बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
रेडक्रॉस की स्थापना करने और शांति का पहला नोबल पुरस्कार पाने वाले जीन हेनरी ड्यूनेंट का जन्म 8 मई 1828 को जेनेवा में हुआ था। इनके माता-पिता जेनेवा के सम्मानित नागरिकों में गिने जाते थे। इनके पिता जीन जैक्स ड्यूनेंट एक जेल और अनाथालय में काम करते थे।वहीं, इनकी मां एंटोनेट ड्यूनेंट-कोलाडोन बीमार और गरीबों के लिए काम करती थीं। माता-पिता के कार्यों का प्रभाव बचपन से ही हेनरी पर पड़ा। एक बार की बात है। हेनरी के मन में आया कि नेपोलियन बोनापार्ट से मिला जाए। नेपोलियन बोनापार्ट की ख्याति उन दिनों एक महान सेनापति के रूप में थी। इसके लिए वह जेनेवा से पेरिस पहुंचा।
वहां पहुंचने पर उसे पता चला कि नेपोलियन युद्ध के मोर्चे पर हैं। वह उनसे मिलने युद्ध के मोर्चे पर गया। उस समय भीषण युद्ध चल रहा था। वह पहाड़ी की चोटी से जंग देखने लगा। उसने देखा कि सैकड़ों सैनिक घायल पड़े हैं। कोई इधर कराह रहा है, तो कोई उधर रो रहा है। उनकी कोई देखभाल करने वाला नहीं है। यह देखकर हेनरी का मन द्रवित हो गया।
वह बिना कुछ सोचे, युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा सुश्रषा करने लगा। वह भूल गया कि वह नेपोलियन से मिलने आया था। जंग खत्म होने के बाद उसने कुछ युवकों का दल रेडक्रॉस नाम से बनाया जो निस्वार्थ जंग के समय घायल सैनिकों की सेवा कर सकें। उसने रेडक्रॉस को अंतर्राष्ट्रीय जगत में मान्यता दिलाई। मानवता के प्रति उसकी सेवाओं को देखते हुए शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
यही नहीं बाद में रेडक्रॉस संस्था को भी तीन बार नोबेल पुरस्कार हासिल हुआ। 30 अक्टूबर 1910 को 82 साल की उम्र में हेनरी का निधन हो गया।









