Friday, July 31, 2026

प्रोफेसर के आगे नहीं झुके बिधानचंद

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

डॉ. बिधान चंद राय का जन्म पटना के बांकीपुर में एक बंगाली कायस्थ परिवार में 1882 में हुआ था। वह एक महान चिकित्सक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह पश्चिम बंगाल के वह दूसरे मुख्यमंत्री थे जो अपने मृत्युपर्यंत बारह साल तक अपने पद पर बने रहे। बिधानचंद राय को आधुनिक बंगाल का निर्माता कहा जाता है। संयोग की बात है कि बिधान चंद का जन्म और मृत्यु एक जुलाई को ही हुई थी। 

भारत सरकार ने उन्हें 1961 में भारत रत्न से सम्मानित किया था। बिधान चंद के माता-पिता ब्रह्मसमाजी थे जिसका प्रभाव उनके जीवन पर काफी गहरा पड़ा था। उनके पिता डिप्टी कमिश्नर थे, लेकिन अपनी दानशीलता के कारण हमेशा आर्थिक दबाव में रहे। स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने बहुत ही कठिन परिश्रम के बाद कलकत्ता मेडिकल कालेज में प्रवेश पाया। 

अपनी प्रतिभा और सादगी के चलते वह जल्दी ही अध्यापकों और छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए। वह सत्यवादी थे। चाहे जो परिस्थितियां हों, वह हमेशा सत्य ही बोलते थे। एक बार की बात है। उनके एक प्रोफेसर की वजह से कार दुर्घटना हो गई। उस समय बिधानचंद राय वहीं मौजूद थे। प्रोफेसर ने बिधानचंद को अपने पक्ष में गवाही देने को कहा। 

बिधानचंद ने सच कहना ही स्वीकार किया। प्रोफेसर ने बहुत धमकाया, परीक्षा में फेल करने की धमकी दी, लेकिन वह अडिग रहे। अदालत में उन्होंने वही कहा, जो देखा था। नतीजा यह हुआ कि प्रोफेसर दंडित किया गया। प्रोफेसर ने दुर्भावना वश उन्हें उस साल परीक्षा में फेल कर दिया। उनका एक साल बरबाद गया, लेकिन वह बाद में परीक्षा पास करके एक योग्य चिकित्सक बने। गरीबों की चिकित्सा वह बिना फीस लिए करते थे।

यदि सुरक्षा नहीं, तो किसी काम का नहीं है एक पेड़ मां के नाम पौधरोपण

अशोक मिश्र

मां और धरती दोनों में बड़ी साम्यता है। एक इंसान को जन्म देती है, दूसरी हवा, पानी और अनाज के जरिये जीवन को आगे बढ़ाती है। इसी नजरिये को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2024 को पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में देश भर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान शुरू किया था। इसके माध्यम से जन्म देने वाली मां की स्मृति को बनाए रखते हुए प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करना था। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया गया कि वह अपनी मां के नाम पर हर साल एक पौधरोपण अवश्य करें। रोपा गया पौधा जब पेड़ बन जाएगा, तो उनके मां की स्मृतियां पेड़ के माध्यम से जीवित रहेंगी। 

हरियाणा में भी लोगों ने इस मुहिम को साकार बनाने की ठान ली। हरियाणा को पहले चरण में 1.6 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था, लेकिन राज्य ने 1.87 करोड़ पौधे लगाकर सबको चकित कर दिया था। पूरे राज्य में बड़, पीपल, गुलमोहर, नीम और फलदार पौधे लगाए गए जिससे यह साफ हुआ कि लोगों ने इसे सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनात्मक जिम्मेदारी मान लिया था।  

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 26 जुलाई 2026 को यमुनानगर पुलिस लाइन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पौधे सिर्फ पर्यावरण नहीं, आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। हर नागरिक से जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल जरूर करनी चाहिए। सरकार ने इस मुहिम को होल आॅफ गवर्नमेंट और होल आॅफ सोसाइटी मॉडल पर चलाया। इस तरह का संदेश जब मुखिया से गांव तक जाता है तो लोगों में जिम्मेदारी का भाव आता है। सरकार ने इसे केवल अपील नहीं रहने दिया, संस्थागत बनाया है। 

वन विभाग को नोडल बनाकर मनरेगा, जल शक्ति अभियान, स्वच्छ भारत मिशन, अमृत सरोवर और राष्ट्रीय हरित राजमार्ग मिशन से जोड़ा गया है, ताकि गड्ढा खोदने से लेकर पानी देने तक की जिम्मेदारी बँटे। सबसे प्रयोगधर्मी कदम वन मित्र योजना रही, जहाँ पौधा लगाने पर 20 रुपये और उसकी देखभाल सौंपने पर 10 रुपये प्रति पौधा प्रोत्साहन दिया गया। इससे लोगों की आय बढ़ी और पौधों को सुरक्षा भी मिली। कई जिलों से यह भी खबरें आ रही हैं कि काफी संख्या में रोपे गए पौधे सूख चुके हैं या फिर अपने स्थान से गायब हैं। 

सवाल यह भी है कि क्या पौधरोपण का लक्ष्य पूरा हुआ। संख्यात्मक के लिहाज से हरियाणा ने हर चरण में अपना कोटा पूरा किया है। कई बार उससे आगे भी निकला है। नहरों, अमृत सरोवरों और स्कूल परिसरों में लगे पौधों की देखभाल अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि सड़क किनारे और खुले मैदानों में गर्मी और पानी की कमी से क्षति भी हुई है। कुछ मामले तो केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहे, इसके बाद ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी गई।

Thursday, July 30, 2026

अदालत का आदेश नहीं मानते, तो हंटर से पिटवाता

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बंगाल के एक सुल्तान हुए थे गयासुद्दीन आजम शाह। इनकी न्यायप्रियता की कहानियां आज भी सुनाई जाती हैं। गयासुद्दीन इलियास शाही वंश के तीसरे सबसे प्रभावशाली शासक थे। इन्होंने बंगाल पर 1390 से 1410-11 ईस्वी तक शासन किया था। गियासुद्दीन आजम शाह सिकंदर शाह और उनकी एक हिंदू पत्नी के पुत्र थे। इनके सत्रह सौतेले भाई थे। अपने पिता के शासनकाल में उन्होंने मयमनसिंह जिले के राज्यपाल के रूप में कार्य किया और वहाँ गियासपुर नामक एक टकसाल की स्थापना की थी। 

कहते हैं कि गयासुद्दीन रोज तीरंदाजी का अभ्यास किया करते थे। एक दिन दुर्योग से उनका तीर लक्ष्य से भटककर एक विधवा के इकलौते बेटे को जा लगा। बेटे की तीर लगने से मौत हो गई। उस महिला ने अपने बेटे की मौत को लेकर शहर के काजी के यहां न्याय दिलाने के लिए गुहार लगाई। शहर काजी ने समन भेजकर सुल्तान गयासुद्दीन को अपनी अदालत में तलब किया। 

सुल्तान भी साधारण कपड़े में अदालत में आए और एक आरोपी की तरह कठघरे में खड़े हो गए। न्यायालय की कार्रवाई शुरू हुई। तमाम गवाहों और सुबूतों के आधार पर सुल्तान दोषी पाए गए। काजी ने सुल्तान को विधवा के भरणपोषण के लिए उचित मुआवजा देने का आदेश दिया। सुल्तान ने आदेश मान लिया। जब मामला निपट गया, तो सुल्तान ने अपने कपड़ों में छिपी तलवार निकालकर काजी को दिखाते हुए कहा कि अगर आज आप डर जाते और न्याय नहीं करते, तो इसी तलवार से आपका गला काट देता। 

तब काजी ने अपनी गद्दी से हंटर निकालकर दिखाते हुए कहा कि यदि आप अदालत का फैसला नहीं मानते, तो इसी हंटर से पिटवाता। यह सुनकर सुल्तान ने काजी को गले लगा लिया और उसके न्याय की खूब प्रशंसा की।

नई औद्योगिक नीति से रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं

अशोक मिश्र

हरियाणा सरकार ने नई औद्योगिक नीति लांच कर दी है। हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति केवल एक सरकारी घोषणा मानना भूल होगी। नई औद्योगिक नीति प्रदेश की अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने वाला कदम साबित होने वाला है। 55 हजार करोड़ के शुरुआती निवेश और पांच लाख करोड़ के बड़े लक्ष्य वाली इस ‘मेक इन हरियाणा 2026’ नीति का सबसे बड़ा संदेश है कि अब निवेश सिर्फ गुरुग्राम-मानेसर तक सीमित नहीं रहेगा। इसका लाभ राज्य के लगभग सभी जिलों को मिलेगा। नई औद्योगिक नीति से विजन 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी सफलता मिलेगी। 

नई औद्योगिक नीति का सबसे ज्यादा लाभ रोजगारऔर प्रति व्यक्ति आय के क्षेत्र में दिखाई देगा। सैनी सरकार नई नीचि से खुद 10 लाख नौकरियों के सृजन का लक्ष्य बता रही है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, डेटा सेंटर, फार्मा और खिलौना निर्माण जैसे नए सेक्टर शामिल हैं। इतने भारी भरकम पूंजी निवेश के बाद जब लोकल युवाओं को स्थानीय फैक्ट्रियों में स्किल्ड नौकरी मिलेगी, तो इसके पूरे प्रदेश में पलायन घटेगा। इन फैक्ट्रियों में उत्पादित माल की खपत बढ़ेगी, जो स्थानीय लोगों की आय में सीधे इजाफा करेगा। रोजगार सृजन से जहां प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी, वहीं दूसरे प्रदेशों और विदेश में इन उत्पादों का निर्यात करने से विदेशी मुद्रा का भंडार भी बढ़ेगा। नई औद्योगिक नीति में रोजगार को लेकर सरकार का लक्ष्य साफ है। 

अगले पांच साल में 10 लाख नए रोजगार पैदा करने की दिशा में नई औद्योगिक नीति एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा जोर उन सेक्टरों पर है जहाँ कम पूंजी में ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। इसमें सबसे आगे मैन्युफैक्चरिंग और आॅटोमोबाइल,इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपोनेंट सेक्टर है। फरीदाबाद-गुरुग्राम-मानेसर बेल्ट में पहले से मौजूद फैक्ट्रियों के विस्तार और नई आईएमटी बनने से असेंबलिंग, वेल्डिंग, मेंटेनेंस जैसे कामों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। राज्य में दूसरा बड़ा क्षेत्र खिलौना निर्माण, फार्मा और कृषि आधारित उद्योग है। 

इन क्षेत्रों में पूंजी निवेश के बाद रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। ये सभी श्रम आधारित उद्योग हैं और एमएसएमई के जरिए गांव-कस्बों तक नौकरियों पहुंचेंगी और लोगों का जीवन स्तर अच्छा होगा। हरियाणा की नई 'मेक इन हरियाणा 2026' नीति का फोकस अब पारंपरिक उद्योग से हटकर भविष्य के उद्योगों पर ज्यादा है, इसलिए इसका फायदा चुनिंदा नहीं बल्कि एक पूरी चेन को होगा। सरकार ने इसी वजह से रोजगार सब्सिडी और एसजीएसटी रिफंड को नीति से जोड़ा है ताकि कंपनियां हरियाणा के युवाओं को ही प्राथमिकता दें। सरकार ने महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति, दिव्यांग, पूर्व सैनिकों जैसे तमाम लोगों के लिए विशेष प्रोत्साहन प्रावधान किए हैं।


Wednesday, July 29, 2026

अंतत: पर्वत पर चढ़ने में कामयाब हो गया

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जीवन में हर किसी के सामने कोई न कोई समस्या जरूर सामने आती है। अगर व्यक्ति को हल करने के लिए पहला कदम उठाता है, वही सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। अपने लक्ष्य की ओर उठा पहला कदम ही उसको आधी सफलता दिला देता है। यदि वह पहला कदम नहीं उठाता तो सफलता कैसे हासिल होती। किसी गांव में एक युवक रहता था। उस गांव के सामने एक पर्वत था। 

वह उस पर्वत पर चढ़कर अपने गांव का नाम रोशन करना चाहता था। लेकिन गांव के लोग उसको हर बार हतोत्साहित कर देते थे। इसके कारण उसमें धीरे-धीरे साहस की कमी होती गई और वह अपने साहस पर ही शंका करने लगा। संयोग से उस रास्ते से एक दिन एक साधु गुजरा। 

वह थोड़ी देर के लिए उस गांव में भी गया। मुलाकात के दौरान उस युवक ने अपने मन की सारी बात साधु को बताई। यह सुनकर साधु ने कुछ दिन गांव में रहने का निश्चय किया। साधु उसे गांव के बाहर ले गया और एक बड़े से पत्थर को उठाने को कहा। युवक ने कहा कि इतना बड़ा पत्थर मैं कैसे उठा सकता हूं। साधु ने कहा कि तुम इसे उठा नहीं सकते, तो क्या हुआ? ढकेल तो सकते हो। 

साधु के कहने पर युवक रोज पत्थर को ढकेलने का प्रयास करता रहा। कुछ दिन बाद साधु ने युवक से कहा कि अब तुम पर्वत की चढ़ाई शुरू करो। युवक ने पर्वत की चढ़ाई शुरू की और अंतत: वह पर्वत पर चढ़ने में कामयाब हो गया। जब युवक वापस आया, तो उसने साधु से कहा कि आपने मुझे पत्थर ढकेलने के लिए क्यों कहा था? साधु ने कहा कि पत्थर ढकेलने से तुम्हारा शरीर मजबूत हुआ। जब शरीर मजबूत हुआ, तो तुम्हारा साहस लौट आया। आज पर्वत पर चढ़ने में सफल हुए हो, तो इसका कारण यह है कि तुमने पत्थर को ढकेलने के लिए पहला कदम उठाया था। यही तुम्हारी सफलता का राज है।

कांवड़ यात्रा को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने की तैयारी

अशोक मिश्र

सावन का पवित्र महीना कल यानी 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं। जो भी भक्त भगवान शिव की सच्चे मन और पूरी आस्था के साथ पूजा करता है, भगवान उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। यही वजह है कि शिवभक्त सावन में भगवान को प्रसन्न करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। इसके लिए वे तमाम परेशानियां सहकर भी गंगा जल लाते हैं और अपने देवाधिदेव भगवान शंकर को अर्पित करते हैं। 

हर साल की तरह देश-प्रदेश के करोड़ों शिव भक्त कल से कांवड़ यात्रा पर निकलेंगे। वैसे तो हरियाणा में गंगा का कोई तट नहीं है, लेकिन यह उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली को जोड़ने वाला सबसे अहम ट्रांजिट राज्य है। इसलिए हर साल लाखों कांवड़िए हरिद्वार-ऋषिकेश से गंगाजल लेकर यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, हिसार, भिवानी और गुरुग्राम-मानेसर होते हुए अपने-अपने शिव मंदिरों तक जाते हैं। हर साल की तरह राज्य प्रशासन की तरफ से कांवड़ियों के रूट पर गड्ढे भरवाने, सड़क किनारे झाड़ियां साफ कराने, स्ट्रीट लाइट, पीने का पानी, शौचालय, बिजली और सात्विक भोजन के शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। 

डीजे की आवाज और कांवड़ की ऊंचाई तय सीमा में रखने को कहा गया है ताकि यातायात बाधित न हो। कुछ दिन पहले मेरठ में पांच राज्यों के आला अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक हुई थी जिसमें कांवड़ियों की यात्रा को सुरक्षित संपन्न कराने के लिए पूरा प्लान तैयार किया गया था। हरियाणा के सामने संतुलन साधने की चुनौती है, एक तरफ कांवड़ियों को सम्मान, सुरक्षा और सुविधा देनी है, दूसरी तरफ स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा की आवाजाही बाधित न हो इसका ध्यान रखना है। 

अगर समय से रूट की जानकारी, साफ-सफाई और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से सेवा शिविर लगें और कांवड़िए भी अनुशासन बनाए रखें तो यह यात्रा वाकई सेवा और सौहार्द का उदाहरण बन सकती है। सैनी सरकार ने जो व्यवस्था की है, उसको देखते हुए यही लगता है कि इस बार भी पूरे राज्य में कांवड़ यात्रा सुरक्षित, सुविधाजनक और बाधारहित होगी। यदि राज्य और राज्य के बाहर से आने वाले कांवड़िए अनुशासन में रहे, निस्संदेह सरकार उनको हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है। सावन का महीना वैसे भी आस्था और विश्वास का है। सात्विकता और शुद्ध आचरण की अपेक्षा इस महीने में हर किसी से की जा सकती है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने पूरे कांवड़ रूट पर मीट और शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रखने का आदेश जारी किया है। सुरक्षा के लिहाज से इस बार इंतजाम पहले से कहीं ज्यादा कड़े और तकनीक आधारित हैं। हरियाणा पुलिस ने भी इसे चुनौती के रूप में लेते हुए कांवड़ यात्रा को अबाधित संपन्न कराने की चुनौती स्वीकार की है।

Tuesday, July 28, 2026

प्रजा को आलसी मत बनाइए, महाराज

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर किसी को आलसी और कामचोर बनाना है, तो सबसे उत्तम यही होगा कि उसकी मूलभूत जरूरतों को पूरा करना शुरू कर दो। धीरे-धीरे वह आदमी काम-धंधा छोड़कर पूरी तरह उस अनुदान पर निर्भर हो जाएगा, तो उसे दिया जा रहा है। आलसी आदमी यही सोचने लगेगा कि जब घर बैठे जरूरतें पूरी हो रही हैं, तो वह काम धंधा क्यों करे। एक राजा ने अपनी प्रजा के साथ ऐसा ही किया था। 

बहुत पुरानी बात है। एक राजा अपनी प्रजा का बहुत ख्याल रखता था। वह अपने राज गुरु की बात बहुत मानता था। एक बार उसके मन में आया कि गरीब लोगों की मदद की जाए। उसने महल के बाहर सोने के सिक्कों से भरा थाल रखवाकर घोषणा की कि जिसको जरूरत हो, वह एक मुट्ठी सोने के सिक्के ले जा सकता है। नतीजा यह हुआ कि लोग काम-धंधा छोड़कर स्वर्ण मुद्रा लेने निकल पड़े। 

कुछ दिनों बाद यह बात राजगुरु को पता चली, तोवह वेष बदलकर वहां पहुंचे। एक मुट्ठी स्वर्ण मुद्रा ली और चल पड़े। थोड़ी दूर जाने के बाद वह लौटे और स्वर्ण मुद्रा जमीन पर पटक दी। पूछने पर राजगुरु ने कहा कि सोचता हूं, शादी कर लूं। लेकिन इतनी स्वर्ण मुद्रा से क्या होगा? तब राजा ने कहा कि एक मुट्ठी स्वर्ण मुद्रा और ले लो। थोड़ी दूर जाने के बाद वह फिर वापस आए और बोले, शादी करूंगा, तो घर भी चाहिए। 

राजा ने एक मुट्ठी स्वर्ण मुद्रा और लेने को कहा। इस बार भी वही हुआ। लौटने के बाद बोले, शादी के बाद बच्चे भी तो होंगे, उनका क्या करूंगा। राजा नेएक मुट्ठी स्वर्ण मुद्रा और लेने को कहा। तब राजगुरु असली वेष में आए और बोले, इस तरह स्वर्ण मुद्राएं बांटकर आप लोगों को आलसी बना रहे हैं। इन मुद्राओं का उपयोग लोगों को काम दिलाने में कीजिए तो बेहतर रहेगा। यह सुनकर राजा की आंखें खुल गईं।

हरियाणा में लगातार गहराता जा रहा है भूगर्भ जल संकट

अशोक मिश्र

हरियाणा में भूगर्भ जलसंकट लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुग्राम जिले के मानेसर क्षेत्र में कई गांवों का भूगर्भ जलस्तर सात सौ फीट नीचे पहुंच गया है। गांव नाहरपुर कासन, कांकरौला, शिकोहपुर और हयातपुर में अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं जिससे सप्लाई के लिए पाइप डालकर लोगों को पानी मुहैया कराया जाएगा। मानेसर इलाके में हालत यह है कि पानी की कमी की वजह से लोग पलायन करने पर मजबूर हैं। यह कोई अचानक घटी घटना नहीं है। भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे जाने की प्रक्रिया दशकों से चल रही थी। 

उसके परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। यह प्रक्रिया जब अपने चरम पर पहुंची है, तब लोगों को होश आया है कि हम लगातार संकट में घिरते जा रहे हैं। रिपोर्टें बताती हैं कि मानेसर के वार्ड 13 के गांव खोह जैसे इलाकों में तो हालात इससे भी बुरे हैं, जहां भूजल स्तर आठ सौ से एक हजार फुट तक पहुंच चुका है और सभी बोरवेल से पानी आना बंद हो गया है। सच तो यह है कि मानेसर की यह कहानी धीरे-धीरे पूरे राज्य की कहानी में तब्दील होती जा रही है। 

केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 142 में से 85 ब्लॉक ओवर-एक्सप्लॉइटेड यानी अति-दोहित श्रेणी में हैं। गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र के कई हिस्सों में वॉटर लेवल हर साल 1 से 3 फीट तक नीचे जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह खेती है। धान-गेहूं का चक्र और ट्यूबवेल पर मुफ्त या सस्ती बिजली ने पानी के अंधाधुंध इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। किसानों ने हरित क्रांति के नाम पर गैर जरूरी पानी का दोहन किया। नतीजा यह हुआ कि धरती के नीचे से पानी खींचते रहे, अपना काम चलाते रहे, लेकिन रिचार्ज करने की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। 

इसके लिए केवल खेती ही जिम्मेदार नहीं है। राज्य के हर जिले में लगी छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों ने अपने उपयोग के लिए अंधाधुंध जल दोहन किया। खेती की जमीन पर बसी बड़ी बड़ी कालोनियों और बस्तियों में रहने वाले लोगों ने भी पानी का कम दोहन नहीं किया है। घरों, फैक्ट्रियों और कंस्ट्रक्शन के लिए बोरवेल गहरे होते गए और रिचार्ज के लिए तालाब, जोहड़ और बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पा रहा क्योंकि कंक्रीट बढ़ती जा रही है। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट खुद कहती है कि दक्षिण हरियाणा में भूजल दोहन खतरनाक स्तर पर है और गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसी जमीन के रेगिस्तान बनने का खतरा मंडराने लगा है। 

एक अध्ययन बताता है कि 2003 से 2020 के बीच अकेले पंजाब-हरियाणा ने 64.6 बिलियन क्यूबिक मीटर भूजल खो दिया है। यह कोई आंकड़ा नहीं, आने वाली पीढ़ियों के हिस्से का पानी है जो हमने बिना सोचे खर्च कर दिया। यदि हमने अभी ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें जरूर कोसेंगी। हमें अभी से ही पानी की बचत पर पूरा ध्यान देना होगा, ताकि हरियाणा का पानी बचा रहे।

Monday, July 27, 2026

मित्र मोर! दुनिया में कोई भी पूर्ण नहीं है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इस संसार में कोई भी पूर्ण नहीं है। कुछ न कुछ कमियां हर प्राणी में होती है। हर प्राणी में कोई न कोई खूबी भी होती है। हर प्राणी का इस प्रकृति में कोई न कोई उपयोग है। किसी जंगल में एक मोर रहता था। वह  अपने प्राकृतिक स्वभाव की वजह से नाचता बहुत अच्छा था। एक दिन जब रिमझिम-रिमझिम बरसात हो रही थी, तो वह मोर नाचने लगा। बरसात होती रही और मोर मगन होकर नाचता रहा। 

जब मोर नाच रहा था, तो उसके नृत्य को देखने वाला वैसे तो कोई नहीं था, लेकिन झाड़ियों के पीछे छिपा हुआ एक कछुआ जरूर नाच देख रहा था। जब जी भरकर मोर नाच चुका, तो कछुआ झाड़ियों से निकला। वह अपने धीमे कदमों से मोर के पास पहुंचा और कहा, मोर भाई! आप नाचते बहुत अच्छा हैं। मैं संयोग से झाड़ियों के पीछे से आपका नृत्य देख रहा था। कछुए की बात सुनकर मोर उदास हो गया। 

उसकी उदासी देखकर कछुए ने कहा, भाई इतना अच्छा नाचने के बाद भी आप उदास क्यों हैं? क्या परेशानी है? मोर ने कहा कि मेरा शरीर तो बहुत सुंदर है, लेकिन मेरे पैर और आवाज बहुत भद्दी है। मेरी आवाज सुनते ही सारे जीव-जंतु भाग जाते हैं। जबकि कोयल की आवाज कितनी मधुर है। सभी प्रसन्न होकर उसकी आवाज को सुनते हैं। 

तब कछुए ने कहा कि भाई, इसके लिए उदास मत हो। मैं जमीन पर कछुए के मुकाबले में धीमे चलता हूं, लेकिन यदि पानी में दौड़ हो, तो कौन जीतेगा, यह तो तुम जानते हो। हर प्राणी में कोई न कोई कमी होती है। किसी की आवाज अच्छी है, तो शरीर अच्छा नहीं है। कोमल कंठ से गाने वाली कोयल कितनी काली होती है, यह तो आप जानते ही होंगे। कोयल को भी अपने कालेपन पर अफसोस होता होगा। यह सुनकर मोर की उदासी दूर हो गई और वह फिर  नाचने लगा।

युवाओं को रोजगार देने की ओर अग्रसर हरियाणा सरकार

अशोक मिश्र


हरियाणा में लगातार दो बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नायब सिंह सैनी ने एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए दावा किया कि पिछले 21 माह के कार्यकाल में उनकी सरकार ने साठ हजार युवाओं को बिना किसी खर्ची-पर्ची के नौकरियां दी हैं। हाल में ही उन्होंने 1500 शिक्षकों को नौकरी देने की बात कही। सीएम सैनी का कहना है कि युवाओं को रोजगार देना, उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में है। वह राज्य के हर युवा को रोजगार देने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में भी राज्य के बेरोजागर युवाओं को बिना पर्ची-खर्ची के पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसर मिलते रहेंगे। 

हरियाणा में बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा है। इस मुद्दे को लेकर विधानसभा और सड़क पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा बेरोजगारी में पड़ोसी राज्यों से बेहतर स्थिति में है। विधानसभा में उन्होंने अक्टूबर-दिसंबर 2024 की पीरियाडिक लेबर फोर्स सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि हरियाणा की बेरोजगारी दर 4.7 प्रतिशत, जबकि राष्ट्रीय औसत 6.4 प्रतिशत है। सरकार पीएलएफएस की रिपोर्ट को ही सही मानती है। जबकि विपक्ष जब भी प्रदेश में बेरोजगारी की बात करता है, तो वह सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़े को उद्धृत करता है। सीएमआईई के आंकड़ों में हरियाणा की बेरोजगारी दर कई बार देश में सबसे ऊंची, 35.7 प्रतिशत से लेकर 37.4 प्रतिशत तक दिखाई गई है, जबकि सरकार के अपने पीएलएफएस में सितंबर 2025 तक यह 15.4 प्रतिशत बताई गई थी। 

दोनों सर्वेक्षणों की पद्धति अलग है, इसलिए अंतर स्वाभाविक है, राज्य के युवाओं में जिस तरह रोजगार को लेकर बेचैनी है, उससे यह बात साफ हो जाती है कि राज्य सरकार को अभी रोजगार सृजन के मामले में और मेहनत करनी होगी। सरकारी नौकरी हरियाणा में सामाजिक प्रतिष्ठा का सवाल है। जिसे सरकारी नौकरी मिल जाती है, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा काफी बढ़ जाती है। लोग उसको सम्मान की निगाह से देखने लगते हैं। इसलिए सीएम सैनी द्वारा 60,000 भर्तियां बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी राहत जरूर हैं, खासकर ग्रुप सी और डी जैसी भर्तियों में।

 लेकिन हर साल लाखों युवाओं के अपनी पढ़ाई पूरी करके रोजगार बाजार में आने के कारण सरकारी नौकरी से ही बेरोजगारी खत्म नहीं होती। इसके लिए निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे, तभी बेरोजगारी को दूर करने में सफलता मिलेगी। उद्योगों में निवेश, एमएसएमई को बढ़ावा, कौशल को बाजार की जरूरत से जोड़ना और निजी क्षेत्र में पारदर्शी भर्ती जरूरी है। हरियाणा के पास लोकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल कार्यबल बहुत ज्यादा है। अगर इसे रोजगार से जोड़ने में राज्य सरकार सफल हो जाती है, तो नारा नौकरी का संकट बदलकर नौकरी का अवसर बन सकता है।