Monday, March 16, 2026

जब डूब ही जाना है, तो क्यों न प्रयास करें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मार्क रदरफोर्ड ब्रिटिश लेखक थे। वैसे उनका वास्तविक नाम विलियम हेल व्हाइट था। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की, लेकिन द आटो बायोग्राफी आफ मार्करदरफोर्ड काफी चर्चित रही। समीक्षकों का कहना है कि उनकी विभिन्न रचनाओं में उनके जीवन की कई घटनाएं समाहित की गई थीं। 

मार्क का जन्म 22 दिसंबर 1831 में इंग्लैंड के बेडफोर्डशायर में हुआ था। बात तब की है, जब रदरफोर्ड युवा थे। उनके मन में आशा और निराशाजनक विचार चलते रहते थे। कभी किसी काम को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाते थे, तो ठीक अगले ही पल वह निराशा में भी डूब जाते थे। एक दिन की बात है। वह समुद्र के किनारे बैठे हुए थे। मौसम भी बड़ा सुहावना था। तभी उनकी निगाह समुद्र में लंगर डाले एक जहाज पर पड़ी। जहाज रदरफोर्ड से ठीक ठाक दूरी पर था। उनके मन में अचानक यह विचार आया कि लंगर डाले जहाज तक तैर कर पहुंचा जाए।

रदरफोर्ड एक अच्छे तैराक भी थे। वह कई बार ऐसे साहसिक कारनामे कर चुके थे। जोश में उन्होंने समुद्र में छलांग लगाई और जहाज की ओर तैरने लगे। देखते ही देखते वह जहाज तक पहुंच गए। जहाज के कई चक्कर भी लगाए। फिर उन्होंने तट की ओर लौटना शुरू किया। लेकिन यह क्या? लौटते समय वह शिथिलता अनुभव करने लगे। सारा जोश गायब हो गया। 

उन्हें लगने लगा कि अब वह तट तक नहीं पहुंच पाएंगे और समुद्र में डूब जाएंगे। मन पर निराशा हावी होने लगी। उन्होंने सोचा कि यदि प्रयास नहीं किया, तो डूबना तय है। ऐसी स्थिति में क्यों न प्रयास किया जाए, तो शायद तट तक पहुंचा जा सकता है। निराशा दूर होते ही उन्होंने तेजी से तैरना शुरू किया और अंतत: तट तक पहुंचने में सफल हो गए।

बुजुर्गों को नहीं होना पड़ेगा परेशान प्रशिक्षित स्वयंसेवक करेंगे सहायता


अशोक मिश्र

वृद्धावस्था जीवन का सबसे कष्टकारक पड़ाव होता है। इस अवस्था में ज्ञानेंद्रियां शिथिल हो जाती हैं। आंखों से दिखाई देना बंद हो जाता है। शरीर कमजोर हो जाता है। सुनाई देना भी बंद हो जाता है। ऐसी अवस्था में आमतौर पर बुजुर्ग दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। कल तक जो पूरे परिवार का मुखिया था, जिसके इशारे पर पूरा परिवार संचालित होता था, आज वही व्यक्ति असहाय-लाचार सा कोने में पड़ा रहता है। 

ऐसी स्थिति तब और कष्टप्रद हो जाती है, जब किसी बुजुर्ग की देखभाल करने वाला परिवार में न हो। कुछ मामलों में यह भी देखने में आता है कि बुजुर्ग माता-पिता यहां रह रहे हैं और बेटा या बेटी अपने परिवार के साथ विदेश में रह रहे हैं। कई बार तो इन बुजुर्गों के बेटा-बेटी हालचाल तक नहीं पूछते हैं। ऐसी स्थिति में यदि बुजुर्ग दंपति में से किसी एक को कुछ हो जाए, तो बाकी बचे बुजुर्ग के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है। हरियाणा के बुजुर्गों को ऐसी परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए सैनी सरकार ने प्रहरी योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। 

हरियाणा में अब प्रशिक्षित स्वयंसेवक बुजुर्गों के लिए प्रहरी की भूमिका निभाएंगे। प्रहरी अपने इलाके के बुजुर्गों के संपर्क में रहेंगे। यदि उन्हें जरूरत महसूस हुई, तो वह उनकी हर संभव सहायता करेंगे। स्वयंसेवक बुजुर्ग की हर जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। यदि उन्हें दवा की जरूरत है, तो वह मेडिकल स्टोर से उनकी दवा लाकर देंगे। बीमार होने पर बुजुर्ग को अस्पताल ले जाएंगे। उनकी देखभाल करेंगे और स्वस्थ होने पर घर पहुंचाएंगे। गैस सिलेंडर भरवाना हो या बिजली बिल जमा करना हो, सब्जी लाने से लेकर छोटी मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर समय यह स्वयंसेवक तैयार रहेंगे। 

दरअसल, सन 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रहरी योजना की रूपरेखा तैयार की थी। इस समय प्रदेश में 80 वर्ष से अधिक आयु के सवा तीन लाख बुजुर्ग हरियाणा में रहते हैं। इनमें  से साढ़े तीन हजार से अधिक बुजुर्ग अपने घर में अकेले रहते हैं। यदि इन बुजुर्गों में से किसी को कोई परेशानी हो, तो वह अपने पड़ोसियों से सहायता मांगने की स्थिति में नहीं होता है। ऐसी स्थिति यदि स्वयंसेवी प्रहरी जैसी सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो इन बुजुर्गों का जीवन थोड़ा आरामदायक हो सकता है। कई बार ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं जिसके मुताबिक अकेले रह रहे बुजुर्ग की मौत हो जाने पर भी पड़ोसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। 

जब लाश से बदबू आने लगती है, तभी पता चलता है कि पड़ोस में रहने वाले अमुक व्यक्ति की मौत दो दिन पहले हो गई थी। हरियाणा में किसी बुजुर्ग के सामने ऐसी स्थिति न आए, इसके लिए बुजुर्गों की सेवा करने के इच्छुक लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वह अपने क्षेत्र के बुजुर्ग की सेवा कर सकें।

Sunday, March 15, 2026

संतोषी व्यक्ति जमीन पर भी सो सकता है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

किसी राज्य में एक संत रहते थे। उन्होंने सोचा कि एक भव्य आश्रम का निर्माण किया जाए ताकि उनके शिष्यों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। आश्रम निर्माण में लगने वाले धन को इकट्ठा करने के लिए उन्होंने लोगों के बीच जाने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि लोगों से सहयोग मांगने पर इतना तो जरूर बच जाएगा जिससे आश्रम की जरूरतों को भी पूरा किया जा सकता है। 

वह कई राज्यों में घूमे, लोगों का यहयोग भी अच्छा मिला। एक दिन जब उन्हें भटकते-भटकते शाम हो गई, तो वह एक कुटिया के सामने रुक गए। उस कुटिया में एक बुजुर्ग महिला रहती थी। उसने संत और उनके शिष्यों का स्वागत किया। किसी तरह उसने सबके लिए भोजन की व्यवस्था की। सबने सुस्वादु भोजन किया। इसके बाद उसने एक तख्त पर दरी बिछाई और संत से उस पर लेटने का आग्रह किया। 

वह महिला खुद एक चटाई बिछाकर जमीन पर सो गई। लेटते ही उसे गहरी नींद आ गई। रात में संत को बेचैनी महसूस होने लगी। वह उठकर बैठ गए। उन्हें नींद नहीं आ रही थी। उन्हें मुलायम गद्दे पर सोने की आदत थी। खुरदरी दरी पर सोने से उन्हें परेशानी हो रही थी। अगले दिन महिला सुबह उठी। उसने सबके लिए भोजन का प्रबंध किया। उसने थोड़ी देर पूजा-अर्चना की। 

खाली समय में पड़ोस के बच्चों को बुलाकर उन्हें कहानियां सुनाई। संत ने उस महिला से कहा कि कल रात में मुझे दरी पर नींद नहीं आई, लेकिन तुम्हें जमीन पर कैसे नींद आ गई। उस महिला ने कहा कि मैं अपना भोजन जुटाने के लिए मेहनत करती हूं। मैं अपनी जरूरत से ज्यादा की कामना भी नहीं करती। मैं संतोष करती हूं। इस वजह से मुझे नींद आ जाती है।  

संत ने मन में सोचा कि यह महिला जमीन पर सोकर भी सुखी है और मैं भव्य आश्रम बनवाने की फेर में दर दर भटक रहा हूं। उस रात संत को गहरी नींद आई और वह अपने आश्रम लौट गए।

क्रॉस वोटिंग की वजह से दो बार हारी कांग्रेस फूंक-फूंककर रख रही कदम


अशोक मिश्र

देश में राज्यसभा सांसदों का चुनाव 16 मार्च को होने जा रहा है। उसी दिन चुनाव परिणाम आ जाएगा। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार 26 सीटों पर राज्यसभा सांसद निर्विरोध चुने जा चुके हैं जिसमें से इंडिया गठबंधन को 13, एनडीए गठबंधन को 12 और एक निर्दलीय प्रत्याशी को जीत हासिल हुई है क्योंकि इनके खिलाफ कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारा गया था। 

अब विभिन्न राज्यों की कुल ग्यारह सीटों पर चुनाव होना है जिसमें हरियाणा की दो सीटें भी शामिल हैं। इन दो सीटों के लिए कुल तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया, कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित सतीश नांदन के मैदान में उतरने से चुनाव काफी रोमांचक हो गया है। भाजपा अपने 48 विधायकों के साथ-साथ दो इनेलो और तीन निर्दलीय विधायकों को लेकर निश्चिंत है, लेकिन कांग्रेस अपने विधायकों को लेकर सशंकित है। 

उसे मतदान के दौरान क्रास वोटिंग का भय सता रहा है। यही वजह है कि उसने अपने 37 विधायकों में से  31 को हिमाचल प्रदेश रवाना कर दिया है। अब ये विधायक 16 मार्च को सीधे विधानसभा पहुंचेंगे और मतदान करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित छह विधायक विभिन्न कारणों से हिमाचल प्रदेश नहीं गए हैं। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश न जाने वाले छह कांग्रेसी विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने की आशंका बिल्कुल नहीं है। हुड्डा गुट की मानी जाने वाली जुलाना विधायक विनेश फोगाट पारिवारिक कारणों से हिमाचल नहीं गई हैं। 

वहीं चंद्रमोहन बीमारी की वजह से हिमाचल नहीं गए हैं। टोहाना विधायक परमवीर सिंह और पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास बीमार हैं। यह दोनों विधायक पुराने कांग्रेसी हैं, इस वजह से इनके क्रास वोटिंग करने की कोई आशंका नहीं है। बादली से विधायक और हुड्डा गुट के विश्वसनीय माने जाने वाले कुलदीप वत्स के भतीजे की शादी है, इस वजह से वह भी हिमाचल नहीं गए हैं। दरअसल, कांग्रेस की क्रास वोटिंग की आशंका निराधार नहीं है। इससे पहले भी दो बार कांग्रेस क्रास वोटिंग का शिकार हो चुकी है। 

सन 2016 में हरियाणा में दो पदों के लिए हुए चुनाव के दौरान क्रास वोटिंग हो चुकी है और कांग्रेस का जीतता हुआ प्रत्याशी हार गया था। उस समय कांग्रेस के प्रत्याशी वकील आरके आनंद कांग्रेस के 17 में से 14 विधायकों के गलत पेन का इस्तेमाल करने से हार गए थे जबकि कांग्रेस और इनेलो के कुल 37 विधायक थे। सन 2024 में भी ऐसा ही खेल हुआ था। 2024 में बीजेपी के तरफ से कृष्णलाल पंवार तो कांग्रेस के तरफ से अजय माकन उम्मीदवार थे। 

राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपने वोट बीजेपी एजेंट को दिखाए। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इन वोटों को रद्द करने की मांग की मगर वोट रद्द नहीं हुए। नतीजा निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा जीत गए। कांग्रेस विधायकों ने खुलकर क्रॉस वोटिंग की। किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग करके कार्तिकेय शर्मा को वोट दिया और अजय माकन हार गए थे।

Saturday, March 14, 2026

समुद्री यात्रा का मार्ग प्रशस्त करने वाला हेनरी


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इतिहास में पढ़ाया जाता है कि 20 मई 1498 को पहला यूरोपीय नाविक वास्को डी गामा केरल के कोझीकोड जिले के कालीकट पहुंचा था। वह 8 जुलाई 1497 को पुर्तगाल से भारत की खोज में निकला था। भारतीय सभ्यता और अपार धन संपदा की कहानियां यूरोप में काफी प्रचलित थीं। यही वजह है कि यूरोप के लोग भारत में काफी रुचि रखते थे। लेकिन वास्को डी गामा की इस खोज की आधारशिला जिस व्यक्ति ने रखी थी, वह था पुर्तगाल के शासक जान प्रथम और उनकी पत्नी फिलिप्पा का तीसरा पुत्र हेनरी। 

राजकुमार हेनरी को बचपन से ही समुद्री यात्रा और मानचित्रण में गहरी रुचि थी। उसने नाविकों, मानचित्रणकारों और नावों पर यात्रा करने वाले लोगों को संगठित भी किया था। उन्होंने सेउटा पर कब्जा करने के बाद तय किया कि वह समुद्री मार्ग से दक्षिण अफ्रीका के तटीय क्षेत्रों पर अपना प्रभुत्व कायम करेंगे। हेनरी ने अफ्रीका के तटीय क्षेत्र का अन्वेषण शुरू किया, जिसका अधिकांश भाग यूरोपीय लोगों के लिए अज्ञात था। 

उनके उद्देश्यों में पश्चिम अफ्रीकी स्वर्ण व्यापार के स्रोत और प्रेस्टर जॉन के पौराणिक ईसाई साम्राज्य का पता लगाना तथा पुर्तगाली तट पर समुद्री डाकुओं के हमलों को रोकना शामिल था। उस समय यूरोप के अधिकतर नाविक समुद्री यात्रा से बहुत डरते थे। लेकिन हेनरी ने अपनी कुछ समुद्री यात्राओं से नाविकों को प्रभावित किया। उनका मानना था कि ज्ञान और साहस से समुद्र पर विजय पाई जा सकती है। 

इसके बाद समुद्री यात्राओं से नए नए देशों को खोजने का मार्ग प्रशस्त हुआ। हेनरी की मृत्यु 13 नवंबर 1406 को हुई थी, उन्हें शुरू में लागोस के सेंट मैरी चर्च में दफनाया गया था, बाद में उन्हें बटलहा मठ में ले जाया गया, जहाँ उनकी कब्र अभी मौजूद है।

युद्ध के दौरान थोड़ी दिक्कत होती ही है, ऐसे में घबराना नहीं चाहिए


अशोक मिश्र

अमेरिका, इजरायल और  ईरान के बीच पिछले एक पखवाड़े से चल रहे युद्ध ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी युद्ध के दुष्परिणामों को लेकर परेशान है। पेट्रो पदार्थों की सप्लाई बाधित होने से अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी रसोई गैस की किल्लत महसूस की जा रही है। प्रदेश सरकार बारबार कह रही है कि रसोई गैस की कोई कमी नहीं है, लोग परेशान न हों। लेकिन लोगों को सरकार की बात पर भरोसा नहीं है। वह गैस एजेंसी पहुंचकर अपनी बुकिंग कराना चाहते हैं, भरा हुआ गैस सिलेंडर हासिल करना चाहते हैं ताकि उनको खाना बनाने में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। 

कहते हैं कि अच्छी बातों को समाज में फैलने के लिए पैरों की आवश्यकता होती है, लेकिन अफवाहें बिना पैर के ही इतनी जल्दी फैल जाती हैं कि हर किसी को ताज्जुब होता है। लोगों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से यह अफवाह बहुत तेजी से फैली कि युद्ध के चलते भारत को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति नहीं हो रही है। होर्मूज जलडमरूमध्य पर ईरानी सेना का कब्जा होने की वजह से तेल और गैस की आपूर्ति घट गई है, यह बात बिल्कुल सही है, लेकिन हालात अभी इतने भी बदतर नहीं हुए हैं कि रसोई गैस को लेकर परेशान हुआ जाए। लोगों को इस मामले में धैर्य रखना चाहिए। 

उन्हें अपने देश और प्रदेश की सरकारों पर विश्वास करना चाहिए। हरियाणा के कुछ जिलों में गैस एजेंसियों के दफ्तर के सामने बुकिंग कराने वाले लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि सबकी बुकिंग उस दिन नहीं हो सकती है। कुछ लोगों को तो निराश होकर लौटना ही होगा। बुकिंग न करा पाने से निराश लोग भी बातचीत के दौरान इस बात को हवा दे रहे हैं कि रसोई गैस की कमी है। दरअसल, ऐसा लगता है कि कुछ गैस एजेंसियों के संचालकों ने आपदा में अवसर खोज लिया है। 

वह जान बूझकर रसोई गैस की कृत्रिम कमी को दर्शाकर रसोई गैस की कालाबाजारी करने की फिराक में हैं। खबर यह भी है कि हरियाणा में इंडक्शन चूल्हे की बिक्री एकाएक बढ़ गई है। जहां महीने भर में एक लाख-सवा लाख इंडक्शन चूल्हा बिकता था, वहीं अब यह आंकड़ा प्रतिदिन का हो सकया है। स्वाभाविक है कि लोग रसोई गैस की किल्लत को ध्यान में रखते हुए इन चूल्हों से खाना पकाया जा सके। इस तरह के हालात पैदा करने के पीछे इंडक्शन चूल्हा कंपनियों का हाथ भी हो सकता है। 

इंडक्शन चूल्हा बिकने से इन्हीं कंपनियों को फायदा भी तो मिल रहा है। लोगों को रसोई गैस के कालाबाजारियों की चाल को समझना चाहिए और किसी भी प्रकार की दहशत मन में नहीं पालनी चाहिए। अब जब युद्ध चल रहा है, तो थोड़ी बहुत दिक्कत तो होगी ही। इससे घबराना नहीं चाहएि।

बजट में किसानों के लिए सैनी सरकार ने खोल दिया खजाना

अशोक मिश्र

हरियाणा विेधानसभा में सीएम नायब सिंह सैनी ने वित्तमंत्री के तौर पर 2.23 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। उन्होंने बजट को हरियाणा के सर्वांगीण विकास में सहायक बताते हुए महिलाओं, युवाओं, किसानों और उद्योगों के विकास के लिए कई तरह की घोषणाएं की। बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश की जनता की आय में बढ़ोतरी और युवाओं के लिए रोजगार सृजन में सहायक होगा। वित्त मंत्री के रूप में सैनी ने किसानों के लिए विशेष रियायतों और नई योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने घोषणा की कि देसी कपास की खेती की प्रोत्साहन राशि तीन हजार से बढ़ाकर चार हजार रुपये प्रति एकड़ की जा रही है। 

धान को छोड़कर दालें, तिलहन और कपास उगाने वाले किसानों को दो हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा। ऐसा करके सैनी प्रदेश के किसानों को दलहन खेती की ओर विशेष तौर पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि धान की खेती का रकबा कम हो और पानी को बचाया जा सके। दलहन की खेती में पानी की खपत कम होती है। सैनी सरकार ने महिलाओं में उद्यमिता बढ़ाने की भी योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दो हजार महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण प्रशिक्षण देकर ग्रामीण हाट और सीधे बाजार से जोड़ा जाएगा। 

इतना ही नहीं, किसानों को सीधा बाजार देने के लिए प्रदेशभर में ग्रामीण हाट मंडियां स्थापित की जाएंगी ताकि उनकी फसलों को उचित मूल्य और बाजार मिल सके। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिसार व फरीदाबाद में सौ करोड़ रुपये की लागत से मछली मंडियां और करनाल में पचास करोड़ की लागत से मछली प्रसंस्करण इकाई स्थापित होगी। खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आठ नई फूड टेस्टिंग लैब स्थापित होंगी। साथ ही करनाल में आठ करोड़ से एनएबीएल प्रमाणित दूध और खाद्य परीक्षण लैब बनेगी। मछली पालने वाले किसानों के लिए भी बजट में घोषणाएं की गई हैं। 

बजट में मत्स्य पालक किसानों के लिए यमुनानगर, रोहतक व फरीदाबाद में नौ करोड़ से नई मृदा और जल परीक्षण लैब स्थापित की जाएंगी, वहीं बीस करोड़ रुपये से ज्योतिसर और सांपला के मछली बीज फार्मों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। प्रदेश में पशुपालकों को भी राहत प्रदान की जाएगी। उनके पशुओं को होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए आठ नए पशु औषधालय और चार नए राजकीय पशु चिकित्सालय खोले की सरकार ने वायदा किया है। 

हिसार में तीस करोड़ की लागत से हरियाणा पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान केंद्र बनाया जाएगा। उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए दस करोड़ की लागत से सौ पशुओं की क्षमता वाले आधुनिक डेयरी फार्म स्थापित होंगे। वैसे तो सरकार ने बजट में सभी वर्गों का ख्याल रखा है।

सास की क्रूरता भी कम नहीं कर पाई शिवभक्ति


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महिला संत कवयित्रियों में मीरा बाई का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। मीरा बाई ने भगवान कृष्ण की आराधना करके अपने जीवन को सार्थक कर लिया था। ठीक उसी तरह कश्मीर की संत कवयित्री लाल देद का नाम भी जम्मू-कश्मीर में बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता था। उनकी रचनाओं-पदों को वाख कहा जाता है। संत कवयित्री लाल देद को विभिन्न नामों से जाना जाता है। 

उन्हें लल्लेश्वरी और योगिनी कहकर भी संबोधित किया जाता है। कहा जाता है कि श्रीनगर के दक्षिण पूर्व के एक छोटे से गांव में लाल देद का जन्म 1320 में हुआ था। इनके माता-पिता काफी गरीब थे। बारह साल की उम्र में लाल देद का विवाह पंपूर के एक परिवार में हुआ था। 

कहते हैं कि इनकी सास को इनकी शिवभक्ति पसंद नहीं थी। वह इन्हें हर समय प्रताड़ित करने का मौका खोजती रहती थी। आधा पेट भोजन मिलता था, लेकिन इसके बावजूद इनकी शिवभक्ति को खत्म करने में सास को सफलता नहीं मिली। जब इनकी सास शिवभक्ति के मार्ग में अत्यधित बाधक बनने लगी, तो 24 साल की उम्र में इन्हें घर छोड़ दिया। साधना पथ पर निकलने के बाद कुछ लोगों ने लाल देद को मंदबुद्धि कहकर उपहास भी किया क्योंकि यह नग्न घूमने लगी थीं। सूफी संत श्रीकांत के संपर्क में आने के बाद इनकी साधना और निखरती गई। जब इनकी रचनाओं को कश्मीरियों ने सुना, पढ़ा तब उन्हें पता लगा कि लल्लेश्वरी महिला सशक्तिकरण, जातिगत रूढ़ियों और कुप्रथाओं का विरोध  करती हैं। उन्होंने सबको समान समझने की शिक्षा दी। सन 1392 में इस संत कवयित्री की कश्मीर में मृत्यु हो गई।

Monday, March 2, 2026

तुम किसी और की मदद कर देना


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जरूरत के समय किसी की मदद करना और उसे भूल जाना सज्जन व्यक्ति का काम है। इस दुनिया में ऐसे बहुत से लोग जीवन में कभी न कभी मिल जाते हैं जो लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। लेकिन ऐसे लोग बहुतायत में मिलेंगे जो किसी की मदद करने के बाद लोगों के बीच चर्चा करते रहते हैं कि अमुक व्यक्ति की उन्होंने संकट के समय सहायता की थी। 

फ्रैंकलिन बेंजामिन एक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ प्रकाशक थे। वह संपादक होने के साथ-साथ राजनेता और राजनयिक भी थे। उन्हें अमेरिका का संस्थापक होने के भी सौभाग्य हासिल हुआ था। वह अमेरिका के अमीर लोगों में से एक थे। उनका बचपन काफी संकटों में बीता था। जब वह अपने जीवन के शुरुआती दिनों में संकट में थे, तो उन्होंने अपने एक मित्र से कुछ मुद्राएं उधार ली थीं। 

उन दिनों वह एक समाचार पत्र प्रकाशित कर रहे थे। बीमार पड़ जाने की वजह से कई दिनों तक उनका अखबार नहीं निकला था। अखबार से भी बहुत ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने मित्र से उधार मांगने की नौबत आ गई थी। उनके मित्र ने उनकी भरपूर मदद भी की थी। इस बात को काफी दिन बीत गए। एक दिन वह अपने मित्र के पास गए और उसके सामने कुछ मुद्राएं रखकर बोले, मित्र, यह रही तुम्हरी रकम। मित्र ने पूछा, किस बात की रकम।

 फ्रैंकलिन ने कहा कि एक बार मैंने आपसे कुछ मुद्राएं उधार ली थीं। अब मेरे पास पैसा है, तो आपकी रकम लौटाना चाहता हूं। उन्होंने पूरी घटना बताई। तब उनके मित्र ने कहा कि यह रकम तुम अपने पास रखो। जब तुम्हें कोई जरूरतमंद मिल जाए तो तुम उसकी मदद कर देना और रकम वापस मत मांगना। फ्रैंकलिन ने बाद में ऐसा किया भी, लोगों की भरपूर मदद की।

त्यौहार आते ही मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री ने पकड़ा जोर


अशोक मिश्र

होली त्यौहार को पूरे भारत में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है। सर्दियों के बीतने के तुरंत बाद आने वाले इस त्यौहार में खुशियां मानो छलक ही पड़ती हैं। होली के मौके पर घरों में विभिन्न पकवान और मिठाइयां बनाई जाती हैं। तीन-चार दशक पहले लोग मिठाइयां और पकवान घर पर ही बनाते थे। मिठाइयों में उपयोग की जाने वाली अधिकतर सामग्री भी उनके घर में ही उपलब्ध रहती थीं, इसलिए मिलावटी सामान मिलने की गुंजाइश भी बहुत कम रहती थी। उस दौर में दुकानदार भी मिलावट करने से कतराते थे। लेकिन आज इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार दिखाई देती है। ज्यादातर मिठाइयां और अन्य पदार्थ मिलावटी होते हैं। 

दुकानदार मुनाफा कमाने की होड़ में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हैं। कई दुकानों पर तो बासी और फफूंद लगी मिठाइयों को भी बेच दिया जाता है। बेचने वाला इस बात पर ग्लानि नहीं महसूस करता है कि इन बासी और मिलावटी मिठाइयों और पकवानों को खाकर लोग बीमार पड़ जाएंगे। हालात बिगड़ने पर उनकी मौत भी हो सकती है। यही वजह है कि त्यौहार आने से कुछ दिन पहले ही भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने लोगों को सावधानी बरतने के लिए चेतावनी जारी की है। 

तीज-त्यौहारों पर सबसे ज्यादा मिलावटी दूध और उससे बनने अन्य उत्पाद बेचे जाते हैं। होली के अवसर पर मिलावटी पनीर, खोया आदि बिकता है। हरियाणा में भी त्यौहार के मद्देनजर खाने-पीने और मिठाइयों की दुकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जा रहे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर जुर्माना ठोका जा रहा रहा है। इसके बावजूद मिलावटी सामानों की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। सच तो यह है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री के न रुकने का कारण हमारे प्रदेश के बाजार की संरचना और संसाधनों की कमी है। लगभग तीन करोड़ आबादी वाले हरियाणा प्रदेश खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। राज्य में जितने भी खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जाते हैं, उनकी टेस्टिंग रिपोर्ट आने में ही पंद्रह से बीस दिन लग जाते हैं। 

ऐसी स्थिति दुकानदार तब तक अपना मिलावटी माल बेच चुका होता है। लगने वाला जुर्माना भी बहुत ज्यादा नहीं होता है, इसकी वजह से मिलावट का बाजार सरगर्म रहता है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2025 के अंतर्गत मिलावटी पदार्थ खाने से किसी की मौत होने पर आजीवन कैद या दस लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन ऐसे ज्यादातर मामलों को अदालत में साबित कर पाना आसान नहीं है। 

ऐसी स्थिति में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वाले ज्यादातर व्यापारी अदालत से छूट जाते हैं। इसके लिए अगर अलग से फास्ट ट्रैक बनाकर जल्दी-जल्दी मामले निपटाए जाएं तो मिलावट कुछ हद तक रुक सकती है।