उस समय के बहुत बड़े तांत्रिक महासिद्ध प्रत्यंग से अपनी कामना पूर्ति का उपाय पूछा, तो महासिद्ध ने बताया कि अगले महीने तक्षशिला का राज सिंहासन खाली होने वाला है। वह जो भी व्यक्ति पूर्णिमा के दिन सुबह राज महल के फाटक पर खड़ा मिलेगा, वही राजा बनेगा। 
अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए वह उसी समय चल पड़े। जानकारी मिलने पर उनके पांच मित्र भी उनके साथ जाने के लिए तैयार हुए। चलते समय महासिद्ध प्रत्यंग ने बताया कि रास्ते में यक्ष वन मिलता है। वहां की यक्षिणियां रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श से राहगीरों को फुसलाती हैं और उनको भोगती हैं और क्षीण होने पर मारकर खा जाती हैं। 
बोधिसत्व ने चल पड़े। यक्ष वन में एक यक्षिणी ने उनको फुसलाना चाहा, लेकिन वह अपने निश्चय से डिगे नहीं। वह उनके पीछे-पीछे चलती चली आई, लेकिन उनके पांचों मित्र रूपसी यक्षिणियों पर मोहित हो गए और बाद में काल के गाल में समा गए। वह यक्षिणी उनके पीछे-पीछे आती रही। वह मुहूर्त की प्रतीक्षा में एक कुंज में रुक गए। तब तक यक्षिणी की सुंदरता की खबर फैल चुकी थी। 
तक्षशिला के राजा ने यक्षिणी को पटरानी बनाने का आश्वासन देकर विवाह कर लिया। उसने राजमहल में अन्य यक्षिणियों को भी बुला लिया। सबने मिलकर सबका भक्षण कर लिया। नियत समय जब राज महल से बाहर रहने वालों ने फाटक तोड़ना चाहा, तो वहां सबसे पहले बोधिसत्व खड़े दिखे। सबने बोधिसत्व को ही वहां का राजा बना दिया और यक्षिणियों से राज्य को मुक्त कराया। एक दिन बोधिसत्व ने अपनी प्रजा से कहा कि रूप, शब्द, रस, स्पर्श और गंध ही पांच यक्षिणियां हैं। जो विनाश का कारण बनती हैं।

सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं होने के बावजूद खुले में प्रसव शर्मनाक

अशोक मिश्र

हरियाणा के लिए यह काफी संतोष की बात है कि राज्य में संस्थागत प्रसव की दर लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। मातृ मृत्यु अनुपात 89 प्रति लाख जीवित जन्म के आसपास है। यह हरियाणा सरकार की व्यवस्था और संवेदनशीलता का जीता जागता प्रमाण है। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षित प्रसूति के लिए कई व्यवस्थाएं की हैं। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव पूरी तरह मुफ्त और नकदरहित है। 

इसमें सामान्य या सिजेरियन प्रसव, दवाएं, जांच, रक्त, आहार और परिवहन की सुविधा शामिल है। घर से अस्पताल, रेफरल और वापसी की मुफ्त एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध है। जननी सुरक्षा योजना गरीब और अनुसूचित जाति की महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए नकद प्रोत्साहन देती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पहली जीवित संतान के लिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को तीन किस्तों में पांच हजार रुपये देती है। मुख्यमंत्री मातृत्व सहायता योजना दूसरी संतान के लिए भी कुछ श्रेणियों की महिलाओं को सहायता प्रदान करती है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने नौ तारीख को विशेषज्ञ जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी सेवाएं दी जाती हैं। 

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन पहल सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर देती है। इसके बावजूद अफसोस यह है कि राज्य में कई बार महिलाओं को अस्पताल पहुंचने के बाद भी खुले में या गेट पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा है। फरीदाबाद के धौज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार रात जो कुछ हुआ, वह किसी एक रात की घटना नहीं है। पूरे राज्य में अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। 

रविवार रात साढ़े तीन बजे प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को लेकर परिजन पीएचसी पहुंचे तो गेट पर ताला लटका मिला। मजबूरी में खुले में महिला का प्रसव कराना पड़ा। सिविल सर्जन ने धौज पीएचसी के एसएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, लेकिन इससे क्या स्थिति सुधर जाएगी? यह अहम सवाल है। मीडिया रिपोर्टों में फरीदाबाद, झज्जर और करनाल जैसे जिलों में समय-समय पर गेट बंद होने, स्टाफ की कमी या देरी के कारण ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। 

इन घटनाओं से साफ है कि योजनाओं के बावजूद रात के समय आपात द्वार, स्टाफ की उपस्थिति और संचार व्यवस्था में खामियां बनी हुई हैं। गर्भवती महिलाओं को ऐसी स्थिति से बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर रात भर आपात द्वार खुला रखना, स्पष्ट संकेत बोर्ड लगाना, स्टाफ की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करना और नियमित निगरानी जरूरी है। परिवारों को पहले से पता होना चाहिए कि रात में किस द्वार से प्रवेश करना है। गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, उच्च जोखिम वाले मामलों की पहचान और समय पर रेफरल मजबूत किया जाना चाहिए।

Wednesday, September 2, 2026

इस जैसा प्रेमी आदमी कभी नहीं देखा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

किसी गांव में जूता सिलने वाला व्यक्ति रहता था। गरीब था। दो जून की रोटी का ठिकाना भी बड़ी मुश्किल से हो पाता था। उस गांव में महात्मा बुद्ध का प्रवचन होना था। लेकिन उसे इन बातों से मतलब भी नहीं था रोजी-रोटी कमाने के चक्कर में। एक दिन वह सुबह सोकर उठा और पास के तालाब में गया, तो उसे एक सुंदर फूल दिखाई दिया। उसने कीचड़ में घुसकर उस फूल को तोड़ा और उसे बेचने के लिए शहर की ओर चल दिया। 

सोचा, आठ आने, एक रुपया मिल जाएगा, तो दो दिन का खर्च चल जाएगा। जैसे ही वह गांव के बाहर पहुंचा, रास्ते में नगर सेठ ने उसके हाथ में फूल देखा, तो कहा कि इस फूल के मैं दो रुपये दूंगा। यह फूल मुझे दे दो। गरीब आदमी खुश हो गया। तभी राजा के एक मंत्री वहां आ पहुंचे और उन्होंने कहा कि मैं इस फूल के पांच रुपये दूंगा। यह फूल मेरा हुआ। 

नगर सेठ और मंत्री में हो रहा विवाद निपटा भी नहीं था कि वहां राजा की सवारी आ पहुंची। राजा ने उस फूल को देखते ही कहा कि यह फूल मेरा हुआ। मैं तुम्हें राजकोष से इतना धन दूंगा कि तुम्हें जीवन भर मेहनत करने की जरूरत नहीं होगी। देखते ही देखते उस फूल की कीमत हजारों रुपये हो गई। अब गरीब व्यक्ति ने राजा से पूछा कि आखिर इस फूल में ऐसी क्या खासियत है जो इतना महंगा हो गया। 

राजा ने सारी बात बताई कि इस गांव में महात्मा बुद्ध का आगमन होने वाला है। हम इसे बुद्ध को भेंट करना चाहते हैं। यह सुनकर उस व्यक्ति ने फूल बेचने से मना कर दिया। शाम को जब बुद्ध गांव में पहुंचे, तो उस व्यक्ति ने बुद्ध को प्रणाम करते हुए उस फूल को अर्पित कर दिया और एक कोने में जाकर खड़ा हो गया। बुद्ध के कानों तक फूल की कथा पहुंच चुकी थी। उन्होंने कहा कि जिस आदमी के पास खाने के पैसे नहीं हैं। वह आदमी इतना बड़ा त्याग कर रहा है। मैं वर्षों से भ्रमण कर रहा हूं, इस जैसा प्रेमी आदमी कभी नहीं मिला।

कभी शुद्ध जल का स्रोत रही यमुना नदी का पानी छूने लायक नहीं रहा

अशोक मिश्र

हरियाणा में यमुना नदी की हालत इन दिनों चिंताजनक है। प्राचीनकाल से लेकर चार-पांच दशक पहले तक यह नदी शुद्ध जल का स्रोत मानी जाती थी। अब यमुना नदी कई स्थानों पर मानक से कहीं अधिक प्रदूषित हो चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अभी हाल में जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक जब हरियाणा में यमुना नदी प्रवेश करती है, तो उसका पानी अपेक्षाकृत साफ होता है। फरीदाबाद और पलवल तक पहुंचने के बाद वह एक गंदे नाले में तब्दील हो जाती है। इन दोनों जिलों में यमुना नदी मानक से 27 गुना ज्यादा प्रदूषित पाई गई है। इसका सबसे बड़ा कारण है सीवेज और औद्योगिक कचरे का बिना उपचार के सीधा नदी में जाना। 

हरियाणा के पास अपने घरेलू गंदे पानी के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को रिसाइकिल करने की क्षमता है, लेकिन हकीकत में राज्य प्रतिदिन कम से कम 1140 एमएलडी अनुपचारित या आंशिक रूप से उपचारित सीवेज यमुना में छोड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यमुना में पहुंचने वाले कुल प्रदूषण का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अकेला गुरुग्राम छोड़ता है। पानीपत और सोनीपत में हर दिन लगभग 42 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज नदी में जा रहा है। फरीदाबाद की सैकड़ों अवैध डाइंग और टेक्सटाइल इकाइयां रासायनिक और रंगीन कचरा खुलेआम बुढ़िया नाले में बहा रही हैं। 

बल्लभगढ़-पलवल से भी बिना शोधन का सीवेज गिरता है, इसलिए वजीराबाद से ओखला के बीच 22 किमी का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित माना ही जाता है। यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकारी प्रयास कई दशकों से चल रहे हैं, पर कमी कार्यान्वयन में रह गई है। यमुना कार्य योजना के पहले और दूसरे चरण में कुल 1514.42 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 

तीसरे चरण के लिए 1656 करोड़ रुपये की संशोधित लागत मंजूर की गई है। एनजीटी ने कई बार हरियाणा को एसटीपी अपग्रेड करने की डेडलाइन दी, नालों की निगरानी के लिए विशेष समिति बनवाई और सीपीसीबी को तिमाही आधार पर एसटीपी के प्रदर्शन की निगरानी का निर्देश दिया। 2027 तक नालों के बीओडी स्तर को 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। ड्रोन सर्वेक्षण से नालों की मैपिंग हो रही है, सीवर लाइनें लगभग पूरी बिछाई जा चुकी हैं और अवैध डिस्चार्ज पर कार्रवाई भी हो रही है। 

कई जगह क्षमता बढ़ी है और कुछ नालों से उपचारित पानी की मात्रा पहले से ज्यादा हो गई है। फिर भी कमी बनी हुई है। नदियों के प्रदूषण का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव गहरा है। यमुना और घग्गर के किनारे की खेती पर असर पड़ रहा है। उच्च टीडीएस और रासायनिक कचरे वाला पानी फसलों और मवेशियों के लिए खतरनाक है, भूजल में भी 30 से 50 प्रतिशत तक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। पीने के पानी में अमोनिया बढ़ने से क्लोरीन के साथ मिलकर कैंसर तक का खतरा बताया गया है।