Sunday, March 1, 2026

चार आलसी बेटे और खेत में गड़ा सोना

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता है। मेहनती आदमी कभी शांत नहीं बैठता है। वह कुछ न कुछ करता रहता है ताकि उसकी मेहनत की आदत बनी रहे। आलसी आदमी मेहनत करने से कतराता है। वह कुछ करने की जगह खयाली पुलाव पकाता रहता है। लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगता है। ऐसी ही एक कथा है जिसमें एक मेहनती किसान ने अपने जीवन के अतिंम क्षणों में अपने चार बेटों को मेहनत करने का क्या परिणाम होता है, यह समझा दिया। 

यह कथा वैसे तो हम सबने सुनी ही होगी, लेकिन एक बार और सही। किसी गांव में एक किसान था। बहुत मेहनती था। उसके पास खेत तो कम थे, लेकिन मेहनत करने की वजह से गुजारा ठीकठाक चल जाता था। उसके चार बेटे थे। चारों बेटे बहुत आलसी थे। किसान जब भी खेतों में काम करने को कहा, वह टाल जाते थे। इससे किसान बहुत चिंतित रहता थ। उसने लाख प्रयास किए, लेकिन उसके बेटे नहीं सुधरे। 

आखिर वह समय भी आया, जब किसान बूढ़ा हो गया और बीमार पड़ा। बीमारी की वजह से वह जान गया कि उसका अंत निकट है। उसने अपने बेटों से कहा कि उसने खेत में सोना गाड़ रखा है, लेकिन वह स्थान उसे ठीक-ठीक याद नहीं है। इतना कहने के बाद उसकी मौत हो गई। शोक दूर होने पर बेटों को पिता की बात याद आई। उन चारों ने मिलकर पूरे खेत को खोद डाला, लेकिन सोना नहीं मिला। 

अंत में उन्होंने सोचा कि जब खेत की खोदाई कर ही ली है, तो क्यों न बीज बो दिया जाए। समय पर उसकी सिंचाई भी की। उस साल अच्छी फसल हुई। जरूरत भर का रखने के बाद बेचने पर अच्छा मुनाफा भी हुआ। वह अब समझ गए थे कि उनका पिता उन्हें क्या सिखाना चाहता था।

लावारिस पशुओं से मुक्ति की राह देखती हरियाणा की सड़कें

अशोक मिश्र

हरियाणा में लावारिस पशु एक बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं। लावारिस पशुओं को पकड़कर उन्हें गौशालाओं तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार कई बार विशेष अभियान तक चलाया है। सरकार ने तो कुछ महीनों के भीतर सड़कों को लावारिस पशुविहीन करने की घोषणा तक की थी, लेकिन सड़कें अभी तक लावारिस पशुविहीन नहीं हुई हैं। पिछले साल 1 से 31 अगस्त 2025 तक प्रदेश के सभी जिलों में एक विशेष अभियान चलाया गया था ताकि सड़कें पशुओं से मुक्त हो सकें। काफी संख्या में लावारिस पशुओं को पकड़कर उनकी टैगिंग की गई थी और उन्हें विभिन्न गौशालाओं में पहुंचाया गया था। गौशालाओं में क्षमता से ज्यादा पशु रखे गए। वैसे तो राज्य सरकार ने पशुपालन विभाग के माध्यम से चार जिलों में विशेष 'गौ अभ्यारण्य' स्थापित करने की योजना बनाई है ताकि आवारा पशुओं को स्थायी आश्रय मिल सके। 

एक अनुमान के मुताबिक पिछले कुछ सालों में लावारिस पशुओं की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है। अनुमान लगाया जाता है कि प्रदेश में पांच लाख से अधिक पशु लावारिस हैं। जिनमें से साढ़े चार लाख पशुओं को गौशालाओं में भेजा जा चुका है। इसका मतलब यही है कि पचास हजार से अधिक लावारिस पशु सड़कों पर हैं। यह भी कहा जाता है कि हर साल लगभग 50 हजार नए लावारिस पशु इसमें जुड़ जाते हैं। प्रदेश के 750 से अधिक पंजीकृत/अपंजीकृत गौशालाओं में 4.5 लाख से अधिक मवेशी हैंजो क्षमता से अधिक और दबाव में हैं। 

फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार जैसे कई शहरों में लावारिस पशु बड़ी संख्या में पाए जाते हैं जिसकी वजह से होने वाले हादसों में लोग अपना जीवन गंवा रहे हैं। कुछ लोग स्थायी रूप से दिव्यांग भी हो जाते हैं जिसकी वजह से वह परिवार पर एक तरह से बोझ बनकर रह जाते हैं। सड़कों पर घूमते लावारिस पशु प्रदेश में होने वाले पंद्रह प्रतिशत हादसों के लिए जिम्मेदार हैं। लावारिस पशु कब आपस में ही लड़ने लगेंगे, यह नहीं कहा जा सकता है। इस आपसी भिड़ंत के चलते इनके पास से गुजरने वाले राहगीर और वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं। वैसे तो पशुओं के हमले या दुर्घटना में मृत्यु/स्थायी दिव्यांगता होने परहरियाणा सरकार 'दयालु-कक' योजना के तहत तीन लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान कर रही है। 

1 अगस्त 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच 38 शहरों में 49,500 से अधिक पशुओं को आश्रय में भेजा गयाऔर मालिकों पर 421 चालान किए गए। उनसे जुर्माना वसूला गया। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को सख्य आदेश दे रखा है कि जो डेयरी संचालक अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ते हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए और उनसे भारी जुर्माना वसूला जाए। लगभग सभी शहरों में नगर निगम अलग से अभियान चलाता रहता है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है।