बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
इतिहास में पढ़ाया जाता है कि 20 मई 1498 को पहला यूरोपीय नाविक वास्को डी गामा केरल के कोझीकोड जिले के कालीकट पहुंचा था। वह 8 जुलाई 1497 को पुर्तगाल से भारत की खोज में निकला था। भारतीय सभ्यता और अपार धन संपदा की कहानियां यूरोप में काफी प्रचलित थीं। यही वजह है कि यूरोप के लोग भारत में काफी रुचि रखते थे। लेकिन वास्को डी गामा की इस खोज की आधारशिला जिस व्यक्ति ने रखी थी, वह था पुर्तगाल के शासक जान प्रथम और उनकी पत्नी फिलिप्पा का तीसरा पुत्र हेनरी।राजकुमार हेनरी को बचपन से ही समुद्री यात्रा और मानचित्रण में गहरी रुचि थी। उसने नाविकों, मानचित्रणकारों और नावों पर यात्रा करने वाले लोगों को संगठित भी किया था। उन्होंने सेउटा पर कब्जा करने के बाद तय किया कि वह समुद्री मार्ग से दक्षिण अफ्रीका के तटीय क्षेत्रों पर अपना प्रभुत्व कायम करेंगे। हेनरी ने अफ्रीका के तटीय क्षेत्र का अन्वेषण शुरू किया, जिसका अधिकांश भाग यूरोपीय लोगों के लिए अज्ञात था।
उनके उद्देश्यों में पश्चिम अफ्रीकी स्वर्ण व्यापार के स्रोत और प्रेस्टर जॉन के पौराणिक ईसाई साम्राज्य का पता लगाना तथा पुर्तगाली तट पर समुद्री डाकुओं के हमलों को रोकना शामिल था। उस समय यूरोप के अधिकतर नाविक समुद्री यात्रा से बहुत डरते थे। लेकिन हेनरी ने अपनी कुछ समुद्री यात्राओं से नाविकों को प्रभावित किया। उनका मानना था कि ज्ञान और साहस से समुद्र पर विजय पाई जा सकती है।
इसके बाद समुद्री यात्राओं से नए नए देशों को खोजने का मार्ग प्रशस्त हुआ। हेनरी की मृत्यु 13 नवंबर 1406 को हुई थी, उन्हें शुरू में लागोस के सेंट मैरी चर्च में दफनाया गया था, बाद में उन्हें बटलहा मठ में ले जाया गया, जहाँ उनकी कब्र अभी मौजूद है।

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