Tuesday, April 7, 2026

द मदर ऑफ द फ्रीडम मूवमेंट रोजा पार्क्स


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

रोजा लुईज मक्कॉली पार्क्स का नाम अमेरिकी-अफ्रीकी अश्वेत नागरिकों में आज भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। पार्क्स का जन्म 4 फरवरी 1913 को अमेरिका के टस्कागी में एक साधारण परिवार में हुआ था। जीवन यापन के लिए उन्होंने कई तरह के काम किए। बचपन में पार्क्स ने अपनी दादी और मां से रजाई सिलना सीखा था। ग्यारह साल की उम्र में उन्होंने अपनी स्कूल की पोशाक तक सिल ली थी। 

सन 1932 में रोजा ने मोंटगोमरी के रेमंड पार्क्स से विवाह कर लिया जो पेशे से नाई थे। रेमंड उन दिनों सामाजिक सुधार के लिए आंदोलन चलाने वाले संगठन के सदस्य भी थे। इसका प्रभाव रोजा पार्क्स पर भी पड़ा। 1 दिसंबर 1955 की बात है। एक दिन अपने काम से वापस आते समय वह एक बस में चढ़ी और टिकट लेकर अश्वेतों के लिए तय सीट पर बैठ गईं।  

उन दिनों अमेरिका में बसों में श्वेत और अश्वेत लोगों के लिए अलग-अलग सीटें तय थीं। जब श्वेत लोगों की संख्या ज्यादा होने पर उनकी निर्धारित सीटें भर जाती थीं, तो अश्वेतों को अपनी सीट खाली करनी पड़ती थी। उस दिन भी ऐसा ही हुआ। श्वेत लोगों की सभी सीटें भर गई थीं। बस चालक जेम्स एफ. ब्लेक ने एक श्वेत यात्री के लिए पार्क्स से अपनी सीट छोड़ने के आदेश दिया। 

पार्क्स ने सीट छोड़ने से इनकार कर दिया। पार्क्स को गिरफ्तार कर लिया गया। अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय ने बस सेवा का 381 दिनों तक बहिष्कार किया। इस आंदोलन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर सहित कई प्रसिद्ध नेताओं ने भाग लिया। अंत में अदालत ने बसों में किए जाने वाले नस्लीय भेदभाव को असंवैधानिक करार दिया। 

अपने साहस से पार्क्स ने अमेरिकी इतिहास बदल दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने द फर्स्ट लेडी आॅफ सिविल राइट्स (नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और द मदर आॅफ द फ्रीडम मूवमेंट (आजादी लहर की माँ) नामों से पुकारा। 

हरियाणा में हार्ट अटैक से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ना चिंताजनक

अशोक मिश्र

करीब तीन दशक पहले तक लोग बातचीत के दौरान कहा करते थे कि अगर पहले से ही कोई हृदय संबंधी रोग नहीं है, तो तीस-पैंतीस साल की उम्र वाले व्यक्ति को हार्टअटैक नहीं आता है। यह केवल एक मिथक था। अब तो हालत यह है कि पंद्रह सोलह साल तक के बच्चों की हार्टअटैक या हार्ट फेलियर से मौत हो रही है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कोरोना काल के बाद हार्ट अटैक या हार्ट फेल से होने वाली मौत के आंकड़ों में भारी वृद्धि हुई है। कुछ लोगों ने तो यहां तक अफवाह फैलाई थी कि कोरोना से बचने के लिए लगाए गए टीके की वजह से हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। 

हालांकि केंद्र सरकार ने इस बात को सख्ती से नकार दिया था। स्वास्थ्य विभाग की तमाम जांच रिपोर्टों में भी इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी। लेकिन यह बात भी सच है कि हार्टअटैक की वजह से हरियाणा में भी मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों की खराब जीवन शैली और खानपान को माना जा रहा है। इसके अलावा कम उम्र में लोगों का डायबिटीज अथवा ब्लड प्रेशर जैसे रोग का शिकार होना भी हार्ट अटैक का कारण बन रहा है। जैसे-जैसे परिवार में सुख-सुविधाओं का स्तर बढ़ रहा है, लोगों ने पैदल चलना या शारीरिक श्रम करना एक तरह से बंद ही कर दिया है। 

सड़कों पर अब तो साइकिल चलाता हुआ कोई शायद ही दिखता हो। पैदल चलने से भी लोग कतराने लगे हैं। शारीरिक श्रम और देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने की संस्कृति ने लोगों को बीमारियों का घर बना दिया है। पिछले महीने हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश में हार्ट अटैक या हार्ट फेल से होने वाली मौतों का आंकड़ा पेश किया गया था। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में 17,973 (लगभग 18 हजार) युवाओं की मौत हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से हुई है।

 इन आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में हर दिन 18 से 45 वर्ष के करीब आठ युवाओं की जान हार्ट अटैक से जा रही है। इसी वर्ष जनवरी में ही प्रदेश में 391 लोग हार्ट अटैक से अपनी जान गंवा चुके थे। अगर पिछले छह साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्ष 2020 में 2,394 मौतें हुई थीं। साल 2021 में 3,188, 2022 में 2,796, 2023 में 2,886, 2024 में 3,063 और साल 2025 में 3,255 लोग हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर से अपनी जान गंवा चुके हैं। यमुनानगर में पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक 2400 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि गुरुग्राम में 594 और रोहतक में 201 मौतें रिकॉर्ड की गईं।

इसके बावजूद सरकार सरकारी अस्पतालों में हृदय रोगियों के लिए अच्छी व्यवस्था कर पाने में विफल रही है। सरकारी अस्पतालों में दिल की बीमारियों के इलाज के लिए सस्ती और अच्छी सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।

Monday, April 6, 2026

एक पतवार से कहीं नाव चलती है क्या?

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बहुत सारे व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो लक्ष्य तो तय कर लेते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम होता है कि वह लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी होता है कि किसी योग्य व्यक्ति का मार्ग दर्शन मिले। फिर उस व्यक्ति में अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प और समर्पण हो, तो वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। 

यही बात एक संत ने अपने शिष्यों को समझाया था। बात कुछ ऐसी है कि एक दिन एक संत अपने शिष्यों को लक्ष्य के बारे में बता रहे थे। संत के एक शिष्य ने पूछा, गुरुदेव! लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्या करना चाहिए। संत ने जवाब दिया कि जिस प्रकार पक्षियों को उड़ने के लिए दो पंख चाहिए. ठीक उसी प्रकार अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यक्ति को संकल्प और समर्पण चाहिए। 

शिष्य ने पूछा कि संकल्प या समर्पण में से किसी एक से काम नहीं चल सकता है क्या? तब संत ने कहा कि कल हम इस बात का जवाब देंगे। अगले दिन संत अपने शिष्यों को एक नाव पर बैठ गए। जब पतवार चलाने की बारी आई, तो संत ने कहा कि आज मैं नाव खेता हूं। 

उन्हें एक पतवार ली और नाव चलाने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि एक ही पतवार की वजह से नाव वहीं चक्कर काटने लगी। संत के ऐसा करते हुए आधा घंटा बीता, एक घंटा बीता, फिर भी नाव वहीं चक्कर काटती रही। तब एक शिष्य ने कहा कि गुरु जी, एक पतवार से कहीं नाव चलती है? संत ने मुस्कुराते हुए कहा कि तो फिर केवल संकल्प या समर्पण में से किसी एक से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है? 

शिष्यों की समझ में अब बात आ गई थी कि अगर किसी लक्ष्य को हासिल करना हो, तो उसके लिए संकल्प के साथ-साथ समर्पण की आवश्यकता होती है।

जानलेवा साबित हो रही वाहन चलाते समय युवाओं की लापरवाही

अशोक मिश्र

पिछली 27 मार्च को करनाल में नाबालिग कार चालक ने जो कारनामा अंजाम दिया, उससे यह पता चलता है कि आज की युवा पीढ़ी को न तो कानून का भय है, न ही किसी की जान जाने की रत्ती भर फिक्र। 27 मार्च को करनाल स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलिस कर्मी कुलबीर और एक अन्य कर्मचारी के सााथ ड्यूटी कर रहे थे। उन दोनों के सामने एक नई स्विफ्ट गाड़ी आई जिसके शीशों पर काली फिल्म चढ़ी थी और कार का नंबर प्लेट भी गायब था। कुलबीर ने उस गाड़ी को रोकने का इशारा किया, लेकिन कार चालक ने गाड़ी रोकने की जगह पर रफ्तार तेज कर दी और कुलबीर को टक्कर मार दिया। 

नतीजा यह हुआ कि टक्कर लगने से कुलबीर आगे की ओर उछले और कार के बोनट पर लटक गए। चालक काफी दूर तक कुलबीर को बोनट पर लटकाकर ले गया। किसी तरह जान बचाकर कुलबीर बोनट से उतरा। इसी बीच कुछ लोगों ने घटना की वीडियो बना ली। मामले की रिपोर्ट दर्ज होने के सात दिन बाद नाबालिग कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

कहा जाता है कि घटना के वक्त कार में एक लड़की भी थी। नाबालिग के इस आचरण से साफ पता चलता है कि आज की युवा पीढ़ी यानी जेन-जेड को किसी कायदे-कानून की फिक्र नहीं है। उन्हें मालूम है कि यदि उनसे कुछ गलत भी हो गया, तो उनके मां-बाप उन्हें बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। इस तरह के मामलों में दोषी पाए गए कुछ युवाओं को अपने अमीर मां-बाप पर बहुत ज्यादा भरोसा होता है। वैसे भी कई जेन जेड युवाओं को 'हेलिकॉप्टर पेरेंट्स' यानी अत्यधिक सुरक्षा देने वाले माता-पिता ने पाला होता है। 

इससे उनकी आत्म निर्भरता की कमी आ जाती है, लेकिन वह अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी अपने परिजनों पर निर्भर होकर रह जाते हैं। उनके माता-पिता भी अपने व्यवहार से यह एहसास दिलाते रहते हैं कि वे स्पेशल हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वह काफी हद तक लापरवाह और जिद्दी हो जाते हैं। इस वजह से उनमें 'एंटाइटेलमेंट' यानी हर चीज पर हक जताने का भाव पैदा हो जाता है। यही भाव जेन जेड को लापरवाह बना देता है। 

जेन जेड के मामले में अक्सर यह देखा गया है कि उनमें पैदा हुई लापरवाही उनके मानसिक थकान का परिणाम होती है। नई पीढ़ी के सोशल मीडिया और इंटरनेट ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की वजह से इन्हें अगर किसी चीज की जरूरत है, तो वह चीज तुरंत चाहिए। धैर्य की कमी इनके व्यवहार में लापरवाही के रूप में दिखती है। हमेशा आॅनलाइन रहने के कारण, दूसरों के जीवन की तुलना अपने वास्तविक जीवन से करने से यह पीढ़ी चिंता, अवसाद और सामाजिक अलगाव का शिकार हो रही है। यही वजह है कि नई पीढ़ी हर मामले में लापरवाह दिख रही है। सड़क पर वाहन चलाने के मामले में भी।

Sunday, April 5, 2026

लोग कमियां ही कमियां गिना देंगे

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान चाहे जितना भी गुणी हो, लोग उसमें कोई न कोई दोष निकाल ही लेते हैं। यही इंसान की प्रवृत्ति होती है। यदि किसी को खुद के दोष खोजने को कहा जाए, तो वह अपने आपको दुनिया का सबसे अच्छा आदमी ही बताएगा। लोगों को अपने अवगुण और दूसरों में गुण कभी दिखाई नहीं देते हैं। 

एक बार की बात किसी जगह पर एक चित्रकार रहता था। वह बहुत अच्छा चित्रकार था। लोग उसके चित्रों के मुरीद थे। वह कई कला प्रतियोगिताओं में विजेता भी रह चुका था। उसके बावजूद उसके मन में भावना बार-बार घर कर जाती थी कि लोग उसकी कला को किस रूप में लेते हैं, इसका पता लगाया जाए। यदि उसकी कला में किसी प्रकार की कमी है, तो उसको सुधारा जाए। 

एक दिन उसने एक बहुत सुंदर चित्र बनाया और उसे ले जाकर एक चौराहे पर यह लिखते हुए टांग दिया कि यदि कोई कमी रह गई हो, तो बताएं। अगले दिन वह जब उस जगह पहुंचा, तो देखा कि चित्र बदरंग हो चुका था और उस पर लोगों ने कमियां ही कमियां अंकित कर रखी थीं। लोगों ने कमी बताने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती थी। 

चित्रकार दुखी हुआ। उसने यह बात अपने एक मित्र से बताई। उस मित्र ने कहा कि अच्छा एक काम करो, एक चित्र दूसरी जगह लगाकर लिखों कि इस चित्र की कमियों को सुधार दो। चित्रकार ने ऐसा ही किया। दूसरे दिन उसने देखा कि चित्र ज्यों का त्यों था। 

किसी ने उसे सुधारा नहीं था। जबकि यह चित्र पहले की अपेक्षा साधारण किस्म का था। तब चित्रकार को उसके मित्र ने समझाया कि लोग अच्छे भले आदमी में भी हजार कमियां निकाल देंगे, लेकिन अगर उसमें सुधार करना हो, तो कोई कुछ नहीं करेगा।

नहरों, नालियों और नालों की सफाई के लिए सैनी सरकार ने कसी कमर


अशोक मिश्र

मानसून आने में मुश्किल से दो-ढाई महीने ही बचे हैं। मानसून के दौरान होने वाली परेशानियों से निपटने के लिए सैनी सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। वैसे तो सैनी सरकार ने जनवरी महीने में भी संबंधित विभागों से सूखा और बाढ़ राहत से जुड़े कामों की तैयारियां करने का निर्देश दिया था। इसका कारण यह था कि पिछले साल बरसात के दिनों में पंजाब और हरियाणा में बाढ़ से जो तबाही हुई थी, दोनों राज्यों की एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित हुई थी, उसकी याद उन दिनों सीएम सैनी के दिमाग में ताजा थी। 

यही वजह थी कि जब पूरा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहा था, तभी उन्होंने संबंधित विभागों को मानसून के दौरान होने वाली दिक्कतों से निपटने की तैयारियां करने का आदेश दिया था। लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके आदेश को कितनी गंभीरता से लिया, यह तो नहीं पता चला है, लेकिन शुक्रवार को सिंचाई, जनस्वास्थ्य एवं स्थानीय निकाय विभाग के साथ हुई समीक्षा बैठक में सीएम नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर अधिकारियों को चेताया कि वह मानसून आने से पहले ही सभी ड्रेन, नदियों और नालों की सफाई कर लें। 

आबादी क्षेत्र में आने वाले ड्रेनों और नहरों के किनारों को ऊंचा करने के साथ-साथ तटबंधों को मजबूत कर लें। उन्होंने सख्त आदेश देते हुए कहा कि प्रदेश में इस बार मानसून से पहले सभी ड्रेन, नहरों एवं नालों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाए। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के अनुसार नई जल निकासी परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए जाएं ताकि भविष्य में उन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति न बनें। 

पिछले साल पंजाब और हरियाणा में आई बाढ़ की वजह से पैदा हुए जलभराव के चलते किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था। काफी लोग संक्रामक रोगों के शिकार भी हुए थे। बैठक के दौरान अधिकारियों ने सीएम सैनी को बताया कि 87 स्थानीय निकायों में 2655 किलोमीटर लंबाई की 2382 ड्रेनों में से 1116 किलोमीटर लंबी ड्रेनों की सफाई की कार्य कर लिया गया है। 

शेष ड्रेनों का कार्य जून तक पूरा कर लिया जाएगा। जनस्वास्थ्य विभाग की 85 शहरों में 100 किलोमीटर लंबी ड्रेनों की सफाई का कार्य मई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शेष के लिए अप्रैल अंत तक टेंडर पूरे कर लिए जाएंगे। जलभराव की स्थिति में निकासी हेतु 1678 क्यूसेक क्षमता के 839 डीजल पंप, 4466 क्यूसिक क्षमता के 1389 इलेक्ट्रिक पंप तथा 3465 क्षमता के 495 मोबाइल पंप तैयार हैं। 

इस प्रकार प्रदेश में 9609 क्यूसेक क्षमता के 2723 पंप तैयार कर लिए गए हैं। अभी तक जिन ड्रेनों में सफाई का कार्य कर लिया गया है, वह जनवरी में दिए गए निर्देश का नतीजा भी हो सकता है। बहरहाल, सैनी सरकार की सक्रियता को देखते हुए लगता है कि इस बार पिछले साल जैसी कहानी नहीं दोहराई जाएगी।


Saturday, April 4, 2026

युवक बोला, मैं बहरा हूं, बहरा था, बहरा रहूंगा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर मन में सच्ची लगन हो और दूसरों की निराशाजनक बातों पर ध्यान न देने की प्रवृत्ति हो, तो कठिन से कठिन काम किए जा सकते हैं। एक बार की बात है। एक जगह पहाड़ पर चढ़ने की प्रतियोगिता हो रही थी। पहाड़ ऊंचा औ सीधी चढ़ाई वाला था। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले लोग काफी संख्या में थे। 

जब प्रतियोगिता शुरू हुई, तब तक प्रतियोगिता को देखने वालों की बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि इस पहाड़ पर चढ़ना, कठिन ही नहीं असंभव है। तभी प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतिभागियों ने पहाड़ पर चढ़ना शुरू किया। कई प्रतिभागी थोड़ी ही देर में पस्त हो गए। वह पहाड़ का चौथाई हिस्सा भी नहीं चढ़ पाए थे। 

कुछ लोग आधे रास्ते में ही फिसलकर नीचे आ गए। उन्होंने दोबारा चढ़ना शुरू किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। कुछ प्रतिभागी तो ऐसे भी थे, जो लगभग पहाड़ चढ़ चुके थे, लेकिन वह फिर फिसलकर नीचे आ गए। उधर, भीड़ बड़ी जोर-जोर से चिल्लाकर कह रही थी कि प्रयास करना बेकार है। इस सीधी पहाड़ी पर चढ़ना कठिन ही नहीं असंभव है। प्रयास ही मत करो। 

लेकिन एक युवक था कि तीन-चार बार विफल होने के बाद भी उसने प्रयास करना बंद नहीं किया था। अंतत: वह पहाड़ चढ़ने में सफल हो गया। लोगों ने उससे पूछा कि तुम कैसे ऊपर चढ़ गए। तभी एक आदमी ने कहा कि उससे क्या पूछते हो, यह तो बहरा है। 

उस युवक ने पलटकर जवाब देते हुए कहा कि नकारात्मक बातों को न सुनने के लिए मैं बहरा था, बहरा हूं और बहरा रहूंगा। यदि आप लोगों की बातों को मैंने सुना होता, शायद पहाड़ पर चढ़ नहीं सकता था। यह सुनकर सब चुप रह गए।

हरियाणा में पाक जासूस का फैला नेटवर्क, खुफिया एजेंसियां सतर्क


अशोक मिश्र

आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है। इसके पीछे कुछ राष्ट्रों का हित छिपा हुआ है जिसको वह समय-समय पर  हैं। ऐसे ही देशों में पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर है। पाकिस्तान हमेशा भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहता है। वह अपने देश में आतंकियों को प्रशिक्षण देकर भारत में आतंकी कार्रवाई के लिए भेज देता है। उसके एजेंट भारत में आकर नए आतंकी तैयार करने की कोशिश करते हैं। 

हालांकि भारतीय खुफिया एजेंसियां उनके नापाक मनसूबों को सफल नहीं होने देती हैं। हरियाणा में भी पाकिस्तानी एजेंट और आतंकी अपना पैर पसारने की फिराक में रहते हैं। हरियाणा के दो जिलों पलवल और नूंह में एनआईए और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से आठ युवकों को हिरासत में लिया है। इन पर पाकिस्तानी एजेंटों को खुफिया जानकारी देने का शक है। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। हरियाणा में पाकिस्तान के लिए कथित रूप से काम करने वाले इन एजेंटों की जानकारी जम्मू-कश्मीर में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक युवक से पूछताछ के दौरान मिली। 

यह जानकारी मिलने के बाद एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी सक्रिय हुई और हथीन क्षेत्र के पावसर गांव से तीन और नूंह के तावड़ू इलाके से करीब पांच युवकों को हिरासत में लिया गया। इसी बीच जानकारी मिली कि पाकिस्तान से जुड़ा एक जासूस लंबे समय से हथीन और नूंह के कुछ गांवों में सक्रिय था। वह स्थानीय युवकों से संपर्क कर धीरे-धीरे अपना नेटवर्क तैयार कर रहा था। दरअसल, हरियाणा के कुछ जिले पहले भी पाकिस्तानी जासूसों के नेटवर्कके लिए चिह्नित किए जा चुके हैं। 

उनमें पलवल और नूंह खासतौर पर भारतीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हैं। पिछले ही महीने 14 मार्च को गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में महिला सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। ये लोग रेलवे स्टेशन, सैन्य ठिकानों और अन्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी तक पहुंचा रहे थे। पिछले वर्ष 28 सितंबर को क्राइम ब्रांच ने आलीमेव निवासी तौफीक को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस पर भारतीय सूचनाएं पाकिस्तान दूतावास के एक अधिकारी तक पहुंचाने का आरोप था। उसने पाकिस्तानी की यात्रा भी की थी। 

इसके अलावा यूट्यूबर वसीम अकरम को भी कोट क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था, जो कथित तौर पर पाक दूतावास के कर्मचारी दानिश के संपर्क में था। नवंबर महीने में दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन प्रोफेसर गिरफ्तार किए गए थे। इनके खिलाफ आतंकी गतिविधियों में भाग लेने और युवाओं को आतंकी बनने की ट्रेनिंग देने का आरोप था। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इनको गिरफ्तार करके इनके मनसूबों पर पानी फेर दिया था।

Friday, April 3, 2026

राजा ने युवराज को दिया देश निकाला


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

एक सच्चा न्यायाधीश या राजा वही होता है, जो किसी मामले में फैसला करते समय अपना पराया नहीं देखता है। न्याय जल्दी और सच्चा होना चाहिए। एक समय की बात है। किसी राज्य का राजा अपनी प्रजा के बीच काफी लोकप्रिय था। वह अपनी प्रजा की भलाई के लिए हमेशा कुछ न कुछ करने को तैयार रहता था। 

एक दिन की बात है। उसके दरबार में कुछ लोग उससे मिलने आए। उसने उन लोगों को बड़े आदर के साथ बिठाया। उन्हें जलपान कराया। इसके बाद उसने पूछा कि आप लोग किस वजह से मुझसे मिलने आए हैं। एक व्यक्ति यह बात सुनते ही रो पड़ा। राजा ने उस रोते हुए व्यक्ति से कहा कि आप मुझे बताइए कि मेरे राज्य में आपको किस प्रकार का कष्ट है। 

मैं आपके कष्ट को दूर करने का हरसंभव प्रयास करूंगा। राजा की बात सुनकर एक बुजुर्ग ने कहा कि महाराज! अब आपसे क्या कहूं। युवराज के कार्यों से राज्य के काफी लोग दुखी हैं। परेशान हैं। बुजुर्ग की बात सुनकर राजा ने पूछा कि युवराज ऐसा क्या करते हैं जिसकी वजह से हमारी प्रजा को दुख होता है। 

उस बुजुर्ग ने कहा कि महाराज! रोज शाम को युवराज नदी के किनारे जाकर बैठ जाते हैं। उधर से गुजरने वाले छोटे बच्चों को नदी में फेंककर अपना मनोरंजन करते हैं। बच्चे जब बचाने के लिए चिल्लाते हैं, वह हंसते हैं। काफी बच्चे डूबकर मर गए हैं। राजा ने कहा कि आप लोग घर जाइए, कल से ऐसा नहीं होगा। 

राजा जब राजमहल पहुंचा, तो उसने युवराज को बुलाया और कहा कि तुम्हें डूबते बच्चों को देखकर खुशी मिलती है। तुम युवराज रहने के लायक ही नहीं हो। भय से कांपते हुए युवराज ने दोबारा ऐसा करने का वचन दिया, लेकिन राजा नहीं माने और युवराज को देश निकाला दे दिया।

कड़े फैसले लिए बिना हरियाणा में कभी साफ नहीं होगी यमुना


अशोक मिश्र

जब भी दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में चुनाव होते हैं, यमुना की गंदगी का मुद्दा जरूर उठता है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में यमुना नदी की स्वच्छता को लेकर खूब चर्चा हुई थी। आप सरकार के दौरान झाग वाली यमुना को लेकर खूब आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए थे। 

वैसे तो यमुना नदी आज भी दिल्ली और हरियाणा में साफ नहीं है, लेकिन हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में बहने वाली यमुना को स्वच्छ बनाने का मन बना लिया है। यमुना नगर के कलेसर जंगल से लेकर पलवल के हसनपुर के बीच 320 से 328 किमी लंबाई में बहने वाली यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का फैसला सैनी सरकार ने लिया है। इसके लिए एक विशेष मिशन चलाने पर फैसला लिया गया है। 

प्रदेश सरकार की योजना है कि वर्ष 2926-27 के बीच यमुना में गिरने वाले सभी नालों के जल का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित किया जाए जिससे नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त किया जा सके। इसके लिए यमुना नदी में मिलने वाले सभी नालों की मैपिंग कराई जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि तीन महीने के भीतर सभी नालों और प्रदूषण पैदा करने वाले बिंदुओं की पहचान की जाए ताकि यमुना नदी को पुराने स्वरूप में लौटाया जा सके। हरियाणा में 463 एमएलडी तक बिना ट्रीटमेंट किया हुआ गंदा पानी यमुना में गिराया जा रहा है। 

हरियाणा में इन दिनों 90 एसटीपी काम कर रहे हैं। इन सीवेट ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 1518 एमएलडी है। इनमें से 62 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी केवल यमुना में मिलने वाले जल को शोधित करने में ही लगे हुए हैं। लेकिन यह सभी एसटीपी मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। कुछ एसटीपी की कार्य क्षमता आंशिक है। बाहशाहपुर ड्रेन क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में तो अभी एसटीपी लगाए ही नहीं गए हैं। यही वजह है कि 463 एमएलडी प्रदूषित जल यमुना में मिलाया जा रहा है। इन हालात को देखते हुए सरकार ने सभी खराब एसटीपी की तुंरत मरम्मत करने का फैसला लिया है। 

इस कार्य में नई क्षमता वाली एसटीपी को जोड़ा जाएगा ताकि हरियाणा में बहने वाली यमुना नदी में मिलने वाले जल को प्रदूषण रहित बनाया जा सके। प्रदेश में ड्रेन नंबर छह समेत कई ड्रेन और 117 औद्योगिक इकाइयां यमुना नदी में प्रदूषित जल डाल रही हैं। इन्हें सरकार ने चिह्नित किया है। इन औद्योगिक इकाइयों सहित नालों से होकर यमुना में मिलने वाले प्रदूषित जल को रोकने के लिए अब कड़े कदम उठाए जाएंगे। अब औद्योगिक इकाइयों को एसटीपी से जोड़ना  अनिवार्य किया जाएगा। 

यमुना नदी में रासायनिक कचरा डालने या बहाने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अवैध डिस्चार्ज पर इन इकाइयों पर जुर्माना लगाने या बंद कर देने का भी प्रदेश सरकार ने फैसला किया है। यमुना नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिए कड़े फैसले लेने पर सरकार को मजबूर होना पड़ेगा।