Sunday, July 19, 2026

पत्थर बोला, उफ! मुझे मत मारो


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जीवन में कुछ हासिल करने के लिए कष्ट सहना पड़ता है, प्रतिकूल परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। जो कष्ट से घबरा जाता है, वह कुछ भी हासिल नहीं कर पाता है। वह तिरस्कार का भागी होता है। वहीं जिसने विपरीत परिस्थितियों से जूझकर सफलता पाई है, वह पूजा के योग्य माना जाता है। एक कथा है। कहते हैं कि किसी राज्य में एक नामी मूर्तिकार रहता था। 

मूर्तिकार की मूर्तियां एकदम जीवंत लगती थीं। जो भी उसकी बनाई हुई मूर्तियों को देखता, सराहना किए बिना नहीं रह सकता था। एक दिन मूर्तिकार कहीं जा रहा था। काफी देर तक चलते रहने की वजह से वह थक गया। थोड़ी देर सुस्ताने के लिए एक पेड़ की छांव में बैठ गया। उसने उस पेड़ के आसपास देखा, तो उसे काफी बड़े-बड़े पत्थर दिखाई दिए। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद उसने एक पत्थर को उठाया। 

उसने जैसे ही पहली हथौड़ी का प्रहार किया, पत्थर ने रोते हुए गुहार लगाई, मुझे मत मारो। दूसरा वार होते ही पत्थर ने कहा कि मुझे आपकी हथौड़ी से पीड़ा पहुंच रही है। मुझे मत मारो। पत्थर की बात सुनकर मूर्तिकार ने उसे छोड़ दिया। उसने दूसरा पत्थर उठाया और वह उसे तराशने लगा। कठिन मेहनत के बाद मूर्तिकार ने उस पत्थर को एक देवी का रूप दे दिया। उस मूर्ति को वहीं छोड़कर वह आगे बढ़ गया। कुछ साल इस घटना को बीत गए। एक दिन वह फिर उस रास्ते से गुजरा। 

उसने देखा कि लोगों ने उस मूर्ति की पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। लोग उस पर फूल और नैवेद्य आदि चढ़ा रहे हैं। जो पत्थर रोया था, उस पर  लोग मूर्ति पर चढ़ाने के लिए नारियल फोड़ते हैं। यह देखकर पत्थर पछता रहा था। सच ही कहा गया है कि बिना कष्ट सहे, जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है।

हरियाणा में हरित परिवहन का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल

 

अशोक मिश्र

दिल्ली एनसीआर में हर साल प्रदूषण की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रदूषण के चलते लोगों का दम घुटने लगता है। बच्चे और बूढ़े हलकान हो जाते हैं। हरियाणा ने अब इससे निजात पाने की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। निकट भविष्य में हरित विकास की ओर बढ़ा कदम उसे प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाएगा। हरियाणा सरकार 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने की दिशा में अग्रसर है। 

राज्य सरकार अगले चार वर्ष तक सरकारी बसों में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक बसों की करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए पूरे राज्य में 789 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और पॉइंट सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला में ई-बसें और ई-आटो सड़कों पर उतर चुके हैं। चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क धीरे-धीरे फैल रहा है। अगर नीतियों का साथ मिला तो हरियाणा अगले पांच साल में देश का ग्रीन मोबिलिटी हब बन सकता है। हरियाणा ने अब तय कर लिया है कि गुरुग्राम-दिल्ली की जहरीली हवा, फरीदाबाद की फैक्ट्रियों से निकलते धुएं से वह निजात पाकर रहेगा। 

राज्य में विकास का रंग अब हरा हो चला है। ऐसे में हरित परिवहन प्रदेश के लिए मजबूरी भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।हरियाणा वैसे भी देश का आटो हब है। मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और कुंडली में पहले से ही दुनिया की बड़ी आटो कंपनियां हैं। अब यही कंपनियां इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन की तरफ मुड़ रही हैं। इन कंपनियों के सहारे राज्य को हरित विकास की रफ्तार को तेज किया जा सकता है। हरित परिवहन केवल प्रदूषण घटाएगा ही नहीं, यह लाखों हाथों को काम भी देगा। ईवी बैटरी, मोटर, कंट्रोलर और हाइड्रोजन फ्यूल सेल के निर्माण में इंजीनियरों से लेकर आईटीआई पास तकनीशियनों तक की जरूरत होगी। 

अनुमान है कि मानेसर-धरुहेड़ा की आटो बेल्ट में ही अगले कुछ सालों में 50 से 70 हजार प्रत्यक्ष नौकरियां बन सकती हैं। इसके साथ चार्जिंग स्टेशन और हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन लगाने, चलाने और उनकी देखरेख के लिए 20 हजार लोगों को काम मिलेगा। कुल मिलाकर आने वाले 5 से 7 साल में हरित परिवहन के कारण हरियाणा में 1.2 से 1.5 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं और इनमें से बड़ी संख्या उन युवाओं के लिए होगी जिन्होंने 12वीं या आईटीआई की है। 

नीति आयोग के एक अनुमान के अनुसार यदि हरियाणा हरित परिवहन में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश करता है तो 2030 तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 8 से 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। मजबूत नीतिगत फैसलों और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के कारण, राज्य में हरित परिवहन का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।

Saturday, July 18, 2026

तुम मेरी गठरी लेकर भाग तो नहीं जाओगे


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

लालच में अकसर लोग अपनी किस्मत को संवारने का अवसर खो देते हैं। कई बार ऐसा होता है कि यदि हम लालच में न पड़ें, तो हमारे जीवन की दशा बदल सकती है, लेकिन यह लालच हमें कहीं का नहीं छोड़ता है। इसी वजह से कहा गया है कि लालच बुरी बला है। इस संबंध में एक बहुत रोचक कथा है। कहते हैं कि एक सूनसान जगह पर एक बूढ़ा तीन गठरियों के साथ खड़ा हुआ था। 

तभी उस रास्ते से एक युवक गुजरा। बूढ़े ने युवक से कहा कि बेटा, अगर तुम यह गठरी उठाकर ले चलो, तो मैं तुम्हें दो सोने के सिक्के दूंगा। युवक मान गया। उसने एक गठरी उठाई। गठरी भारी थी। युवक ने पूछा कि बाबा! इसमें क्या है? बूढ़े ने कहा कि इसमें सिक्के हैं। थोड़ी दूर चलने के बाद एक नदी आई। बूढ़े ने कहा कि बेटा! दो गठरियां लेकर मैं नदी नहीं पार कर पाऊंगा। क्या तुम एक गठरी और ले लोगे। 

युवक ने हामी भर दी। युवक ने दूसरी गठरी उठाकर पूछा, बाबा! इसमें क्या है? बूढ़े ने कहा कि इसमें चांदी के सिक्के हैं। तुम इसे लेकर भाग तो नहीं जाओगे। युवक ने कहा कि नहीं, मैं ईमानदार आदमी हूं। नदी पार करने के बाद एक पहाड़ी आ गई। बूढ़े ने कहा कि बेटा, इस गठरी को भी तुम ले लो। मैं गठरी उठाकर पहाड़ी पार नहीं कर सकता हूं। युवक ने तीसरी गठरी उठा ली। 

युवक ने पूछा, इसमें क्या है? बुजुर्ग ने कहा कि इसमें सोने के सिक्के हैं। तुम लेकर भाग तो नहीं जाओगे। युवक ने कहा कि वह ईमानदार है। आगे जाने पर बूढ़ा पीछे रह गया। तब युवक तीनों गठरियां लेकर भाग गया। घर जाकर उसने तीनों गठरी खोली, तो उसमें मिट्टी भरी हुई थी और एक पत्र रखा हुआ था। पत्र में लिखा था कि मुझे एक ईमानदार खजांची की जरूरत थी। इसलिए तुम्हारी परीक्षा ली गई, लेकिन तुम पास नहीं हुए। पास हो जाते तो मंत्रि परिषद के सदस्य बन जाते। ठाठ का जीवन बिताते। यह पढ़कर युवक अपने लालच पर बहुत शर्मिंदा हुआ।

सरकार, समाज, स्कूल और परिवार को मिलकर लड़ना होगा नशे के खिलाफ


अशोक मिश्र

हरियाणा में जहां युवा खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करके देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रांतीय खेलों में पदक जीत रहे हैं, वहीं राज्य के कुछ युवा नशा करके अपना भविष्य बरबाद कर रहे हैं। हरियाणा के लिए नशा कारोबार एक बड़ी समस्या है। हरियाणा नारकोटिक्स डिपार्टमेंट और स्थानीय पुलिस नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वालों पर जहां कड़ाई से कार्रवाई कर रही है, वहीं नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी और कर्मचारी स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालयों में जाकर नशे के खिलाफ छात्र-छात्राओं को जागरूक भी कर रहे हैं। 

इसके बावजूद नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है। पिछले साल आतंकवादी गतिविधियों के लिए चर्चा में रही अलफलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है। पिछले साल आतंकवादी घटनाओं में लिप्त और दिल्ली कार विस्फोट के मामले में अलफलाह यूनिवर्सिटी के कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था। अब इसी यूनिवर्सिटी का एक छात्र दो सौ ग्राम से अधिक गांजा की तस्करी करता हुआ पकड़ा गया है। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अदीदशाह दिल्ली के सप्लायर से गांजा लेकर यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को सप्लाई करता था। 

कुछ बाहरी लोग भी अदीदशाह से गांजा लेने आते थे। हरियाणा में नशे का अवैध कारोबार (ड्रग तस्करी) एक गंभीर समस्या है। पंजाब और राजस्थान की सीमा से सटे इलाकों और बड़े शहरों में इसका ज्यादा असर है। सरकार और पुलिस इसके खिलाफ 'जीरो टॉलेरेंस' (सख्त रुख) की नीति अपना रहे हैं। इसे रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। नशे का कारोबार अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, यह गांव-देहात तक अपनी जड़ें जमा चुका है।

सबसे खतरनाक बात यह है कि नशे का शिकार सबसे ज्यादा 15 से 30 साल के युवा हो रहे हैं। बेरोजगारी, तनाव, दिखावे की जिंदगी और गलत संगत ने उन्हें इस दलदल में धकेल दिया है। युवाओं को नशे के दलदल से निकालने के लिए सरकार को तस्करी की सप्लाई चेन तोड़नी होगी। हरियाणा की सीमा पर बसे जिलों में निगरानी बढ़ानी होगी। यदि राज्य में कहीं भी कोई अवैध नशीला पदार्थ बेचता पाया जाए, तो उसकी संपत्ति की कुर्की की जाए। सरकार को तस्करों पर गैंगस्टर एक्ट लगाकर उन्हें जेल में ठूंस देना चाहिए। साथ ही नशीली दवाओं की अवैध बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर पर लगाम लगानी होगी, ताकि युवाओं का भविष्य सुधारा जा सके। इसके लिए जरूरी है कि सरकार, समाज, स्कूल और परिवार चारों मिलकर नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ें तभी नशा रोकने में सफलता मिल सकती है। किसी भी राज्य की अकेली सरकार नशे के कारोबार को नहीं रोक सकती है। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है।

Friday, July 17, 2026

उद्यमशीलता ने दिलाई गरीबी से निजात

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बंगाल के महानतम समाज सुधारकों में गिने जाते हैं ईश्वर चंद्र विद्यासागर। वैसे उनका पूरा नाम था ईश्वर चंद्र बंध्योपाध्याय। उन्हें विद्यासागर की उपाधि प्रदान की गई थी। 26 सितंबर 1820 में पश्चिम बंगाल में पैदा हुए ईश्वर चंद्र ने आजीवन समाज सुधार में ही अपना जीवन खपा दिया था। वह उन्नीसवीं सदी के बहुमुखी प्रतिभा के धनी समाजसेवी थे जिनका भारत में महिलाओं की स्थिति को बदलने में योगदान उल्लेखनीय है। एक बार की बात है। उन दिनों बंगाल में अकाल फैला हुआ था। 

लोग भूखे मर रहे थे। रोजी-रोटी की तलाश में लोग बंगाल से बाहर निकलकर दूसरे प्रदेशों में जा रहे थे। उन दिनों गांव के गांव खाली हो गए थे। एक दिन विद्यासागर कहीं जा रहे थे। रास्ते में एक बच्चे ने उनसे कहा कि मुझे एक पैसा दे दो। उन्होंने देखा कि उसका मुंह सूख गया था। विद्यासागर ने पूछा कि अगर दो पैसा दे दूं, तो तुम क्या करोगे? 

उसने कहा कि मैं खाना खरीदकर अपनी मां के पास जाऊंगा। विद्यासागर ने पूछा कि अगर तुम्हें चार आने दूं तो क्या करोगे? उस लड़के ने कहा कि मैं दो आने का सामान खरीदूंगा और दो आने के फल खरीदकर बेचूंगा। उससे पैसे कमाऊंगा। दयावान विद्यासागर ने उसे एक रुपया दिया और वहां से चले गए। पांच-छह साल बाद संयोग से एक दिन वहीं पहुंचे। 

एक युवक ने उनके पास आकर प्रणाम किया और कहा कि क्या वह थोड़ी देर के लिए उसकी दुकान पर चलेंगे। विद्यासागर ने कहा कि मैं तो तुम्हें पहचानता नहीं हूं। तब उस युवक ने सारी बात बताई। यह सुनकर विद्यासागर बहुत खुश हुए और उसकी खूब प्रशंसा की। युवक की उद्यमशीलता ने उसे गरीबी से मुक्त कर दिया था।

‘हरित विकास’ का नया मॉडल बनकर उभरेगा हरियाणा


अशोक मिश्र

हरियाणा आज हरित विकास का एक ऐसा इतिहास रचने जा रहा है, जो पूरे देश को एक नई दिशा और दशा प्रदान करने वाला है। हाइड्रोजन  ट्रेन के संचालन से उपलब्धि की एक नई ऊंचाई छूने वाला हरियाणा अब केवल कृषि और उद्योग का प्रदेश नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे हरित विकास का मॉडल भी बन रहा है। जब विकास का रंग हरा होता है तो उसका असर सिर्फ  पर्यावरण पर नहीं, सीधे-सीधे युवाओं के रोजगार और जीवन पर भी पड़ता है। आने वाले कुछ वर्षों में हरियाणा में हरित अर्थव्यवस्था से लाखों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। बस जरूरत है कि युवाओं को हरित विकास के क्षेत्र में रोजगार हासिल करने योग्य बनाया जाए। 

उन्हें इस क्षेत्र में ट्रेनिंग दी जाए और कार्य कुशल बनाया जाए। 1.5 मेगावाट के इस प्लांट को चलाने, हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और सुरक्षा के लिए केमिकल इंजीनियर, तकनीशियन, आॅपरेटर और सुरक्षा कर्मियों की जरूरत पड़ेगी। जींद में देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट लग चुका है और जींद-सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज रवाना होगी। पीएम नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। हरियाणा के शहरों में हरित निर्माण एक नया उद्योग बनकर उभर रहा है।

 हरित विकास हरियाणा के लिए सिर्फ  पर्यावरण बचाने का जरिया नहीं है, यह रोजगार देने का इंजन भी है। अगर नीतियां सही दिशा में चलीं, निवेश समय पर हुआ और युवाओं को स्किल दी गई, उन्हें प्रशिक्षित किया गया तो हरियाणा न केवल प्रदूषण मुक्त बनेगा बल्कि रोजगार युक्त भी बनेगा। हरा प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश होगा और समृद्ध प्रदेश में हर हाथ को काम मिलेगा। हरित नौकरियों के लिए पारंपरिक डिग्री काफी नहीं होगी। सोलर पैनल लगाना, हाइड्रोजन फ्यूल सेल संभालना, ईवी की बैटरी ठीक करना, कार्बन आॅडिट करना, ये सब नई स्किल मांगते हैं। इसलिए आईटीआई, पॉलिटेक्निक और कौशल विश्वविद्यालयों में ग्रीन स्किल के कोर्स शुरू करने होंगे। 

सरकार और उद्योग मिलकर युवाओं को प्रशिक्षण दें तो पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार अकेले रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अगले पांच साल में हरियाणा में एक लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां बन सकती हैं। हालांकि यह भी सही है कि हाइड्रोजन काफी महंगी तकनीक है। शुरुआत में उद्योग लगाने पर ज्यादा निवेश करना होगा, यह भी सही है। इस क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े मानक हैं। सुरक्षा मानकों पर सरकार और उद्योगों को कड़ी नजर रखनी होगी। 

अगर कड़ाई से निगरानी नहीं की गई, तो किसी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन केवल आशंका के चलते इसे छोड़ा नहीं जा सकता है। अगर सरकार और निजी कंपनियां मिलकर प्लांट और डिपो का विस्तार नहीं करेंगी तो रोजगार सीमित रह जाएगा।

Thursday, July 16, 2026

युवराज ने सीखी अनकहे को सुनने की कला

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अच्छा शासक वही है, जो अपनी प्रजा की परेशानियों को बिना कहे समझ जाए। जब कोई शासक अपने लोगों के दिल की बात सुनना सीख जाए, बिना उनके बोले, उनकी भावनाओं और जो दर्द बयाँ न किया गया हो उसे समझ ले, तो वह अच्छा शासक माना जाता है। प्रजा भी  अपने उसी राजा पर विश्वास करती है।  एक बार की बात है। चीन में एक राजा हुआ करता था। 

वह जब बूढ़ा हो चला, तो उसने सोचा कि अपने पुत्र को राजपाट सौंप देना चाहिए। लेकिन वह चाहता था कि उसका पुत्र एक अच्छा शासक बने। इसलिए वह अपने पुत्र को एक जेन के पास ले गया। जेन मास्टर वास्तव में बौद्ध धर्म की एक शाखा से जुड़े होते हैं, जो ध्यान लगाते हैं। जेन मास्टर ने राजकुमार को एक साल के लिए जंगल में भेज दिया। साल भर बाद जब राजकुमार लौटकर आया, तो जेन मास्टर ने पूछा कि तुम्हें जंगल में क्या सुनाई दिया। राजकुमार ने कहा कि मैंने कोयल को कूकते सुना। 

नदियों के बहते पानी की कल-कल ध्वनि सुनी। मेढकों का टर्राना सुना। भेड़ियों की आवाज सुनी। वह अपना अनुभव सुनाता चला गया। जेन मास्टर ने कहा कि तुम फिर एक साल के लिए जंगल में जाओ और कुछ नया सुनकर आओ। राजकुमार अब अपने घर लौटना चाहता था, लेकिन बेमन से वह एक बार फिर जंगल गया। शुरुआत में तो उसे कुछ नया नहीं सुनाई दिया। लेकिन जब उसने ध्यान लगाना सीख लिया, तो उसे बहुत कुछ सुनाई देने लगा। 

वह लौटकर आया और जेन मास्टर से कहा कि इस बार मैंने तितलियों की बातें सुनीं, कलियों का चटकना सुना, सूरज की किरणों को धरती पर उतरना सुना। जेन मास्टर ने कहा कि अब तुम राजा बनने के लायक हो गए हो। जो राजा  अनसुने को सुन लेता हो, वही अच्छा शासक हो सकता है।

हरित क्रांति की नई गाथा लिखने को तैयार हरियाणा

अशोक मिश्र

इन दिनों पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के संकट से जूझ रही है। पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। ऐसे संकट के दौर में 17 जुलाई को हरियाणा में एक हरित विकास की एक नई क्रांति होने जा रही है। एक दिन बाद भारत हाईड्रोजन ट्रेन चलाने वाला आठवां देश हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नब्बे किमी की यात्रा करने वाली हाईड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे और हरियाणा को पहली हाईड्रोजन ट्रेन चलाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। निस्संदेह यह हरियाणा के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। 

अगर योजना, सुरक्षा और लागत का संतुलन बना रहा तो जींद-सोनीपत की यह 90 किमी की पटरी, पूरे हरियाणा के लिए 90 साल आगे की सोच बन सकती है। इसके लिए निस्संदेह केंद्र और राज्य सरकार बधाई के पात्र हंै। हाईड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह डीजल और बिजली दोनों पर निर्भर नहीं है। इसमें लगे फ्यूल सेल हाईड्रोजन गैस से बिजली बनाते हैं। उसी से ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में धुआं नहीं निकलता, सिर्फ पानी की भाप बनती है। इसका नतीजा यह निकलेगा कि नब्बे किमी की पटरी के आसपास इस ट्रेन की वजह से प्रदूषण नहीं होगा। कार्बन का उत्सर्जन ही नहीं होगा। 

अगर यह कहा जाए कि 17 जुलाई से चलने वाली हाईड्रोजन ट्रेन केवल एक रेलगाड़ी नहीं है, बल्कि हरियाणा के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बहुत बड़ा कदम है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। दिल्ली एनसीआर से सटे जिलों में डीजल इंजन और सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की वजह से होने वाले प्रदूषण को कम करने में यह ट्रेन सहायक हो सकती है, यदि हाईड्रोजन गैस के माध्यम से चलने वाले वाहनों के इंजन ईजाद कर लिए जाएं तो निकट भविष्य में हरियाणा ही नहीं, देश के सभी राज्य शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे। इससे पूरे देश के पर्यावरण में भारी सुधार होगा और लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु उपलब्ध हो सकेगी। 

हाईड्रोजन ट्रेन की वजह से तेज और साफ सफर संभव हो सकेगा। इससे हरियाणा में उद्योग, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। लोग कम समय में आ-जा सकेंगे और माल ढुलाई भी बेहतर होगी। अभी तो यह हरियाणा में केवल एक हाईड्रोजन ट्रेन की शुरुआत हो रही है। निकट भविष्य में हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी हाईड्रोजन ट्रेन का संचालन संभव होगा और पूरे देश की तस्वीर बदल जाएगी। हाईड्रोजन ट्रेन और वाहनों का संचालन शुरू होने पर देश की डीजल और पेट्रोल के आयात पर निर्भरता घटेगी और ईंधन घरेलू स्तर पर ही बनेगा। यदि ऐसा होता है तो देश में हाईड्रोजन प्लांट, रीफ्यूलिंग स्टेशन और रखरखाव से जुड़े नए उद्योग और नौकरियां पैदा होंगी। बहरहाल, 17 जुलाई को हरियाणा से देश में हरित क्रांति की मशाल जलने वाली है जो भविष्य में पूरे देश की तस्वीर बदल सकती है।

Wednesday, July 15, 2026

ज्ञान, धन और विश्वास की कथा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

दुनिया में सबसे अमूल्य है विश्वास। एक बार किसी का विश्वास टूट जाए, तो फिर दोबारा विश्वास कायम नहीं होता है। यही वजह है कि हमारे प्राचीन ग्रंथों में विश्वास को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। विश्वास कायम रखना, एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इस संदर्भ में एक बहुत पुरानी कथा है। कहते हैं कि ज्ञान, धन और विश्वास नामक तीन मित्र थे। तीनों में प्रगाढ़ मित्रता थी। 

एक बार उन्होंने तय किया कि किसी मूल्यवान वस्तु की खोज की जाए। तो फिर क्या था? तीनों अपनी यात्रा पर निकल पड़े। काफी दूर-दूर तक भटकने के बाद एक राज्य में पहुंचे। उस राज्य के राजा के सामने तीनों मित्र खड़े हुए। राजा ने तीनों का परिचय पूछा, तो सबसे पहले ज्ञान आगे आया। उसने राजा और दरबारियों को ज्ञान की बहुत सारी बातें बताईं। 

राजा ज्ञान की बातों से बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद धन की बारी आई। उसने राजा और दरबारियों के सामने ढेर सारा धन प्रस्तुत किया। सभी इतना धन देखकर धन से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने धन का ज्ञान से भी बढ़कर सम्मान किया। विश्वास की वेशभूषा भी बहुत साधारण थी। उसने लोगों को अपनी बातों से विश्वास दिलाना चाहा लेकिन कोई प्रभावित नहीं हुआ। 

कुछ समय बाद तीनों मित्र एक जंगल से गुजर रहे थे, तो डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया। ज्ञान ने डाकुओं को समझाना चाहा, लेकिन उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। धन से भी सब कुछ छीन लिया गया। तब विश्वास आगे आया। उसने कहा कि आपने हमारा सब कुछ छीन लिया है, लेकिन एक बात याद रखना, अगर विश्वास टूट जाए, तो दोबारा कायम नहीं हो सकता है। डाकुओं पर विश्वास की बात का गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने तीन मित्रों को आजाद कर दिया और लूटा गया सामान भी वापस कर दिया।

बरसात के दिनों में जल निकासी बन जाती है सबसे बड़ी समस्या


अशोक मिश्र

हरियाणा में बरसात ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। कई जिलों में सड़कों और गलियों में जलभराव ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। गुरुग्राम की सड़कें हों या मेवात, पलवल, फरीदाबाद के निचले इलाके, रोहतक और हिसार के कई गांव, हर जगह पानी भरना अब आम बात हो गई है। हरियाणा की भौगोलिक बनावट के कारण रोहतक, झज्जर और सोनीपत जैसे मध्यवर्ती इलाकों में प्राकृतिक जल निकासी की समस्या है, जिससे हर मानसून में निचले इलाकों में पानी भर जाता है। 

कुछ घंटे की बारिश भी कई इलाकों को घंटों के लिए तालाब में बदल देती है और इसके बाद शुरू होता है बीमारियों और दिक्कतों का सिलसिला।ग्रामीण इलाकों की दशा तो बरसात के दिनों में और भी खराब हो जाती है। खेतों में लंबा जलभराव होने से किसानों की खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं और मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है। कई जिलों में कई बार पानी कई दिनों तक जमा रहता है। इस रुके हुए पानी में एडीज और एनोफिलिज मच्छरों के पनपने लगते हैं जिसकी वजह से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। बरसात के मौसम में सबसे बड़ी परेशानी पानी का दूषित हो जाना है। 

पीने वाले पानी में सीवर की गंदगी मिलने से पीलिया, टाइफाइड, हैजा और गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट में संक्रमण और उल्टी-दस्त) जैसी बीमारियां होती हैं। दूषित पानी के संपर्कमें लंबे समय तक रहने से त्वचा पर चकत्ते, फंगल इंफेक्शन और आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अस्पतालों में ऐसे रोगियों की भरमार हो जाती है। सड़कों पर पानी भरने से लंबा ट्रैफिक जाम लगता है। भारी बरसात होने की वजह से कई बार सड़कें तक धंस जाती हैं। ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। 

जल जमाव सिर्फ बीमारी ही नहीं लाता, रोजमर्रा की जिंदगी भी ठप कर देता है। स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ और पानी से होकर गुजरते हैं। कई बार सड़कें बंद होने से बसें नहीं चलतीं और विद्यार्थियों की पढ़ाई छूट जाती है। दफ्तर जाने वाले लोग घंटों जाम में फंस रहते हैं। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक इलाकों में पानी भरने से फैक्टरियों में काम रुक जाता है, जिससे मजदूरों की दिहाड़ी भी जाती है। इस समस्या की जड़ में अव्यवस्थित शहरीकरण, नालों की सफाई न होना और जल निकासी की सही योजना का अभाव है। कई जगह नाले अतिक्रमण के कारण बंद हैं। कचरा डालने से वे जाम हो गए हैं। 

बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पाता क्योंकि कंक्रीट के जंगल बढ़ गए हैं। समाधान के लिए सिर्फ  बरसात के बाद सफाई काफी नहीं है। हर जिले में बरसात से पहले नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाना और पंपिंग स्टेशन दुरुस्त करने की मुहिम चलनी चाहिए। शहरी इलाकों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाए ताकि पानी जमीन में जाए।