Wednesday, April 29, 2026

देखना चाहता था कि तुम में कितना धैर्य है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर कोई काम धैर्य के साथ किया जाए, तो वह भले ही असंभव लगने वाला हो, आखिरकार पूरा हो ही जाता है। धैर्य के साथ-साथ लगन भी जरूरी होता है। यदि इन दोनों गुणों का समावेश हो जाए, तो व्यक्ति जीवन में काफी सफल हो जाता है। कहते हैं कि जिस व्यक्ति में थोड़ा सा भी धैर्य नहीं होता है, वह जीवन में कोई भी काम सफलतापूर्वक नहीं कर सकता है। 

एक बार की बात है। किसी राज्य में एक गुरुकुल चलता था। वहां काफी संख्या में बच्चे पढ़ते थे। गुरुकुल के आचार्य की बहुत अधिक ख्याति थी। एक दिन उन्होंने अपने शिष्यों के धैर्य की परीक्षा लेनी चाही। उन्होंने बांस से बनी कुछ टोकरियां मंगाई और अपने शिष्यों को देते हुए कहा कि इन टोकरियों में पानी भरकर लाओ। आश्रम की सफाई करनी है। बांस की टोकरियों को देखकर सारे शिष्य आश्चर्यचकित रह गए।  

उन्हें आचार्य का आदेश विचित्र तो लगा, लेकिन वह कुछ कर भी नहीं सकते थे। अत: वह पास में बहने वाली नदी में गए और उन्होंने टोकरियों में पानी भरा। लेकिन पानी तुरंत ही बहकर निकल गया। सारे शिष्यों ने कई बार प्रयास किया, लेकिन विफल होने पर वह आचार्य के पास लौट आए। उन्होंने कहा कि आचार्य जी, इन टोकरियों में पानी कैसे भरा जा सकता है। 

आचार्य ने देखा कि एक शिष्य वापस नहीं आया था। उन्होंने कहा कि तुम सब इंतजार करो। वह शिष्य नदी से पानी भरने का प्रयास शाम तक करता रहा। इससे पानी में भीगते-भीगते बांस फूल गया और सारे छेद बंद हो गए। जब उसने पानी भरा तो वह नहीं निकला। यह देखकर वह प्रसन्न हुआ और पानी लाकर आचार्य के सामने रख दिया। तब आचार्य ने कहा कि यही तुम लोगों परीक्षा थी। मैं देखना चाहता था कि तुम लोगों में कितना धैर्य है। इस परीक्षा में केवल एक शिष्य ही सफल हुआ।

सड़क पर चलने वालों की जान जोखिम में डालते तेज रफ्तार वाहन


अशोक मिश्र

तेज रफ्तार गाड़ियां सड़कों पर चलने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित होती जा रही हैं। तेज रफ्तार वाहन से दो तरह के खतरे होते हैं। एक तो जो तेज रफ्तार में वाहन चला रहा होता है, उसकी जान खतरे में होती है। वहीं सड़क पर चलने वाले दूसरे लोग भी खतरे में ही होते हैं। तेज रफ्तार वाहन कब किसी को कुचल दे, किसी वाहन को टक्कर मार दे, इसका पूर्वाभास नहीं होता है। 

आजकल के युवा अपने वाहन को तेज रफ्तार में ही चलाना पसंद करते हैं। नतीजा यह होता है कि वह खुद तो घायल होते ही हैं, दूसरों की जान भी जोखिम में डालते हैं। फरीदाबाद में खेड़ी पुल थाना के अंतर्गत आने वाले कच्चा खेड़ी रोड पर एक महिला अपने दो साल के बच्चे का हाथ पकड़कर पैदल जा रही थी। पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे कार चालक ने लापरवाही से बच्चे को टक्कर मार दी। गाड़ी का अगला पहिया बच्चे के सिर से गुजर गया। बच्चे की तत्काल मौत हो गई। 

फरीदाबाद के ही गदपुरी थाने के पास तेज रफ्तार में आगे जा रहे ट्रक ने अचानक ब्रेक मार दी जिससे पीछे से आ रहा आटो बड़ी तेजी से ट्रक से टकरा गया। इस टक्कर में आटो में बैठे एक बुजुर्ग की मौत हो गई। फरीदाबाद के ही समयपुर चुंगी के पास तेज रफ्तार कैंटर ने आगे चल रही बाइक को टक्कर मार दी जिससे बाइक सवार महिला सड़क पर गिर पड़ी और टैंकर महिला के सिर के ऊपर से गुजर गया। पलवल के पृथला गांव के समीप राष्ट्रीय राज मार्ग 19 पर बाइक और पिकअप की टक्कर में बाइक चालक के साथ-साथ दो मासूम बच्चियों की मौत हो गई। 

होडल गे गांव गढ़ी पट्टी में तेज रफ्तार ट्रैक्टर चालक ने बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। इस टक्कर की वजह से पानी लेने जा रहे दो भाइयों में से एक की मौत हो गई और दूसरा बुरी तरह घायल हो गया। यह सारी घटनाएं रविवार को ही हुई हैं। जब दो जिलों की यह हालत है, तो हरियाणा के सभी जिलों में होने वाले हादसों का अंदाजा लगाया जा सकता है। वाहन की स्पीड तेज होने की वजह से नुकसान भी बहुत ज्यादा होता है। कई बार तो इंसानी नुकसान बहुत ज्यादा हो जाता है।

एक्सप्रेस वे और फोरलेन सड़कों पर गलत साइड से वाहनों के आने पर रोक नहीं लग पा रही है। इससे सड़क हादसों पर रोक नहीं लग पा रही है। सड़कों की खराब दशा भी ज्यादातर सड़क हादसों के लिए जिम्मेदार है। एक्सप्रेस वे और फोरलेन सड़कों पर सौ-एक सौ बीस की स्पीड में दौड़ रहे वाहन के सामने जब अचानक कोई गाड़ी, इंसान या लावारिस पशु आ जाता है तो ऐसी स्थिति में वाहन को नियंत्रित करना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में सड़क हादसे की आशंका काफी बढ़ जाती है। कई बार अचानक ब्रेक मारने से वाहन उलट जाता है या फिर सामने से आर रहे वाहन से टकरा जाता है। 

Tuesday, April 28, 2026

आचार्य नरेंद्र देव की सादगी और ईमानदारी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस में रहते हुए भी समाजवादी विचारधारा को मानते थे। उनका जन्म 30 अक्टूबर 1889 को सीतापुर जिले में एक खत्री परिवार में हुआ था। इनके बचपन का नाम अविनाशी लाल खत्री था। उनके पिता के मित्र माधव प्रसाद मिश्र ने इनका नाम अविनाशी लाल से नरेंद्र देव रख दिया था। इनके पिता बलदेव प्रसाद अपने समय के सबसे बड़े वकील थे और कांग्रेस के नेता भी थे। 

देश में लोगों की गरीबी और बदहाली को देखकर किशोरावस्था में ही अविनाशी लाल के मन में समाजवादी विचारधारा घर कर गई थी। आचार्य नरेंद्र देव स्वाधीनता संग्राम सेनानी होने के साथ-साथ पत्रकार, साहित्यकार, पुरातत्व विशेषज्ञ और शिक्षाविद भी थे। बाद में वह मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी बनाए गए। एक बार की बात है। 

काशी में ही किसी काम से आचार्य नरेंद्र रिक्शे पर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें उनके एक परिचित ने देखा, तो उसने रुकने के लिए आवाज दी। उस आदमी ने आचार्य से कहा कि आप रिक्शे से क्यों जा रहे हैं? तब आचार्य ने कहा कि मेरे जैसा मामूली  आदमी रिक्शे पर नहीं जाएगा तो किस पर जाएगा? उस आदमी ने कहा कि आपको तो विश्वविद्यालय की ओर से कार मिली है। 

फिर रिक्शे पर क्यों जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि मेरे जैसा साधारण आदमी उसका खर्च नहीं वहन कर सकता है। और फिर, मैं अपने एक बीमार संबंधी को देखने जा रहा हूं। कार विश्वविद्यालय के कामों के लिए मिली है। मैं उसको अपने काम में कैसे इस्तेमाल कर सकता हूं। यह सुनकर वह आदमी उनकी सादगी और ईमानदारी पर मुग्ध हो गया। उसने उन्हें मन ही मन नमन किया और चला गया।

हरियाणा में दहेज की भेंट चढ़ती औरतों को कब मिलेगा न्याय?


अशोक मिश्र

देश में दहेज हत्या कोई नई बात नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे देश में रोज लगभग बीस से तीस महिलाएं दहेज की बलिवेदी पर चढ़ा दी जाती हैं। हरियाणा भी दहेज हत्या के मामले में अछूता नहीं है। राज्य में दहेज हत्याओं का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। तीन दिन पहले ही पलवल के किठवाड़ी गांव में विवाहिता और उसकी चार साल की बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गई। 

मामला दहेज हत्या का बताया जा रहा है। मृतका के भाई का आरोप है कि उसकी बहन मितलेश की शादी साल 2020 में आरोपी धर्मवीर के साथ हुई थी। विवाह के कुछ ही दिनों बाद मितलेश का पति, देवर, सास ननदें जमीन और 25 लाख रुपये मायके से मांगकर लाने के लिए दबाव बनाते थे। मितलेश के साथ मारपीट भी की जाती थी। बार-बार उसे मायके से दहेज लाने के लिए प्रताड़ित किया जाता था। 

25 अप्रैल को ससुराल वालों ने मितलेश के साथ साथ उसकी चार साल की बच्ची की पीट-पीटकर हत्या कर दी। तीन महीने पहले पैदा हुए बेटे को लेकर पिता धर्मवीर फरार है। पुलिस मामले की सच्चाई पता लगाने की कोशिश कर रही है। हरियाणा में दहेज हत्या के मामलों में चिंताजनक आंकड़े सामने आ रहे हैं, जो राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं। 

साल 2025 में प्रकाशित एनसीआरबी डेटा पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में दहेज हत्या के 207 मामले दर्ज किए गए जबकि साल 2021 में दहेज हत्या के 275 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, साल 2020 में 251 और 2019 में 248 मामले सामने आए थे। हरियाणा में दहेज हत्या के अलावा पति या ससुराल वालों द्वारा महिलाओं के साथ क्रूरता (दहेज उत्पीड़न) के भी हजारों मामले सामने आते हैं, जो कई बार हत्या में बदल जाते हैं। दहेज उत्पीड़न और हत्या रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कड़े कानून बना रखे हैं। इसके बावजूद प्रदेश में दहेज हत्याओं का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। 

दरअसल, प्राचीन काल में जब कोई अपनी बेटी का विवाह करता था, तो नवदंपति को अपनी गृहस्थी को व्यवस्थित करने के लिए लड़की का पिता या भाई अनाज, कपड़े, गृहस्थी के सामान आदि दूल्हे को देता था। यह सब कुछ करने का मकसद यह था कि नवदंपति को अपना वैवाहिक जीवन की शुरुआत में किसी प्रकार की परेशानी न हो। ऐसा करना भी कोई जरूरी नहीं था। लेकिन कालांतर में यही दाय भाग दहेज में कब परिवर्तित हो गया, किसी को पता ही नहीं चला। 

अब तो यह है कि लोग खुलेआम दहेज मांग लेते हैं और लड़की वालों को मजबूरन ऐसा करना पड़ता है। वैसे तो कानूनन दहेज मांगना और देना दोनों अपराध की श्रेणी में आते हैं, लेकिन लोग सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर लड़की वालों को दहेज देने पर मजबूर कर देते हैं।

Monday, April 27, 2026

मूर्ति ने हथौड़ी और छेनी का वार सहा है


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हमें किसी की उपलब्धि पर कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। कोई भी उपलब्धि या समाज में सम्मान कठिन परिश्रम और विपरीत परिस्थितियों में सघर्ष करने के बाद ही हासिल होती है। बिना किसी प्रकार का संघर्ष किए संयोगवश यदि कोई उपलब्धि हासिल हो जाती है, तो उस पर इतराना भी नहीं चाहिए। 

एक बार की बात है। एक देव प्रतिमा से एक पुष्प ईर्ष्या कर बैठा। उसकी समझ में यह नहीं आता था कि लोग मंदिरों में स्थापित प्रतिमा की पूजा क्यों करते हैं। जबकि वह उस मूर्ति से कहीं ज्यादा सुंदर और सुकोमल है। एक दिन जब मंदिर में मूर्ति पर फूल चढ़ाया गया, तो वह नाराज हो उठा। उसने रोष भरे स्वर में पुजारी से कहा कि तुम इस मूर्ति की पूजा क्यों करते हैं जबकि मैं उस मूर्ति से कहीं ज्यादा सुंदर, कोमल और दर्शनीय हूं। 

पुष्प की बात सुनकर पुजारी हंस पड़ा। उसने पुष्प से कहा कि वह पूज्य इसलिए है क्योंकि उसने मूर्ति बनने के दौरान पीड़ा झेली है। पहले वह एक बदरंग पत्थर था। मूर्तिकार की नजर पड़ने से पहले उसने न जाने कितनी बरसात, धूप, गर्मी और सर्दी बर्दाश्त किया। फिर मूर्तिकार ने उसे काटा छांटा। मूर्ति बनाने के लिए उस पर न जाने कितनी बार हथौड़ी और छेनी का वार सहा है। 

तब कहीं जाकर वह मूर्ति के रूप में ढला है। अगर वह टूट जाता, तो उसका कोई मूल्य नहीं रह जाता। और तुम्हें यह कोमलता, सुंदरता और खुशबू तो प्रकृति ने प्रदान किया है। इसके लिए तुम्हें किसी प्रकार का परिश्रम या संघर्ष नहीं किया है। ऐसी स्थिति में तुम बताओ, पूजा और आदर के योग्य कौन है? तुम या मूर्ति? यह सुनकर पुष्प चुप रह गया। उसकी समझ में यह बात आ गई कि सम्मान या उच्च पद प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

प्रचंड गर्मी में मजदूरों को काम कम मिलने से घर चलाना हुआ मुश्किल

अशोक मिश्र

पूरा देश तप रहा है। कई राज्यों में लू के थपेड़ों ने जनजीवन का अस्त-व्यस्त कर दिया है। बाहर निकलते ही ऐसा लगता है कि किसी ने भट्ठी सुलगा दी हो। इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक व्याकुल हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तापमान 47.4 तक पहुंच गया है। भारत के पांच राज्यों के 14 शहरों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। दिल्ली में शनिवार दोपहर को पारा 42.8 डिग्री तक पहुंच गया। 

यह इस साल का सबसे गर्म दिन रहा। हरियाणा भी इससे अछूता नहीं है। सूरज की किरणें लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। तापमान में भारी उछाल की वजह से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।  रोहतक में पारा 44.6 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जो सामान्य से 5.9 डिग्री अधिक है। रोहतक पूरे देश में छठा सबसे गर्म शहर रहा। प्रदेश के 13 प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रिकॉर्ड किया गया है । इनमें रोहतक (44.6 डिग्री), सिरसा (43.4 डिग्री), हिसार (42.9 डिग्री), नारनौल (42.8 डिग्री) और फरीदाबाद (43.5 डिग्री) जैसे शहर शामिल हैं। 

आशंका व्यक्त की जा रही है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। प्रचंड गर्मी का सबसे ज्यादा खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है जो रोज कमाते हैं और खाते हैं। इतनी गर्मी में मजदूरों को काम मिलने में काफी दिक्कत हो रही है। इनके सामने समस्या यह है कि यदि इनको काम नहीं मिला तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। मकान निर्माण में लगे मजदूरों को तो सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। मकान बनाने का काम धीमा पड़ रहा है। 

कई जगहों पर भीषण गर्मी न सह पाने और शरीर में पानी की कमी हो जाने की वजह से मजदूर बीमार पड़ गए हैं। गिग वर्कर्स की तो दोपहर में भी भागदौड़ करने के चलते हालत खराब हो रही है। वह लोगों तक सही समय पर अपनी डिलिवरी नहीं दे पा रहे हैं। इससे उन्हें ग्राहकों के साथ-साथ कंपनी वालों से सुनना पड़ता है। सड़कों के किनारे रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले भी परेशान हैं। भीषण गर्मी के कारण लोग घर से ही नहीं निकल रहे हैं। इससे उनकी कमाई पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा है। 

हरियाणा में पड़ रही प्रचंड गरमी के दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लोग गर्मी के कारण होने वाले रोगों से पीड़ित होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का लोगों से यही कहना है कि घर से निकलने से परहेज करना चाहिए। यदि बहुत जरूरी काम हो, तो खाली पेज बाहर नहीं निकलें। थोड़ा सा ठोस खाद्य पदार्थ और पानी या छाछ जरूर पीकर निकलें। निकलते समय सिर पर गमछा या रुमाल जरूर डाल लें। शरीर को हलके कपड़ों से ढककर ही बाहर निकलें। चक्कर, कमजोरी या किसी तरह की परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Sunday, April 26, 2026

उसका विश्वास कैसे टूटने देता

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

यदि कोई व्यक्ति किसी का विश्वास तोड़ता है, तो वह सबसे अधम किस्म का प्राणी होता है। विश्वासघात करने वाले व्यक्ति की सच्चाई और ईमानदारी पर कभी कोई व्यक्ति भरोसा नहीं कर पाता है। आदमी वैसे तो किसी पर बहुत जल्दी विश्वास नहीं करता है, लेकिन अगर किसी कारणवश विश्वास कर लिया, तो उसका विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए। एक बार की बात है। 

किसी राज्य में डाकुओं का एक दल रहता था। वह दल आने जाने वाले व्यापारियों को लूटता था और अपने खर्चे भर का रखकर बाकी धन वह गरीबों में बांट दिया करता था। डाकुओं का यह दल कभी किसी गरीब या असहाय को नुकसा नहीं पहुंचाता था। व्यापारियों या धनवानों को लूटते समय भी यही कोशिश करते थे कि किसी को चोट न पहुंचाई जाए। एक दिन उधर से व्यापारियों का एक दल गुजरा। 

उस दल में कई व्यापारी थे जिन्होंने बड़ी मेहनत से धन कमाया था। डाकुओं ने व्यापारियों के दल पर हमला किया और लूटपाट करने लगे। इसी बीच एक व्यापारी डाकुओं की निगाह बचाकर निकल भागा।  थोड़ी ही दूरी पर एक तंबू में घुसा और वहां बैठे साधु को रपयों और सोने-चांदी से भरी थैली को सौंपते हुए कहा कि आप इसे अपने पास रख लीजिए। कल आकर ले जाऊंगा। 

अगले दिन व्यापारी तंबू में पहुंचा तो देखा कि साधु बना व्यक्ति डाकुओं का सरदार है। वह लूटे गए धन को आपस में बांच रहा था। यह देखकर व्यापारी लौटने लगा। तब सरदार ने व्यापारी को आवाज लगाते हुए कहा कि तुम अपनी थैली ले जाओ। जैसी दे गए थे, वैसी ही रखी है। व्यापारी अपना धन लेकर चला गया तो डाकुओं ने सरदार से कहा कि आपने उसका धन क्यों लौटा दिया। सरदार ने कहा कि उसने विश्वास करके मुझे धन सौंपा था। उसका विश्वास कैसे टूटने देता।

यमुना नदी को अगले साल के आखिर तक प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना


अशोक मिश्र

देश की सबसे प्रदूषित नदियों में पहला नाम यमुना नदी का है। दिल्ली और आगरा के बीच यमुना नदी का पानी तो छूने लायक भी नहीं रह जाता है। दिल्ली में ही 50 प्रतिशत से अधिक कचरा और औद्योगिक गंदगी मिल जाती है। यहाँ जहरीला फोम यानी झाग बनना आम है। किसी भी महीने में दिल्ली में यमुना नदी के किनारे पहुंच जाएं, तो पानी के ऊपर तैरता झाग दिख जाएगा। इस प्रदूषण के लिए अकेले दिल्ली ही जिम्मेदार नहीं है, इसके लिए हरियाणा भी जिम्मेदार है। 

यही वजह है कि हरियाणा सरकार समय समय पर यमुना नदी की सफाई को लेकर अभियान चलाती रहती है, लेकिन उसके अभियान को नदी में औद्योगिक कचरा और अन्य रासायनिक अपशिष्ट मिलाने वाले उद्योग नाकाम बना देते हैं। यमुना नदी की दशा और दुर्दशा से चिंतित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह नियमों का उल्लंघन कर यमुना में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 

यमुना नगर के कलेसर जंगल से लेकर पलवल के हसनपुर के बीच 320 से 328 किमी लंबाई में बहने वाली यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का फैसला सैनी सरकार ने लिया है। यमुना नदी को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में सीएम सैनी ने अपना इरादा जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार अगले साल यानी 2027 के अंत तक यमुना नदी को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना चाहती है। इसके लिए जो भी कार्रवाई आवश्यक होगी, वह कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी विभागों को आपसी सामंजस्य के साथ तेजी से कार्रवाई करनी होगी। 

आंकड़े बताते हैं कि इन दिनों यमुना नदी कैचमेंट एरिया में 1543 एलएमडी क्षमता के 91 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इनमें से 41 एसटीपी पिछले पांच साल से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 11 नए एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। इससे यमुना कैचमेंट एरिया में प्रदूषित जलशोधन की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। सीएम ने बैठक में यहां तक कहा कि यमुना नदी को साफ रखने के लिए जहां भी जरूरत होगी, वहां औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) और सामान्य अपशिष्ट उपचार केंद्र (सीईटीपी) स्थापित किए जाएंगे। 

प्रदेश में ड्रेन नंबर छह समेत कई ड्रेन और 117 औद्योगिक इकाइयां यमुना नदी में प्रदूषित जल डाल रही हैं। इन्हें सरकार ने चिह्नित किया है। इन औद्योगिक इकाइयों सहित नालों से होकर यमुना में मिलने वाले प्रदूषित जल को रोकने के लिए अब कड़े कदम उठाए जाएंगे। अब औद्योगिक इकाइयों को एसटीपी से जोड़ना  अनिवार्य किया जाएगा। यमुना नदी में रासायनिक कचरा डालने या बहाने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अवैध डिस्चार्ज पर इन इकाइयों पर जुर्माना लगाने या बंद कर देने का भी प्रदेश सरकार ने फैसला किया है।

Saturday, April 25, 2026

एकाग्रचित्त होकर लक्ष्य पर ध्यान दो


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

स्वामी विवेकानंद हमेशा हर काम को एकाग्रचित्त होकर करने का संदेश दिया करते थे। वह लोगों को जीवन में घटने वाली छोटी-छोटी घटनाओं के माध्यम से ही समझाने का प्रयास करते थे। वैसे स्वामी विवेकानंद खुद अपनी यात्रा के दौरान हुए अनुभवों से सीख लेते थे। 

उन पर विचार करते थे और उसके बाद अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते थे। वह संन्यासी होते हुए भी लोगों के दुख-दर्द को दूर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उन्होंने कई देशों की यात्राएं की थीं। वह जहां भी जाते थे, जिज्ञासु लोग उन्हें घेर लेते थे और धर्म की चर्चा करते थे। 

एक बार की बात वह किसी देश की यात्रा पर थे। वह लोगों से मिलते जुलते हुए घूम रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि एक पुल पर खड़े हुए कुछ लड़के बहते हुए अंडे के छिलके पर निशाना लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन सभी लड़कों में एक तरह की अघोषित प्रतियोगिता चल रही थी। 

किसी भी लड़के का सटीक निशाना नहीं लग रहा था। स्वामी विवेकानंद कुछ देकर तक लड़कों का यह कौतुक देखते रहे। फिर उन्होंने एक युवक से कहा कि लाओ, बंदूक मुझे दो। एक लड़के ने अपनी बंदूक स्वामी जी को थमा दी। स्वामी जी ने पहला निशाना साधा। एकदम सटीक निशाना लगा। 

इसके बाद उन्होंने दस निशाने लगाए, सारे निशाने सटीक लगे। लड़कों को बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने पूछा कि आपने यह कैसे कर लिया? स्वामी जी ने कहा कि जब तुम किसी काम को करो, तो अपना पूरा ध्यान उसी काम पर लगाओ। एकाग्रचित्त होकर यदि कोई काम करोगे, तो सफलता जरूर मिलेगी। पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर ही लगा दो। मैंने भी ऐसा ही किया। यही वजह है कि मेरे सारे निशाने ठीक लगे।

मंडियों में अव्यवस्था और गेहूं की धीमी उठान से किसानों में भारी रोष

अशोक मिश्र

हरियाणा में गेहूं की फसल लगभग पूरी तरह कट चुकी है। किसानों ने अपने परिश्रम को नकदी में बदलने के लिए मंडियों की ओर रुख करना बहुत पहले से शुरू कर दिया था। इन दिनों तो मंडियों में किसानों की आमद काफी तेज हो गई है। लेकिन तमाम दावों और वायदों के बावजूद मंडियों की व्यवस्था चरमरा कर रह गई है। किसान अपनी फसल को लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके अनाज खरीदने के लिए या तो कर्मचारी  उपलब्ध नहीं हैं या फिर जो अनाज खरीद लिया गया है, उसकी उठान की कोई मुकम्मल व्यवस्था तक नहीं है। मंडियों की पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त दिखाई देती है। राज्य भर की मंडियों में चारों ओर गेहूं ही गेहूं दिखाई पड़ रहा है।  प्रदेश की 14 मंडियों में हालात काफी बिगड़े हुए हैं। 

गेहूं का ढेर सड़कों और मंडियों में लगा हुआ है।  इस अनाज का कोई पुरसाहाल नहीं है। राज्यभर की मंडियों से अब तक जो आंकड़ा मिल रहा है, उसके मुताबिक राज्य मंडियों में अब तक 80.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 58.28 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। बाकी अनाज अभी तक मंडियों में ही पड़ा हुआ है। जहां तक अनाज की उठान का मामला है, अभी तक कुल 30.14 लाख मीट्रिक टन का ही उठान हो पाया है। हालत यह है कि 12 अप्रैल को खरीदा गया गेहूं अभी तक उठाया नहीं गया है। 

आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान रघुवीर चट्ठा का कहना है कि छह दिन पहले एसोसिएशन और किसानों ने मंडियों की अव्यवस्था को लेकर रोष जताया था। तब प्रशासन ने आश्वासन देते हुए कहा था कि पहले केंद्र की सड़कों से गेहूं उठाया जाएगा। इसके बाद प्लेटों से गेहूं उठान शुरू किया जाएगा। लेकिन हालत आज तक नहीं सुधर हैं। इससे आढ़तियों में काफी रोष है। 

उठान न होने की वजह से किसानों को भुगतान मिलने में भी देरी हो रही है। धीमी उठान की वजह से 11.3 प्रतिशत भुगतान किसानों को नहीं हो पाया है। किसान अपने खातों को बार-बार चेक करते हैं और फिर मायूस हो जाते हैं। अभी तक 6269.09 करोड़ रुपये में से कुल 2474.93 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है। आढ़तियों का कहना है कि उठान प्रक्रिया जानबूझकर धीमी की जा रही है। 

इतना ही नहीं, आढ़तियों से प्रति कट्टा सात रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक, इस तरह हर सीजन में लगभग पचास लाख रुपये का खेल किया जाता है। मंडियों में पैदा हुई अव्यवस्था के चलते आढ़तियों और किसानों में भारी रोष भी देखने को मिल रहा है। किसान संगठनों ने धीमी उठान और मंडियों में अव्यवस्था को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह ट्रांसपोर्टरों, माल ढुलाई और उठान से जुड़ी एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई करे, ताकि काम में तेजी आए।