Thursday, May 28, 2026

बांस अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को अपने किए गए कार्यों का परिणाम हासिल करने के लिए धैर्य रखना चाहिए। कुछ काम ऐसे भी होते हैं जिनके परिणाम काफी देर से दिखाई देते हैं। इससे कुछ लोग निराश हो जाते हैं और काम करना छोड़ देते हैं। किसी नगर में एक व्यक्ति रहता था। 

उसने जीवन भर काफी प्रयास किया, लेकिन उसे अपने काम में सफलता नहीं मिली। वह इस बात से निराश हो गया। निराशा के क्षणों में उसने घर छोड़ दिया और एक जंगल में जाकर रहने लगा। उसने अपने को पूरी तरह नकारा आदमी मान लिया था। संयोग से कुछ दिनों बाद जंगल में ही रहने वाले एक साधु से उसकी मुलाकात हुई। उस आदमी ने साधु को सारी बात बताई और पूछा कि आप एक भी कारण बताएं जिससे हार न मानूं। 

साधु ने धैर्य पूर्वक उस निराश व्यक्ति की बात सुनी। साधु ने निराश व्यक्ति को सामने की ओर लगे दो पेड़ों की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम सामने उगे फर्न और बांस के पेड़ को देख रहे हो? उस व्यक्ति ने कहा कि हां, मैं देख रहा हूं। फर्न का पेड़ काफी छोटा है, लेकिन बांस का पेड़ काफी लंबा है। तब साधु ने कहा कि मैंने इन दोनों पेड़ों के बीज को आज से पांच साल पहले एक साथ ही बोया था। 

दोनों को खाद और पानी समय-समय पर देता रहा। फर्न का पौधा कुछ ही दिनों बाद जमीन फाड़कर ऊपर आ गया। लेकिन बांस से कोई पौधा नहीं फूटा। लेकिन मैं लगातार बांस के पौधे को पानी देता रहा। चार साल बाद बांस से अंकुर फूटा और एक साल में ही वह फर्न से भी बड़ा हो गया। 

निराश व्यक्ति ने कहा कि यह कैसे हो गया? तब साधु ने कहा कि बांस का बीज बोये जाने के बाद ही अंकुरित हो गया था, लेकिन वह जमीन के नीचे ही अपनी जड़ों को मजबूत कर रहा था। तुमने भी अब तक अपनी जड़ों को मजबूत किया है। हो सकता है कि अब तुम्हें सफलता मिल जाए। यह सुनकर निराश व्यक्ति समझ गया कि उसे क्या करना है?

पाक का हरियाणा में आतंक की नर्सरी तैयार करने का मनसूबा नाकाम


अशोक मिश्र

आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है। इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी भारत है क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान अपने यहां आतंकी संगठनों को प्रश्रय देकर भार
त के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए उकसाता रहता है। वह अपने देश में आतंकियों को न केवल ट्रेनिंग देता है, बल्कि हथियार उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक मदद मदद भी प्रदान करता है। पाकिस्तान की सीमा से सटे होने की वजह से जम्मू-कश्मीर और पंजाब को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। 

पंजाब का पड़ोसी राज्य होने की वजह से हरियाणा में भी छिटपुट आतंकी घटनाएं होती रहती हैं। यह भी सही है कि हरियाणा में सीधे तौर पर किसी स्थानीय या पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन की सक्रियता या मजबूत आधार देखने को नहीं मिला है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में छिपे बैठे आतंकी भागकर जरूर हरियाणा में आते हैं, लेकिन राज्य पुलिस और खुफिया विभाग की अति सतर्कता की वजह से उन्हें अपने मनसूबों में किसी प्रकार की कामयाबी नहीं मिली है। 

हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, राज्य में जैश-ए-मोहम्मद (खीट) और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय और खालिस्तानी आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल और नेटवर्क समय-समय पर सक्रिय पाए गए हैं। एनआईए ने सिरसा महिला थाने पर 25 नवंबर 2025 को हुए ग्रेनेड हमले के बारे में पंचकूला स्थित एनआईए अदालत में मंगलवार को चार्ज शीट पेश किया है। चार्ज शीट से पता चलता है कि पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी हरियाणा में आतंकियों की नर्सरी तैयार करने का प्रयास कर रहा था। 

लेकिन सिरसा में महिला थाने पर ग्रेनेड हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और हरियाणा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करके आतंकियों के मनसूबों पर पानी फेर दिया था। हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस के एक संयुक्त आॅपरेशन के दौरान फरीदाबाद से 350 किलो आरडीएक्स, दो एके 47 राइफल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए थे। हरियाणा में आतंक संबंधी मामलों पर नियंत्रण के लिए सैनी सरकार एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड का गठन करने जा रही है। 

एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड की नीति 1 जून से प्रदेश में लागू हो सकती है। प्रदेश में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड के सक्रिय होते ही आतंकियों की रही-सही कमर भी तोड़ दी जाएगी। हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल ने बताया कि मुख्यमंत्री और पुलिस विभाग द्वारा तैयार नई नीति के अनुसार एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड का समूचा स्टाफ ट्रेंड, सभी संसाधनों से युक्त और एमएचए के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगा। राज्य में एटीएस का एक पुलिस थाना पंचकूला में और एक पुलिस थाना गुरुग्राम में बनाया जाएगा, जहां सभी टेरर संबंधी केसों को भेजा जाएगाष फिलहाल ऐसे मामलों को एसटीएफ और जिला पुलिस देख रही है।

Wednesday, May 27, 2026

तोता बोला, गुरु मिले तो बंधन छूटे


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गुरु के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती है। अज्ञानता का बंधन भी नहीं कटता है। सच्चा गुरु जीवन को सार्थक बना देता है। इस संबंध में एक बहुत ही रोचक कथा है। एक पंडित रोज अपने राज्य की रानी को कथा सुनाने जाया करता था। रानी उस पंडित पर बहुत विश्वास करती थीं क्योंकि पंडित काफी पढ़ा-लिखा और सरल स्वभाव का था। 

वह जब भी कोई कथा या प्रसंग सुनाता था, तो वह अंत में यही कहता था, राम कहे, तो बंधन टूटे। रानी के घर में  एक तोता पला हुआ था। वह भी इंसान की तरह बोलना जानता था। जब पंडित कहता कि राम कहे, तो बंधन टूटे। तभी तोता बोल उठता था, यो मत कहो रे पंडित झूठे। पंडित उसकी बात से बहुत परेशान होता था। वह उसकी बात समझ नहीं पाता था। 

एक दिन पंडित ने तोते की चर्चा अपने गुरु से की। गुरु जी तोते के पास पहुंचे और बोले, तुम यह क्यों कहते हो कि यो मत कहो, रे पंडित झूठे। तोते ने कहा कि पहले में स्वतंत्र रहता था। एक दिन एक गुरुकुल के पास की पेड़ पर बैठा था कि गुरुकुल के एक आचार्य ने मुझे पकड़ लिया। उसने मुझे पिंजरे में डाल दिया। उसने मुझे कुछ श्लोक भी रटवाए। मुझे बोलना सिखाया। 

फिर एक दिन नगर के व्यापारी ने मुझे देखा, तो उसने आचार्य को पैसा देकर मुझे खरीद लिया। अब मैं चांदी के पिंजरे में कैद हो गया। कुछ दिन बाद व्यापारी ने मुझे रानी को भेंट कर दिया, तो मैं सोने के पिंजरे में आ गया। अब आप बताएं कि राम कहे, तो बंधन टूटे कहां सच साबित हुआ। गुरु जी ने कहा कि कल तुम अपनी सांस रोककर यों ही पड़े रहना। अगले दिन रानी ने देखा कि तोता हिल डुल नहीं रहा है, तो उन्होंने समझा कि तोता मर गया है। उन्होंने तोते को निकालकर बाहर रख दिया। तोता मौका देखकर आकाश में उड़ गया और बोला, गुरु मिले तो बंधन छूटे।

डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से आमजनता, उद्योगपति परेशान


अशोक मिश्र

सोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई। इससे पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई। दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बढ़ोतरी है। दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये हो गई है। डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हो गए हैं। 

महंगाई दिनोंदिन बढ़ रही है। डीजल पेट्रोल की कीमतों में इजाफा होने से परिवहन महंगा हो गया है। थोड़ी दूरी के लिए जहां लोगों को दस रुपये खर्च करना पड़ता था, उतनी ही दूरी के लिए अब पंद्रह रुपये देने पड़ रहे हैं। महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीबों की जेब पर पड़ा है। उनकी कमाई तो बढ़ी नहीं, लेकिन सब्जी, दाल, आटा, चावल से लेकर मसाले तक महंगे हो गए हैं। 

दूध के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, उस पर मिलावटी दूध, दही और छाछ बेचे जा रहे हैं।  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण ईंधन के दाम बढ़े हैं। इसके प्रभाव से हरियाणा में भी ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है जिससे रोजमर्रा की चीजों, सब्जियों और अनाज की ढुलाई लागत बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में सब्जियों से लेकर राशन, फल और मसाले आदि महंगे हो गए हैं। रसोई गैस में पहले से ही आग लगी हुई है। 

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत एक हजार रुपये पार हो चुकी है। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत भी लगभग तीन हजार रुपये प्रति सिलेंडर के आस पास पहुंच गई है। इसलिए होटल, रेस्त्रां और ढाबों में खाना काफी महंगा हो गया है। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। डीजल महंगा होने से खेतों की जुताई, सिंचाई (डीजल पंप) और फसलों को मंडियों तक ले जाने का खर्च काफी बढ़ गया है।  खेतों की सिंचाई के लिए अब किसानों को अपनी जेब से काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इन दिनों मंडियों में विभिन्न अनाज की खरीद हो रही है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने से किसानों को अपने घर से मंडी तक अनाज ले जाने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। 

ऐसी स्थिति में अनाजों का समर्थन मूल्य तो नहीं बढ़ा, लेकिन अनाज की लागत बढ़ गई। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले दस दिनों में चौथी बार डीजल पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह से किसानों में ही नहीं, आम जनता में भी काफी रोष पनप रहा है। लोगों का कहना है कि उनकी आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन लगातार महंगाई से घरेलू बजट बुरी तरह बिगड़ गया है। हरियाणा के उद्योगपतियों में भी महंगाई को लेकर काफी रोष है। उनका बजट बिगड़ने लगा है। कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसी स्थिति में उत्पादन लागत को काबू में रखना उनके लिए बहुत भारी पड़ रहा है।

Tuesday, May 26, 2026

‘सुबह होती है’

सन 1968 में मास्को में खींची गई मानव जी की तस्वीर

दिवंगत श्री रामेश्वर दत्त मानव

प्रात: उठ दुनिया जगती है।
पक्षी का कलरव होता है
फूलों का उत्सव होता है
भ्रमरों का गुंजन होता है
सब अपने कामों में लगते
मै भी बिकने चल देता हूं
शोषण की तपती भट्टी में
जलने सिकने चल देता हूं
कभी एक दिन को मैं बिकता
कभी एक हफ्ते बिकता हूं
कभी जरा महंगे बिकता हूं
कभी जरा सस्ते बिकता हूं
मै बिकता, मेरी मेहनत बिकती
इज्जत बिकती, अस्मत बिकती
मै क्या मेरी किस्मत बिकती

जी हां हम इंसान नही हैं
जी हां, हम भी चीज हो गये
फिर भी हमें क्रय नहीं करते
हम इतने नाचीज हो गये
एक पहर दिन बीत गया है
लेकिन कोई खरीदार न आया
अच्छा माटी के मोल खरीदोगे
बाबू क्या मुझे खरीदोगे
मैं अपने को बेच रहा हूं
बोलो क्या मुझे खरीदोगे।

जी हां मैं आदम का प्यारा
हब्बा के आंखों का तारा
परमेश्वर के पुत्र लाड़ले
ब्रम्हा का मैं गढ़ा संवारा
दुनिया आज बनी बाजार
चलता तेजी से व्यापार
रुपये से आदान प्रदान
दे दो रुपया लो ईमान

कविता कला नृत्य संगीत
प्रेमी प्रेयसी मन के मीत
नाता रिश्ता जग की रीत
बिना अर्थ के जुड़े न प्रीत
सब कुछ व्यर्थ निर्रथक बात
प्यारे करो अर्थ की बात

सर्वे:गुणा :कंचनमा श्रयन्ति
सुजना: रुदन्ति मूर्खा: हसंति

जिसके सोना उसकी चांदी
वर्ना बस समझो बर्बादी
आज रुपया सबका माप
चाहे हम हों चाहे आप
रुपया हो तो पुण्य खरीद
पापी होकर पुण्य खरीद
ज्ञान, कल्पना, सुख और आशा
बिकता है सब सरे बाजार

अर्थपूर्ण हैं नैन सभी के
अर्थपूर्ण हैं बैन सभी के
अर्थपूर्ण हैं सैन सभी के
अर्थपूर्ण हर एक इशारे
पहुंचो ऊंची जहां दुकान
और फीके हों पकवान
और खरीदो वेद कुरान
दे दो रुपया लो ईमान
अच्छा माटी के मोल खरीदोगे
बाबू क्या मुझे खरीदोगे।
मैं अपने को बेच रहा हूं
बोलो क्या मुझे खरीदोगे।

एक बार जब बिके हरिश्चन्द्र
हो गयी उनकी अमर कहानी।
रंगे गये पन्नों पर पन्ने
छोड़ गये वो अमर निशानी
धर्म ग्रंथ ने कहा धन्य हो
राजा हरिश्चन्द्र की जय हो
सत्य मार्ग पर बिकने वाले
राजा हरिश्चन्द्र की जय हो
उनकी विक्रय कथा अमर हो गयी

उनकी कथा हुई व्यापकतम
जन मन गन की व्यथा हो गयी
मै और मेरे अगणित भाई
रोज बिके पर किसने देखा
किसके मस्तक पर है आयी
चिंताओं की अविकल रेखा
कौन कहेगा कथा हमारी
कौन सुनेगा व्यथा हमारी
हम पापी गरीब जो ठहरे
कहने वाले हो गये गूंगे
सुनने वाले हो गये बहरे

शैव्या ने जब आंचल फाड़े
और रोहित को कफन ओढ़ाये
क्षीरोदधि में प्रलय मच गयी
दौड़े हुए स्वयं प्रभु आये
मेरी भी नारी ने अपने
बिना कफन के पूत बहाये
बिलख बिलख रोयी चिल्लायी
किन्तु नहीं परमेश्वर आये।
हम भक्तन के भक्त हमारे
प्रभु नहीं आये भक्त पुकारे
एक बार जब द्रुपद सुता की
दु:शासन ने खींची साड़ी
स्वमं चीर में समा गये प्रभु
बच गयी लाज चकित हुए प्राणी

देख असंख्यों दुपद सुता को
दु:शासन ने नग्न कर दिया
दुर्योधन हो रहा मगन
धर्मराज को भग्न कर दिया
डेढ़ हाथ की ओढ़नी ओढ़े
स्तन ढकै कि घूंघट काढ़े
अंगनैया में जेठ खड़े हैं
और ड्यौढ़ी पर सासुर ठाढे
इनको हे भगवान निहारो
ओ धन वालों मुझे खरीदोगे।
मैं अपने को बेच रहा हूं
बोलो क्या मुझे खरीदोगे।

सुनो स्वैद हमारे रक्त से ही
बस तुम्हारी जि़न्दगी है
अरे ओ पापी तुम हमारा
रक्त पीकर जी रहे हो
सुरा कामिनी कंचन नहीं
जीवन कहाता
श्रमफल छीनकर जीना
नहीं जीवन कहाता
रहे जो सर्द गरमी में
रहे गर्म सर्दी में
उसे कुछ इस करीने से
हमीं ने तो बनाया है
हमारी कला देखोगे
जरा देखो अजंता में
ऐलोरा में जरा घुसिये
अरे कुछ सांस तो रोको
यह कितनी भावमय मुद्रा
सरस यूं प्रेम की कविता
प्रस्तर में कि मानो
प्रेम का आवेश होता है
अभी ये बोल देंगे
यह अहसास होता है
कला श्रमजीवियों के
कृत्य से अमरत्व पाती है।
मैंने हिम किरणों से पूछा
तुमने कहीं तपन देखी है
हिम किरणें सकुचाकर बोलीं
जहां गये शीतलता पायी
तपन किसे कहते है बतलाना
मैंने सूरज से पूछा तुमने
कही अंधियारा देखा है
और सूरज के बोल न फूटे
विस्मित होकर वह बोला
मेरी असंख्य किरणों ने
जहां गयी उजियारा देखा
अंधियारा किसे कहते है बतलाना
मैने अपनी पत्नी से पूछा
तुमने सुख देखा है
विस्मित होकर बोली
नैहर देखा, सासुर देखा, सुख क्या है देख न पायी
मै बोला परदेस चला
दूर देश को मै जाउंगा कुछ दिन वहां रहूंगा
लेकिन सुख झोली में भर लाउंगा।
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मेरे पिता दिवंगत रामेश्वर दत्त ‘मानव’ की वर्ष 1965 में प्रकाशित लंबी कविता ‘सुबह होती है’ के कुछ अंश

सौंदर्य तो एक दिन मिट जाएगा, गुण रहेंगे

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जब संपूर्ण प्रकृति चिरस्थायी नहीं है तो फिर किसी व्यक्ति, वस्तु या प्रकृति की सुंदरता स्थायी कैसे हो सकती है। यह प्रकृति हमेशा से परिवर्तन शील रही है, भविष्य में भी रहेगी। ऐसी स्थिति में किसी को अपने रूप और सौंदर्य का अभिमान नहीं करना चाहिए। 

एक बार की बात है। चंद्रगुप्त और चाणक्य कहीं जा रहे थे। कहा जाता है कि चंद्रगुप्त बहुत ही सुदर्शन थे। उनके रूप की प्रशंसा करते हुए कविगण नहीं अघाते थे। अपने रूप पर चंद्रगुप्त को भी थोड़ा बहुत अभिमान था। वहीं चाणक्य असुंदर थे। रंग भी श्यामवर्ण था। ऊपर से संघर्ष ने उनकी काया को थोड़ा बहुत क्षीण भी कर दिया था। जब किसी काम के लिए दोनों एक साथ निकलते थे, तो लोग चंद्रगुप्त को ही देखते रह जाते थे। 

एक दिन की बात है। किसी समस्या पर विचार विमर्श करते हुए चाणक्य और चंद्रगुप्त वाटिका में टहल रहे थे। उसी समय चंद्रगुप्त ने कहा, गुरुदेव! आप में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आप जैसा विद्वान शायद ही कोई हो, लेकिन यदि भगवान ने आपको रूप दिया होता तो कितना अच्छा होता। चाणक्य समझ गए कि चंद्रगुप्त को अपने रूप का अभिमान हो गया है। 

चंद्रगुप्त को राजा भी चाणक्य ने बनाया था। मुंह से बात निकलने के बाद चंद्रगुप्त भी समझ गए कि उन्होंने गलत बात कह दी है। चाणक्य ने सेवक को बुलाकर मिट्टी और सोने के पात्र में पानी लाने को कहा। थोड़ी देर बाद जब चंद्रगुप्त को प्यास लगी, तो चाणक्य ने मिट्टी के पात्र का जल पीने को दिया। 

पानी पीकर चंद्रगुप्त ने कहा कि इस पात्र का जल मीठा और ठंडा है। उसके बाद स्वर्ण पात्र का जल उन्हें पीने को दिया गया। चंद्रगुप्त ने कहा कि इस पात्र का जल कोई विशेष नहीं है। तब चाणक्य ने कहा कि पात्र की खूबसूरती से जल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। गुणों का प्रभाव ही मायने रखता है। यह सुनकर चंद्रगुप्त ने लज्जा से अपना सिर झुका लिया।

धन संपत्ति का लालच परिवार के सदस्यों की जान का बना दुश्मन

अशोक मिश्र

हरियाणा में रहने वाले लोगों के पारिवारिक प्रेम और भाईचारे की मिसाल सदियों से दी जाती रही है। कुटुंब और गांव समाज के लोग एक दूसरे से मिलजुल कर रहते थे। गांवों में भाईचारा कायम रहता था। परिवार भी बड़े होते थे। संयुक्त परिवार होने की वजह से लोगों का आपस में प्रेम बना रहता था। दादी, दादा, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ फूफा और चचेरे भाइयों में बहुत प्रेम हुआ करता था। 

मजाल है कि कोई बाहरी आदमी परिवार के किसी सदस्य को आंख दिखाकर सकुशल चला जाए। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। जब से एकल परिवार की अवधारणा ने हरियाणा में पैर फैलाना शुरू किया, परिवार का प्रेम कम होता चला गया। आज हालात तो यह है कि लोग धन-संपत्ति के लिए अपने ही परिवार के सदस्यों का खून करने पर आमादा हैं। भाई-भाई का हत्यारा बना हुआ है। 

हरियाणा में संपत्ति और धन के लालच में होने वाली हत्याएं एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बनी हुई हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पारिवारिक विवाद, जमीन के सौदे और पैसों के लेनदेन के कारण हिंसक वारदात हुई हैं। शनिवार को ही अंबाला जमीन और मिट्टी खनन के ठेके के विवाद में एक युवक ने अपनी 95 वर्षीय दादी, सगे भाई और चाचा की गोली मारकर हत्या कर दी। चाची अस्पातल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। यह विवाद लंबे समय से चल रहे पारिवारिक संपत्ति बंटवारे से जुड़ा था। हत्या के आरोपी युवक के पिता को सेवानिवृत्त होने के बाद सारे फंड वगैरह मिलाकर 16 लाख रुपये मिले थे। 

इस पैसे और मिट्टी खनन के ठेके में युवक का बड़ा भाई अपना हिस्सा मांग रहा था। यह बात उसे स्वीकार नहीं थी। वह चाहता था कि सारे रुपये और मिट्टी खनन से होने वाली आय उसके या पिता के पास ही रहे। शनिवार को अंबाला के शहजादपुर प्रखंड के बिचपड़ी गांव में युवक ने धन और संपत्ति के लिए खूनी खेल खेला और हत्या के बाद से आरोपी युवक फरार है। स्वाभाविक है कि पुलिस कुछ ही दिनों में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लेगी। इस हत्याकांड के लिए उसे जेल में रहना पड़ेगा। 

तीन लोगों की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास या फांसी की सजा भी मिल सकती है। यह तो तय है कि जिस संपत्ति और धन के लिए उसने हत्याकांड को अंजाम दिया है, उसका उपभोग वह खुद नहीं कर पाएगा। अगर युवक अपने अंजाम के बारे में सोच लेता, तो शायद हत्याकांड सामने नहीं आता। भाई और चाचा का परिवार बरबाद नहीं होता। भाई और चाचा के बच्चे अनाथ नहीं होते। शहरीकरण और विकास परियोजनाओं के कारण हरियाणा में जमीन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे छोटे-छोटे टुकड़ों के लिए भी खूनी संघर्ष हो रहे हैं। पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे में असमानता या असंतोष अक्सर हिंसा का रूप ले लेता है। 

Monday, May 25, 2026

बेटे का अंतिम संस्कार करने गए हैैं

प्रतीकात्मक चित्र
बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बिना किसी की परेशानी को जाने समझे उसे कोसना, कतई उचित नहीं है। कुछ लोग संकट आने पर बहुत ज्यादा अधीर हो जाते हैं। वह यह नहीं सोच पाते हैं कि दूसरा व्यक्ति भी उनसे कहीं ज्यादा संकट में हो सकता है। कुछ लोग तो सामने वाले व्यक्ति के कपड़ों, उसकी सामाजिक स्थिति को देखते हुए आकलन करने लगते हैं। 

एक बार की बात है। एक अमीर आदमी का बेटा बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया। उसे तत्काल सर्जरी की जरूरत थी। उस अस्पताल में एक बहुत ही काबिल डॉक्टर था, लेकिन वह उस समय अस्पताल में उपलब्ध नहीं था। अमीर आदमी ने अस्पताल प्रबंधन पर लगभग चीखते हुए कहा कि उस डॉक्टर को बुलाओ। जल्दी से जल्दी बुलाओ। 

अस्पताल प्रबंधन कहता रहा कि डॉक्टर को फोन कर दिया गया है। वह आते ही होंगे। थोड़ी देर बाद एक डॉक्टर हड़बड़ाते हुए आया। अमीर आदमी उस पर बरस पड़ा। तुम कितने लापरवाह डॉक्टर हो। मेरा बेटा जिंदगी और मौत से लड़ रहा है और तुम इतनी देर करके आ रहे हो। डॉक्टर ने विनम्रता से कहा कि मैं काफी दूर था। इसलिए आने में समय लग गया। 

अमीर आदमी ने कहा कि यदि तुम्हारा बेटा भी मर रहा होता, तो क्या तुम ऐसा ही करते। डॉक्टर उस आदमी को जवाब देने की जगह सर्जरी रूम में चला गया। दो घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और उस आदमी से कहा कि तुम्हारा बेटा अब ठीक है। बाकी बातें नर्स तुम्हें समझा देगी। इतना कहकर डॉक्टर चला गया। अमीर आदमी ने नर्स से कहा कि यह डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है?

नर्स ने कहा कि डॉक्टर के बेटे की कल मौत हो गई है। जब उन्हें फोन किया गया था, तब वह अपने बेटे का दाह संस्कार करने जा रहे थे।  आपके बेटे की हालत जानकर उन्होंने अंतिम संस्कार रोक दिया था। अब वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने गए हैं। यह सुनकर अमीर आदमी लज्जित हो गया।

सामूहिक टैंक योजना से सिंचाई कर बचाया जा सकता है गिरता जल स्तर

अशोक मिश्र

हरियाणा में जल संकट बढ़ता जा रहा है। कृषि के लिए पानी की भारी बर्बादी भी नहीं रुक रही है। हरियाणा में गिरते भूगर्भ जलस्तर का संकट बहुत गंभीर हो गया है। प्रदेश के 14 जिलों में स्थिति चिंताजनक है। प्रदेश के 141 ब्लॉकों में से लगभग 85 ब्लॉक 'डार्क जोन' की श्रेणी में आ चुके हैं। इनमें से 22 ब्लॉक अत्यधिक दोहन की स्थिति में हैं। राज्य में जल संकट का मुख्य कारण जहां दैनिक उपयोग में होने वाली पानी की बर्बादी है, वहीं कृषि क्षेत्र में फसलों की सिंचाई का पारंपरिक तरीका भी है। 

पारंपरिक नहरों या ट्यूबवेलों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाने की प्रक्रिया में रिसाव और वाष्पीकरण के कारण लगभग 30 से 40 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। कृषि में धान की खेती के लिए जरूरत से ज्यादा पानी निकालना और नहरों को पूरी तरह से पक्का (कंक्रीट) करने के कारण जमीन में पानी का प्राकृतिक रिसाव रुकना इन इलाकों में मुख्य रूप से जलस्तर गिरने के कारण हैं। यही वजह है कि सैनी सरकार ने राज्य में खेती की तस्वीर बदलने का फैसला किया है। अब सरकार ने पानी आधारित सबसे बड़ा ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल तैयार करना शुरू कर दिया है। आने वाले वर्षों में खेतों में खुले पानी से सिंचाई और ट्यूबवेल आधारित व्यवस्था को धीरे-धीरे सीमित कर माइक्रो इरिगेशन आधारित स्मार्ट सिंचाई मॉडल लागू किया जाएगा। 

इसकी शुरुआत प्रदेश के नौ जिलों से होगी, जहां किसानों के समूह बनाकर सामूहिक जल टैंक तैयार किए जाएंगे। सरकार ने पहले चरण में भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा को चुना है। इन जिलों में किसानों के समूहों को सामूहिक टैंक निर्माण पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। प्रत्येक 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि के लिए किसानों के समूह बनाकर सामूहिक टैंक तैयार किए जाएंगे।

इन टैंकों को नहरों से पाइपलाइन के जरिए भरा जाएगा। फिर इन्हीं से खेतों तक टपका या फव्वारा सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। फव्वारा या टपका विधि से फसलों की सिंचाई करने पर पानी की बरबादी नहीं होती है और फसल को जरूरत का पानी भी मुहैया हो जाता है। फसल भी अच्छी होती है। सामूहिक टैंक योजना के तहत पानी के भंडारण से किसानों को व्यक्तिगत रूप से ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 

वह सामूहिक टैंक में भरे हुए पानी का उपयोग अपने फसलों की सिंचाई के लिए कर सकते हैं। यदि मुख्यमंत्री की योजना के अनुसार किसानों ने अपने फसलों की सिंचाई की तो कम पानी और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के उपयोग से किसानों का सिंचाई खर्च न्यूनतम हो जाएगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। बस जरूरत है राज्य के हर किसान को सामूहिक टैंक योजना से परिचित कराने और इसके फायदे बताने की।


Sunday, May 24, 2026

बेकार की वस्तुएं मत लाया कीजिए

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

‘संतन को कहा सीकरी सो काम’जैसी काव्य रचना करने वाले कुंभन दास अष्टछाप के प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। उनका जन्म मथुरा के जमनावतो गांव में 1468 ईस्वी में हुआ माना जाता है। पुराने जमाने के कवि, साहित्यकार और दार्शनिक अपनी रचनाओं में भी अपने बारे में कुछ भी लिखने से परहेज करते थे। ऐसी अवस्था में उनके बारे में बहुत सारी बातें उनके समकालीन लोगों के आधार पर तय करनी पड़ती है। 

कहा जाता है कि वह अपने गांव में खेती करते थे, उसी से परिवार को गुजारा होता था। खेती से कितनी आय होती रही होगी, इसका अंदाजा आज के किसानों को देखकर लगाया जा सकता है। श्रीनाथ जी के मंदिर में यह रोज नए-नए पद गाकर सुनाया करते थे। इनकी पत्नी के अलावा सात पुत्र, सात पुत्रवधुएं और एक विधवा भतीजी रहती थी। एक बार की बात है। राजा मान सिंह वेष बदलकर कवि कुंभनदास से मिलने पहुंचे। 

उस समय वह नहाने के बाद माथे पर तिलक लगाने जा रहे थे। उन्होंने अपनी बेटी को आवाज देते हुए कहा कि बेटी दर्पण दे जाओ, तिलक लगाना है। संयोग से दर्पण बेटी के हाथ से छूटा और गिरकर टूट गया। बेटी ने दर्पण टूटने की बात कही, तो कुंभनदास ने कहा कि कोई बात नहीं किसी बर्तन में पानी भरकर ले आओ। एक टूटे बर्तन में पानी आने पर उन्होंने प्रतिबिंब देखकर तिलक लगाया। 

अगले दिन राजा मान सिंह स्वर्ण जड़ित दर्पण लेकर कुंभनदास के समक्ष उपस्थित हो गए। कुंभनदास ने कहा कि अच्छा तो कल आप ही आए थे। आपका यहां आने का स्वागत है, लेकिन इन बेकार की वस्तुओं को लाने की जरूरत नहीं है। यह सुनकर राजा मान सिंह का हृदय भाव विभोर हो उठा।