बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
डॉ. बिधान चंद राय का जन्म पटना के बांकीपुर में एक बंगाली कायस्थ परिवार में 1882 में हुआ था। वह एक महान चिकित्सक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह पश्चिम बंगाल के वह दूसरे मुख्यमंत्री थे जो अपने मृत्युपर्यंत बारह साल तक अपने पद पर बने रहे। बिधानचंद राय को आधुनिक बंगाल का निर्माता कहा जाता है। संयोग की बात है कि बिधान चंद का जन्म और मृत्यु एक जुलाई को ही हुई थी।भारत सरकार ने उन्हें 1961 में भारत रत्न से सम्मानित किया था। बिधान चंद के माता-पिता ब्रह्मसमाजी थे जिसका प्रभाव उनके जीवन पर काफी गहरा पड़ा था। उनके पिता डिप्टी कमिश्नर थे, लेकिन अपनी दानशीलता के कारण हमेशा आर्थिक दबाव में रहे। स्कूली शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने बहुत ही कठिन परिश्रम के बाद कलकत्ता मेडिकल कालेज में प्रवेश पाया।
अपनी प्रतिभा और सादगी के चलते वह जल्दी ही अध्यापकों और छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए। वह सत्यवादी थे। चाहे जो परिस्थितियां हों, वह हमेशा सत्य ही बोलते थे। एक बार की बात है। उनके एक प्रोफेसर की वजह से कार दुर्घटना हो गई। उस समय बिधानचंद राय वहीं मौजूद थे। प्रोफेसर ने बिधानचंद को अपने पक्ष में गवाही देने को कहा।
बिधानचंद ने सच कहना ही स्वीकार किया। प्रोफेसर ने बहुत धमकाया, परीक्षा में फेल करने की धमकी दी, लेकिन वह अडिग रहे। अदालत में उन्होंने वही कहा, जो देखा था। नतीजा यह हुआ कि प्रोफेसर दंडित किया गया। प्रोफेसर ने दुर्भावना वश उन्हें उस साल परीक्षा में फेल कर दिया। उनका एक साल बरबाद गया, लेकिन वह बाद में परीक्षा पास करके एक योग्य चिकित्सक बने। गरीबों की चिकित्सा वह बिना फीस लिए करते थे।