अशोक मिश्र
होली त्यौहार को पूरे भारत में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है। सर्दियों के बीतने के तुरंत बाद आने वाले इस त्यौहार में खुशियां मानो छलक ही पड़ती हैं। होली के मौके पर घरों में विभिन्न पकवान और मिठाइयां बनाई जाती हैं। तीन-चार दशक पहले लोग मिठाइयां और पकवान घर पर ही बनाते थे। मिठाइयों में उपयोग की जाने वाली अधिकतर सामग्री भी उनके घर में ही उपलब्ध रहती थीं, इसलिए मिलावटी सामान मिलने की गुंजाइश भी बहुत कम रहती थी। उस दौर में दुकानदार भी मिलावट करने से कतराते थे। लेकिन आज इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में मिलावटी खाद्य पदार्थों की भरमार दिखाई देती है। ज्यादातर मिठाइयां और अन्य पदार्थ मिलावटी होते हैं।
दुकानदार मुनाफा कमाने की होड़ में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हैं। कई दुकानों पर तो बासी और फफूंद लगी मिठाइयों को भी बेच दिया जाता है। बेचने वाला इस बात पर ग्लानि नहीं महसूस करता है कि इन बासी और मिलावटी मिठाइयों और पकवानों को खाकर लोग बीमार पड़ जाएंगे। हालात बिगड़ने पर उनकी मौत भी हो सकती है। यही वजह है कि त्यौहार आने से कुछ दिन पहले ही भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने लोगों को सावधानी बरतने के लिए चेतावनी जारी की है।
तीज-त्यौहारों पर सबसे ज्यादा मिलावटी दूध और उससे बनने अन्य उत्पाद बेचे जाते हैं। होली के अवसर पर मिलावटी पनीर, खोया आदि बिकता है। हरियाणा में भी त्यौहार के मद्देनजर खाने-पीने और मिठाइयों की दुकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जा रहे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर जुर्माना ठोका जा रहा रहा है। इसके बावजूद मिलावटी सामानों की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। सच तो यह है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री के न रुकने का कारण हमारे प्रदेश के बाजार की संरचना और संसाधनों की कमी है। लगभग तीन करोड़ आबादी वाले हरियाणा प्रदेश खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। राज्य में जितने भी खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जाते हैं, उनकी टेस्टिंग रिपोर्ट आने में ही पंद्रह से बीस दिन लग जाते हैं।
ऐसी स्थिति दुकानदार तब तक अपना मिलावटी माल बेच चुका होता है। लगने वाला जुर्माना भी बहुत ज्यादा नहीं होता है, इसकी वजह से मिलावट का बाजार सरगर्म रहता है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2025 के अंतर्गत मिलावटी पदार्थ खाने से किसी की मौत होने पर आजीवन कैद या दस लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन ऐसे ज्यादातर मामलों को अदालत में साबित कर पाना आसान नहीं है।
ऐसी स्थिति में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वाले ज्यादातर व्यापारी अदालत से छूट जाते हैं। इसके लिए अगर अलग से फास्ट ट्रैक बनाकर जल्दी-जल्दी मामले निपटाए जाएं तो मिलावट कुछ हद तक रुक सकती है।
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