बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
रोजा लुईज मक्कॉली पार्क्स का नाम अमेरिकी-अफ्रीकी अश्वेत नागरिकों में आज भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। पार्क्स का जन्म 4 फरवरी 1913 को अमेरिका के टस्कागी में एक साधारण परिवार में हुआ था। जीवन यापन के लिए उन्होंने कई तरह के काम किए। बचपन में पार्क्स ने अपनी दादी और मां से रजाई सिलना सीखा था। ग्यारह साल की उम्र में उन्होंने अपनी स्कूल की पोशाक तक सिल ली थी।सन 1932 में रोजा ने मोंटगोमरी के रेमंड पार्क्स से विवाह कर लिया जो पेशे से नाई थे। रेमंड उन दिनों सामाजिक सुधार के लिए आंदोलन चलाने वाले संगठन के सदस्य भी थे। इसका प्रभाव रोजा पार्क्स पर भी पड़ा। 1 दिसंबर 1955 की बात है। एक दिन अपने काम से वापस आते समय वह एक बस में चढ़ी और टिकट लेकर अश्वेतों के लिए तय सीट पर बैठ गईं।
उन दिनों अमेरिका में बसों में श्वेत और अश्वेत लोगों के लिए अलग-अलग सीटें तय थीं। जब श्वेत लोगों की संख्या ज्यादा होने पर उनकी निर्धारित सीटें भर जाती थीं, तो अश्वेतों को अपनी सीट खाली करनी पड़ती थी। उस दिन भी ऐसा ही हुआ। श्वेत लोगों की सभी सीटें भर गई थीं। बस चालक जेम्स एफ. ब्लेक ने एक श्वेत यात्री के लिए पार्क्स से अपनी सीट छोड़ने के आदेश दिया।
पार्क्स ने सीट छोड़ने से इनकार कर दिया। पार्क्स को गिरफ्तार कर लिया गया। अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय ने बस सेवा का 381 दिनों तक बहिष्कार किया। इस आंदोलन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर सहित कई प्रसिद्ध नेताओं ने भाग लिया। अंत में अदालत ने बसों में किए जाने वाले नस्लीय भेदभाव को असंवैधानिक करार दिया।
अपने साहस से पार्क्स ने अमेरिकी इतिहास बदल दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस ने द फर्स्ट लेडी आॅफ सिविल राइट्स (नागरिक अधिकारों की पहली औरत) और द मदर आॅफ द फ्रीडम मूवमेंट (आजादी लहर की माँ) नामों से पुकारा।









