अशोक मिश्रकाकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने इंडिया ब्लॉक की एक नवंबर को प्रस्तावित रैली को समर्थन देने के ऐलान कर दिया है। सीजेपी के इस समर्थन को केवल एक औपचारिक समर्थन से आगे की बात कही जा रही है। इसके साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सीजेपी आने वाले दिनों में औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा बन सकती है। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि सीजेपी एक कैडर आधारित बड़ी पार्टी नहीं है। उसकी पहचान एक व्यंग्यात्मक, व्यवस्था-विरोधी और खुद को सबसे कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाले आम नागरिक की प्रतीक के तौर पर रही है। यही वजह है कि उसके इस कदम के राजनीतिक मायने वोट प्रतिशत से ज्यादा संदेश और नैरेटिव के स्तर पर निकाले जा रहे हैं।
अगर इंडिया ब्लॉक और कॉकरोच जनता पार्टी एक साथ आ जाएं तो भारतीय राजनीति में एक नई तरह की ऊर्जा और जटिलता दोनों पैदा हो सकती है। सीजेपी युवाओं, खासकर जेन जेड और मध्यम वर्ग के असंतुष्ट युवाओं का दबाव समूह है जो पारंपरिक पार्टी राजनीति से अलग रहकर शिक्षा व्यवस्था की खामियों, परीक्षाओं में लीक, बेरोजगारी और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाता रहा है। वह खुद को राजनीतिक दल नहीं मानता। सीजेपी नागरिक आंदोलन के रूप में काम करने पर जोर देती है। इंडिया ब्लॉक कांग्रेस समेत क्षेत्रीय दलों का गठबंधन है जो सत्ताधारी दल के खिलाफ संगठित विपक्ष की भूमिका निभाने की कोशिश करता है लेकिन आंतरिक मतभेदों, सीट बंटवारे और नेतृत्व के सवालों से समय समय पर जूझता रहता है। दोनों के एक साथ आने का मतलब होगा कि सड़क की युवा ऊर्जा और संसदीय-संगठनात्मक ताकत का मेल। इससे विपक्ष को एक व्यापक जनआधार मिल सकता है जो सिर्फ चुनावी गणित तक सीमित न रहकर मुद्दों पर लगातार दबाव बनाने में सक्षम हो। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सीजेपी निकट भविष्य में एक राजनीतिक दल के रूप में सामने आ सकती है जिस तरह अन्ना हजारे आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी उभरकर सामने आई थी।
काकरोच जनता पार्टी के आम आदमी पार्टी की तरह एक पूर्ण राजनीतिक संगठन में तब्दील होने की संभावना पर बात करें तो दोनों के बनने की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है। हां, दोनों में कुछ समानताएं भी हैं जिनके कारण यह सवाल उठ रहा है। आम आदमी पार्टी का उदय एक बड़े जन-आंदोलन, इंडिया अगेंस्ट करप्शन से हुआ था। उसके पास शुरू से ही अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया जैसे पहचाने हुए चेहरे थे। एक स्पष्ट मुद्दा था भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल, और दिल्ली जैसे एक केंद्र शासित प्रदेश में केंद्रित होकर काम करने की रणनीति थी। संगठन के तौर पर उसने बहुत जल्दी बूथ स्तर तक कार्यकर्ता बनाए, चंदा मॉडल को पारदर्शी बनाया और एक कल्याणकारी मॉडल बिजली, पानी, शिक्षा को अपना मुख्य चुनावी वादा बनाया। काकरोच जनता पार्टी के पास ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं है।
अभी तक उसकी पहचान एक प्रेशर ग्रुप, एक व्यंग्यात्मक आंदोलन और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले समूह की ज्यादा है। उसके पास न तो कोई बड़ा चेहरा है जो राज्य स्तर पर वोट खींच सके, न ही कोई एक स्पष्ट प्रशासनिक मॉडल जिसे वह जनता के सामने रख सके। काकरोच जनता पार्टी को भी अगर आम आदमी पार्टी की तरह बनना है तो उसे एक गंभीर सांगठनिक ढांचे में आना होगा। चुनाव आयोग में पंजीकरण, हिसाब-किताब, बूथ कमेटी और एक ऐसा चेहरा जो बहस में खड़ा हो सके। बिना इसके वह एक मीम पार्टी बनकर रह जाएगी, जो रैली में भीड़ तो बढ़ा देगी लेकिन वोट में नहीं बदलेगी।
इस आधार पर कहा जा सकता है कि सीजेपी के आम आदमी पार्टी बनने की संभावना बहुत ही क्षीण है। एक नवंबर को होने वाली रैली के संदर्भ में सीजेपी और इंडिया ब्लाक के एक साथ आने को लेकर एनडीए में शामिल दल आलोचना भी कर रहे हैं। भाजपा और उसके अन्य सहयोगी दल इंडिया ब्लाक की गंभीरता और विश्वसनीयता को लेकर आलोचना कर रहे हैं। इंडिया ब्लॉक पहले से ही सीट बंटवारे, नेतृत्व और साझा एजेंडा जैसे मुद्दों पर आंतरिक खींचतान से जूझ रहा है। ऐसी स्थिति में एक ऐसी पार्टी जिसका नाम ही काकरोच जनता पार्टी है, को साथ लाने से एनडीए को यह कहने का मौका मिलेगा कि इंडिया ब्लॉक में राजनीतिक गंभीरता कम हो रही है।
उसे भीड़ जुटाने के लिए ऐसे दलों का सहारा लेना पड़ रहा है जिसका कोई खास जनाधार भी नहीं है। यह भाजपा के उस नैरेटिव को भी बल दे सकता है कि विपक्षी गठबंधन विचारधारा नहीं बल्कि सिर्फ मोदी-विरोध के नाम पर बना एक अस्वाभाविक जमावड़ा है। इंडिया ब्लॉक के अंदर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच प्रतिस्पर्धा पहले से है और सीजेपी के शामिल होने से नेतृत्व और एजेंडा तय करने को लेकर और मतभेद उभर सकते हैं। कुछ दल सीजेपी को अपने युवा आधार को चुराने वाला मान सकते हैं जबकि कुछ इसे उपयोगी सहयोगी समझेंगे।



















