Monday, June 15, 2026

क्यों ना मौत की खुशी से स्वागत किया जाए

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जीवन का हर पल कीमती है और उसका उपयोग करना चाहिए। जीवन का कोई भरोसा नहीं है, पता नहीं कब मौत आ जाए। संसार में वही लोग सुखी रहते हैं, जो अपने जीवन को सहजता से जीते हैं। एक बार की बात है।

 किसी राज्य का राजा किसी बात पर अपने मंत्री से नाराज हो गया। वैसे मंत्री ने कोई बड़ा अपराध नहीं किया था, लेकिन राजा ने अपने सैनिकों को बुलाकर कहा कि आज शाम तक मंत्री को फांसी पर लटका दो। राजा को मंत्री की कोई बात हृदय में चुभ गई थी, इसीलिए वह मंत्री से नाराज हो गया था। 

राजा की बात सुनकर सारे दरबारी चकित रह गए क्योंकि मंत्री ने कई बार अपने अमूल्य सुझावों से राजा को फायदा पहुंचाया था। लेकिन राजा का आदेश कोई भला कैसे टाल सकता था। सैनिक उस मंत्री के घर पहुंचे, तो मंत्री अपने रिश्तेदारों और परिवार वालों के साथ उत्सव मना रहा था। उस मंत्री का उस दिन जन्मदिन था। सैनिकों ने जब राजा का आदेश सुनाया, तो परिवार और रिश्तेदार दुखी हो गए। उत्सव मनाना रोक दिया गया। 

तब मंत्री ने कहा कि फांसी तो शाम को लगनी है। तब तक का समय तो है न हमारे पास। तो फिर उत्सव बंद क्यों किया जाए। लोगों ने उत्सव मनाना शुरू कर दिया। लेकिन मन ही मन सारे लोग उदास थे। यह बात जब सैनिकों ने राजा को बताई तो राजा को बहुत आश्चर्य हुआ। 

उन्होंने मंत्री को बुलाया, तो मंत्री ने कहा कि आपने शाम तक का समय दिया,यह आपकी कृपा है। ऐसी स्थिति में मैं बचा हुआ समय अपने परिवार के साथ बिताना चाहता हूं। मेरे लिए एक-एक पल बहुत कीमती है। जब मौत होनी ही है, तो क्यों न खुशी से मौत का स्वागत किया जाए। यह सुनकर राजा ने मंत्री की सजा को माफ कर दिया।

धान की खेती करें, लेकिन पानी को बरबाद होने से भी बचाएं

अशोक मिश्र

धान की रोपाई करने पर हरियाणा सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदी आज यानी 15 जून को समाप्त हो जाएगी। कल के बाद किसान अपनी सुविधानुसार धान की रोपाई कर सकेंगे। हरियाणा में पिछले कुछ दशकों से भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है जिसकी वजह से साठ दिन में पैदा होने वाले धान की रोपाई पर प्रदेश सरकार ने 15 जून तक रोपाई पर प्रतिबंध लगा रखा है। 

वैसे भी प्रदेश के लगभग सभी जिलों में लगातार गिरता भूजल स्तर राज्य सरकार, कृषि विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि लगातार गिरते भूजल स्तर को रोका जाए और लोगों को होने वाली पानी की कमी की समस्या को दूर किया जाए। आज हालात यह है कि हरियाणा में दिनोंदिन गिरता भूजल स्तर एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण यहाँ पानी का अत्यधिक दोहन होता है, जिसके चलते लगभग 88 ब्लॉक 'अति-शोषित' (डार्क जोन) की श्रेणी में आ चुके हैं। 

पानी की किल्लत के कारण हजारों नलकूप सूख चुके हैं। प्रदेश के लगभग 14 जिलों की स्थिति चिंताजनक है, जहाँ भूजल स्तर 30 मीटर से भी नीचे चला गया है। महेंद्रगढ़, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, अंबाला, हिसार और जींद में भूजल का दोहन सबसे अधिक हुआ है। यही वजह है कि प्रदेश सरकार धान की जगह मक्का, बाजरा और दलहन जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दे रही है। इतना ही नहीं, सरकार इसके लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि भी देती है। सरकार चाहती है कि प्रदेश में धान की फसल कम से कम उगाई जाए ताकि पानी की बचत हो सके। एक बीघा धान बोने से लेकर फसल तैयार होने तक औसतन तीन से पांच लाख लीटर पानी खर्च होता है। 

इतना पानी खर्च करने के बाद अगर धान की फसल तैयार होती है, तो पूरे प्रदेश में धान की फसल पर कितना पानी खर्च होता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रदेश में लगातार गिरते भूजल स्तर का एक प्रमुख कारण धान की खेती भी है। लेकिन यदि किसान चाहें तो आधुनिक तकनीक से पानी की खपत को काफी कम कर सकते हैं। सीधी बुवाई करने से धान की फसल उगाने पर खर्च होने वाले पानी की पचास से साठ प्रतिशत बचत की जा सकती है। 

ड्रिप इरीगेशन विधि से धान उगाने पर पानी का वाष्पीकरण कम होता है और सिंचाई पर होने वाला पानी और खर्च दोनों बचते हैं। लेकिन ज्यादातर किसान ऐसा नहीं सोचते हैं। वह धान की अगेती फसल बोकर जल्दी से जल्दी खेत खाली कर लेना चाहते हैं ताकि अगली फसल आलू, सरसों जैसी फसलों को बोकर ज्यादा कमाई की जा सके। अगेती फसल में धान के प्रमुख कीटों और बीमारियों का प्रकोप बहुत कम देखने को मिलता है। लेकिन किसानों को यह सोचना चाहिए कि धान की खेती करने पर पानी की होने वाली बरबादी कम नहीं है। पानी की बरबादी राष्ट्र का नुकसान है।

Sunday, June 14, 2026

गलती मान लेने वाले लोग बड़ा काम करते हैं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा गांधी ने अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले को समर्पित एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है धर्मात्मा गोखले। गोखले कांग्रेस में नरम दल के नेता माने जाते थे। उन्हें भारत को स्वाधीन कराने के लिए प्रतिक्रियावादी या क्रांतिकारी तरीका पसंद नहीं था। 

यही वजह है कि वह गरम दल के नेताओं के विचारों के विरोधी थे। इसके बावजूद जब 1907 में गरम दल के नेता लाला लाजपत राय को अंग्रेजों ने म्यामार के माडले जेल में कैद कर लिया, तो गोखले ने उनकी रिहाई के लिए आंदोलन चलाया था। गोखले का जन्म 9 मई, 1866 को वर्तमान महाराष्ट्र (तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा) के कोटलुक गाँव में हुआ था।

इनके बचपन का एक किस्स है। हुआ यह कि एक दिन गणित के अध्यापक ने क्लास में सभी बच्चों को एक सवाल हल करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि जो इस सवाल को हल कर लेगा, उसे पुरस्कार दिया जाएगा। सभी बच्चे सवाल हल करने लगे। लेकिन किसी को इसका हल नहीं सूझ रहा था। सवाल वाकई कठिन था। क्लास में काफी सन्नाटा था। काफी देर गोखले अपनी सीट से उठे और अध्यापक को अपनी कापी सौंप दी। अध्यापक ने देखा कि सवाल का उत्तर वाकई सही था। 

अगले दिन जब पुरस्कार देने की बारी आई, तो गोखले अपने अध्यापक के पैरों से लिपट गए और रोते हुए बोले, मैं इस पुरस्कार के लायक नहीं हूं क्योंकि मैंने उस सवाल का उत्तर किताब से नकल किया था। अध्यापक ने कहा कि मुझे दुख इस बात का नहीं है कि तुमने उत्तर नकल किया। लेकिन इस बात की खुशी है कि तुमने आखिर में सच बोल दिया। गलती मान लेने वाले लोग जीवन में कुछ बड़ा काम करते हैं।

अभी से पानी नहीं बचाया तो निकट भविष्य में होगी भारी परेशानी


अशोक मिश्र

हरियाणा में गर्मी के दिनों पेयजल की किल्लत हर साल होती है। हालात कितने चुनौतीपूर्ण हैं, इसको इस बात से समझा जा सकता है कि शुक्रवार को अरावली गोल्फ क्लब में विधायक धनेश अदलखा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एक पार्षद ने तो यहां तक कहा कि वार्ड में पेयजल की समस्या का समाधान न होने की वजह से मैंने अपने वार्ड में ही जाना छोड़ दिया है। 

बता दें कि कुछ दिनों पहले सीएम नायब सिंह सैनी ने एफएमडीए और नगर निगम को पूरे जिले में बराबर पानी वितरण का आदेश दिया था। नगर निगम ने नया शिड्यूल भी जारी किया था। यह राज्य के किसी एक जिले की हालत नहीं है। लगभग सभी जिले पानी की किल्लत झेल रहे हैं। दरअसल, राज्य में पानी की उपलब्धता कम और मांग ज्यादा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन सबको जरूरत के मुताबिक पेयजल उपलब्ध करा पाने में नाकाम साबित हो रहा है। 

हरियाणा में हर साल लगभग 14 अरब घन मीटर का भारी जल घाटा है। प्रदेश में जहाँ कुल मांग 34.96 बीसीएम यानी अरब घन मीटर के मुकाबले उपलब्धता केवल 20.93 बिलियन क्यूब मीटर है। 14 अरब घन मीटर पानी की कमी को पूरा कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है। पूरे राज्य में तेजी से गिरता भूजल स्तर और नहरी पानी की सीमित आपूर्ति लोगों की मुख्य जरूरत और पेयजल किल्लत की जड़ हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। राज्य के कई जिलों में भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जबकि वर्षा के माध्यम से उसकी भरपाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। भूजल का अत्यधिक दोहन राज्य के लिए सबसे बड़ा संकट है। 

राज्य के कई जिले जैसे महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, हिसार, फरीदाबाद और सिरसा अत्यधिक डार्क जोन में आ चुके हैं। सेंट्रल और वेस्टर्न हरियाणा के कई जिलों में भूजल स्तर नीचे जा रहा है क्योंकि यहां का पानी अच्छी गुणवत्ता का है और उसका लगातार अधिक उपयोग किया जा रहा है। सिरसा, हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र, कैथल और महेंद्रगढ़ जैसे जिलों में भूजल दोहन की दर अधिक है, जबकि वर्षा से उसकी भरपाई पर्याप्त नहीं हो पा रही है। हरियाणा में पीने का पानी का अधिकतर हिस्सा पड़ोसी राज्य पंजाब से नहरों के माध्यम से मिलता है जिसे तलघरों में इकट्ठा किया जाता है।

जब पड़ोसी राज्यों से पानी आपूर्ति में बाधा आती है, तो राज्य में जल संकट खड़ा हो जाता है।  जल संरक्षण और मांग को संतुलित करने के लिए, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण ने 'जल न्याय' के तहत एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। प्रदेश सरकार अपने स्तर पर हालात से निपटने का हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसी स्थिति में नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वह सरकार का साथ दें और पानी को हर हालत में बचाएं।

Saturday, June 13, 2026

मैंने तीनों को पिंजरे से स्वतंत्र कर दिया


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गुलामी किसी को पसंद नहीं होती है। वह चाहे इंसान हो या जीव-जंतु। दुनिया भर में लोगों को पशु और पक्षियों को पालने का शौक होता है। वह किस्म-किस्म के जानवरों और पक्षियों को पालते हैं। उन्हें पिंजरे या कमरे में रखते हैं। यदि सच कहा जाए, तो यह प्रवृत्ति इन पशु-पक्षियों के स्वतंत्र जीवन जीने के अधिकार का हरण है। 

किसी नगर में एक व्यक्ति रहता था। उसका एक किशोर बेटा था। वह व्यक्ति काफी धनवान था। रुपये पैसे की कमी नहीं थी, तो वह अपने बेटे की हर मनोकामना को पूरा करने का प्रयत्न करता था। एक दिन की बात है। वह आदमी जब अपने काम से घर लौटा, तो उसके बेटे ने पूछा, पिता जी, यह जानवर, पशु-पक्षी हमारे दोस्त नहीं हो सकते हैं क्या? उस व्यक्ति ने कहा, क्यों नहीं हो सकते हैं। इनसे दोस्ती करना बहुत अच्छी बात है। 

पुत्र ने कहा कि पिता जी, मैं घर में आने वाली गिलहरियों, चिड़ियों, तोतों के साथ दोस्ती करना चाहता हूं, लेकिन जैसे ही मैं इनके पास जाने की कोशिश करता हूं, यह उड़ जाती हैं। पिता ने अपने पुत्र से कहा कि मैं कल तुम्हारे लिए कुछ दोस्त लेकर आऊंगा। जब तुम्हारा मन हो उनके साथ तुम खेलते रहना। 

यह सुनकर बेटा बहुत खुश हुआ। अगले दिन पिता अपने पुत्र के लिए तीन पिंजरे लाया जिसमें तोता, कबूतर और गौरेया बंद थीं। बेटा काफी खुश हुआ। उसने पूछा कि पिता जी यह सब उदास क्यों हैं? पिता ने कहा कि कुछ दिन बाद यह उदास नहीं रहेंगी। यह नई-नई पिंजरे में आई हैं, इसलिए उदास हैं। 

दो दिन बाद पिता ने देखा कि तीनों पिंजरे खाली हैं। उसने पुत्र से पूछा, तो पुत्र ने कहा कि यह सब पिंजरे में रहने की वजह से उदास थीं, तो मैंने उन्हें स्वतंत्र कर दिया। स्वतंत्र होने के बाद काफी देर तक पेड़ पर बैठकर वह तीनों चहकते रहे।

बात-बेबात होती हत्याएं समाज और सरकार के लिए चिंताजनक


अशोक मिश्र

हरियाणा में अपराध का ग्राफ कभी घट जाता है, तो कभी बढ़ जाता है। राज्य में ज्यादातर गैंगवार के दौरान हत्याएं होती हैं। लेकिन मामूली बात पर अन्य राज्यों में होने वाली हत्याएं यहां भी होती हैं। किसी से मामूली सी बात पर कहा सुनी हो गई, आवेश में आकर एक ने दूसरे की हत्या कर दी। ऐसी हत्याओं पर कोई सरकार अंकुश नहीं लगा सकती है। हां, संगठित अपराध पर काबू पाया जा सकता है जिसका हरसंभव प्रयास राज्य सरकार करती ही है। 

राज्य के हांसी शहर में गुरुवार को जिम संचालक की पांच सेकेंड में दस गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। सुबह पांच बजे लोगों को वार्म अप कराते समय जिम में घुसे दो लोगों ने ताबड़तोड़ गोलियां मारकर जिम संचालक कपिल रेढू की हत्या कर दी। हत्यारों ने अपना मुंह कपड़े से ढक रखा था। हत्या का कारण अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन लारेंस बिश्नोई गैंग के नाम से जो पोस्ट सोशल मीडिया पर सामने आई है, उसमें दावा किया गया है कि जिम संचालक शेखपुरा और ढाणी पुरिया फायरिंग मामले में मुख्य साजिशकर्ता था। 

यह बात कितनी सही है, यह पता लगाने की पुलिस कोशिश कर रही है। पुलिस मरने वाले जिम संचालक के आपराधिक इतिहास को भी खंगालने का प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और हरियाणा पुलिस द्वारा समय-समय पर उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर साल एक हजार से ग्यारह सौ हत्याएं होती हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य में हत्याओं का कुल आंकड़ा लगभग 5,000 से 5,500 के बीच रहा है। राज्य में हत्या की सबसे ज्यादा वारदात गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में दर्ज की जाती है। 

राज्य में होने वाली हत्याओं का सबसे प्रमुख कारण पुरानी रंजिश और व्यक्तिगत विवाद माने गए हैं। पुरानी रंजिश में लोग इंतजार करते रहते हैं और उपयुक्त अवसर पाकर अपने विरोधी की हत्या कर देते हैं। जमीन, जायदाद और पैसों के बंटवारे को लेकर भी हत्याएं होना, हरियाणा में आम बात है। ऐसे मामलों में विवाद होने पर घर का ही कोई व्यक्ति उत्तेजित होकर अपने ही भाई, बहन, पिता, माता या अन्य सदस्य की हत्या कर बैठता है। पारिवारिक कलह और अवैध संबंधों के चलते या संदेह में भी हत्याएं होती हैं। 

ऐसे मामले में ज्यादातर महिला या उसके प्रेमी की हत्या कर दी जाती है। कभी-कभी पत्नी अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को भी मौत के घाट उतार देती है। हरियाणा में आॅनर किलिंग कोई नई बात नहीं है। राज्य में लड़की के समान गोत्र या दूसरी जाति, धर्म के लड़के के साथ विवाह कर लेने को अच्छा नहीं समझा जाता है। सम्मान बचाने के नाम पर लोग अपनी बहन-बेटी के साथ लड़के की भी हत्या कर देते हैं। इसके बाद नंबर आता है संगठित गिरोहों द्वारा किए गए अपराध का। राज्य सरकार गिरोहों का समूल नाश करने की हर संभव कोशिश कर रही है।

Friday, June 12, 2026

राजा, मकड़ी और जंगली मक्खी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इस संसार में कोई भी वस्तु या जीव बेकार नहीं है। प्रकृति ने हर जीव-जंतु में कोई न कोई गुण जरूर दिया है। हां, इंसान की नजर में किसी जीव का गुण उसके लिए अवगुण हो सकता है। इंसान अपने हिसाब से जीवों के गुण-अवगुण को निर्धारित करता है। एक समय की बात है। 

एक राजा के मन में यह बात आई कि पता किया जाए कि किस जीव-जंतु या वस्तु में कोई गुण नहीं है। उसने यह बात अपने दरबार में कही, तो उसके दरबारियों ने यह पता करने के लिए कुछ समय मांगा। कुछ दिन बीतने के बाद दरबारियों ने राजा को बताया कि इस संसार में जंगली मक्खी और मकड़ी की कोई उपयोगिता नहीं है। इन दोनों जीवों का इस संसार में रहना या न रहना, कोई मायने नहीं रखता है। 

तब राजा ने सोचा कि इन दोनों जीवों का अपने राज्य से समूल नाश करा दिया जाए। वह अपनी योजना को लागू कर पाता कि इससे पहले पड़ोसी राजा ने उस पर हमला कर दिया। पड़ोसी राजा काफी दिनों से हमले की तैयारी कर रहा था। उसकी सेना भी काफी बड़ी थी, तो लड़ाई में पड़ोसी राजा जीत गया। पराजित राजा को अपनी जान बचाने के लिए जंगल में छिपना पड़ा। 

एक दिन जब वह थककर एक पेड़ के नीचे सो रहा था, तभी उसकी नाक पर जंगली मक्खी ने काट लिया। राजा ने चौंक कर देखा कि दुश्मन राजा के सैनिक आ रहे हैं। वह भागकर एक गुफा में छिप गया। उसी समय एक मकड़ी ने आकर वहां जाला बुन दिया। जब सैनिक उस गुफा के नजदीक पहुंचे, तो उन्होंने जाले को देखकर यहां कोई नहीं छिपा हो सकता है। वह आगे बढ़ गए। यह देखकर राजा ने मन ही मन कहा कि इस दुनिया में कोई भी वस्तु या जीव बेकार नहीं है। आज उसकी जान भी इन्हीं दो जीवों की वजह से बची है।

सड़कों पर तेज रफ्तार वाहन बन रहे लोगों की मौत का कारण


अशोक मिश्र

वाहन चालकों की लापरवाही सड़क पर चलने वालों के लिए मौत का कारण बनती जा रही है। हरियाणा सरकार, पुलिस प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि सड़कों पर चलने वाले सुरक्षित रहें, घर से बाहर निकलने वाला हर व्यक्ति अपने घर तक सकुशल पहुंचे, लेकिन हादसे कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई बार यह घोषणा भी कर चुके हैं कि उनका हर संभव प्रयास यही है कि प्रदेश की सड़कों को दुर्घटना रहित बनाया जाए। हर हालत में सड़कों पर होने वाले हादसों की संख्या को शून्य पर लाया जाए, लेकिन वाहन चालकों की लापरवाही मुख्यमंत्री के मंतव्य को धता बता रही है। 

शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो, जब राज्य में कहीं न कहीं सड़क हादसे की खबर न आती हो।  अगर वाहन चालक थोड़ी सी सावधानी बरतें, तो मुख्यमंत्री सैनी की इच्छा को काफी हद तक संभव बनाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि दोपहिया वाहन चालक और उनके साथ बैठी सवारी हेलमेट जरूर लगाए। सभी तरह के वाहन चालक अपने वाहन को निर्धारित गति सीमा तक ही चलाएं। 

यातायात के नियमों का पालन करें। हरियाणा यातायात पुलिस से आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2014 से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 57,901 लोगों की जान गई है। आश्चर्यजनक बात यह है कि सन 2020 में जब पूरे देश में सख्त लॉकडाउन था। लोगों का घर से निकला प्रतिबंधित था, सड़कें पूरी तरह से सुनसान थीं, तब भी राज्य भर में 9,431 दुर्घटनाएं हुईं। राज्य में पिछले 11 वर्षों में लगभग 1.15 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सन 2017 में 11,258 सड़क दुर्घटनाओं में 5,120 लोगों की जान गई जो 2014 के बाद सबसे अधिक है। आकस्मिक मौतों की संख्या 2024 में 4,689 से बढ़कर 2025 में 4,885 हो गई, जबकि दुर्घटनाओं की संख्या 9,806 से बढ़कर 10,352 हो गई। 

पिछले 11 वर्षों में सबसे कम 4,429 मौतें सन 2015 में दर्ज की गईं। दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मामले में शीर्ष पांच जिले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से हैं जिनमें गुरुग्राम पहले स्थान पर है। पिछले 11 वर्षों में अकेले गुरुग्राम में 4,988 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद सोनीपत में 4,521, करनाल में 4,113, पानीपत में 3,432 और झज्जर में 2,944 मौतें हुईं। 

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति, लापरवाही से गाड़ी चलाने और गलत दिशा में गाड़ी चलाने के कारण होती हैं। चालक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं या नशे में होते हैं, जो इन दुर्घटनाओं के कारणों में और इजाफा करता है। शराब पीकर गाड़ी चलाना, सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण है। यातायात पुलिस लोगों को विभिन्न माध्यमों से ट्रैफिक रूल्स का पालन करने की लोगों से अपील करती है, लेकिन उसका प्रभाव लोगों पर पड़ता दिखाई नहीं देता है।

Thursday, June 11, 2026

राजा को योग्य उम्मीदवार की तलाश

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को अपनी भलाई के साथ दूसरों की भलाई का ध्यान रखना चाहिए। यदि मनुष्य ऐसा करता है, तो वह सबका प्यारा हो जाता है। लोग उसका आदर करते हैं और ऐसा व्यक्ति जीवन में सफल भी होता है। अपनी भलाई के बारे में सोचना, कोई बुरी बात नहीं है। सभी अपना भला चाहते हैं, लेकिन इंसानियत के नाते दूसरों का भला भी सोचना चाहिए। एक बार की बात है। 

एक राजा का मंत्री सेवानिवृत्त हो गया। वह काफी बूढ़ा हो गया था। राजा को उस पर विश्वास भी बहुत था क्योंकि वह राजा की सेवा में काफी दिनों से था और वह राजा को सलाह भी अच्छी दिया करता था। अब राजा को अपने मंत्री के समान ही बुद्धिमान और सच्चे मंत्री की जरूरत महसूस होने लगी। उसने अपने बुजुर्ग मंत्री की सलाह पर कई योग्य उम्मीदवारों की परीक्षा ली। उस परीक्षा में राज्य के हजारों युवा शामिल हुए। 

परीक्षा के कई चक्र से गुजरते हुए तीन उम्मीदवार चयनित हुए जिनमें से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता था। राजा इन उम्मीदवारों को लेकर ऊहापोह में था कि वह किसका चयन करे। उसने अपने दरबारियों से सलाह मशविरा किया। सारे दरबारी एक मत नहीं हो पाए। तब राजा को अपने सेवानिवृत्त मंत्री की याद आई।  उन्होंने हमेशा उन्हें संकट से उबारा था। 

बुजुर्ग मंत्री ने राजा को उपाय बताया। राजा ने तीनों को बुलाकर एक ही सवाल किया-यदि मेरे और तुम्हारे बालों में आग लग जाए तो तुम क्या करोगे। एक ने उत्तर दिया कि मैं सबसे पहले आपके बालों की आग को बुझाऊंगा। दूसरे ने कहा कि मैं सबसे पहले अपनी आग को बुझाऊंगा। तीसरे ने कहा कि मैं एक हाथ से अपनी आग बुझाऊंगा और दूसरे हाथ से  आपके बालों में लगी आग को बुझाऊंगा। 

राजा ने तीसरे को अपना मंत्री बना लिया। राजा ने कहा कि पहले वाला चापलूस है। दूसरा वाला स्वार्थी है। तीसरा वाला अपने साथ-साथ दूसरों का भी भला सोचता है। यही योग्य है।

जहरीली गैसों से कब तक मरते रहेंगे सफाई कर्मचारी?

अशोक मिश्र

सरकार की ओर से रोक के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए बिना किसी सुरक्षा उपकरण के आज भी लोगों से काम लिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में काम करने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को ही फरीदाबाद के जीवन नगर में स्थित मेन पंपिंग स्टेशन के टैंक में उतरे दो ममेरे-फुफेरे भाइयों की मौत हो गई। यह दोनों भाई बिना सुरक्षा उपकरण लिए ही पंपिंग स्टेशन में सफाई करने उतरे थे। बिना सेफ्टी उपकरण सफाई करने उतरा आकाश गैस चढ़ने से बेहोश होकर टैंक में ही गिर गया। 

यह देखकर उसे बचाने के लिए अनमोल नीचे उतरा, तो उसकी भी गैस चढ़ने से मौत हो गई। आरोप है कि प्लांट से गंदे पानी से कचरा निकालने वाली मशीन काफी दिनों से खराब थी। इसके बारे में कई बार ठेकेदार से शिकायत की जा चुकी थी। लेकिन ठेकेदार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि दो लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन दोनों को बचाने के लिए नीचे उतरे तीसरे कर्मचारी की हालत गंभीर है। तीन घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने शव को निकाला।

 हरियाणा में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए हादसों में अब तक दर्जनों मजदूरों की जान जा चुकी है। संसद में इस संबंध में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में 43 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है। वहीं गैर सरकारी आंकड़े 76 सफाईकर्मियों की मौत का दावा कर रहे हैं। पिछले साल मार्च महीने में गुरुग्राम में निमार्णाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दीवार गिरने से सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। हरियाणा सरकार ने सीवर की मैन्युअल (हाथ से) सफाई पर रोक लगा रखी है। 

इसके अतिरिक्त, दुर्घटनाओं को रोकने और मशीनीकृत सफाई (जेटिंग और सक्शन मशीनों) को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया लागू है। इसके बावजूद इस मामले में लापरवाही करते हैं। हर वर्ष प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से खबर आती है कि सीवर साफ करते समय जहरीली गैस से कई सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई। कुछ देर के लिए मीडिया में चर्चा होती है, प्रशासन दुख जताता है, नेता मुआवजे की घोषणा करते हैं और फिर मामला खत्म हो जाता है। 

लेकिन उन परिवारों के लिए जिंदगी कभी सामान्य नहीं होती। एक मजदूर की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों, बच्चों के भविष्य और घर की रोटी का अंत होती है। सबसे दुखद बात यह है कि इन मौतों को समाज ने लगभग सामान्य मान लिया है। जैसे यह कोई हादसा नहीं, बल्कि उनका तयशुदा भाग्य हो। सुरक्षा उपकरणों के बिना लोगों को जहरीले गटरों में उतार दिया जाता है। कई बार ठेकेदार और अधिकारी जानते हैं कि यह गैरकानूनी है, फिर भी यह सब जारी रहता है।