एक अनुमान के मुताबिक पिछले कुछ सालों में लावारिस पशुओं की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है। अनुमान लगाया जाता है कि प्रदेश में पांच लाख से अधिक पशु लावारिस हैं। जिनमें से साढ़े चार लाख पशुओं को गौशालाओं में भेजा जा चुका है। इसका मतलब यही है कि पचास हजार से अधिक लावारिस पशु सड़कों पर हैं। यह भी कहा जाता है कि हर साल लगभग 50 हजार नए लावारिस पशु इसमें जुड़ जाते हैं। प्रदेश के 750 से अधिक पंजीकृत/अपंजीकृत गौशालाओं में 4.5 लाख से अधिक मवेशी हैंजो क्षमता से अधिक और दबाव में हैं।
फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार जैसे कई शहरों में लावारिस पशु बड़ी संख्या में पाए जाते हैं जिसकी वजह से होने वाले हादसों में लोग अपना जीवन गंवा रहे हैं। कुछ लोग स्थायी रूप से दिव्यांग भी हो जाते हैं जिसकी वजह से वह परिवार पर एक तरह से बोझ बनकर रह जाते हैं। सड़कों पर घूमते लावारिस पशु प्रदेश में होने वाले पंद्रह प्रतिशत हादसों के लिए जिम्मेदार हैं। लावारिस पशु कब आपस में ही लड़ने लगेंगे, यह नहीं कहा जा सकता है। इस आपसी भिड़ंत के चलते इनके पास से गुजरने वाले राहगीर और वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं। वैसे तो पशुओं के हमले या दुर्घटना में मृत्यु/स्थायी दिव्यांगता होने परहरियाणा सरकार 'दयालु-कक' योजना के तहत तीन लाख रुपये तक का मुआवजा प्रदान कर रही है।
1 अगस्त 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच 38 शहरों में 49,500 से अधिक पशुओं को आश्रय में भेजा गयाऔर मालिकों पर 421 चालान किए गए। उनसे जुर्माना वसूला गया। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को सख्य आदेश दे रखा है कि जो डेयरी संचालक अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ते हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए और उनसे भारी जुर्माना वसूला जाए। लगभग सभी शहरों में नगर निगम अलग से अभियान चलाता रहता है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है।

No comments:
Post a Comment