बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
केन्या में 1 अप्रैल 1940 को पैदा हुई वंगारी मथाई ने एक छोटा सा एनजीओ स्थापित करके पूरी दुनिया को पर्यावरण बचाने का जो संदेश दिया, वह अद्भुत है। केन्या पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक देश है। मथाई ने अमेरिका और कीनिया में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी।वंगारी माथाई ने 1964 में कंसास के एटचिसन स्थित माउंट सेंट स्कोलास्टिका कॉलेज से जीव विज्ञान में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने 1966 में पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय से मास्टर आॅफ साइंस की डिग्री हासिल की। उन्होंने जर्मनी और नैरोबी विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट की पढ़ाई की और 1971 में नैरोबी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की, जहाँ उन्होंने पशु चिकित्सा शरीर रचना विज्ञान भी पढ़ाया था।
मथाई जब बड़ी हुईं तो उन्होंने पाया कि केन्या में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। उन्हें याद आया कि उनके गांवों में हर ओर हरियाली थी। गांव के किनारे घने जंगल थे जिनमें विभिन्न प्रकार के जीव जंतु रहते थे। नदियों का पानी बहुत साफ सुथरा रहता था। जिसका उपयोग लोग पीने में करते थे। खेतों में हर समय हरियाली रहती थी। लेकिन अब वह सब बीती बातें हो चुकी थीं।
जंगल कटते जा रहे थे, नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा था। खेतों में भी हरियाली बहुत कम हो गई थी। इससे मथाई को बहुत कष्ट हुआ। उन्होंने 1970 में ग्रीन बेल्ट आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने कीनिया की महिलाओं को इससे जोड़ा और धीरे-धीरे पूरे देश में यह आंदोलन फैल गया। सन 2004 में मथाई को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अगले साल इन्हें जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार प्रदान किया गया। सांसद और कीनिया सरकार में मंत्री रहीं मथाई का 26 सितंबर 2011 को नैरोबी में उनका निधन हो गया।






