अशोक मिश्र
दो दिन पहले ही हरियाणा में लिंगानुपात सुधरने की खबर आई थी। यह उपलब्धि खुश करने वाली थी, लेकिन इसके साथ ही साथ चिंताजनक बात यह है कि महिलाओं में पोषण की कमी के कारण कमजोर बच्चे पैदा हो रहे हैं। फरीदाबाद के बीके (बादशाह खान) अस्पताल के नीकू वार्ड में हर महीने पहुंचने वाले बच्चों में बहुत सारे बच्चे शारीरिक रूप से कमजोर पाए जा रहे हैं। इसका कारण गर्भवती महिलाओं में पोषण की कमी माना जा रहा है।बीके अस्पताल में हर हफ्ते सात से दस बच्चों का जन्म होता है। इनमें से तीन-चार बच्चे कमजोर पैदा होते हैं। इन कमजोर बच्चों को बाद में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिशुओं में कम वजन, सांस लेने में दिक्कत, खून की कमी, कुछ अंगों का सही से विकास न होना जैसी समस्याएं अब तो आम हो चली हैं। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि यदि गर्भवती स्त्री को ठीक ढंग से पोषण न मिले, तो उसका गर्भस्थ शिशु कमजोर रह सकता है क्योंकि शिशु को पोषण उसकी मां के माध्यम से ही मिलता है।
अब अगर मां ही कमजोर होगी, तो गर्भस्थ शिशु कैसे हष्ट-पुष्ट हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को सही पोषण न मिल पाने का सबसे पहला कारण उनकी गरीबी है। परिवार की आय कम होने की वजह से उनकी अनिवार्य जरूरतें भी पूरी नहीं हो पाती हैं। सामान्य दिनों में भी महिलाओं और लड़कियों को भर पेट भोजन नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में यदि महिला गर्भवती हो जाए, तो हालात और बिगड़ जाते हैं। यह भी सच है कि राज्य सरकार आंगनबाड़ी, एएनएम और आशा वर्कर्स के जरिये गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार देने का प्रयास करती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने गर्भवती महिलाओं महीने में तीन दिन 9, 10, 23 और माह के अंतिम दिन गुड़ और चना बांटने का फैसला किया है। गुड़ और चना शरीर में रक्त आपूर्ति का बेहतरीन माध्यम माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गुड़ और चना वितरण का फैसला लिया है। इसके बावजूद राज्य में गर्भवती महिलाएं एनीमिया और पौष्टिक आहार की कमी से जूझती हुई मिल जाती हैं। गरीबी, भुखमरी और कुपोषण जैसे तमाम कारणों से देश की आधी आबादी यानी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित पाई जाती हैं।
गर्भवती महिलाओं के मामले में यह आंकड़ा कुछ और बढ़ जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि पांच में से एक गर्भवती महिला खून की कमी का शिकार होती है। यह कोई अच्छी स्थिति नहीं है। गर्भवस्था के दौरान पोषण युक्त भोजन करने की सलाह सरकारी अस्पतालों में अपनी जांच कराने आने वाली गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर और नर्सें देती रहती हैं, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इस बात पर ध्यान ही नहीं देती हैं। बाद में जब परेशानी होती है, तो पछताती हैं।










