Tuesday, June 9, 2026

दो पहाड़ों के बीच काटकर बना दिया रास्ता

प्रतीकात्मक चित्र

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर मन में लगन और विश्वास पक्का हो, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता है। बस व्यक्ति को कभी अपने फैसले से विचलित नहीं होना चाहिए। जीवन में सफलता तभी मिलती है, जब व्यक्ति अपना हौसला कायम रखता है। इस संबंध में हिमाचल प्रदेश की एक कथा है। कहते हैं कि हिमाचल प्रदेश के किसी पहाड़ी गांव में एक बुजुर्ग रहता था। उसके दो बेटे थे। 

बेटे बहुत अधिक परिश्रम और आज्ञाकारी थे। गांव भर के लोग उस बुजुर्ग को महामूर्ख कहकर बुलाते थे क्योंकि वह लोगों को जो भी सलाह देता था, लोगों को उसकी सलाह अटपटी लगती थी। उस बुजुर्ग का जहां घर था, उसी घर के सामने से रास्ता जाता था। उसके घर के सामने ही दो बड़े पहाड़ थे जिनसे होकर दूसरी तरफ जाने में लोगों को कई दिन लग जाते थे। 

एक दिन उसने अपने दोनों बेटों को बुलाया और कहा कि इन दोनों पहाड़ों के बीच से रास्ता बनाना है। पिता की आज्ञा मानते हुए दोनों बेटों ने फावड़ा उठा लिया। बुजुर्ग भी हलका फावड़ा लेकर पहाड़ी से रास्ते बनाने में जुट गया। गांव के लोगों ने जब  उन तीनों को देखा, तो मजाक उड़ाने लगे। बुजुर्ग ने कहा कि भले ही मेरी जिंदगी में यहा रास्ता न बन पाए, लेकिन यह काम मेरे दोनों बेटे पूरा करेंगे। बेटों से यह काम पूरा नहीं हुआ, तो मेरी आने वाली पीढ़ी इसे पूरा करेगा। 

कुछ दिन तक पिता-पुत्र अपने काम में जुटे रहे। फिर धीरे-धीरे गांव वालों ने भी मदद करनी शुरू कर दी। देखते ही देखते कुछ ही महीनों में दोनों पहाड़ों के बीच से एक रास्ता तैयार हो गया। लोगों ने अब यह समझ लिया था कि यदि लगन सच्ची हो, तो पहाड़ को भी काटकर रास्ता बनाया जा सकता है। उसी दिन से बुजुर्ग लोगों की श्रद्धा का पात्र बन गया।

अगर घातक बीमारियों से बचना है तो शारीरिक श्रम करना होगा


अशोक मिश्र

हमारे देश में स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन माना गया है। कहा भी गया है कि तंदुरुस्ती हजार नियामत है। अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। लोग इस कहावत पर अमल भी करते थे। गांवों में ज्यादातर लोग किसान हैं। वह दिन भर अपने खेत-खलिहान में हाड़तोड़ मेहनत करते थे। जमकर खाते-पीते थे और भरपूर नींद लेते थे। यह दिनचर्या उन्हें स्वस्थ रखती थी। घर में खाने-पीने की चीजें भी भरपूर मात्रा में हुआ करती थीं। 

हर घर में गाय-भैंस जरूर हुआ करती थी। इस वजह से दूध, दही और छाछ की भी कमी नहीं थी। इस मामले में हरियाणा कभी देश में अव्वल हुआ करता था। शहरों में भी लोग खूब परिश्रम करते थे। यही वजह है कि उन दिनों लोगों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्राल जैसी समस्याएं नहीं हुआ करती थीं। गांव हो या शहर, लोग पैदल चलने को ही प्राथमिकता दिया करते थे। अगर दूरी ज्यादा हुई, तो साइकिल से आया-जाया करते थे। बैलगाड़ी, तांगा और बस आदि भी आवागमन के साधन हुआ करते थे। लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं कि हरियाणा सरकार को साइकिल ऑन संडे जैसे कार्यक्रम का आगाज करना पड़ रहा है। 

लोगों को प्रेरित करना पड़ रहा है कि रविवार को साइकिल से आना-जाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य ठीक रहता है और कई तरह की बीमारियों से निजात भी मिलती है। राज्य के विभिन्न शहरों फरीदाबाद, पलवल और चंडीगढ़ आदि में हर रविवार साइकिल रैलियों का आयोजन किया जाता है, जिनमें हजारों युवा और छात्र भाग लेते हैं। केवल कुछ घंटे साइकिल चलाने से भी कुछ नहीं होने वाला है। 

हमें सातों दिन साइकिल का उपयोग करना होगा। चार-पांच किमी की दूरी तक नियमित साइकिल चलाई जाए, तो स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। भारत सरकार ने 29 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर एक फिट इंडिया मूवमेंट शुरू किया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शारीरिक गतिविधियों और खेलों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके बावजूद लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। 

हरियाणावासियों के स्वास्थ्य के प्रति उदासीन होने का मुख्य कारण तेज शहरीकरण, औद्योगिक विकास के कारण बदलती जीवन शैली, कार्यस्थलों पर बढ़ता तनाव और खानपान में हुए नकारात्मक बदलाव हैं। इसके अलावा जागरूकता की कमी, समय का अभाव और स्वास्थ्य सेवाओं तक भौगोलिक पहुंच में असमानता भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाते हैं। 

जब से देश और प्रदेश में सोशल मीडिया का चलन शुरू हुआ है, लोग घर से बाहर निकलकर टहलने से ज्यादा बेहतर आॅन स्क्रीन रहना पसंद करते हैं। शारीरिक श्रम न करने की वजह से लोग कई असाध्य रोगों के शिकार होते जा रहे हैं।

Monday, June 8, 2026

मैं ट्यूशन पढ़ाकर स्कूल फीस जमा करता हूं

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

ईमानदारी और बुरे कर्मों से दूर रहने वाला व्यक्ति अगर अपने मन में कुछ करने की ठान ले, तो वह असंभव लगने वाला काम भी संभव करके दिखा सकता है। बहुत पहले की बात है। अमेरिका में एक एथेंस नामक युवक रहता था। वह अनाथ था। एथेंस बहुत ही मेहनती और स्वाभिमानी व्यक्ति था। 

एक दिन उसने किसी किताब में पढ़ा था कि ज्ञान अर्जित करने से व्यक्ति विश्व में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर सकता है। इससे वह न केवल धन-संपदा का मालिक बन सकता है, बल्कि अच्छे आचरण का मार्ग अपनाकर वह अपना जीवन सफल भी बना सकता है। एथेंस ने उसी दिन संकल्प लिया कि वह जीवन भर अपनी मेहनत की कमाई से ही गुजारा करेगा। वह बुरे कामों से हमेशा दूर रहेगा। 

किसी प्रकार का नशा नहीं करेगा। चूंकि वह अनाथ था, तो उसे किसी का सहारा भी नहीं था। वह अपनी मेहनत के बल पर एक दिन वह अमेरिका के सबसे सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। उसकी प्रतिभा को देखकर कुछ छात्रों को बड़ी ईर्ष्या हुई। उन्होंने चोरी का इल्जाम लगाकर मुकदमा दर्ज करा दिया। 

जज के पास जब मामला पहुंचा, तो एथेंस ने कहा कि उसने कोई चोरी नहीं की है। तब जज ने कहा कि तुम्हारे साथ पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि तुम चोरी करके इतनी महंगी फीस जमा करते हो। एथेंस ने कहा कि खाली समय में वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता है। एक महिला के घर पर माली का काम करता है। 

इससे उसको जो कमाई होती है, वह अपनी फीस जमा करता है। उसका खर्च बहुत कम है। जज ने जब मामले की जांच कराई तो एथेंस की सच्चाई सामने आ गई। उन्होंने एथेंस को मुक्त कर दिया। बाद में एथेंस अमेरिका का सबसे प्रसिद्ध बुद्धिजीवी बना।

ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों से बचकर रहने की जरूरत

अशोक मिश्र

विज्ञान ने सदियों पुराने कई अंध विश्वासों को गलत साबित कर दिया है। जैसे-जैसे विज्ञान उन्नत होता जा रहा है, लोगों में जागरूकता आने लगी है। इसके बावजूद ऐसे लोग काफी संख्या में मौजूद हैं जो जीवन में विज्ञान की उपलब्धियों का लाभ तो उठाते हैं, लेकिन जैसे ही परिवार पर कोई संकट आता है, वह विज्ञान पर भरोसा करने की जगह तंत्र-मंत्र, तांत्रिकों और ढोंगी बाबाओं पर भरोसा करते हैं। 

समस्या का निदान वैज्ञानिक तरीके से खोजने की जगह अंध विश्वास में फंस जाते हैं। कुछ ही दिन पहले भरतपुर राजस्थान में रहने वाली एक महिला ने रिश्ते में देवर लगने वाले दो युवकों पर तांत्रिक क्रिया करवाने के बहाने दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पुलिस को अपनी शिकायत में महिला ने बताया कि उसके परिवार में आए दिन कोई न कोई बीमार रहता था। वह काफी परेशान थी। 

इसी दौरान रिश्ते में देवर लगने वाले पड़ोसी ने उसे तांत्रिक क्रिया करवाने का सुझाव दिया। उसने कहा कि तांत्रिक क्रिया करवाने के बाद परिवार पर आने वाला संकट खत्म हो जाएगा। उसके कहने पर वह पलवल आई और तांत्रिक ने झाड़-फूंक की। इस दौरान वह सुधबुध खो बैठी। इसके बाद वह उसे होटल में ले गया, जहां दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और कई बार दुष्कर्म किया। हरियाणा में ही नहीं, देश के कई राज्यों में लोग झाड़-फूंक, टोना-टोटका जैसे अंधविश्वास के चलते यौन शोषण या आर्थिक शोषण का शिकार होते हैं। लगभग तीन साल पहले जनवरी 2023 में फतेहाबाद के टोहाना में स्वघोषित बाबा अमरपुरी उर्फ बिल्लू राम या जलेबी बाबा ने तंत्र-मंत्र का जाल बिछाकर सौ से अधिक महिलाओं का यौन शोषण किया था। 

उसके पास से 120 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप बरामद किए गए थे। जलेबी बाबा महिलाओं को नशीला पदार्थ खिलाकर उनके अश्लील वीडियो बना लेता था और फिर उन्हें ब्लैकमेल कर बार-बार दुष्कर्म करता था। जनवरी 2023 में कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए 14 साल की सजा सुनाई थी। मई 2024 में जेल में बंद रहने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उसकी मृत्यु हो गई। जनवरी 2026 में पानीपत की एक महिला अपने बीमार बेटे का संकट कटवाने के लिए एक तांत्रिक के पास गई थी। 

तांत्रिक ने महिला को अपनी बातों में फंसाया, नशीला प्रसाद खिलाया और उसे बंधक बनाकर लगातार कई दिनों तक दुष्कर्म किया। पानीपत पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज कर आरोपी तांत्रिक को गिरफ्तार किया। यह घटनाएं तो उस समाज की बानगी है जो पूरी तरह अंधविश्वास के जाल में फंसा हुआ है। लोग शारीरिक समस्याओं के लिए चिकित्सक के पास न जाकर ढोंगी तांत्रिकों और बाबाओं के पास जाते हैं। इनके अंध विश्वास का ऐसे लोग फायदा उठाते हैं। ढोंगी बाबाओं और तांत्रिकों से लोगों को बचकर रहना चाहिए।

Sunday, June 7, 2026

अमूल्य शरीर होते हुए अपने गरीब कहते हो


 बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में हुआ था। जब उनकी मां महामाया अपने नैहर देवदह जा रही थीं, तभी रास्ते में उन्हें प्रसव पीड़ा हुई और लुंबिनी में बुद्ध का जन्म हुआ। गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। वह शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के पुत्र थे। 

चूंकि बुद्ध के जन्म के कुछ ही दिन बाद महामाया की मृत्यु हो गई थी, तो उनका पालन-पोषण उनकी मौसी और राजा शुद्धोधन की दूसरी पत्नी महाप्रजावती गौतमी ने किया था। इस वजह से वह गौतम कहलाए। बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद तथागत निरंतर यात्रा पर ही रहते थे। केवल वर्षाकाल में ही एक जगह रुकते थे। एक बार की बात है। महात्मा बुद्ध प्रवचन दे रहे थे। उनके पास एक व्यक्ति आया। 

वह बहुत ही क्षीण दिख रहा था। महात्मा बुद्ध ने उससे पूछा कि तुम इतने क्षीण क्यों हो? उस व्यक्ति ने उदास मन से जवाब दिया, महात्मन! मैं बहुत गरीब हूं। मेरे पास रोजी-रोटी का भी कोई जरिया नहीं है। समय पर सही भोजन नहीं मिलने की वजह से मेरा शरीर क्षीण हो गया है। 

कुछ देर सोचने के बाद महात्मा बुद्ध ने कहा कि यदि तुम अपने एक कान मुझे दे दो, तो मैं दो हजार मुद्राएं तुम्हें दिला सकता हूं। उस व्यक्ति ने कहा कि मैं आपको अपने कान कैसे दे सकता हूं। महात्मा बुद्ध मुस्कुराए और बोले, यदि तुम अपनी एक आंख दे दो, तो मैं पांच हजार मुद्राएं दे दूंगा। 

उस व्यक्ति ने आंख देने से भी मना कर दिया। फिर बुद्ध ने दस हजार मुद्राओं में हाथ देने को कहा, लेकिन उसने इस बार भी मना कर दिया। तब बुद्ध ने कहा कि इतना अनमोल शरीर लेकर भी तुम अपने को गरीब कहते हो। यदि तुम मेहनत करो, तो तुम गरीब नहीं रहोगे। यह सुनकर व्यक्ति ने मेहनत करने का वचन दिया और अपने घर चला गया।

मरीजों की जान जोखिम में डाल देते हैं झोलाछाप डॉक्टर

अशोक मिश्र

हमारे देश में एक बहुत पुरानी कहावत है कि नीम हकीम खतरा-ए-जान। आधा अधूरा ज्ञान रखने वाला डॉक्टर या वैद्य मरीज की जान के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। लेकिन हरियाणा में तो ऐसे लोग भी इलाज करते हुए पाए गए हैं जिनके पास आधा अधूरा भी ज्ञान नहीं है। फरीदाबाद के एसजीएम नगर में शाहीन बानू नामक महिला क्लीनिक चलाती हुई पकड़ी गई है जिसके पास कोई डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट नहीं थी। 

इस महिला के बारे में केंद्र सरकार के आनलाइन शिकायत पोर्टल पर किसी ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में गठित टीम ने शाहीन क्लीनिक पर छापा मारा, तब यह खुलासा हुआ कि महिला के पास शिक्षा या चिकित्सा से जुड़ा कोई भी कागज मौजूद नहीं है। उसके पास से भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं भी बरामद हुई हैं। चिकित्सा के नाम पर भारी भरकम फीस वसूलने वाली महिला न जाने कितने लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर चुकी है। 

हरियाणा में झोलाछाप या अनपढ़ लोग क्लीनिक खोलकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों का कोई आधिकारिक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है क्योंकि इस तरह का सारा कारोबार चोरी-छिपे किया जाता है, लेकिन एक अनुमान के आधार पर बात कही जाए, तो पूरे प्रदेश में लगभग पचास से साठ हजार क्लीनिक ऐसे चल रहे हैं जिनके पास उपयुक्त डिग्री या डिप्लोमा नहीं है। प्रदेश में झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों विशेषकर नूंह, पलवल और गुरुग्राम में गंभीर है। मेवात, नूंह, पलवल, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे कई जिलों  में इन अवैध क्लीनिकों की भरमार है। 

ऐसे क्लीनिकों के फलने-फूलने का सबसे बड़ा कारण यह है कि प्रदेश में योग्य चिकित्सकों की भारी कमी है। सरकारी अस्पतालों की संख्या भी आबादी के अनुपात में काफी कम है। जो सरकारी अस्पताल हैं भी, उनमें या तो डॉक्टरों की कमी है या फिर समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में चौबीस घंटे सेवा का कोई व्यवस्था नहीं है। रात में इमरजेंसी के समय मरीज कहां जाए। निजी अस्पतालों में एक सामान्य सी बीमारी के लिए फीस और दवा के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। 

कमीशन के लिए निजी अस्पताल कई बार जरूरत से ज्यादा जांच लिख देते हैं जिससे मरीज परेशान हो जाता है। ऐसी स्थिति में गरीब और मध्यम आय वर्ग के लोग इन अवैध रूप से खुले क्लीनिकों की ओर रुख करते हैं। अवैध रूप से खुले क्लीनिक न केवल मरीजों की जान को जोखिम में डालते हैं, बल्कि इनका आर्थिक शोषण भी करते हैं। हजारों लोग रोज ऐसे कथित डॉक्टरों पर भरोसा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और सीएम फ्लाइंग स्क्वायड लगातार ऐसे क्लीनिकों पर छापा मारता रहता है, लेकिन ऐसे क्लीनिक रक्तबीज की तरह बढ़ते जा रहा है।

Saturday, June 6, 2026

ग्रीन बेल्ट आंदोलन ने दिलाया नोबेल पुरस्कार

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

केन्या में 1 अप्रैल 1940 को पैदा हुई वंगारी मथाई ने एक छोटा सा एनजीओ स्थापित करके पूरी दुनिया को पर्यावरण बचाने का जो संदेश दिया, वह अद्भुत है। केन्या पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक देश है। मथाई ने अमेरिका और कीनिया में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। 

वंगारी माथाई ने 1964 में कंसास के एटचिसन स्थित माउंट सेंट स्कोलास्टिका कॉलेज से जीव विज्ञान में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने 1966 में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय से मास्टर आॅफ साइंस की डिग्री हासिल की। ​​उन्होंने जर्मनी और नैरोबी विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट की पढ़ाई की और 1971 में नैरोबी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, जहाँ उन्होंने पशु चिकित्सा शरीर रचना विज्ञान भी पढ़ाया था। 

मथाई जब बड़ी हुईं तो उन्होंने पाया कि केन्या में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। उन्हें याद आया कि उनके गांवों में हर ओर हरियाली थी। गांव के किनारे घने जंगल थे जिनमें विभिन्न प्रकार के जीव जंतु रहते थे। नदियों का पानी बहुत साफ सुथरा रहता था। जिसका उपयोग लोग पीने में करते थे। खेतों में हर समय हरियाली रहती थी। लेकिन अब वह सब बीती बातें हो चुकी थीं। 

जंगल कटते जा रहे थे, नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा था। खेतों में भी हरियाली बहुत कम हो गई थी। इससे मथाई को बहुत कष्ट हुआ। उन्होंने 1970 में ग्रीन बेल्ट आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने कीनिया की महिलाओं को इससे जोड़ा और धीरे-धीरे पूरे देश में यह आंदोलन फैल गया। सन 2004 में मथाई को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अगले साल इन्हें जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार प्रदान किया गया। सांसद और कीनिया सरकार में मंत्री रहीं मथाई का 26 सितंबर 2011 को नैरोबी में उनका निधन हो गया।

मानकों पर खरे न उतरने वाले होटलों, रेस्त्रां पर हो कार्रवाई

अशोक मिश्र

दिल्ली के मालवीय नगर में तीन जून को हुई घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। फ्लोरिश स्टे होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई थी। गुरुग्राम के विवेक अग्रवाल और उनके परिवार के आठ सदस्य भी होटल में लगी आग में जिंदा जल गए थे। विवेक अग्रवाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ दिल्ली साकेत के मैक्स हॉस्पिटल दाखिल अपने पिता से मिलने गए थे और फिर बाद में अपने परिवार और मौसा-मौसी के साथ नाश्ता करने मालवीय नगर के रेस्टारेंट में गए थे जहां सभी की जलकर मौत हो गई थी। 

दिल्ली की घटना को देखते हुए हरियाणा प्रशासन की भी नींद खुल गई है। उसने हर जिले में ऐसे होटलों और रेस्टोरेंट की पहचान करनी शुरू कर दी है जिनके पास फायर एनओसी है या नहीं। भवन का निर्माण निर्धारित मानकों पर किया गया है या नहीं। यदि  कोई संस्थान मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है, तो उसे नोटिस भेजा जा रहा है। इस मामले में कोई आधिकारिक आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमान है कि पूरे राज्य में हजारों होम स्टे, होटल और रेस्टोरेंट संचालित है जिन्होंने वैध तरीके से फायर एनओसी हासिल नहीं की है। 

यह सभी अन्य मानकों पर भी खरे नहीं उतरते हैं। हर जिले में संचालित सैकड़ों होटलों और रेस्टोरेंटों में से केवल दस-बारह फीसदी के पास ही फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है। घनी आबादी में संचालित प्रतिष्ठान किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं जिससे जान-माल का भारी नुकसान संभव है। लगभग हर जिले में ढेर सारे होटल घनी आबादी में स्थित हैं जहां संकरी गलियों के कारण आग लगने जैसी आपदा आने पर दमकल वाहनों के पहुंचने में भी दिक्कत आ सकती है। 

यदि कोई हादसा हो जाए तो फायर विभाग के कर्मचारियों को विपदा में फंसे लोगों तक राहत पहुंचा, उन्हें बचाना काफी मुश्किल हो जाता है। होटल, रेस्टोरेंट और पेट्रोल पंप जैसे प्रतिष्ठानों में फायर सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। नियमित जांच, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और फायर एनओसी किसी भी दुर्घटना के दौरान जान-माल की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। लेकिन कई बार विभागीय अधिकारियों की भी ऐसे में मामले लापरवाही सामने आती है। 

कई प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी उपकरण या तो लगाए ही नहीं गए हैं या फिर वे अनुपयोगी स्थिति में हैं। राज्य के ज्यादातर होटलों, होम स्टे या रेस्टोरेंट में स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म जैसे जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण या तो हैं नहीं या फिर काम ही नहीं कर रहे हैं। कुछ होटल और रेस्टोरेंट तो ग्राउंड फ्लोर पर बने गोदाम में गैस सिलेंडर तक रखते हुए पाए जाते हैं। इससे आग लगने पर हालात काफी विस्फोटक हो जाते हैं। स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में काफी गंभीरता से काम करना होगा और नियम विरुद्ध बने होटलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी।

Friday, June 5, 2026

जीवन के अनुभवों से सीखा लिखना

 बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

कहते हैं कि कलम में बहुत ताकत होती है। लेखनी की बदौलत किसी देश की सत्ता बदली जा सकती है, तो किसी गलत नियमों को बदलने पर शासन को मजबूर किया जा सकता है। अमेरिकी उपन्यासकार अपटन बिल सिनक्लेयर जूनियर का उपन्यास द जंगल जब प्रकाशित हुआ, तो अमेरिकी जनता में काफी रोष फैल गया। 

उपन्यास में मांस पैकिंग उद्योग में श्रम और स्वच्छता की खराब स्थितियों को वर्णन किया गया था। बाद में सरकार ने नियम बनाकर मांस पैकिंग उद्योग में स्वच्छता का पालन करवाया। सिनक्लेयर के पिता शराब व्यवसायी थे। वह खुद भी इतना ज्यादा शराब पीते थे कि वह अपना व्यवसाय चौपट कर बैठे थे। नतीजा यह हुआ कि दस साल की उम्र तक सिनक्लेयर को स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। 

लेकिन पढ़ने-लिखने की लगन के चलते तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने कालेज तक की पढ़ाई की। कालेज की फीस चुकाने के लिए सिनक्लेयर को सस्ती किताबों का लेखन भी करना पड़ा। वह दिन रात मिलाकर आठ हजार शब्द लिखने की कोशिश करते थे। उन्होंने सस्ते लेखन से एक अपार्टमेंट खरीदा और अपने माता-पिता को उसमें शिफ्ट किया। 

उन्होंने जून 1897 में सिटी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बाद में उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई की, लेकिन उनकी रुचि लेखन में अधिक थी। उन्होंने स्पेनिश, जर्मन और फ्रेंच सहित कई भाषाएँ सीखीं। वैसे तो उनके पहले चार उपन्यास खास लोकप्रिय नहीं रहे, लेकिन द जंगल ने उन्हें प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार दिलाया। नब्बे वर्ष की आयु में 25 नवंबर 1968 को उपन्यासकार अपटन सिनक्लेयर की मृत्यु हो गई।

संगठित अपराध के खिलाफ हरियाणा पुलिस ने कसी कमर

अशोक मिश्र

कोई भी राज्य संगठित अपराध को रोकने में तो सफल हो सकता है, लेकिन असंगठित अपराध को रोक पाना किसी भी राज्य की पुलिस या खुफिया विभाग के लिए संभव नहीं है। असंगठित अपराधों में ऐसे अपराध आते हैं जो योजना बनाकर नहीं किए जाते हैं। अगर कोई दो व्यक्ति किसी चौराहे पर झगड़ कर बैठें और एक व्यक्ति चाकू या बंदूक निकालकर हत्या कर दे, ऐसे अपराध को रोकना किसी के भी वश में नहीं है। 

आपसी झगड़े में हुई हत्या, किसी महिला या बच्ची के साथ किया गया दुष्कर्म जैसे न जाने कितने अपराध हैं जो असंगठित अपराध की श्रेणी में आते हैं। कोई आदमी कब क्या कर बैठेगा, इसका अंदाजा पहले से नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन संगठित अपराध को काफी हद तक रोका जा सकता है। संगठित अपराध अपराधी गिरोहों द्वारा अंजाम दिया जाता है। हरियाणा पुलिस और खुफिया एजेंसियां संगठित अपराध को रोकने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं। काफी हद तक उन्हें सफलता भी मिली है। 

एसटीएफ ने वर्ष 2024 में 323, वर्ष 2025 में 470 और 2026 में 28 मई तक 148 गैंग सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस तरह पिछले तीन वर्षों में कुल 941 गैंगस्टर और उनके सहयोगी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, हरियाणा पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए राज्य के 10,892 जघन्य अपराधियों की डिजिटल कुंडली तैयार की है। हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल इन अपराधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कर उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हरियाणा पुलिस ने चार जिलों के नाम पर विशेष यूनिट भी तैयार की है जो संगठित अपराधी गिरोहों पर विशेष नजर रख रही है। 

पिछले दिनों रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जिलों में संचालित विशेष आरजेएसएफ (रोहतक-झज्जर-सोनीपत-फरीदाबाद) यूनिट की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की समीक्षा भी की गई है जिसके परिणाम उत्साहजनक पाए गए हैं। आरजेएसएफ यूनिट उन युवाओं और छोटे अपराधियों पर भी नजर रख रही है जिन्हें गैंगस्टर गिरोह अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर सकते हैं। हरियाणा में संगठित अपराध और गैंगस्टर सिंडिकेट मुख्य रूप से जबरन वसूली (फिरौती), टारगेट किलिंग और हथियारों की तस्करी में लिप्त हैं। अपराधी गिरोह आए दिन हरियाणा में व्यापारियों, नेताओं और बड़े उद्योगपतियों को रंगदारी देने के लिए धमकाते रहते हैं। 

विदेश में बैठा अपराधी गिरोह का मुखिया प्रदेश में टारगेट किलिंग जैसे अपराध को अंजाम देता रहता है। पुलिस ऐसे कई अपराधियों को भारत लाने में भी सफल हो चुकी है। हरियाणा एसटीएफ अब तक 22 वांछित गैंगस्टरों को विदेशों से डिपोर्ट या प्रत्यर्पित कर भारत ला चुकी है। अकेले 2026 में अब तक नौ गैंगस्टरों की वापसी सुनिश्चित की गई है।