Friday, June 12, 2026

राजा, मकड़ी और जंगली मक्खी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इस संसार में कोई भी वस्तु या जीव बेकार नहीं है। प्रकृति ने हर जीव-जंतु में कोई न कोई गुण जरूर दिया है। हां, इंसान की नजर में किसी जीव का गुण उसके लिए अवगुण हो सकता है। इंसान अपने हिसाब से जीवों के गुण-अवगुण को निर्धारित करता है। एक समय की बात है। 

एक राजा के मन में यह बात आई कि पता किया जाए कि किस जीव-जंतु या वस्तु में कोई गुण नहीं है। उसने यह बात अपने दरबार में कही, तो उसके दरबारियों ने यह पता करने के लिए कुछ समय मांगा। कुछ दिन बीतने के बाद दरबारियों ने राजा को बताया कि इस संसार में जंगली मक्खी और मकड़ी की कोई उपयोगिता नहीं है। इन दोनों जीवों का इस संसार में रहना या न रहना, कोई मायने नहीं रखता है। 

तब राजा ने सोचा कि इन दोनों जीवों का अपने राज्य से समूल नाश करा दिया जाए। वह अपनी योजना को लागू कर पाता कि इससे पहले पड़ोसी राजा ने उस पर हमला कर दिया। पड़ोसी राजा काफी दिनों से हमले की तैयारी कर रहा था। उसकी सेना भी काफी बड़ी थी, तो लड़ाई में पड़ोसी राजा जीत गया। पराजित राजा को अपनी जान बचाने के लिए जंगल में छिपना पड़ा। 

एक दिन जब वह थककर एक पेड़ के नीचे सो रहा था, तभी उसकी नाक पर जंगली मक्खी ने काट लिया। राजा ने चौंक कर देखा कि दुश्मन राजा के सैनिक आ रहे हैं। वह भागकर एक गुफा में छिप गया। उसी समय एक मकड़ी ने आकर वहां जाला बुन दिया। जब सैनिक उस गुफा के नजदीक पहुंचे, तो उन्होंने जाले को देखकर यहां कोई नहीं छिपा हो सकता है। वह आगे बढ़ गए। यह देखकर राजा ने मन ही मन कहा कि इस दुनिया में कोई भी वस्तु या जीव बेकार नहीं है। आज उसकी जान भी इन्हीं दो जीवों की वजह से बची है।

सड़कों पर तेज रफ्तार वाहन बन रहे लोगों की मौत का कारण


अशोक मिश्र

वाहन चालकों की लापरवाही सड़क पर चलने वालों के लिए मौत का कारण बनती जा रही है। हरियाणा सरकार, पुलिस प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि सड़कों पर चलने वाले सुरक्षित रहें, घर से बाहर निकलने वाला हर व्यक्ति अपने घर तक सकुशल पहुंचे, लेकिन हादसे कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई बार यह घोषणा भी कर चुके हैं कि उनका हर संभव प्रयास यही है कि प्रदेश की सड़कों को दुर्घटना रहित बनाया जाए। हर हालत में सड़कों पर होने वाले हादसों की संख्या को शून्य पर लाया जाए, लेकिन वाहन चालकों की लापरवाही मुख्यमंत्री के मंतव्य को धता बता रही है। 

शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो, जब राज्य में कहीं न कहीं सड़क हादसे की खबर न आती हो।  अगर वाहन चालक थोड़ी सी सावधानी बरतें, तो मुख्यमंत्री सैनी की इच्छा को काफी हद तक संभव बनाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि दोपहिया वाहन चालक और उनके साथ बैठी सवारी हेलमेट जरूर लगाए। सभी तरह के वाहन चालक अपने वाहन को निर्धारित गति सीमा तक ही चलाएं। 

यातायात के नियमों का पालन करें। हरियाणा यातायात पुलिस से आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2014 से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 57,901 लोगों की जान गई है। आश्चर्यजनक बात यह है कि सन 2020 में जब पूरे देश में सख्त लॉकडाउन था। लोगों का घर से निकला प्रतिबंधित था, सड़कें पूरी तरह से सुनसान थीं, तब भी राज्य भर में 9,431 दुर्घटनाएं हुईं। राज्य में पिछले 11 वर्षों में लगभग 1.15 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सन 2017 में 11,258 सड़क दुर्घटनाओं में 5,120 लोगों की जान गई जो 2014 के बाद सबसे अधिक है। आकस्मिक मौतों की संख्या 2024 में 4,689 से बढ़कर 2025 में 4,885 हो गई, जबकि दुर्घटनाओं की संख्या 9,806 से बढ़कर 10,352 हो गई। 

पिछले 11 वर्षों में सबसे कम 4,429 मौतें सन 2015 में दर्ज की गईं। दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में शीर्ष पांच जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से हैं जिनमें गुरुग्राम पहले स्थान पर है। पिछले 11 वर्षों में अकेले गुरुग्राम में 4,988 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद सोनीपत में 4,521, करनाल में 4,113, पानीपत में 3,432 और झज्जर में 2,944 मौतें हुईं। 

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति, लापरवाही से गाड़ी चलाने और गलत दिशा में गाड़ी चलाने के कारण होती हैं। चालक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं या नशे में होते हैं, जो इन दुर्घटनाओं के कारणों में और इजाफा करता है। शराब पीकर गाड़ी चलाना, सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण है। यातायात पुलिस लोगों को विभिन्न माध्यमों से ट्रैफिक रूल्स का पालन करने की लोगों से अपील करती है, लेकिन उसका प्रभाव लोगों पर पड़ता दिखाई नहीं देता है।

Thursday, June 11, 2026

राजा को योग्य उम्मीदवार की तलाश

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को अपनी भलाई के साथ दूसरों की भलाई का ध्यान रखना चाहिए। यदि मनुष्य ऐसा करता है, तो वह सबका प्यारा हो जाता है। लोग उसका आदर करते हैं और ऐसा व्यक्ति जीवन में सफल भी होता है। अपनी भलाई के बारे में सोचना, कोई बुरी बात नहीं है। सभी अपना भला चाहते हैं, लेकिन इंसानियत के नाते दूसरों का भला भी सोचना चाहिए। एक बार की बात है। 

एक राजा का मंत्री सेवानिवृत्त हो गया। वह काफी बूढ़ा हो गया था। राजा को उस पर विश्वास भी बहुत था क्योंकि वह राजा की सेवा में काफी दिनों से था और वह राजा को सलाह भी अच्छी दिया करता था। अब राजा को अपने मंत्री के समान ही बुद्धिमान और सच्चे मंत्री की जरूरत महसूस होने लगी। उसने अपने बुजुर्ग मंत्री की सलाह पर कई योग्य उम्मीदवारों की परीक्षा ली। उस परीक्षा में राज्य के हजारों युवा शामिल हुए। 

परीक्षा के कई चक्र से गुजरते हुए तीन उम्मीदवार चयनित हुए जिनमें से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता था। राजा इन उम्मीदवारों को लेकर ऊहापोह में था कि वह किसका चयन करे। उसने अपने दरबारियों से सलाह मशविरा किया। सारे दरबारी एक मत नहीं हो पाए। तब राजा को अपने सेवानिवृत्त मंत्री की याद आई।  उन्होंने हमेशा उन्हें संकट से उबारा था। 

बुजुर्ग मंत्री ने राजा को उपाय बताया। राजा ने तीनों को बुलाकर एक ही सवाल किया-यदि मेरे और तुम्हारे बालों में आग लग जाए तो तुम क्या करोगे। एक ने उत्तर दिया कि मैं सबसे पहले आपके बालों की आग को बुझाऊंगा। दूसरे ने कहा कि मैं सबसे पहले अपनी आग को बुझाऊंगा। तीसरे ने कहा कि मैं एक हाथ से अपनी आग बुझाऊंगा और दूसरे हाथ से  आपके बालों में लगी आग को बुझाऊंगा। 

राजा ने तीसरे को अपना मंत्री बना लिया। राजा ने कहा कि पहले वाला चापलूस है। दूसरा वाला स्वार्थी है। तीसरा वाला अपने साथ-साथ दूसरों का भी भला सोचता है। यही योग्य है।

जहरीली गैसों से कब तक मरते रहेंगे सफाई कर्मचारी?

अशोक मिश्र

सरकार की ओर से रोक के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए बिना किसी सुरक्षा उपकरण के आज भी लोगों से काम लिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में काम करने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को ही फरीदाबाद के जीवन नगर में स्थित मेन पंपिंग स्टेशन के टैंक में उतरे दो ममेरे-फुफेरे भाइयों की मौत हो गई। यह दोनों भाई बिना सुरक्षा उपकरण लिए ही पंपिंग स्टेशन में सफाई करने उतरे थे। बिना सेफ्टी उपकरण सफाई करने उतरा आकाश गैस चढ़ने से बेहोश होकर टैंक में ही गिर गया। 

यह देखकर उसे बचाने के लिए अनमोल नीचे उतरा, तो उसकी भी गैस चढ़ने से मौत हो गई। आरोप है कि प्लांट से गंदे पानी से कचरा निकालने वाली मशीन काफी दिनों से खराब थी। इसके बारे में कई बार ठेकेदार से शिकायत की जा चुकी थी। लेकिन ठेकेदार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि दो लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन दोनों को बचाने के लिए नीचे उतरे तीसरे कर्मचारी की हालत गंभीर है। तीन घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने शव को निकाला।

 हरियाणा में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए हादसों में अब तक दर्जनों मजदूरों की जान जा चुकी है। संसद में इस संबंध में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में 43 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है। वहीं गैर सरकारी आंकड़े 76 सफाईकर्मियों की मौत का दावा कर रहे हैं। पिछले साल मार्च महीने में गुरुग्राम में निमार्णाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दीवार गिरने से सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। हरियाणा सरकार ने सीवर की मैन्युअल (हाथ से) सफाई पर रोक लगा रखी है। 

इसके अतिरिक्त, दुर्घटनाओं को रोकने और मशीनीकृत सफाई (जेटिंग और सक्शन मशीनों) को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया लागू है। इसके बावजूद इस मामले में लापरवाही करते हैं। हर वर्ष प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से खबर आती है कि सीवर साफ करते समय जहरीली गैस से कई सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई। कुछ देर के लिए मीडिया में चर्चा होती है, प्रशासन दुख जताता है, नेता मुआवजे की घोषणा करते हैं और फिर मामला खत्म हो जाता है। 

लेकिन उन परिवारों के लिए जिंदगी कभी सामान्य नहीं होती। एक मजदूर की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों, बच्चों के भविष्य और घर की रोटी का अंत होती है। सबसे दुखद बात यह है कि इन मौतों को समाज ने लगभग सामान्य मान लिया है। जैसे यह कोई हादसा नहीं, बल्कि उनका तयशुदा भाग्य हो। सुरक्षा उपकरणों के बिना लोगों को जहरीले गटरों में उतार दिया जाता है। कई बार ठेकेदार और अधिकारी जानते हैं कि यह गैरकानूनी है, फिर भी यह सब जारी रहता है। 

Wednesday, June 10, 2026

ताकि आने वाली पीढ़ी फल खा सके

प्रतीकात्मक चित्र


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को हमेशा आगे की सोचना चाहिए। उसे यह सोचना चाहिए कि आज जिस पेड़ के फल का उपयोग वह कर रहा है, उसे उसने नहीं रोपा है। उसे रोपने वाला तो न जाने कब का इस दुनिया से विदा हो चुका है। यदि उस व्यक्ति ने फलदार पेड़ नहीं लगाए होते, तो आज वह इन फलों का स्वाद कैसे ले रहा होता। 

इस संबंध में एक बड़ी रोचक कथा है। किसी गांव में एक सत्तर-बहत्तर वर्ष की आयु का एक बुजुर्ग रहता था। वह शाम को एक निश्चित समय पर रोज टहलने निकलता था। काफी दूर तक टहलने के बाद लौट आता था। उस बुजुर्ग के घर से थोड़ी ही दूर पर एक नया परिवार रहने आया था। उस परिवार में दस-बारह साल का एक किशोर भी रहता था। वह उस बुजुर्ग को रोज टहलने निकलते देखकर सोचता था कि बुजुर्ग आखिर नियत समय पर ही क्यों टहलने निकलता है।

एक दिन वह उस बुजुर्ग के पीछे-पीछे चल पड़ा। उसने देखा कि कुछ दूर जाने के बाद उस बुजुर्ग ने एक बड़े पत्थर के पीछे रखी एक छोटी सी बाल्टी निकाली और थोड़ी दूर पर स्थित तालाब से पानी भरा। पानी भरने के बाद वह छोटे-छोटे फलदार पौधों की सिंचाई करने लगा। सारे पौधों की सिंचाई करने के बाद जब वह बुजुर्ग लौटने लगा, तो उस किशोर ने उससे पूछा, बाबा! जब तक यह पौधे बड़े होंगे और फल देने लायक होंगे, तब तक तो शायद आप इस दुनिया में नहीं रहेंगे। तो फिर इन पौधों को पानी क्यों दे रहे हैं? 

उसकी बात सुनकर बुजुर्ग मुस्कुराया। बोला, मैंने जीवन भर जिन फलों का स्वाद लिया, उन पौधों को तो मैंने नहीं लगाया था। मैं इन पौधों को इसलिए सींच रहा हूं ताकि आने वाली पीढ़ी को फल खाने को मिल सके। यह सुनकर किशोर बहुत प्रभावित हुआ और उसने भी पौधरोपण की प्रतिज्ञा की।

घरेलू कलह और अवैध संबंधों की वजह से बिखर रहे हैं परिवार

अशोक मिश्र

परिवार टूट रहे हैं। घरेलू कलह और अवैध संबंधों की वजह से परिवार में बिखराव की प्रक्रिया पिछले कुछ दशकों से तेज हो गई है। तलाक के मामले बढ़ रहे हैं। सात जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाने वाले पति-पत्नी कुछ ही साल में एक दूसरे से अलग हो जाने के लिए अदालत या महिला आयोग का दरवाजा खटखटा रहे हैं। हरियाणा राज्य महिला आयोग के पास इन दिनों ज्यादातर मामले अवैध संबंधों और संपत्ति विवाद के आ रहे हैं। राज्य महिला आयोग के पास आने वाले मामलों में एक बात सबसे ज्यादा उभर कर सामने आई है और वह है अलगाव की मांग करने वाले ज्यादातर जोड़े प्रेम विवाह करने वाले हैं। 

हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का तो यहां तक कहना है कि आयोग के पास पहुंचने वाले 60 प्रतिशत मामलों में युवक-युवतियां सोशल मीडिया से संबंध स्थापित किया था। सोशल मीडिया पर एक दूसरे के साथ परिचय हुआ। फिर दोनों आपस में मिलने जुलने लगे और परिवार की मर्जी के बिना या उन्हें सूचित किए बिना विवाह कर लिया। जब परिवार वालों ने विरोध किया, तो कोई एक पक्ष बहाना बनाकर विवाह से छुटकारा पाने के लिए आयोग या अदालत पहुंच गया।  

कई मामलों में विवाह का आश्वासन देकर संबंध बनाए जाते हैं और बाद में विभिन्न बहाने बनाकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है। अवैध संबंध भी परिवार के टूटने का एक महत्वपूर्ण कारण है। भौतिक संसाधनों को जुटाने और रोजी-रोटी कमाने की आपाधापी में काफी लोग अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ लोग अपने आफिस में या फिर बाहर संबंध बना लेते हैं। 

अवैध संबंधों का जब खुलासा होता है, तो फिर शुरुआत में कलह होती है और उसके बाद मामला मारपीट और हिंसा तक पहुंच जाता है। कई मामलों में हत्या जैसी घटनाएं भी हुई हैं। कुछ परिवार तो महज इसलिए भी टूट जाते हैं क्योंकि ससुराल के लोग अनावश्यक रूप से दंपति के मामलों में दखल देने लगते हैं। इससे लड़का या लड़की अपने को असहज महसूस करते हैं और अंतत: बात परिवार के बिखरने तक आ जाती है। पैतृक या निजी संपत्ति भी परिवार में बिखराव का बहुत बड़ा कारण है। 

हरियाणा में जमीन और प्रॉपर्टी की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने सगे-संबंधियों और भाइयों के बीच के रिश्तों को लालच में बदल दिया है, जिससे संपत्ति हड़पने की प्रवृति बढ़ी है। आयोग के सामने सास-बहू के झगड़ों की वजह से मायके में रह रही बहुओं के मामले भी पहुंचे। यहां आयोग के सामने ही सास-बहू के बीच नोक-झोंक देखने को मिली। यदि किसी परिवार में ऐसी स्थिति हो, तो सबसे बेहतर यही है कि सम्मानजनक तरीके मामले को सुलझाया जाए। यदि परिवार में अक्सर कलह रहता है, तो वैधानिक तरीके से अलग हो जाने में ही भलाई है।

Tuesday, June 9, 2026

दो पहाड़ों के बीच काटकर बना दिया रास्ता

प्रतीकात्मक चित्र

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर मन में लगन और विश्वास पक्का हो, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता है। बस व्यक्ति को कभी अपने फैसले से विचलित नहीं होना चाहिए। जीवन में सफलता तभी मिलती है, जब व्यक्ति अपना हौसला कायम रखता है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश की एक कथा है। कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश के किसी पहाड़ी गांव में एक बुजुर्ग रहता था। उसके दो बेटे थे। 

बेटे बहुत अधिक परिश्रम और आज्ञाकारी थे। गांव भर के लोग उस बुजुर्ग को महामूर्ख कहकर बुलाते थे क्योंकि वह लोगों को जो भी सलाह देता था, लोगों को उसकी सलाह अटपटी लगती थी। उस बुजुर्ग का जहां घर था, उसी घर के सामने से रास्ता जाता था। उसके घर के सामने ही दो बड़े पहाड़ थे जिनसे होकर दूसरी तरफ जाने में लोगों को कई दिन लग जाते थे। 

एक दिन उसने अपने दोनों बेटों को बुलाया और कहा कि इन दोनों पहाड़ों के बीच से रास्ता बनाना है। पिता की आज्ञा मानते हुए दोनों बेटों ने फावड़ा उठा लिया। बुजुर्ग भी हलका फावड़ा लेकर पहाड़ी से रास्ते बनाने में जुट गया। गांव के लोगों ने जब  उन तीनों को देखा, तो मजाक उड़ाने लगे। बुजुर्ग ने कहा कि भले ही मेरी जिंदगी में यहा रास्ता न बन पाए, लेकिन यह काम मेरे दोनों बेटे पूरा करेंगे। बेटों से यह काम पूरा नहीं हुआ, तो मेरी आने वाली पीढ़ी इसे पूरा करेगा। 

कुछ दिन तक पिता-पुत्र अपने काम में जुटे रहे। फिर धीरे-धीरे गांव वालों ने भी मदद करनी शुरू कर दी। देखते ही देखते कुछ ही महीनों में दोनों पहाड़ों के बीच से एक रास्ता तैयार हो गया। लोगों ने अब यह समझ लिया था कि यदि लगन सच्ची हो, तो पहाड़ को भी काटकर रास्ता बनाया जा सकता है। उसी दिन से बुजुर्ग लोगों की श्रद्धा का पात्र बन गया।

अगर घातक बीमारियों से बचना है तो शारीरिक श्रम करना होगा


अशोक मिश्र

हमारे देश में स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। कहा भी गया है कि तंदुरुस्ती हजार नियामत है। अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। लोग इस कहावत पर अमल भी करते थे। गांवों में ज्यादातर लोग किसान हैं। वह दिन भर अपने खेत-खलिहान में हाड़तोड़ मेहनत करते थे। जमकर खाते-पीते थे और भरपूर नींद लेते थे। यह दिनचर्या उन्हें स्वस्थ रखती थी। घर में खाने-पीने की चीजें भी भरपूर मात्रा में हुआ करती थीं। 

हर घर में गाय-भैंस जरूर हुआ करती थी। इस वजह से दूध, दही और छाछ की भी कमी नहीं थी। इस मामले में हरियाणा कभी देश में अव्वल हुआ करता था। शहरों में भी लोग खूब परिश्रम करते थे। यही वजह है कि उन दिनों लोगों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्राल जैसी समस्याएं नहीं हुआ करती थीं। गांव हो या शहर, लोग पैदल चलने को ही प्राथमिकता दिया करते थे। अगर दूरी ज्यादा हुई, तो साइकिल से आया-जाया करते थे। बैलगाड़ी, तांगा और बस आदि भी आवागमन के साधन हुआ करते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि हरियाणा सरकार को साइकिल ऑन संडे जैसे कार्यक्रम का आगाज करना पड़ रहा है। 

लोगों को प्रेरित करना पड़ रहा है कि रविवार को साइकिल से आना-जाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य ठीक रहता है और कई तरह की बीमारियों से निजात भी मिलती है। राज्य के विभिन्न शहरों फरीदाबाद, पलवल और चंडीगढ़ आदि में हर रविवार साइकिल रैलियों का आयोजन किया जाता है, जिनमें हजारों युवा और छात्र भाग लेते हैं। केवल कुछ घंटे साइकिल चलाने से भी कुछ नहीं होने वाला है। 

हमें सातों दिन साइकिल का उपयोग करना होगा। चार-पांच किमी की दूरी तक नियमित साइकिल चलाई जाए, तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भारत सरकार ने 29 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर एक फिट इंडिया मूवमेंट शुरू किया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शारीरिक गतिविधियों और खेलों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके बावजूद लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। 

हरियाणावासियों के स्वास्थ्य के प्रति उदासीन होने का मुख्य कारण तेज शहरीकरण, औद्योगिक विकास के कारण बदलती जीवन शैली, कार्यस्थलों पर बढ़ता तनाव और खानपान में हुए नकारात्मक बदलाव हैं। इसके अलावा जागरूकता की कमी, समय का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक भौगोलिक पहुंच में असमानता भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाते हैं। 

जब से देश और प्रदेश में सोशल मीडिया का चलन शुरू हुआ है, लोग घर से बाहर निकलकर टहलने से ज्यादा बेहतर आॅन स्क्रीन रहना पसंद करते हैं। शारीरिक श्रम न करने की वजह से लोग कई असाध्य रोगों के शिकार होते जा रहे हैं।

Monday, June 8, 2026

मैं ट्यूशन पढ़ाकर स्कूल फीस जमा करता हूं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ईमानदारी और बुरे कर्मों से दूर रहने वाला व्यक्ति अगर अपने मन में कुछ करने की ठान ले, तो वह असंभव लगने वाला काम भी संभव करके दिखा सकता है। बहुत पहले की बात है। अमेरिका में एक एथेंस नामक युवक रहता था। वह अनाथ था। एथेंस बहुत ही मेहनती और स्वाभिमानी व्यक्ति था। 

एक दिन उसने किसी किताब में पढ़ा था कि ज्ञान अर्जित करने से व्यक्ति विश्व में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर सकता है। इससे वह न केवल धन-संपदा का मालिक बन सकता है, बल्कि अच्छे आचरण का मार्ग अपनाकर वह अपना जीवन सफल भी बना सकता है। एथेंस ने उसी दिन संकल्प लिया कि वह जीवन भर अपनी मेहनत की कमाई से ही गुजारा करेगा। वह बुरे कामों से हमेशा दूर रहेगा। 

किसी प्रकार का नशा नहीं करेगा। चूंकि वह अनाथ था, तो उसे किसी का सहारा भी नहीं था। वह अपनी मेहनत के बल पर एक दिन वह अमेरिका के सबसे सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। उसकी प्रतिभा को देखकर कुछ छात्रों को बड़ी ईर्ष्या हुई। उन्होंने चोरी का इल्जाम लगाकर मुकदमा दर्ज करा दिया। 

जज के पास जब मामला पहुंचा, तो एथेंस ने कहा कि उसने कोई चोरी नहीं की है। तब जज ने कहा कि तुम्हारे साथ पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि तुम चोरी करके इतनी महंगी फीस जमा करते हो। एथेंस ने कहा कि खाली समय में वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता है। एक महिला के घर पर माली का काम करता है। 

इससे उसको जो कमाई होती है, वह अपनी फीस जमा करता है। उसका खर्च बहुत कम है। जज ने जब मामले की जांच कराई तो एथेंस की सच्चाई सामने आ गई। उन्होंने एथेंस को मुक्त कर दिया। बाद में एथेंस अमेरिका का सबसे प्रसिद्ध बुद्धिजीवी बना।

ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों से बचकर रहने की जरूरत

अशोक मिश्र

विज्ञान ने सदियों पुराने कई अंध विश्वासों को गलत साबित कर दिया है। जैसे-जैसे विज्ञान उन्नत होता जा रहा है, लोगों में जागरूकता आने लगी है। इसके बावजूद ऐसे लोग काफी संख्या में मौजूद हैं जो जीवन में विज्ञान की उपलब्धियों का लाभ तो उठाते हैं, लेकिन जैसे ही परिवार पर कोई संकट आता है, वह विज्ञान पर भरोसा करने की जगह तंत्र-मंत्र, तांत्रिकों और ढोंगी बाबाओं पर भरोसा करते हैं। 

समस्या का निदान वैज्ञानिक तरीके से खोजने की जगह अंध विश्वास में फंस जाते हैं। कुछ ही दिन पहले भरतपुर राजस्थान में रहने वाली एक महिला ने रिश्ते में देवर लगने वाले दो युवकों पर तांत्रिक क्रिया करवाने के बहाने दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पुलिस को अपनी शिकायत में महिला ने बताया कि उसके परिवार में आए दिन कोई न कोई बीमार रहता था। वह काफी परेशान थी। 

इसी दौरान रिश्ते में देवर लगने वाले पड़ोसी ने उसे तांत्रिक क्रिया करवाने का सुझाव दिया। उसने कहा कि तांत्रिक क्रिया करवाने के बाद परिवार पर आने वाला संकट खत्म हो जाएगा। उसके कहने पर वह पलवल आई और तांत्रिक ने झाड़-फूंक की। इस दौरान वह सुधबुध खो बैठी। इसके बाद वह उसे होटल में ले गया, जहां दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और कई बार दुष्कर्म किया। हरियाणा में ही नहीं, देश के कई राज्यों में लोग झाड़-फूंक, टोना-टोटका जैसे अंधविश्वास के चलते यौन शोषण या आर्थिक शोषण का शिकार होते हैं। लगभग तीन साल पहले जनवरी 2023 में फतेहाबाद के टोहाना में स्वघोषित बाबा अमरपुरी उर्फ बिल्लू राम या जलेबी बाबा ने तंत्र-मंत्र का जाल बिछाकर सौ से अधिक महिलाओं का यौन शोषण किया था। 

उसके पास से 120 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप बरामद किए गए थे। जलेबी बाबा महिलाओं को नशीला पदार्थ खिलाकर उनके अश्लील वीडियो बना लेता था और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर बार-बार दुष्कर्म करता था। जनवरी 2023 में कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए 14 साल की सजा सुनाई थी। मई 2024 में जेल में बंद रहने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उसकी मृत्यु हो गई। जनवरी 2026 में पानीपत की एक महिला अपने बीमार बेटे का संकट कटवाने के लिए एक तांत्रिक के पास गई थी। 

तांत्रिक ने महिला को अपनी बातों में फंसाया, नशीला प्रसाद खिलाया और उसे बंधक बनाकर लगातार कई दिनों तक दुष्कर्म किया। पानीपत पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज कर आरोपी तांत्रिक को गिरफ्तार किया। यह घटनाएं तो उस समाज की बानगी है जो पूरी तरह अंधविश्वास के जाल में फंसा हुआ है। लोग शारीरिक समस्याओं के लिए चिकित्सक के पास न जाकर ढोंगी तांत्रिकों और बाबाओं के पास जाते हैं। इनके अंध विश्वास का ऐसे लोग फायदा उठाते हैं। ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों से लोगों को बचकर रहना चाहिए।