बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
मार्क रदरफोर्ड ब्रिटिश लेखक थे। वैसे उनका वास्तविक नाम विलियम हेल व्हाइट था। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की, लेकिन द आटो बायोग्राफी आफ मार्करदरफोर्ड काफी चर्चित रही। समीक्षकों का कहना है कि उनकी विभिन्न रचनाओं में उनके जीवन की कई घटनाएं समाहित की गई थीं।मार्क का जन्म 22 दिसंबर 1831 में इंग्लैंड के बेडफोर्डशायर में हुआ था। बात तब की है, जब रदरफोर्ड युवा थे। उनके मन में आशा और निराशाजनक विचार चलते रहते थे। कभी किसी काम को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाते थे, तो ठीक अगले ही पल वह निराशा में भी डूब जाते थे। एक दिन की बात है। वह समुद्र के किनारे बैठे हुए थे। मौसम भी बड़ा सुहावना था। तभी उनकी निगाह समुद्र में लंगर डाले एक जहाज पर पड़ी। जहाज रदरफोर्ड से ठीक ठाक दूरी पर था। उनके मन में अचानक यह विचार आया कि लंगर डाले जहाज तक तैर कर पहुंचा जाए।
रदरफोर्ड एक अच्छे तैराक भी थे। वह कई बार ऐसे साहसिक कारनामे कर चुके थे। जोश में उन्होंने समुद्र में छलांग लगाई और जहाज की ओर तैरने लगे। देखते ही देखते वह जहाज तक पहुंच गए। जहाज के कई चक्कर भी लगाए। फिर उन्होंने तट की ओर लौटना शुरू किया। लेकिन यह क्या? लौटते समय वह शिथिलता अनुभव करने लगे। सारा जोश गायब हो गया।
उन्हें लगने लगा कि अब वह तट तक नहीं पहुंच पाएंगे और समुद्र में डूब जाएंगे। मन पर निराशा हावी होने लगी। उन्होंने सोचा कि यदि प्रयास नहीं किया, तो डूबना तय है। ऐसी स्थिति में क्यों न प्रयास किया जाए, तो शायद तट तक पहुंचा जा सकता है। निराशा दूर होते ही उन्होंने तेजी से तैरना शुरू किया और अंतत: तट तक पहुंचने में सफल हो गए।









