Thursday, February 19, 2026

मित्र के लिए राक्षस ने किया आत्मसमर्पण

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद का महामंत्री यानी अमात्य था राक्षस। उसका नाम राक्षस क्यों पड़ा, इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिलती है। कहा जाता है कि वह राज्य को सुरक्षित और संपन्न बनाने के लिए कठोर फैसले लेता था, शायद इसीलिए उसको लोग राक्षस कहने लगे थे। इसके चलते उसका वास्तविक नाम अज्ञात रहा और उसकी उपाधि ही उसका नाम हो गया। 

धनानंद के आमात्य राक्षस के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी विशाखदत्त के संस्कृत भाषा में लिखे गए नाटक मुद्राराक्षस में मिलती है। यह नाटक चौथी से छठवीं शताब्दी के बीच गुप्त काल में लिखा गया माना जाता है। नाटक के अनुसार, जब चाणक्य के संरक्षण में चंद्रगुप्त मौर्य ने धनानंद को पराजित कर दिया, तो चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बना दिया। 

धनानंद के मुख्य सलाहकार और प्रधान मंत्री राक्षस को चंद्रगुप्त पकड़ नहीं पाया था। अमात्य राक्षस ने दूसरे राजाओं के सहयोग से चंद्रगुप्त के खिलाफ कई अभियान चलाए। लेकिन वह चाणक्य की चतुराई की वजह से सफल नहीं हुआ। चाणक्य भी राक्षस को अपनी ओर मिलाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने राक्षस के परममित्र सेठ चंदन दास को गिरफ्तार करवा लिया। चाणक्य ने घोषणा की कि कुछ दिनों बाद चंदनदास को मृत्यु दंड दिया जाएगा। जब यह जानकारी राक्षस को मिली, तो वह विचलित हो गया। 

उसने चंद्रगुप्त के सामने उपस्थित होकर चंदन दास को छोड़  देने का आग्रह किया। चाणक्य ने कहा कि इसके बदले तुम्हें चंद्रगुप्त के लिए कार्य करना होगा। राक्षस ने कहा कि मैं शत्रुपक्ष का अमात्य रहा हूं, आपका मुझ पर विश्वास कैसे होगा? चाणक्य ने कहा कि तुम्हारा कार्य ही विश्वास पैदा करेगा। इसके बाद राक्षस ने अधीनता स्वीकार कर ली।

आतंकवाद से निपटने के लिए सैनी सरकार ने कस ली कमर


अशोक मिश्र

आतंकवाद वैश्विक समस्या है। इस समस्या से कमोबेस सभी देश पीड़ित हैं। कुछ देश तो खुलेआम इसे प्रश्रय भी दे रहे हैं। ऐसे देशों में पाकिस्तान सबसे पहले गिना जाता है। दिक्कत यह है कि पाकिस्तान कभी हमारे ही देश का हिस्सा था और अब पड़ोसी है। स्वाभाविक है कि आतंकवादी घटनाओं का सबसे पहला दुष्प्रभाव हमारे देश को ही झेलना पड़ता है। मुंबई में ताज पर आतंकी हमला, संसद भवन, पुलवामा, पहलगाम और अभी हाल में हुआ दिल्ली ब्लास्ट जैसे न जाने की कितनी घटनाएं हमारे देश में हो चुकी हैं। इन सभी घटनाओं में किसी न किसी रूप में पाकिस्तान का हाथ पाया गया था। 

दिल्ली ब्लास्ट मामले में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी हुई थी। फरीदाबाद में स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसर्स दिल्ली ब्लास्ट मामले में मुख्य अपराधी पाए गए थे।  काफी मात्रा में विस्फोटक रसायन भी हरियाणा में बरामद किए गए थे। इन सब घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सीएम नायब सिंह सैनी ने आतंकवाद विरोधी दस्ता गठित करने की इजाजत गृह विभाग को दे दी है। एटीएस का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक करेंगे। 

गुरुग्राम में एक अलग एटीएस पुलिस स्टेशन बनाया जाएगा। राज्य सरकार की आतंकवाद के खिलाफ यह एक अच्छी पहल है। इससे राज्य में सक्रिय आतंकवादियों और उनके स्लीपर सेल्स को पकड़ने और आतंकी नेटवर्कको छिन्न-भिन्न करने में सफलता मिलेगी। वैसे अभी तक यह काम पुलिस, खुफिया विभाग और अन्य सुरक्षा से जुड़ी संस्थाएं करती रही हैं। इन संस्थाओं के पास पहले से ही अपने बहुत सारे काम होते हैं, इसलिए आतंकियों की पूरी तरह से निगरानी नहीं कर पा रही थीं। 

आतंकवाद विरोधी दस्ते का गठन होने के बाद प्रदेश में आतंकी घटनाओं को रोका जा सकेगा, इसकी उम्मीद हो चली है। एटीएस के पांच विंग होंगे। इस विंग में स्पेशल फोर्स, इंटेलीजेंस-आॅपरेशनल डिपार्टमेंट, रिसर्च-एनालिसिसि विंग और इन्वेस्टिगेशन मुख्य रूप से शामिल रहेंगे। एटीएस का मुख्य काम आतंकी हमलों पर तुरंत सही प्रतिक्रिया देना, आतंकवाद से जुड़े मामलों की अच्छी जांच करना और कोर्ट में सही तरीके से मुकदमा चलाना होगा, ताकि आतंकियों को उनके किए की सजा मिल सके। प्रदेश सरकार ने यह भी तय किया है कि पंचकुला में मुख्यालय के साथ सीआईडी ​​के अंतर्गत एक आतंकवाद-विरोधी दस्ता (एटीएस) सेंटर स्थापित किया जाएगा। 

एटीएस दस्ते के गठन के बाद आतंकियों के खिलाफ मुकम्मल कार्रवाई होगी। राज्य से आतंकी घटनाओं को होने से पूरा तरह रोक लग जाएगी, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। एटीएस में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्थिक लाभ प्रदान करने का भी राज्य सरकार ने फैसला लिया है, जो स्वागत योग्य है।

Wednesday, February 18, 2026

ऊंच-नीच की भावना देश सेवा में बाधक


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

सेवा करने के लिए मन में लगन और जोश जरूर होना चाहिए। देश सेवा के लिए तो बलिदान होने की भावना बहुत जरूरी है। जब तक देश को सर्वोच्च समझकर आत्मोत्सर्ग की भावना नहीं होगी, सच्ची देश सेवा नहीं की जा सकती है। देशवासियों को एक समान समझना भी देश सेवा की अनिवार्य शर्त है। ऊंची-नीच, अमीर गरीब की भावना देश सेवा में सबसे बड़ी बाधक है। एक बार की बात है। 

साबरमती आश्रम में गांधी जी लोगों की सेवा खुद किया करते थे। वह अपना काम तो खुद करते ही थे, लोगों को भी प्रेरित करते थे कि वह अपना काम खुद करें और सादगी से जीवन यापन करें। एक दिन की बात है। एक विदेशी युवक साबरमती आश्रम में आया और गांधी जी से बोला कि उसने उच्च शिक्षा हासिल की है। वह चाहता है कि साबरमती आश्रम में रहकर लोगों की सेवा करे। 

गांधी जी ने उसके लहजे से जान लिया कि युवक को अपनी उच्च शिक्षा और रहन सहन पर बहुत अभिमान है। उन्होंने युवक से कहा कि तुम गेहूं बीनने का काम करो। युवक को गांधी जी की यह बात अच्छी तो नहीं लगी, लेकिन वह गेहूं बीनने लगा। थोड़ी ही देर में वह उस काम से उकता गया। उसने गांधी जी के पास जाकर कहा कि थोड़ा जल्दी खा लेने की मेरी आदत है। इसलिए मैं खाना खाने की इजाजत चाहता हूं। 

गांधी जी ने कहा कि अभी थोड़ी देर में आश्रमवासियों के लिए भोजन तैयार हो जाएगा, तब सबके साथ बैठकर खाना खा लेना। युवक चुप रह गया। तब गांधी जी ने कहा कि तुम देश की सेवा करना चाहते हो, यह अच्छी बात है, लेकिन जब तक तुम अपने को श्रेष्ठ और दूसरों को कमतर समझोगे, तो देश सेवा कैसे कर पाओगे। सबको अपने ही समान समझना चाहिए।

केमिकल फैक्ट्री में लगी आग से सबक सीखें प्रशासनिक अधिकारी


अशोक मिश्र

फरीदाबाद के सेक्टर 24 में सोमवार की शाम लगी भीषण आग ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी है। एक निजी कंपनी में सीएनसी से मेटल शीट कटिंग के दौरान लगी आग में 42 से अधिक लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। इनमें से कुछ लोगोंकी हालत काफी गंभीर है। हादसे के बारे में बताया जा रहा है कि मेटल शीट कटिंग के दौरान निकली चिन्गारी ने कुछ ही दूर रखे ड्रम में आग पकड़ ली। इसके बाद तो लगातार ड्रम किसी बम की तरह फटने लगे। 

चारों ओर चीख पुकार मच गई। घायल और झुलसे लोग बदहवाश होकर इधर-उधर बचने के लिए भागने लगे। इसी बीच किसी ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को फोन करके हादसे की जानकारी दी। जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची और बचाव और राहत का काम शुरू किया। लोगों का कहना है कि यदि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तत्परता से मौके पर नहीं पहुंचती, तो शायद हादसा और भी भयानक हो सकता था। इस एक घटना ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 

प्रशासन को यह नहीं मालूम है कि सेक्टर-24 में चल रही यह फैक्ट्री अधिकृत एरिया में चलाई जा रही थी या अनधिकृत एरिया में। पूछने पर अधिकारी यह कहकर अपना पल्ला झाड़ ले रहे हैं कि छानबीन करने के बाद ही पता चलेगा। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि किस केमिकल की वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि जिन ड्रमों की वजह से विस्फोट हुआ, उन ड्रमों में मशीन के पुर्जोँ को साफ करने वाले आयल के साथ-साथ कोई केमिकल भी था जिसकी वजह से इतनी तेजी से आग फैली और विस्फोट हुआ। 

वैसे इंडस्ट्रियल एरिया में भी अगर कोई केमिकल रखा जाता है, तो उसके लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। अगर किसी इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित फैक्ट्री, वर्कशाप या दुकान में कोई केमिकल या ज्वलनशील पदार्थ रखा जाता है, तो उस केमिकल का नाम जरूर लिखा जाता है। हर ड्रम पर केमिकल का नाम, उसका विवरण, खतरे का चिन्ह और चेतावनी का चिह्न बना होना चाहिए ताकि हर व्यक्ति कार्य करते समय सतर्क रहे। ड्रम में रखे केमिकल को उपयुक्त तापमान पर ही रखा जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे। वेंटिलेशन की भी पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। 

इतना ही नहीं, उसके आसपास पार्किंग एरिया नहीं होनी चाहिए। किसी को स्मोकिंग की इजाजत भी नहीं देनी चाहिए। फैक्ट्रियों, वर्कशापों में आग से बचने के उपाय अवश्य किए जाने चाहिए। अधिकारियों को भी चाहिए कि वह समय समय पर ऐसी फैक्ट्रियों और वर्कशापों की जांच करते रहे। थोड़ी सी भी लापरवाही दिखे, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।

Tuesday, February 17, 2026

विल्मा ने पोलियो को हराकर जीता गोल्ड

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अमेरिका के टेनेसी में 23 जून 1940 को पैदा हुई विल्मा ग्लोडीन रुडोल्फ को बचपन में काफी संघर्ष करना पड़ा। वह समय से पहले पैदा हुई थीं। बचपन में ही निमोनिया और पोलियो की वजह से बायां पैर कमजोर हो गया। वह सहारा लेकर ही चल पाती थीं। 

उनकी मां ब्लैंथ रुडोल्फ और पिता एड रुडोल्फ हमेशा उनका उत्साहवर्धन करते रहे। उन दिनों अमेरिका में स्पोर्ट्स को ज्यादा महत्व दिया जाता था जिसकी वजह से प्राइमरी स्कूल से ही बच्चों को खेलने का मौका दिया जाता था। जब वह बारह साल की हुईं तो एक दिन स्पोर्ट्स पीरियड में उन्होंने अपने टीचर से ओलिंपिक के बारे में जानना चाहा। शिक्षक उसकी बात पर हंस पड़े और व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि तुम अपने पैरों को देखो, दौड़ना तो दूर ठीक से चल भी नहीं पाती हो। ओलिंपिक के बारे में जानकर तुम क्या करोगी। 

वहां मौजूद छात्र-छात्राएं भी उसका मजाक उड़ाने लगे। फिर तो स्कूल में सबने उसका मजाक उड़ाना शुरू किया। तब विल्मा ने अपने शिक्षक से कहा कि एक दिन आप सब मुझे ओलिंपिक में दौड़ते हुए और पदक जीतते हुए देखें। इसके बाद विल्मा ने पहले अपनी बैसाखी से छुटकारा पाने का प्रयास किया जिसमें वह काफी मेहनत के बाद सफल भी हो गईं। इसके बाद उन्होंने दौड़ने का अभ्यास शुरू किया। 

छोटी-मोटी प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेकर जीत हासिल की। इसके बाद 1960 में रोम में हुए ओलिंपिक में उन्होंने तीन प्रतिस्पर्धाओं भाग लेकर तीन स्वर्ण पदक जीते। एक ओलिंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली वह अमेरिका की पहली महिला बनीं। 12 नवंबर 1994 को 54 वर्ष की आयु में इस महान महिला धाविका की कैंसर से टेनेसी में मौत हो गई।

आग लगने पर धन-जन हानि कम करने को खुलेंगे नए फायर स्टेशन


अशोक मिश्र

अब मौसम धीरे-धीरे गरम होने लगा है। तापमान बढ़ने से लोगों ने राहत की सांस ली है। लेकिन आने वाले दिनों में यही गरमी जब प्रचंड रूप अख्तियार करेगी, तब आज सुखद लगने वाली गरमी परेशानी का सबब बन जाएगी। गरमी के मौसम में सबसे ज्यादा आगजनी की घटनाएं सामने आती हैं। मौसम गरम होने की वजह से सब चीजें सूख जाती हैं जिसकी वजह से एक हल्की सी चिन्गारी भयानक रूप धारण कर लेती है। वनों और खेतों में आग लगने की घटनाएं सबसे ज्यादा मार्च से लेकर जून महीने में होती हैं। कई बार किसी व्यक्ति की लापरवाही के चलते खेत में लगी आग कफी नुकसानदायक साबित होती है। 

गेहूं की फसल की मार्च और अप्रैल महीने से कटनी शुरू हो जाती है। कई बार खड़ी फसल में आग लग जाती है जिसको रोक पाना किसान और लोगों के वश की बात नहीं रहती है। कई सौ एकड़ फसल जलकर राख हो जाती है। किसान की मेहनत स्वाहा हो जाती है। इस स्थिति से निपटने के लिए सैनी सरकार ने प्रदेश में फायर स्टेशन की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है। शिवालिक क्षेत्र पंचकुला, अंबाला और यमुना नगर जैसे जिलों में नए फायर स्टेशन खोलने की योजना है। 

 वैसे पूरे प्रदेश में अभी तक केवल 89 फायर स्टेशन हैं, जो जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए काफी कम प्रतीत होते हैं। इनमें से भी सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्र में फायर स्टेशन हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इनकी संख्या काफी कम है। प्रदेश में 59 फायर स्टेशन खोले जाएंगे जिसमें से बीस फायर स्टेशन एनसीआर इलाके में खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन नए फायर स्टेशनों को खोलने की मंजूरी दे चुके हैं। फायर स्टेशन खोलने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों में लगने वाली आग पर जल्दी  से जल्दी काबू पाना है। 

कई बार यह भी देखने में आया है कि जब किसी खेत या औद्योगिक संस्थान में  आग लग जाती है, तो फायर ब्रिगेड को पहुंचने में काफी देर लगती है। इसका कारण फायर स्टेशन का बहुत दूर होना है। जब फायर ब्रिगेड चलती है, तो रास्ते में पड़ने वाली टूटी फूटी सड़कें, संकरे रास्ते और सड़कों पर हुआ अतिक्रमण उनकी रफ्तार को काफी धीमा कर देते हैं। ऐसी स्थिति जब तक फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचती है, तब तक फसल या सामान जलकर स्वाहा हो चुका होता है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने पचास किमी के दायरे में फायर स्टेशन स्थापित करने का फैसला किया है। 

हालांकि यह भी दूरी कुछ ज्यादा ही है। दस-पंद्रह किमी के दायरे में एक फायर स्टेशन होने से आग लगने की घटनाओं पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में धन-जन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि आग लगने पर फायर ब्रिगेड जब तक पहुंचती है, तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका होता है।

Monday, February 16, 2026

साबूलाल ने तिरंगा फहराकर ही दम लिया

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

देश को आजाद कराने के लिए हजारों युवाओं ने अपना बलिदान दिया है। देश के लगभग हर जिले से लोगों ने अंग्रेजी दासता से मुक्ति के लिए अपने प्राणों को उत्सर्ग किया है। ऐसे ही एक क्रांतिकारी थे साबू लाल जैन वैसखिया। साबूलाल का जन्म 1923 मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ा कोटा में हुआ था। 

साबूलाल ने पांचवीं तक पढ़ाई की थी। वह आगे पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनके पिता पूरन चंद की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी, इसलिए उनको पढ़ाई छोड़कर कामकाज में लगना पड़ा। बचपन में ही उनके मन में देशभक्ति भावना पैदा हो गई थी। बात 1942 की है। देश में क्रांति की आग धधक रही थी। अंग्रेजों के खिलाफ पूरे देश में रोष था। उन्हीं दिनों सागर में तय किया गया कि कल अंग्रेजी शासन के विरोध में एक जुलूस निकाला जाएगा, जो कलेक्ट्रेट तक जाएगा। 

इस जुलूस में बाबूलाल ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। सैकड़ों आदमियों का यह जुलूस जैसे ही कलेक्ट्रेट पहुंचा, बाबू लाल कलेक्ट्रेट की छत पर चढ़ गए। उस समय नीचे मौजूद पुलिस वालों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह छत तक पहुंचने में सफल हो गए। कलेक्ट्रेट पर लगेयूनियन जैक को उतार कर साबूलाल ने नीचे फेंक दिया। इस पर पुलिस वालों ने उन्हें चेतावनी दी, लेकिन इसी बीच वह यूनियन जैक की जगह पर तिरंगा लगाने में सफल हो गए। इतने में पुलिस वालों ने गोलियां चलानी शुरू की। 

एक गोली आकर साबूलाल जैन के सीने में लगी। भारत माता की जयकारे के साथ साबूलाल नीचे आ गिरे। उनकी उसी समय मौत हो गई। साबूलाल के शहीद होने की खबर सुनकर पूरा जिला शोकग्रस्त हो गया। उनकी शवयात्रा के दौरान उमड़ी भारी भीड़ को देखकर ब्रिटिश हुकूमत भी दहल गई।

नई औद्योगिक नीति से हरियाणा में विकास को लगेंगे नए पंख


अशोक मिश्र

किसी भी देश या प्रदेश में पूंजी निवेश करते समय निवेशक सबसे पहले यह जानकारी हासिल करता है कि उस देश या प्रदेश की कानून व्यवस्था कैसी है? इसके बाद वह आवागमन के साधनों, सड़कों और शासन से मिलने वाले छूट आदि के बारे में विचार करता है। औद्योगिक क्षेत्र का विकास तभी हो सकता है, जब सरकार की नीतियां उद्योगों को प्रश्रय देने वाली हों, उनके विकास में सहयोगी साबित हों। यही वजह है कि नायब सैनी सरकार ने प्रदेश के विकास की आधारशिला रखने के लिए नई औद्योगिक नीति बनाने का फैसला किया है। नई औद्योगिक नीति के तहत राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय उद्योगों और निवेशकों को वह हरसंभव सुविधाएं देने की कोशिश की जाएगी जिससे देशी-विदेशी पूंजी निवेशक आकर्षित हो सकें। यदि प्रदेश में देशी-विदेशी निवेशक पूंजी निवेश करते हैं, तो इससे प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। 

प्रदेश की बेरोजगारी कम होगी। लोगों की कमाई बढ़ने से जीवन स्तर भी उच्च होगा। सैनी सरकार इस प्रयास में लगी हुई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 लक्ष्य में हरियाणा का सबसे ज्यादा योगदान हो। हरियाणा की औद्योगिक स्थिति को देखते हुए यह स्वप्न असंभव भी नहीं लग रहा है। बस, इसके लिए थोड़ी मेहनत और करनी होगी। सैनी का तो यहां तक कहना है कि प्रदेश देशी-विदेशी पूंजी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। इस बार बजट में नई औद्योगिक नीति के साथ-साथ उद्योगों को भारी छूट और सुविधाएं मिलने की संभावना है। 

पिछले बजट में भी सरकार ने राज्य में दस आईएमटी बनाने की बनाने की घोषणा की थी। इन दस नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप में छह पर बड़ी तेजी से काम चल रहा है। बाकी बची चार आईएमटी का काम जल्दी ही शुरू होने वाला है। प्रदेश की कनेक्टिविटी को दुरुस्त करने के लिए सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। जो सड़कें खराब हो गई हैं या जिन सड़कों पर गड्ढे हैं, उनको दुरुस्त किया जा रहा है। नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और जिलों की सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि प्रदेश में आवागमन दुरुस्त हो सके। 

पहले से ही प्रदेश में आवागमन काफी सहूलियत भरा है। राज्य के एक कोने से दूसरे कोने में बहुत आसानी से पांच-छह घंटे में आया जाया जा सकता है। दिल्ली एयरपोर्ट, चंडीगढ़ एयरपोर्ट और हिसार एयरपोर्ट के जरिये हवाई यात्रा को भी सर्वसुलभ करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है ताकि किसी को आने-जाने में कोई परेशानी न हो। इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर कुछ इस तरीके से विकसित किया जा रहा है ताकि आने वाले चार-पांच दशकों तक पूंजी निवेशकों को किसी किस्म की परेशानी का अनुभव न हो। यूरोपीय यूनियन के साथ पिछले दिनों हुए भारत-ईयू समझौते से भी हरियाणा को भारी लाभ मिलने की संभावना है।

Sunday, February 15, 2026

...और बच्चा हमेशा के लिए सो गया

प्रतीकात्मक एआई चित्र
बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

प्रकृति में मानवीय हस्तक्षेप दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। कहीं पेड़ों को काटकर सड़कें बनाई जा रही हैं, तो कहीं वनों को उजाड़कर बस्तियां बसाई जा रही हैं। इससे हमारा पर्यावरण संकट में पड़ता जा रहा है। जिस मौसम में गर्मी पड़नी चाहिए, उस मौसम में चक्रवात आ रहे हैं, तेज हवाओं के साथ बरसात हो रही है। 

पृथ्वी का तापमान दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह से मौसम चक्र में भारी बदलाव आता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते भारी संख्या में लोगों को विस्थापित होने पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के शुरुआती दौर यह कथा है। कहते हैं कि किसी राज्य में कई वर्षों से बरसात नहीं हुई। उस राज्य के लोगों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादातर पेड़ों को काट डाला था। 

इसका नतीजा यह हुआ कि एक साल बादल आते और बिना बरसे निकल जाते। जैसे प्रकृति भी मानवों के कुकृत्य से नाराज थी। लोगों में त्राहि-त्राहि मची हुई थी। लोग भूख और प्यास से मर रहे थे। एक बच्चा भी कई दिनों से भूखा था। अनाज पैदा न होने की वजह से काफी संख्या में लोगों को अपनी जान देनी पड़ी थी। बच्चा भी काफी दुर्बल हो गया था। उसके पास थोड़ा सा पानी बचा था। 

तभी उस बच्चे के सामने एक चिड़िया भूख-प्यास से बेहाल होकर गिर पड़ी। वह भी शायद कई दिनों से भूखी प्यासी थी। उस बच्चे ने चिड़िया को देखा और फिर अपने पास बचे हुए पानी को देखा। उसने एक-एक बूंद पानी चिड़िया के चोंच में डालनी शुरू की। थोड़ी देर में कुछ पानी चिड़िया के पेट में गया और कुछ पानी जमीन पर। थोड़ी देर बाद चिड़िया ने अपने पंख फड़फड़ाए और उड़ गई। उसके बाद बच्चा जमीन पर गिरा और हमेशा के लिए सो गया। कहते हैं कि इसके बाद उस राज्य में भारी बारिश हुई।

जंगल सफारी तो चाहिए, लेकिन अरावली क्षेत्र की कीमत पर नहीं


अशोक मिश्र

अरावली की पहाड़ियों में प्रस्तावित जंगल सफारी पर रोक लगा दी गई है। सुप्रीमकोर्ट ने हाल ही में अरावली की ऊंचाई को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। इसके बाद जब वैज्ञानिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने इसका विरोध किया और मामले को लेकर दोबारा सुप्रीमकोर्ट में गए, तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर न केवल रोक लगा दी, बल्कि अब जंगल सफारी के निर्माण पर भी रोक लगा दी है। 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान  अरावली की पहाड़ियों में किसी भी तरह के गैर वानिकी कार्य पर रोक लगाते हुए कहा है कि अगली सुनवाई तक अरावली क्षेत्र में कोई भी अंतिम निर्णय नहीं लिया जाए या विस्तृत कार्य योजना जमा की जाए। वैसे सरकार जंगल सफारी विकसित करने के लिए प्रारंभिक सर्वे और कॉन्सेप्ट प्लान तैयार करा रही थी। भूमि की पहचान के साथ-साथ मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार कर लिया था। सरकार अब सुप्रीमकोर्ट के निर्देश के बाद सभी पहलुओं पर दोबारा विचार करेगी, समीक्षा करेगी। 

यह भी संभव है कि सरकार जरूरत पड़ने पर परियोजना के स्वरूप में थोड़ा बहुत बदलाव लाए। सरकार का कहना है कि जंगल सफारी के निर्माण के बाद पर्यावरण संरक्षण होता। सफारी की वजह से अरावली क्षेत्र में हो रहा पेड़ों का अवैध कटान ही नहीं रुकता, बल्कि खनन पर भी रोक लगती। वन और खनन माफिया लोगों की मौजूदगी की वजह से अपना काम नहीं कर पाते। उनकी गतिविधियों पर लगाम लग जाती। इतना ही नहीं, नूंह और गुरुग्राम के दस हजार एकड़ क्षेत्र में जंगल सफारी विकसित होने से प्रदेश में पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा। इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार बढ़ेगा, राज्य के लोगों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। 

दुनिया के सबसे बड़े जंगल सफारी के चलते प्रदेश राष्ट्रीय और  अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन नक्शे पर अपनी जगह और पहचान बनाने में सफल होगा। सरकार का यह तर्क कहीं से भी गलत नहीं है, लेकिन जंगल सफारी बनने से नुकसान भी कम नहीं होता। अरावली क्षेत्र में रहने वाले वन्य जीवों को लोगों के आने से जो परेशानी होती, वह भी ध्यान रखना होगा। वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण नहीं मिल पाता, इससे वह मानव बस्तियों की ओर भी रुख कर सकते थे। 

इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि अरावली की पहाड़ियां हजारों साल से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लिए फेफड़े का काम करती रही है। अरावली की पहाड़ियों की वजह से ही लोगों को स्वस्थ हवा मिलती रही है। प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगती रही है, लेकिन मोटर गाड़ियों, कल-कारखानों के साथ-साथ पराली जलाने जैसी घटनाओं ने प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक बढ़ा दिया है। अरावली की पहाड़ियों पर होने वाले पेड़ों की अवैध कटान से भी बुरा प्रभाव पड़ा है। प्रदूषण की समस्या गहराई है।