Tuesday, February 3, 2026

सन्त च्वांगत्सु ने खोपड़ी से मांगी क्षमा


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

लोगों को अपनी संपत्ति, अपने ओहदे और वैभव को लेकर बड़ा घमंड होता है। लेकिन वह नहीं जानते हैं कि यह सब कुछ इस जीवन भर के लिए है। मरने के बाद अमीर, अहंकारी, सदगुणी, गरीब सबकी गति एक जैसी होती है। मरने के बाद कुछ भी काम नहीं आता है। इस संबंध में चीन की एक रोचक कथा है। सन्त च्वांगत्सु चीन के लोकप्रिय संतों में माने जाते थे। 

एक बार की बात है। वह शाही मरघट की ओर से कहीं जा रहे थे। अंधेरी रात में उनका पैर एक खोपड़ी से टकराया। उन्होंने अंधेरे में टटोलकर देखा, तो वह उस खोपड़ी को अपने घर ले आए। उस खोपड़ी को अपने घर के दरवाजे पर रखकर उससे क्षमा मांगने लगे। उन्होंने कहा, मुझसे भूल हो गई। कृपया मुझे माफ करें। मेरा पैर आपकी खोपड़ी से गलती से टकरा गया था। 

अंधेरी रात होने की वजह से मुझे आपकी खोपड़ी नहीं दिखाई दी। सन्त च्वांगत्सु को ऐसा करते देखकर गांव के लोग जमा हो गए। उन्होंने सन्त च्वांगत्सु से कहा कि तुम पागल तो नहीं हो गए हो। इस खोपड़ी से क्षमा क्यों मांग रहे हो? सन्त च्वांगत्सु  ने कहा कि पागल मैं नहीं, तुम सब लोग हो गए हो। यह तो गनीमत है कि यह मर चुका है। यदि यह जिंदा होता और मेरा पैर इसकी खोपड़ी से लगा होता, तो न जाने यह मेरे साथ कैसा व्यवहार करता। जिस राजा की यह खोपड़ी है, उसने अपने जीवन में न जाने कितने लोगों को मौत की सजा दी होगी। 

इसी खोपड़ी में वह सारे विचार आए होंगे। इसी खोपड़ी की वजह से राजा जीवन भर अहंकारी रहा। लेकिन आज समय का फेर देखो कि इसकी खोपड़ी एक फकीर के ठोकर को सहने के लिए मजबूर है। आदमी को किसी तरह का अहंकार नहीं पालना चाहिए।

No comments:

Post a Comment