Wednesday, March 18, 2026

मंत्रमुग्ध कर देता था स्वामी हरिदास का गायन


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ललिता सखी का अवतार माने जाने वाले स्वामी हरिदास वैष्णव संत थे। वह उच्च कोटि के संगीत मर्मज्ञ थे। वह जब तल्लीन होकर गाते थे तो लोग मंत्र मुग्ध हो जाते थे। स्वामी हरिदास का जन्म 1478 में हुआ था। इनके जन्म स्थान और गुरु के विषय में कई मत प्रचलित हैं। 

राजपुर ग्राम वृन्दावन (उत्तर प्रदेश) इनका जन्म स्थान माना जाता है।  केलिमाल में इनके सौ से अधिक पद संग्रहित हैं। इनकी वाणी सरस और भावुक है। सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक तानसेन स्वामी हरिदास के शिष्य थे। अकबर भी संगीत प्रेमी था। उसने जब रीवा नरेश राजा रामचंद्र के दरबार में गाने वाले तानसेन के बारे में सुना, तो वह तानसेन को अपने दरबार में बुलाने को लालायित हो उठा। 

उसने रीवा नरेश से तानसेन को अपने दरबार में भेजने को कहा। थोड़ा बहुत नानुकुर करने के बाद रीवा नरेश ने अकबर की बात मान ली। संगीत मर्मज्ञ तानसेन अकबर के दरबार में आ गए। अकबर चाहता था कि उसके दरबार में सभी कलाओं में निपुण लोग रहें ताकि वह सभी कलाओं का आनंद उठा सके। उसी दौरान अकबर ने तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास के बारे में सुना। 

वह उनका गायन सुनने के लिए वृंदावन आए। अकबर की उपस्थिति में स्वामी हरिदास ने कई भक्ति पूर्ण पद सुनाए। अकबर जब आगरा लौट कर आया तो उसने एक दिन तानसेन से कहा कि तुम्हारा गायन बहुत ही अच्छा है,लेकिन स्वामी हरिदास के गायन की बात ही कुछ और है। तानसेन ने जवाब देते हुए कहा कि मैं इस धरती के सम्राट के लिए गाता हूं और वह ब्रह्माण के मालिक के लिए गाते हैं। इसलिए दोनों के गायन में फर्कतो रहेगा ही। यह सुनकर अकबर चुप रह गया।

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में किसी तरह कांग्रेस ने बचा ली अपनी इज्जत

अशोक मिश्र

देर रात हरियाणा राज्यसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से कांग्रेस के पांच विधायकों के क्रॉस वोटिंग का मामला सामने आने के बाद से प्रदेश की सियासत गर्म है। इतनी सावधानी और विधायकों को शिमला शिफ्ट करने के बावजूद आखिरकार भाजपा कांग्रेस में सेंध लगाने में सफल हो ही गई। कल यानी सोमवार को राज्यसभा चुनाव परिणाम आने तक कई उतार-चढ़ाव आते रहे। 

शाम को चार बजे मतदान खत्म होने के बाद जब काउंटिंग की बारी आई तो भाजपा की ओर से कांग्रेस के दो विधायक परमवीर सिंह और भरत बेनीवाल के वोट अवैध घोषित करने की शिकायत चुनाव अधिकारी से की गई। जवाब में कांग्रेस ने भी ह्वील चेयर पर मतदान करने पहुंचे परिवहन मंत्री अनिल विज की वोटिंग को भी अमान्य करने की मांग की। इस विवाद को सुलझाने के लिए चुनाव अधिकारी ने मामला चुनाव आयोग को भेज दिया।

जांच में परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया गया, जबकि भरत सिंह बेनीवाल और अनिल विज का वोट वैध माना गया। रात लगभग एक बजे मतगणना हुई और भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध को विजयी घोषित किया गया। चुनाव परिणाम आने के बाद ही पता चला कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इस बारे में  दो विधायकों के नाम का खुलासा हो गया है, बाकी विधायकों की जानकारी प्रदेश कांग्रेस ने हाईकमान को दे दी है।  

इसी बीच, राज्यसभा चुनाव नतीजों के 12 घंटे के भीतर हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने पार्टी छोड़ दी।  रामकिशन गुर्जर की पत्नी शैली चौधरी भी इस्तीफा दे सकती हैं। कांग्रेस उन पांच विधायकों को नोटिस देने की तैयारी में है, जिन्होंने सोमवार को राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की। कांग्रेस के लिए संतोष की बात इतनी है कि वह अपने उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को मामूली अंतर से जिताने में सफल हो गए। यदि भाजपा का एक वोट कैंसिल नहीं हुआ होता, तो यह जीत भी निश्चित नहीं थी। 

कांग्रेस के सामने यही दिक्कत है। वह अपने विधायकों पर अनुशासन कायम नहीं रख पाती है। इससे पहले भी दो बार कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग करके अपनी पार्टी उम्मीदवार को हरा चुके हैं। सन 2016 में हरियाणा में दो पदों के लिए हुए चुनाव के दौरान क्रास वोटिंग हो चुकी थी और कांग्रेस का जीतता हुआ प्रत्याशी हार गया था। उस समय कांग्रेस के प्रत्याशी वकील आरके आनंद कांग्रेस के 17 में से 14 विधायकों के गलत पेन का इस्तेमाल करने से हार गए थे जबकि कांग्रेस और इनेलो के कुल 37 विधायक थे। सन 2024 में भी ऐसा ही खेल हुआ था। 2024 में बीजेपी के तरफ से कृष्णलाल पंवार तो कांग्रेस के तरफ से अजय माकन उम्मीदवार थे। कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते अजय माकन चुनाव हार गए थे।

Tuesday, March 17, 2026

किसी प्रशंसा में काव्य रचना उचित नहीं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

नानालाल दलपतराम गुजराती साहित्य के इतिहास में बहुचर्चित नाम है। वह रोमांटिक और भक्तिपूर्ण साहित्य रचने के लिए जाने जाते हैं। नानालाल एक उत्कृष्ट गीतकार, कथात्मक काव्य रचने वाले कवि और नाटककार थे। उन्होंने अपने जीवन में 80 से अधिक पुस्तकें लिखीं जिनमें काव्य, नाटक, उपन्यास और जीवनी शामिल हैं। 

उन्होंने संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास की प्रसिद्ध रचना अभिज्ञानशाकुंतलम और मेघदूत का गुजराती भाषा में अनुवाद किया। गुजराती पाठकों में उनका यह कार्य काफी पसंद किया गया। इसके साथ ही भगवतगीता और कई उपनिषदों का भी गुजराती में अनुवाद किया। नानालाल का जन्म 16 मार्च 1877 को अहमदाबाद में हुआ था। इनके पिता का नाम दलपतराम था। 

उन्होंने अपने पिता की जीवनी कवीश्वर दलपतराम नाम से लिखी थी। इनकी कविताओं में प्रकृति वर्णन, प्रेम और सौंदर्य प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। काव्य लेखन में नानालाल की युवावस्था में ही रुचि पैदा हो गई थी। एक बार की बात है। नानालाल को बडौदा रियासत के महाराज ने अपने दरबार में आमंत्रित किया। दरबार में किसी दरबारी ने नानालाल से महाराज की प्रशंसा में कविता सुनाने की मांग रखी। 

दरबारी की मांग सुनते ही पूरे दरबार में सन्नाटा छा गया। तब उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा कि कविता किसी को प्रसन्न करने के लिए नहीं रची जाती है। सत्य और सौंदर्य की अभिव्यक्ति से कविता निखर उठती है। यदि कोई कवि किसी प्रशंसा में काव्य रचना करे, तो उसकी रचना का मू्ल्य क्या रह जाएगा। उन्होंने महाराज की प्रशंसा छोड़कर अन्य कविताएं सुनार्इं और अपने घर लौट गए।

तपेदिक मुक्त हरियाणा के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ते कदम

अशोक मिश्र

यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो तपेदिक यानी टीबी जानलेवा साबित होती है। आज से चार-पांच दशक पहले तक तपेदिक रोग होने पर मरीज की मौत निश्चित मान ली जाती थी क्योंकि उन दिनों तपेदिक रोग का मुकम्मल इलाज उपलब्ध नहीं था। लोग रोग को लेकर इतने जागरूक भी नहीं थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। केंद्र और प्रदेश सरकारों ने जहां देश-प्रदेश से टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए मुहिम चला रखी है, वहीं लोग भी अब धीरे-धीरे जागरूक होने लगे हैं। 

केंद्र सरकार ने  राष्ट्रीय प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान चलाकर भारत को तपेदिक मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हरियाणा सरकार भी अपने इस गुरुत्तर दायित्व को पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रही है। हरियाणा में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के साथ सक्रिय मामले खोजे जा रहे हैं। फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 88,689 टीबी के मामले दर्ज किए गए हैं जिसमें 74,483 मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। 

फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मरीजों की संख्या अधिक है, जहाँ अकेले लगभग पांच हजार मामले पहचाने गए थे। हरियाणा में साल 2025 में 12.52 लाख थूक परीक्षण किए गए थे और 'निक्षय मित्र' पहल के तहत 10 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई थी। राज्य सरकार की सक्रियता की वजह से हरियाणा में तपेदिक रोगियों की संख्या में लगातार कमी आती जा रही है। पंचायत स्तर पर चलाए गए अभियान के सार्थक परिणाम आने लगे हैं। टीबी मुक्त भारत अभियान की कड़ी में हरियाणा की 2157 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित कर दिया गया है।

 इनमें से 211 पंचायतों को स्वर्ण, 646 पंचायतों को रजत तथा 1300 पंचायतों को कांस्य श्रेणी में प्रमाणपत्र मिला है। राज्य में कुल 6237 पंचायतें हैं। इस तरह लगभग 35 प्रतिशत पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं। अंबाला टीबी मुक्त 191 पंचायतों के साथ अभियान में सबसे आगे है। पिछले तीन वर्षों में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस कार्यक्रम के जमीनी स्तर पर मजबूत क्रियान्वयन को दर्शाती है। 

वर्ष 2023 में राज्य की 574 पंचायतों को टीबी मुक्त होने का प्रमाणपत्र मिला था और सभी पंचायतें कांस्य श्रेणी में थीं, जो कुल पंचायतों का लगभग नौ प्रतिशत था। इसके बावजूद अभी टीबी मुक्त हरियाणा का लक्ष्य हासिल करना बाकी है। आमतौर पर देखा यह जा रहा है कि कुछ मरीज अपने इलाज को लेकर गंभीर नहीं होते हैं। थोड़ा सा आराम मिलने के बाद वह नियमित रूप से दवा लेना बंद कर देते हैं। जिसकी वजह से बाद में तपेदिक रोग बड़ी तेजी से फैलने लगता है और हालात बेकाबू हो जाते हैं। जब तक टीबी के इलाज का कोर्स पूरा नहीं किया जाता है, तब तक यह रोग पूरी तरह ठीक नहीं होता है।

Monday, March 16, 2026

जब डूब ही जाना है, तो क्यों न प्रयास करें

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मार्क रदरफोर्ड ब्रिटिश लेखक थे। वैसे उनका वास्तविक नाम विलियम हेल व्हाइट था। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की, लेकिन द आटो बायोग्राफी आफ मार्करदरफोर्ड काफी चर्चित रही। समीक्षकों का कहना है कि उनकी विभिन्न रचनाओं में उनके जीवन की कई घटनाएं समाहित की गई थीं। 

मार्क का जन्म 22 दिसंबर 1831 में इंग्लैंड के बेडफोर्डशायर में हुआ था। बात तब की है, जब रदरफोर्ड युवा थे। उनके मन में आशा और निराशाजनक विचार चलते रहते थे। कभी किसी काम को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाते थे, तो ठीक अगले ही पल वह निराशा में भी डूब जाते थे। एक दिन की बात है। वह समुद्र के किनारे बैठे हुए थे। मौसम भी बड़ा सुहावना था। तभी उनकी निगाह समुद्र में लंगर डाले एक जहाज पर पड़ी। जहाज रदरफोर्ड से ठीक ठाक दूरी पर था। उनके मन में अचानक यह विचार आया कि लंगर डाले जहाज तक तैर कर पहुंचा जाए।

रदरफोर्ड एक अच्छे तैराक भी थे। वह कई बार ऐसे साहसिक कारनामे कर चुके थे। जोश में उन्होंने समुद्र में छलांग लगाई और जहाज की ओर तैरने लगे। देखते ही देखते वह जहाज तक पहुंच गए। जहाज के कई चक्कर भी लगाए। फिर उन्होंने तट की ओर लौटना शुरू किया। लेकिन यह क्या? लौटते समय वह शिथिलता अनुभव करने लगे। सारा जोश गायब हो गया। 

उन्हें लगने लगा कि अब वह तट तक नहीं पहुंच पाएंगे और समुद्र में डूब जाएंगे। मन पर निराशा हावी होने लगी। उन्होंने सोचा कि यदि प्रयास नहीं किया, तो डूबना तय है। ऐसी स्थिति में क्यों न प्रयास किया जाए, तो शायद तट तक पहुंचा जा सकता है। निराशा दूर होते ही उन्होंने तेजी से तैरना शुरू किया और अंतत: तट तक पहुंचने में सफल हो गए।

बुजुर्गों को नहीं होना पड़ेगा परेशान प्रशिक्षित स्वयंसेवक करेंगे सहायता


अशोक मिश्र

वृद्धावस्था जीवन का सबसे कष्टकारक पड़ाव होता है। इस अवस्था में ज्ञानेंद्रियां शिथिल हो जाती हैं। आंखों से दिखाई देना बंद हो जाता है। शरीर कमजोर हो जाता है। सुनाई देना भी बंद हो जाता है। ऐसी अवस्था में आमतौर पर बुजुर्ग दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं। कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। कल तक जो पूरे परिवार का मुखिया था, जिसके इशारे पर पूरा परिवार संचालित होता था, आज वही व्यक्ति असहाय-लाचार सा कोने में पड़ा रहता है। 

ऐसी स्थिति तब और कष्टप्रद हो जाती है, जब किसी बुजुर्ग की देखभाल करने वाला परिवार में न हो। कुछ मामलों में यह भी देखने में आता है कि बुजुर्ग माता-पिता यहां रह रहे हैं और बेटा या बेटी अपने परिवार के साथ विदेश में रह रहे हैं। कई बार तो इन बुजुर्गों के बेटा-बेटी हालचाल तक नहीं पूछते हैं। ऐसी स्थिति में यदि बुजुर्ग दंपति में से किसी एक को कुछ हो जाए, तो बाकी बचे बुजुर्ग के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है। हरियाणा के बुजुर्गों को ऐसी परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए सैनी सरकार ने प्रहरी योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। 

हरियाणा में अब प्रशिक्षित स्वयंसेवक बुजुर्गों के लिए प्रहरी की भूमिका निभाएंगे। प्रहरी अपने इलाके के बुजुर्गों के संपर्क में रहेंगे। यदि उन्हें जरूरत महसूस हुई, तो वह उनकी हर संभव सहायता करेंगे। स्वयंसेवक बुजुर्ग की हर जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। यदि उन्हें दवा की जरूरत है, तो वह मेडिकल स्टोर से उनकी दवा लाकर देंगे। बीमार होने पर बुजुर्ग को अस्पताल ले जाएंगे। उनकी देखभाल करेंगे और स्वस्थ होने पर घर पहुंचाएंगे। गैस सिलेंडर भरवाना हो या बिजली बिल जमा करना हो, सब्जी लाने से लेकर छोटी मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर समय यह स्वयंसेवक तैयार रहेंगे। 

दरअसल, सन 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रहरी योजना की रूपरेखा तैयार की थी। इस समय प्रदेश में 80 वर्ष से अधिक आयु के सवा तीन लाख बुजुर्ग हरियाणा में रहते हैं। इनमें  से साढ़े तीन हजार से अधिक बुजुर्ग अपने घर में अकेले रहते हैं। यदि इन बुजुर्गों में से किसी को कोई परेशानी हो, तो वह अपने पड़ोसियों से सहायता मांगने की स्थिति में नहीं होता है। ऐसी स्थिति यदि स्वयंसेवी प्रहरी जैसी सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो इन बुजुर्गों का जीवन थोड़ा आरामदायक हो सकता है। कई बार ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं जिसके मुताबिक अकेले रह रहे बुजुर्ग की मौत हो जाने पर भी पड़ोसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। 

जब लाश से बदबू आने लगती है, तभी पता चलता है कि पड़ोस में रहने वाले अमुक व्यक्ति की मौत दो दिन पहले हो गई थी। हरियाणा में किसी बुजुर्ग के सामने ऐसी स्थिति न आए, इसके लिए बुजुर्गों की सेवा करने के इच्छुक लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वह अपने क्षेत्र के बुजुर्ग की सेवा कर सकें।

Sunday, March 15, 2026

संतोषी व्यक्ति जमीन पर भी सो सकता है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

किसी राज्य में एक संत रहते थे। उन्होंने सोचा कि एक भव्य आश्रम का निर्माण किया जाए ताकि उनके शिष्यों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। आश्रम निर्माण में लगने वाले धन को इकट्ठा करने के लिए उन्होंने लोगों के बीच जाने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि लोगों से सहयोग मांगने पर इतना तो जरूर बच जाएगा जिससे आश्रम की जरूरतों को भी पूरा किया जा सकता है। 

वह कई राज्यों में घूमे, लोगों का यहयोग भी अच्छा मिला। एक दिन जब उन्हें भटकते-भटकते शाम हो गई, तो वह एक कुटिया के सामने रुक गए। उस कुटिया में एक बुजुर्ग महिला रहती थी। उसने संत और उनके शिष्यों का स्वागत किया। किसी तरह उसने सबके लिए भोजन की व्यवस्था की। सबने सुस्वादु भोजन किया। इसके बाद उसने एक तख्त पर दरी बिछाई और संत से उस पर लेटने का आग्रह किया। 

वह महिला खुद एक चटाई बिछाकर जमीन पर सो गई। लेटते ही उसे गहरी नींद आ गई। रात में संत को बेचैनी महसूस होने लगी। वह उठकर बैठ गए। उन्हें नींद नहीं आ रही थी। उन्हें मुलायम गद्दे पर सोने की आदत थी। खुरदरी दरी पर सोने से उन्हें परेशानी हो रही थी। अगले दिन महिला सुबह उठी। उसने सबके लिए भोजन का प्रबंध किया। उसने थोड़ी देर पूजा-अर्चना की। 

खाली समय में पड़ोस के बच्चों को बुलाकर उन्हें कहानियां सुनाई। संत ने उस महिला से कहा कि कल रात में मुझे दरी पर नींद नहीं आई, लेकिन तुम्हें जमीन पर कैसे नींद आ गई। उस महिला ने कहा कि मैं अपना भोजन जुटाने के लिए मेहनत करती हूं। मैं अपनी जरूरत से ज्यादा की कामना भी नहीं करती। मैं संतोष करती हूं। इस वजह से मुझे नींद आ जाती है।  

संत ने मन में सोचा कि यह महिला जमीन पर सोकर भी सुखी है और मैं भव्य आश्रम बनवाने की फेर में दर दर भटक रहा हूं। उस रात संत को गहरी नींद आई और वह अपने आश्रम लौट गए।

क्रॉस वोटिंग की वजह से दो बार हारी कांग्रेस फूंक-फूंककर रख रही कदम


अशोक मिश्र

देश में राज्यसभा सांसदों का चुनाव 16 मार्च को होने जा रहा है। उसी दिन चुनाव परिणाम आ जाएगा। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार 26 सीटों पर राज्यसभा सांसद निर्विरोध चुने जा चुके हैं जिसमें से इंडिया गठबंधन को 13, एनडीए गठबंधन को 12 और एक निर्दलीय प्रत्याशी को जीत हासिल हुई है क्योंकि इनके खिलाफ कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारा गया था। 

अब विभिन्न राज्यों की कुल ग्यारह सीटों पर चुनाव होना है जिसमें हरियाणा की दो सीटें भी शामिल हैं। इन दो सीटों के लिए कुल तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया, कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित सतीश नांदन के मैदान में उतरने से चुनाव काफी रोमांचक हो गया है। भाजपा अपने 48 विधायकों के साथ-साथ दो इनेलो और तीन निर्दलीय विधायकों को लेकर निश्चिंत है, लेकिन कांग्रेस अपने विधायकों को लेकर सशंकित है। 

उसे मतदान के दौरान क्रास वोटिंग का भय सता रहा है। यही वजह है कि उसने अपने 37 विधायकों में से  31 को हिमाचल प्रदेश रवाना कर दिया है। अब ये विधायक 16 मार्च को सीधे विधानसभा पहुंचेंगे और मतदान करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित छह विधायक विभिन्न कारणों से हिमाचल प्रदेश नहीं गए हैं। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश न जाने वाले छह कांग्रेसी विधायकों द्वारा क्रास वोटिंग करने की आशंका बिल्कुल नहीं है। हुड्डा गुट की मानी जाने वाली जुलाना विधायक विनेश फोगाट पारिवारिक कारणों से हिमाचल नहीं गई हैं। 

वहीं चंद्रमोहन बीमारी की वजह से हिमाचल नहीं गए हैं। टोहाना विधायक परमवीर सिंह और पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास बीमार हैं। यह दोनों विधायक पुराने कांग्रेसी हैं, इस वजह से इनके क्रास वोटिंग करने की कोई आशंका नहीं है। बादली से विधायक और हुड्डा गुट के विश्वसनीय माने जाने वाले कुलदीप वत्स के भतीजे की शादी है, इस वजह से वह भी हिमाचल नहीं गए हैं। दरअसल, कांग्रेस की क्रास वोटिंग की आशंका निराधार नहीं है। इससे पहले भी दो बार कांग्रेस क्रास वोटिंग का शिकार हो चुकी है। 

सन 2016 में हरियाणा में दो पदों के लिए हुए चुनाव के दौरान क्रास वोटिंग हो चुकी है और कांग्रेस का जीतता हुआ प्रत्याशी हार गया था। उस समय कांग्रेस के प्रत्याशी वकील आरके आनंद कांग्रेस के 17 में से 14 विधायकों के गलत पेन का इस्तेमाल करने से हार गए थे जबकि कांग्रेस और इनेलो के कुल 37 विधायक थे। सन 2024 में भी ऐसा ही खेल हुआ था। 2024 में बीजेपी के तरफ से कृष्णलाल पंवार तो कांग्रेस के तरफ से अजय माकन उम्मीदवार थे। 

राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपने वोट बीजेपी एजेंट को दिखाए। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इन वोटों को रद्द करने की मांग की मगर वोट रद्द नहीं हुए। नतीजा निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा जीत गए। कांग्रेस विधायकों ने खुलकर क्रॉस वोटिंग की। किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग करके कार्तिकेय शर्मा को वोट दिया और अजय माकन हार गए थे।

Saturday, March 14, 2026

समुद्री यात्रा का मार्ग प्रशस्त करने वाला हेनरी


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इतिहास में पढ़ाया जाता है कि 20 मई 1498 को पहला यूरोपीय नाविक वास्को डी गामा केरल के कोझीकोड जिले के कालीकट पहुंचा था। वह 8 जुलाई 1497 को पुर्तगाल से भारत की खोज में निकला था। भारतीय सभ्यता और अपार धन संपदा की कहानियां यूरोप में काफी प्रचलित थीं। यही वजह है कि यूरोप के लोग भारत में काफी रुचि रखते थे। लेकिन वास्को डी गामा की इस खोज की आधारशिला जिस व्यक्ति ने रखी थी, वह था पुर्तगाल के शासक जान प्रथम और उनकी पत्नी फिलिप्पा का तीसरा पुत्र हेनरी। 

राजकुमार हेनरी को बचपन से ही समुद्री यात्रा और मानचित्रण में गहरी रुचि थी। उसने नाविकों, मानचित्रणकारों और नावों पर यात्रा करने वाले लोगों को संगठित भी किया था। उन्होंने सेउटा पर कब्जा करने के बाद तय किया कि वह समुद्री मार्ग से दक्षिण अफ्रीका के तटीय क्षेत्रों पर अपना प्रभुत्व कायम करेंगे। हेनरी ने अफ्रीका के तटीय क्षेत्र का अन्वेषण शुरू किया, जिसका अधिकांश भाग यूरोपीय लोगों के लिए अज्ञात था। 

उनके उद्देश्यों में पश्चिम अफ्रीकी स्वर्ण व्यापार के स्रोत और प्रेस्टर जॉन के पौराणिक ईसाई साम्राज्य का पता लगाना तथा पुर्तगाली तट पर समुद्री डाकुओं के हमलों को रोकना शामिल था। उस समय यूरोप के अधिकतर नाविक समुद्री यात्रा से बहुत डरते थे। लेकिन हेनरी ने अपनी कुछ समुद्री यात्राओं से नाविकों को प्रभावित किया। उनका मानना था कि ज्ञान और साहस से समुद्र पर विजय पाई जा सकती है। 

इसके बाद समुद्री यात्राओं से नए नए देशों को खोजने का मार्ग प्रशस्त हुआ। हेनरी की मृत्यु 13 नवंबर 1406 को हुई थी, उन्हें शुरू में लागोस के सेंट मैरी चर्च में दफनाया गया था, बाद में उन्हें बटलहा मठ में ले जाया गया, जहाँ उनकी कब्र अभी मौजूद है।

युद्ध के दौरान थोड़ी दिक्कत होती ही है, ऐसे में घबराना नहीं चाहिए


अशोक मिश्र

अमेरिका, इजरायल और  ईरान के बीच पिछले एक पखवाड़े से चल रहे युद्ध ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी युद्ध के दुष्परिणामों को लेकर परेशान है। पेट्रो पदार्थों की सप्लाई बाधित होने से अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी रसोई गैस की किल्लत महसूस की जा रही है। प्रदेश सरकार बारबार कह रही है कि रसोई गैस की कोई कमी नहीं है, लोग परेशान न हों। लेकिन लोगों को सरकार की बात पर भरोसा नहीं है। वह गैस एजेंसी पहुंचकर अपनी बुकिंग कराना चाहते हैं, भरा हुआ गैस सिलेंडर हासिल करना चाहते हैं ताकि उनको खाना बनाने में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। 

कहते हैं कि अच्छी बातों को समाज में फैलने के लिए पैरों की आवश्यकता होती है, लेकिन अफवाहें बिना पैर के ही इतनी जल्दी फैल जाती हैं कि हर किसी को ताज्जुब होता है। लोगों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से यह अफवाह बहुत तेजी से फैली कि युद्ध के चलते भारत को पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति नहीं हो रही है। होर्मूज जलडमरूमध्य पर ईरानी सेना का कब्जा होने की वजह से तेल और गैस की आपूर्ति घट गई है, यह बात बिल्कुल सही है, लेकिन हालात अभी इतने भी बदतर नहीं हुए हैं कि रसोई गैस को लेकर परेशान हुआ जाए। लोगों को इस मामले में धैर्य रखना चाहिए। 

उन्हें अपने देश और प्रदेश की सरकारों पर विश्वास करना चाहिए। हरियाणा के कुछ जिलों में गैस एजेंसियों के दफ्तर के सामने बुकिंग कराने वाले लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि सबकी बुकिंग उस दिन नहीं हो सकती है। कुछ लोगों को तो निराश होकर लौटना ही होगा। बुकिंग न करा पाने से निराश लोग भी बातचीत के दौरान इस बात को हवा दे रहे हैं कि रसोई गैस की कमी है। दरअसल, ऐसा लगता है कि कुछ गैस एजेंसियों के संचालकों ने आपदा में अवसर खोज लिया है। 

वह जान बूझकर रसोई गैस की कृत्रिम कमी को दर्शाकर रसोई गैस की कालाबाजारी करने की फिराक में हैं। खबर यह भी है कि हरियाणा में इंडक्शन चूल्हे की बिक्री एकाएक बढ़ गई है। जहां महीने भर में एक लाख-सवा लाख इंडक्शन चूल्हा बिकता था, वहीं अब यह आंकड़ा प्रतिदिन का हो सकया है। स्वाभाविक है कि लोग रसोई गैस की किल्लत को ध्यान में रखते हुए इन चूल्हों से खाना पकाया जा सके। इस तरह के हालात पैदा करने के पीछे इंडक्शन चूल्हा कंपनियों का हाथ भी हो सकता है। 

इंडक्शन चूल्हा बिकने से इन्हीं कंपनियों को फायदा भी तो मिल रहा है। लोगों को रसोई गैस के कालाबाजारियों की चाल को समझना चाहिए और किसी भी प्रकार की दहशत मन में नहीं पालनी चाहिए। अब जब युद्ध चल रहा है, तो थोड़ी बहुत दिक्कत तो होगी ही। इससे घबराना नहीं चाहएि।