अशोक मिश्र
महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में हुआ था। जब उनकी मां महामाया अपने नैहर देवदह जा रही थीं, तभी रास्ते में उन्हें प्रसव पीड़ा हुई और लुंबिनी में बुद्ध का जन्म हुआ। गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। वह शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के पुत्र थे।चूंकि बुद्ध के जन्म के कुछ ही दिन बाद महामाया की मृत्यु हो गई थी, तो उनका पालन-पोषण उनकी मौसी और राजा शुद्धोधन की दूसरी पत्नी महाप्रजावती गौतमी ने किया था। इस वजह से वह गौतम कहलाए। बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद तथागत निरंतर यात्रा पर ही रहते थे। केवल वर्षाकाल में ही एक जगह रुकते थे। एक बार की बात है। महात्मा बुद्ध प्रवचन दे रहे थे। उनके पास एक व्यक्ति आया।
वह बहुत ही क्षीण दिख रहा था। महात्मा बुद्ध ने उससे पूछा कि तुम इतने क्षीण क्यों हो? उस व्यक्ति ने उदास मन से जवाब दिया, महात्मन! मैं बहुत गरीब हूं। मेरे पास रोजी-रोटी का भी कोई जरिया नहीं है। समय पर सही भोजन नहीं मिलने की वजह से मेरा शरीर क्षीण हो गया है।
कुछ देर सोचने के बाद महात्मा बुद्ध ने कहा कि यदि तुम अपने एक कान मुझे दे दो, तो मैं दो हजार मुद्राएं तुम्हें दिला सकता हूं। उस व्यक्ति ने कहा कि मैं आपको अपने कान कैसे दे सकता हूं। महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और बोले, यदि तुम अपनी एक आंख दे दो, तो मैं पांच हजार मुद्राएं दे दूंगा।
उस व्यक्ति ने आंख देने से भी मना कर दिया। फिर बुद्ध ने दस हजार मुद्राओं में हाथ देने को कहा, लेकिन उसने इस बार भी मना कर दिया। तब बुद्ध ने कहा कि इतना अनमोल शरीर लेकर भी तुम अपने को गरीब कहते हो। यदि तुम मेहनत करो, तो तुम गरीब नहीं रहोगे। यह सुनकर व्यक्ति ने मेहनत करने का वचन दिया और अपने घर चला गया।




