बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है। मेहनती आदमी कभी शांत नहीं बैठता है। वह कुछ न कुछ करता रहता है ताकि उसकी मेहनत की आदत बनी रहे। आलसी आदमी मेहनत करने से कतराता है। वह कुछ करने की जगह खयाली पुलाव पकाता रहता है। लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगता है। ऐसी ही एक कथा है जिसमें एक मेहनती किसान ने अपने जीवन के अतिंम क्षणों में अपने चार बेटों को मेहनत करने का क्या परिणाम होता है, यह समझा दिया।यह कथा वैसे तो हम सबने सुनी ही होगी, लेकिन एक बार और सही। किसी गांव में एक किसान था। बहुत मेहनती था। उसके पास खेत तो कम थे, लेकिन मेहनत करने की वजह से गुजारा ठीकठाक चल जाता था। उसके चार बेटे थे। चारों बेटे बहुत आलसी थे। किसान जब भी खेतों में काम करने को कहा, वह टाल जाते थे। इससे किसान बहुत चिंतित रहता थ। उसने लाख प्रयास किए, लेकिन उसके बेटे नहीं सुधरे।
आखिर वह समय भी आया, जब किसान बूढ़ा हो गया और बीमार पड़ा। बीमारी की वजह से वह जान गया कि उसका अंत निकट है। उसने अपने बेटों से कहा कि उसने खेत में सोना गाड़ रखा है, लेकिन वह स्थान उसे ठीक-ठीक याद नहीं है। इतना कहने के बाद उसकी मौत हो गई। शोक दूर होने पर बेटों को पिता की बात याद आई। उन चारों ने मिलकर पूरे खेत को खोद डाला, लेकिन सोना नहीं मिला।
अंत में उन्होंने सोचा कि जब खेत की खोदाई कर ही ली है, तो क्यों न बीज बो दिया जाए। समय पर उसकी सिंचाई भी की। उस साल अच्छी फसल हुई। जरूरत भर का रखने के बाद बेचने पर अच्छा मुनाफा भी हुआ। वह अब समझ गए थे कि उनका पिता उन्हें क्या सिखाना चाहता था।

