Sunday, May 24, 2026

बेकार की वस्तुएं मत लाया कीजिए

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

‘संतन को कहा सीकरी सो काम’जैसी काव्य रचना करने वाले कुंभन दास अष्टछाप के प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। उनका जन्म मथुरा के जमनावतो गांव में 1468 ईस्वी में हुआ माना जाता है। पुराने जमाने के कवि, साहित्यकार और दार्शनिक अपनी रचनाओं में भी अपने बारे में कुछ भी लिखने से परहेज करते थे। ऐसी अवस्था में उनके बारे में बहुत सारी बातें उनके समकालीन लोगों के आधार पर तय करनी पड़ती है। 

कहा जाता है कि वह अपने गांव में खेती करते थे, उसी से परिवार को गुजारा होता था। खेती से कितनी आय होती रही होगी, इसका अंदाजा आज के किसानों को देखकर लगाया जा सकता है। श्रीनाथ जी के मंदिर में यह रोज नए-नए पद गाकर सुनाया करते थे। इनकी पत्नी के अलावा सात पुत्र, सात पुत्रवधुएं और एक विधवा भतीजी रहती थी। एक बार की बात है। राजा मान सिंह वेष बदलकर कवि कुंभनदास से मिलने पहुंचे। 

उस समय वह नहाने के बाद माथे पर तिलक लगाने जा रहे थे। उन्होंने अपनी बेटी को आवाज देते हुए कहा कि बेटी दर्पण दे जाओ, तिलक लगाना है। संयोग से दर्पण बेटी के हाथ से छूटा और गिरकर टूट गया। बेटी ने दर्पण टूटने की बात कही, तो कुंभनदास ने कहा कि कोई बात नहीं किसी बर्तन में पानी भरकर ले आओ। एक टूटे बर्तन में पानी आने पर उन्होंने प्रतिबिंब देखकर तिलक लगाया। 

अगले दिन राजा मान सिंह स्वर्ण जड़ित दर्पण लेकर कुंभनदास के समक्ष उपस्थित हो गए। कुंभनदास ने कहा कि अच्छा तो कल आप ही आए थे। आपका यहां आने का स्वागत है, लेकिन इन बेकार की वस्तुओं को लाने की जरूरत नहीं है। यह सुनकर राजा मान सिंह का हृदय भाव विभोर हो उठा।

अनियमित बिजली कटौती से लोग परेशान, उद्योगों को भारी नुकसान

अशोक मिश्र

दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर भारत में ही पाए गए हैं। इसमें से 26 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी तीस डिग्री सेल्सियस के आसपास है। इतनी भीषण गर्मी में स्वाभाविक तौर पर बिजली की खपत अधिक हो जाएगी। लोग दिन रात पंखे, कूलर और एसी चला रहे हैं। 

गर्मी का हाल यह है कि एसी से भी गर्म हवा निकल रही है। ऐसी स्थिति में यदि बिजली की कटौती हो जाए, तो लोगों को बहुत अधिक परेशानी हो जाती है। राज्य के लगभग हर जिले में अघोषित बिजली कटौती से लोग काफी परेशान हो गए हैं। रात में तो सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। रातों में बिजली कटौती की वजह से लोग सो नहीं पा रहे हैं जिससे दिन में उनके काम बाधित हो रहे हैं। 

बिजली कटौती का कारण पहला तो यह है कि राज्य में जितनी बिजली की मांग है, उपलब्धता उससे कम है। भीषण गर्मी की वजह से लगातार चल रहे ट्रांसफार्मरों को भी राहत देने के लिए विभिन्न इलाकों में बिजली कटौती करनी पड़ती है। यदि थोड़े-थोड़े अंतराल पर बिजली कट न लगाए जाएं, तो ट्रांसफार्मर  और बिजली के तारों के फुंक जाने का खतरा हो जाता है। ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने के अन्य उपाय भी करने पड़ते हैं। 

प्रदेश में बढ़ती गर्मी की वजह बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के साथ ही घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। दोनों बिजली वितरण निगमों में बिजली की आपूर्ति और खपत में भारी बढ़ोतरी हुई है। छह दिनों में बिजली खपत 30 लाख यूनिट से पार पहुंच चुकी है। इन दोनों सब डिविजनों में सबसे ज्यादा बिजली के अघोषित कट लग रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के 11 सर्कलों में पिछले बुधवार को बिजली की सप्लाई बढ़कर 1493.34 लाख यूनिट तक पहुंच गई थी। 

जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे एयर कंडीशनर और कूलर के उपयोग में तेजी आने से लोड लगातार बढ़ता जा रहा है। हरियाणा में गर्मी और धान के सीजन के दौरान बिजली की चरम मांग लगभग 11,000 मेगावाट से लेकर 13,231 मेगावाट (वर्तमान में) तक पहुंच जाती है। राज्य की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 11,000 से 12,000 मेगावाट के आसपास है, और इस मांग को पूरा करने के लिए पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदी जाती है। 

राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत लगभग 1,805 यूनिट है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। यही वजह है कि बिजली विभाग को बार-बार कट लगाने पड़ते हैं। इससे जहां लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं उद्योगों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है।


Saturday, May 23, 2026

टेरेसा ने कहा, क्षमा ही सबसे बड़ा मरहम है

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मदर टेरेसा को रोमन कैथोलिक चर्च ने कलकत्ता की संत मदर टेरेसा कहकर पुकारा था। 9 सितम्बर 2016 को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत की उपाधि से विभूषित किया था। मदर टेरेसा को मानव सेवा के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 

भारत सरकार ने भी उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा था। कहते हैं कि मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (अब मेसीडोनिया में) में हुआ था। मदर टेरेसा ने 1948 को भारत की नागरिकता ग्रहण की थी। इसके दो साल बाद ही उन्होंने कलकत्ता में मिशनरीज आफ चैरिटी की स्थापना की थी। 

एक बार की बात है। वह कलकत्ता की भीड़ भरी सड़कों पर जा रही थीं। उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग महिला सड़क के किनारे कूड़े के ढेर के पास पड़ी है। उसके आसपास से लोग आ जा रहे हैं, लेकिन कोई उसकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। महिला के शरीर पर घाव थे और उसको उस समय बहुत तेज बुखार था। सफेद साड़ी पहने मदर टेरेसा ने उस महिला को हलके से स्पर्श किया। 

बुजुर्ग महिला ने अपनी आंखें खोली और फिर बंद कर ली। मदर टेरेसा उस महिला को अपने निर्मल आश्रम ले आईं। उन्होंने उसे घावों पर मरहम लगाया। उसको खाने को दिया। ममता भरे स्पर्श से महिला की आंखों में आंसू निकल आए। टेरेसा ने उस महिला से पूछा कि क्या बहुत दर्द हो रहा है? 

महिला ने कहा कि नहीं। मुझे दुख है कि मैंने जिस बेटे को पैदा किया, उसने भी मुझे छोड़ दिया। मदर टेरेसा ने कहा कि क्षमा ही सबसे बड़ा मरहम है। उसे क्षमा कर दो। महिला ने अपने बेटे को क्षमा कर दिया। भारत में मदर टेरेसा पर धर्मांतरण के भी आरोप लगाए गए। इन आरोपों में कितनी सच्चाई थी, पता नहीं।

मानसून सीजन में लोगों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद


अशोक मिश्र

इन दिनों पूरे उत्तर भारत में आसमान से आग बरस रही है। दिन के साथ-साथ रातें भी अब गर्म हो चुकी हैं। इसका प्रभाव आम जनजीवन में काफी बुरा पड़ रहा है। हरियाणा में भी दिन का तापमान चालीस डिग्री सेंटीग्रेड से पार चला गया है। लोग अब तो यही कामना करने लगे हैं कि किसी तरह मानसून आ जाए और बरसात होने से लोगों को राहत मिले। लेकिन अभी हरियाणा में मानसून आने में लगभग एक महीने का समय बाकी है। बरसात के दिनों में अलग तरह की परेशानियां लोगों को होती हैं। 

कहीं जलभराव हो रहा है, तो कहीं नालियां जाम हो चुकी हैं जिसकी वजह से घरों, दुकानों और सड़कों पर पानी जमा हो गया है। ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सीएम नायब सिंह सैनी ने दो दिन पहले ही अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि नहरों, नालों, नालियों और सीवरेज से जुड़े जितने भी काम हैं, वह बीस जून तक पूरे कर लिए जाने चाहिए। यदि निर्धारित समय तक किसी भी क्षेत्र में काम पूरे नहीं हुए, तो संबंधित अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानकर उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। 

बरसात के दिनों में लोगों को किस तरह की परेशानी होती है, इस बात को शासन अच्छी तरह समझता है। यही वजह है कि इसी साल जनवरी में ही सीएम सैनी ने बरसात आने से पहले होने वाले कामों को उसी समय से शुरू करने का आदेश दिया था। उस समय दिए गए आदेश पर कितना अमल किया गया, यह तो नहीं मालूम है, लेकिन दो दिन पहले सीएम ने नहरों, नालों और नालियों की सफाई, नालों, नालियों और सीवरेज को दुरुस्त करने का एक बार फिर आदेश दिया था। 

मुख्यमंत्री नायब सिंह ने तो सभी निकाय आयुक्तों और प्रशासन को निर्देश दिए थे कि बीस जून से पहले नाले-नालियों की सफाई कर ली जाए। ताकि राज्य के लोगों को जलभराव की समस्या का सामना नहीं करने पड़े। सीएम सैनी ने कई बार कहा है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट की  सफाई कराई जाए। यदि पिट ऊंचाई पर है, तो उसको नीचा किया जाए। यदि पिट की मरम्मत की जरूरत है, तो तत्काल उसकी मरम्मत की जाए ताकि बरसात के दिनों में पानी का संरक्षण किया जा सके। गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और हिसार कई ऐसे शहर हैं जहां पर थोड़ी सी ही वर्षा में जलभराव की समस्या हर साल लोगों को सहनी पड़ती है। 

हर साल बरसात आने से पहले नालों की सफाई के नाम पर करोड़ोरुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी इन जिलों में रहने वालों को परेशानी का सामना करना ही पड़ता है। हर साल प्रशासन लोगों को भविष्य में किसी किस्म की परेशानी न होने का आश्वासन देता है, लेकिन समय आने पर वही परेशानियां फिर सामने आ खड़ी होती हैं। सीएम सैनी की सक्रियता की वजह से उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार मानसून के मौसम में लोगों को जलभराव आदि समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी।


Friday, May 22, 2026

यदि आदमी कम हों, तो मुझे बुला लेना

चित्र साभार गूगल

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जार्ज वाशिंगटन को संयुक्त राज्य अमेरिका का संस्थापक कहा जाता है। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ चले युद्ध में उन्होंने भाग लिया था। वाशिंगटन का जन्म 22 फरवरी 1732 को वर्जीनिया में हुआ था। इनका अपने माता-पिता के साथ बहुत अच्छा संबंध नहीं था। वाशिंगटन अपने सौतेले भाई लारेंस के काफी करीब थे। वैसे इनके पिता आगस्टीन न्यायाधीश थे, लेकिन वाशिंगटन की शिक्षा-दीक्षा का वैसा प्रबंध नहीं किया जैसा उन्होंने अपनी पहली पत्नी से हुए बेटों का किया था।

 इनकी मां भी झगड़ालू थी। जार्ज वाशिंगटन संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे। पिता की मृत्यु के बाद इन्हें एक फेरी फार्म और दस गुलाम विरासत में मिले थे। राष्ट्रपति बनने के बाद एक दिन वह घोड़े पर बैठकर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि कुछ मजदूर लकड़ी के एक बड़े से लट्ठे को ऊंचाई पर चढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। काफी देर से मजदूर प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें अपने काम में सफलता नहीं मिल रही थी। 

वहीं उनका ठेकेदार खड़ा हुआ मजदूरों पर नाराज हो रहा था। वह उन्हें कामचोर, आलसी कहकर कोस रहा था। यह देखकर जार्ज वाशिंगटन घोड़े से उतरे और ठेकेदार से कहा कि यदि तुम भी आगे बढ़कर मदद करते, तो यह काम कब का खत्म हो गया होता। उसने कहा कि मैं अधिकारी हूं, मेरा काम आदेश देना है। यह सुनकर जार्ज ने मजदूरों की मदद की और लट्ठा ऊपर पहुंच गया। 

जाते समय जार्ज ने उस ठेकेदार से कहा कि भविष्य में यदि एक आदमी कम हो, तो मुझे बता देना, मैं काम करने आ जाऊंगा। मेरा नाम जार्ज वाशिंगटन है। यह सुनकर ठेकेदार बहुत लज्जित हुआ और भविष्य में ऐसा करने की बात कहते हुए माफी मांगी। जार्ज मुस्कुराते हुए अपने रास्ते चले गए।

युवाओं में घटती सहनशीलता समाज के लिए एक चेतावनी

अशोक मिश्र

युवाओं में संयम घटता जा रहा है। वह थोड़ी थोड़ी सी बात पर उत्तेजित हो रहे हैं। इसी उत्तेजना में वह ऐसे कदम भी उठा रहे हैं जिससे उनके जीवन को खतरा पैदा हो रहा है। माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य की किसी बात पर नाराज युवा आत्महत्या तक कर रहे हैं। फरीदाबाद के पल्ला निवासी एक युवक ने आगरा नहर में केवल इसलिए छलांग लगा दी क्योंकि उसकी मां ने बाजार से लाए छोले-भटूरे को खाने से मनाकर दिया था। 

मां का कहना है कि इतनी गर्मी में बाजार से लाए छोले-भटूरे को खाने से तबीयत खराब हो सकती है। इसके बाद युवक घर से निकला और उसने आगरा नहर में छलांग लगा दी। आगरा नहर में छलांग लगाने के बाद परिवार वालों ने पुलिस को फोन किया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने लापरवाही बरती। काफी देर तक गोताखोरों की व्यवस्था नहीं हो पाई। युवक या उसके शव को पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। 

युवक कुछ दिनों से मोबाइल फोन को लेकर परिवार वालों से नाराज था। यह घटना इस बात की बानगी है कि युवाओं में सहनशीलता लगातार घट रही है। इसका कारण पिछले कई दशक से लगातार बढ़ती बेरोजगारी, अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव, अनिश्चित भविष्य और परिजनों के साथ लगातार घटता संवाद आदि है। युवाओं में थोड़ी-थोड़ी बात पर उत्तेजित होने या गुस्सा आने का कारण आधुनिक जीवनशैली, डिजिटल तनाव, मनोवैज्ञानिक बदलाव और सामाजिक दबाव का एक जटिल मिश्रण है। 

जीवन शैली में आए बदलाव ने युवाओं को काफी प्रभावित किया है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया से काफी जुड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट पर तत्काल प्रतिक्रिया आती है। लाइक्स और कमेंट की  भरमार देखते ही देखते हो जाती है। ज्यादातर सोशल मीडिया पर अपना समय बिताने की वजह से एक तरह की अधीरता युवाओं में पैदा होती जाती है। ऐसे में यदि परिवार उनके मन के मुताबिक व्यवहार नहीं करता है, तो वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। आज के युवाओं पर बहुत जल्दी सफल होने, अच्छा करियर बनाने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने का भारी दबाव होता है। 

जब वे अपनी उम्मीदों के अनुसार परिणाम प्राप्त नहीं कर पाते, तो उनके अंदर निराशा और कुंठा जन्म लेती है, जो अक्सर गुस्से के रूप में बाहर आती है। यह गुस्सा कई बार परिवार और खुद युवाओं के लिए घातक साबित होता है। संयुक्त परिवारों के टूटने और एकाकी जीवन की वजह से भी युवाओं में सहनशीलता कम होती जा रही है। सामाजिक दबाव बढ़ने के कारण युवाओं में विपरीत परिस्थितियों या असहमति को स्वीकार करने की क्षमता कम हो गई है। छोटी-मोटी विफलताएं या किसी की बात न मानना उन्हें व्यक्तिगत अपमान जैसा महसूस होने लगता है और वे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।

Thursday, May 21, 2026

सामाजिक उत्थान को समर्पित रहीं मेहरबाई

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

भारत में पारसी समुदाय की मेहरबाई टाटा का नाम बैटमिंटन खिलाड़ी के साथ-साथ महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने वाली महिलाओं में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है। मेहरबाई का जन्म 10 अक्टूबर 1879 में मुंबई में हुआ था। इनके पिता उच्च शिक्षित व्यक्ति थे। 14 फरवरी, 1898 को खूबसूरत मेहरबाई का विवाह जमशेदजी एन. टाटा के सबसे बड़े पुत्र दोराबजी टाटा से हुआ। 

दोराबजी को 1900 में अपनी नवविवाहित दुल्हन को 245.35 कैरेट का विशाल जुबली हीरा उपहार में देने के लिए जाना जाता है, जिसे वह महत्वपूर्ण सार्वजनिक समारोहों में गर्व से पहनती थीं। मेहरबाई ने छोटी उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। बात 1924 को पेरिस में हुए समर ओलंपिक्स की है। दुनियाभर के टेनिस खिलाड़ी वहां जमा हुए थे। खेल के दौरान टेनिस खेलने के लिए जब मेहरबाई टाटा मैदान में उतरीं, तो वहां उपस्थित लोगों की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं। 

मेहरबाई साड़ी पहनकर टेनिस खेलने के लिए मैदान में आई थीं। उन्हें अपने भारतीय पोशाक साड़ी पर गर्व था। जिस चुस्ती फुर्ती के साथ उन्होंने तेज सर्विस की, लोगों ने आश्चर्य से अपनी अंगुली दांतों तले दबा ली। साड़ी पहनकर टेनिस खेल कर मेहरबाई ने दुनिया भर को यह संदेश दिया कि यदि अपने खेल के प्रति जोश और जुनून हो, तो किसी भी खेल में पोशाक कोई मायने नहीं रखता है। 

मेहरबाई टाटा आजीवन समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहीं।  उन्होंने बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके संघर्ष करने से भारतीय समाज में जागरूकता भी आई। ल्यूकेमिया से पीड़ित मेहरबाई टाटा का 18 जून 1931 में निधन हो गया।

तालाबों के रखरखाव और प्रबंधन से भूगर्भ जलस्तर सुधारने की योजना


अशोक मिश्र

नौतपा के आने से पहले ही पूरा उत्तर भारत गर्मी से बेहाल है। गर्मी ने लोगों का जीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। ऊपर से समय-समय पर लगने वाले बिजली कट ने और समस्या खड़ी कर दी है। प्रचंड गर्मी के कारण पानी संकट गहराता जा रहा है। गर्मियों में वैसे भी पानी की खपत बढ़ जाती है। पेयजल की जरूरत से बसे ज्यादा हो जाती है। जलस्तर बहुत तेजी से नीचे जाने लगता है क्योंकि जलदोहन तेज हो जाता है। लोगों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूगर्भ जल का दोहन कई गुना बढ़ जाता है। 

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अगर जल संकट से उबरने में कोई सबसे ज्यादा सहायक होता है, तो वह है तालाब। कभी हमारे देश में तालाब ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा हुआ करते थे। उनकी जरूरतें गांवों के तालाबों से पूरी हो जाया करती थीं। तालाबों से जहां खेतों की सिंचाई होती थी, वहीं पशुओं को भी पेयजल इन तालाबों से ही मिलता था। गांवों में अधिक से अधिक तालाब होने से जलस्तर भी काफी ऊंचा रहता था। लेकिन धीरे-धीरे शहरों में अधिकतर तालाब अतिक्रमण के शिकार हो गए। 

लोगों ने तालाबों को पाटकर वहां निर्माण कर लिए। गांवों या शहरों में जो तालाब बचे हैं, वह उपेक्षा के शिकार हैं। इन्हीं सब स्थितियों को देखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आदेश दिया है कि राज्य के तालाबों की स्थिति को सुधारा जाए। तालाबों के इर्द-गिर्द उगी झाड़ियों और घासफूस को साफ करके वहां बैठने और घूमने लायक व्यवस्था की जाए। वहां सोलर लाइट की व्यवस्था की जाए ताकि वहां आने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार ने तालाबों की मरम्मत व सौंदर्यीकरण के लिए प्रति तालाब दी जाने वाली राशि को पचास हजार से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया है।

हरियाणा में लगभग 20,039 तालाब हैं जिनमें 19,129 ग्रामीण और 910 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें से अधिकांश तालाब गंदे पानी और कचरे के कारण प्रदूषित थे। सैनी सरकार की तत्परता और प्रतिबद्धता के चलते, जल संरक्षण और भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार इनका कायाकल्प करवा रही है। अब तक 6,000 से अधिक तालाबों की सफाई पूरी हो चुकी है। 

 'अमृत सरोवर मिशन' के तहत हजारों तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। हरियाणा सरकार का 'हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण' इनके संरक्षण, मछली पालन, और जल-पुनर्भरण पर काम कर रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गांवों के गंदे पानी को सीधे तालाबों में न छोड़ा जाए। इसके साथ ही बड़े तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि ग्रामीणों के लिए आय का साधन बन सके। इससे प्राप्त राशि का उपयोग तालाबों के रखरखाव में खर्च किया जाना है ताकि तालाब की स्थिति अच्छी रहे और जलस्तर में सुधार रहे।

Wednesday, May 20, 2026

भिक्षुक कहता था, कर भला तो हो भला

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हमारे देश में ही नहीं, लगभग पूरी दुनिया की सभी सभ्यताओं में यह बात कही जाती है कि किसी का बुरा नहीं सोचना चाहिए। जहां तक संभव हो, हर किसी के बारे में अच्छा सोचना चाहिए और अच्छा करना चाहिए। हमारे देश में कहा गया है कि जो व्यक्ति किसी के साथ भला करता है, तो उसका भी भला ही होता है। इस संबंध में एक रोचक प्रसंग है। किसी राज्य में एक भिक्षुक रहता था। 

वह सुबह-शाम भिक्षा मांगकर अपना गुजारा करता था। जब भी वह किसी भी घर से भिक्षा मांगने जाता था, तो वह केवल एक ही बात कहता था-कर भला तो हो भला। इसके अलावा वह कुछ नहीं कहता था। जिसको भिक्षा देनी होती थी, वह आकर उसके भिक्षा पात्र में डाल देता था। 

नहीं तो विनम्रतापूर्वक मना कर देता था।  जिस गांव में वह अक्सर भिक्षा मांगने जाता था, उस गांव में एक महिला रहती थी। वह भिक्षुक के ‘कर भला तो हो भला’ वाले वाक्य पर कहा करती थी कि यह सब बेकार की बातें हैं। मैं ऐसे कई लोगों को जानती हूं जो बुरे हैं, लेकिन उनका ही भला होता है। एक दिन उसने  भिक्षा मांगने पर भिक्षुक को दो लड्डू दिए जिसमें उसने जहर लगा दिया था। 

भिक्षुक उस लड्डू को लेकर अपनी कुटिया में पहुंचा, तो उसने देखा कि एक यात्री थका और प्यासा आया है। उसने दोनों लड्डू उस यात्री को दे दिया। लड्डू खाते ही यात्री की मौत हो गई। राजा के सिपाही उस भिक्षुक को पकड़कर ले गए और राजा के सामने पेश कर दिया। 

भिक्षुक ने लड्डू मिलने की कथा बताई। उस महिला को भी पकड़कर लाया गया। महिला ने उस यात्री को देखा, तो विलाप करने लगी। असल में वह यात्री उसका ही बेटा था, जो परदेस से लौट रहा था। राजा ने उस भिक्षुक को स्वतंत्र कर दिया और महिला को कैद खाने में डाल दिया।

प्रचंड गर्मी में लोग हो रहे बेहाल अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज


अशोक मिश्र

हरियाणा में इन दिनों प्रचंड गर्मी पड़ रही है। कई जिलों में पारा 44 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है। हरियाणा ही नहीं, देश के कई राज्यों में हीटवेव चल रही है। गर्मी के इस कहर का खामियाजा सबको भुगतना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसका असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इससे कृषि उत्पादन और श्रम उत्पादकता में भारी गिरावट आती है। 

किसान गर्मी की वजह से अपने कृषि कार्य नहीं कर पाता है। गेहूं काटने के बाद खाली हुए खेत में आमतौर पर मौसमी सब्जियां आदि उगाकर अतिरिक्त कमाई कर लेता है। लेकिन ज्यादा गर्मी पड़ने की वजह से उसका कार्य बाधित होता है। अत्यधिक तापमान से दुधारू पशुओं (जैसे मुरैना भैंसों और गायों) के दूध देने की क्षमता घट जाती है, जिससे ग्रामीण आय प्रभावित होती है। इन दिनों बिजली की मांग और पानी की खपत बढ़ जाती है। हर घर में पंखा और एसी का उपयोग बढ़ जाता है। 

इससे लोगों को बिजली पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। राज्य में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ जाती है। इसे पूरा करने के लिए सरकार को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है। इन दिनों प्रचंड गर्मी की वजह स्थानीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह बाधित हो रही है। लोग गर्मी की वजह से घर से बहुत कम निकल रहे हैं। बहुत मजबूरी होने पर ही लोग घर से बाहर निकलते हैं। ज्यादातर लोग शाम को ही बाजार आदि जाते हैं जिससे व्यापारियों को काफी आर्थिक नुकसान होता है। 

भीषण लू और उच्च तापमान के चलते सबसे अधिक नुकसान असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को उठाना पड़ता है। इससे असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की उत्पादकता तो प्रभावित होती ही है, उनकी आय भी कम हो जाती है। निर्माण कार्य और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की उत्पादकता कम हो जाती है। दोपहर के समय काम रोकना पड़ता है, जिससे श्रम घंटों का भारी नुकसान होता है। हरियाणा की कृषि और औद्योगिक हब जैसे गुरुग्राम और फरीदाबाद की अर्थव्यवस्था पर इसका सम्मिलित प्रभाव पड़ता है। 

गर्म हवा और तापमान को देखते हुए डॉक्टर भी लोगों को यही सलाह देते हैं कि बारह बजे से लेकर चार बजे तक संभव हो, तो बाहर निकलने से परहेज करना चाहिए। यदि मजबूरी में निकलना ही पड़े, तो घर से ही थोड़ा बहुत ठोस पदार्थ और पानी पीकर ही निकलें। साथ में पानी की बोतल जरूर अपने साथ रखें। शरीर की तरलता बरकरार रखनी चाहिए ताकि लू न लग सके। सिर सहित पूरे शरीर को अवश्य ढककर रखें। इन दिनों उल्टी दस्त, तेज गर्मी की वजह से चक्कर आने, शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याओं से पीड़ित लोगों का सरकारी और निजी अस्पतालों में आना बढ़ रहा है। इससे बचने के लिए घर पर ही बैठना ज्यादा सुरक्षित है।