बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस में रहते हुए भी समाजवादी विचारधारा को मानते थे। उनका जन्म 30 अक्टूबर 1889 को सीतापुर जिले में एक खत्री परिवार में हुआ था। इनके बचपन का नाम अविनाशी लाल खत्री था। उनके पिता के मित्र माधव प्रसाद मिश्र ने इनका नाम अविनाशी लाल से नरेंद्र देव रख दिया था। इनके पिता बलदेव प्रसाद अपने समय के सबसे बड़े वकील थे और कांग्रेस के नेता भी थे।देश में लोगों की गरीबी और बदहाली को देखकर किशोरावस्था में ही अविनाशी लाल के मन में समाजवादी विचारधारा घर कर गई थी। आचार्य नरेंद्र देव स्वाधीनता संग्राम सेनानी होने के साथ-साथ पत्रकार, साहित्यकार, पुरातत्व विशेषज्ञ और शिक्षाविद भी थे। बाद में वह मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी बनाए गए। एक बार की बात है।
काशी में ही किसी काम से आचार्य नरेंद्र रिक्शे पर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें उनके एक परिचित ने देखा, तो उसने रुकने के लिए आवाज दी। उस आदमी ने आचार्य से कहा कि आप रिक्शे से क्यों जा रहे हैं? तब आचार्य ने कहा कि मेरे जैसा मामूली आदमी रिक्शे पर नहीं जाएगा तो किस पर जाएगा? उस आदमी ने कहा कि आपको तो विश्वविद्यालय की ओर से कार मिली है।
फिर रिक्शे पर क्यों जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि मेरे जैसा साधारण आदमी उसका खर्च नहीं वहन कर सकता है। और फिर, मैं अपने एक बीमार संबंधी को देखने जा रहा हूं। कार विश्वविद्यालय के कामों के लिए मिली है। मैं उसको अपने काम में कैसे इस्तेमाल कर सकता हूं। यह सुनकर वह आदमी उनकी सादगी और ईमानदारी पर मुग्ध हो गया। उसने उन्हें मन ही मन नमन किया और चला गया।










