बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
श्वेत अश्वेत का भेदभाव कोई नया नहीं है। आज दुनिया में कोई भी किसी के साथ रंग या नस्ल के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं रहा है। अमेरिका, अफ्रीका और कई यूरोपीय देशों में नस्लभेद की भावना बहुत गहरे तक समाई हुई थी। काले लोगों को हर जगह अपमानित होना पड़ता था।गोरे लोग कई बार तो अपनी सीमाएं लांघकर काले लोगों को अपमानित करते थे। अमेरिका में रंगभेद के खिलाफ बड़ी मजबूती से लड़ने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जन्म 15 जनवरी 1929 को अटलांटा में हुआ था। उनके पिता पादरी थे। पिता की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी थी, इसलिए मार्टिन को बचपन में आर्थिक संकटों का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन बचपन में हुई एक घटना ने उनके बालमन पर बहुत प्रभाव डाला।
जब वह छह साल के हुए और उन्हें स्कूल जाना पड़ा, तो पता चला कि पड़ोस में रहने वाले एक व्यापारी के पुत्र को गोरों के स्कूल में जाना होगा और मार्टिन को काले लोगों के स्कूल में। स्कूल जाने से पहले वह दोनों एक साथ खेलते थे, लेकिन बाद में दोनों को एक दूसरे के साथ खेलने से रोक दिया गया। इस घटना का उनके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा।
बाद में उन्होंने अमेरिका में रंगभेद के खिलाफ जोरदार संघर्ष शुरू किया। उनके इस काम में आठवीं कक्षा में पढ़ाने वाली टीचर ब्रैडली ने नागरिक अधिकार की लड़ाई में उनका बहुत साथ दिया। टीचर की ही प्रेरणा से वह अमेरिका में वंचितों को न्याय दिलाने में सफल हुए। उन्होंने जीवन भर रंगभेद के खिलाफ संघर्ष किया। 4 अप्रैल 1968 को एक हत्यारे ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर की गोली मारकर हत्या कर दी।









