Thursday, January 8, 2026

कड़ाके की ठंडक और प्रदूषित हवा लोगों को बना रही बीमार

अशोक मिश्र

पूरा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पाला गिरने की वजह से जहां फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका पैदा हो गई है, वहीं लोगों की भी परेशानियां बढ़ रही हैं। पशुओं को भी कड़ाके की ठंड का प्रकोप झेलना पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते जाड़े के दिनों में कमी तो आई ही है, लेकिन ठंड की भयावहता बढ़ गई है। तीन-चार दशक पहले दशहरा पर्व से ही हलका जाड़ा पड़ना शुरू हो जाता था। तब ऐसे जाड़े को गुलाबी जाड़ा कहा जाता था। 

दीपावली तक आते-आते लोगों को फुल स्वेटर तक पहनना पड़ जाता था। हलका फुलका जाड़ा दिसंबर के पहले पखवाड़े तक पड़ता था और दिसंबर और जनवरी में तापमान नौ दस तक आ जाता था। इसके बाद धीरे-धीरे जाड़ा विदा होने लगता था। कुल मिलाकर तीन-साढ़े तीन महीने तक जाड़ा पड़ता था। ग्लोबल वार्मिंग के चलते अब नवंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर जनवरी तक जाड़ा पड़ता है। जाड़े के दिन कम जरूर हुए, लेकिन जाड़े की प्रचंडता काफी बढ़ गई है। 

आज  कल जब जाड़ा पड़ता है, तो हड्डी तक कंपा जाता है। इन दिनों हरियाणा में भी हड्डियों को कंपा देने वाला जाड़ा पड़ रहा है। कई इलाकों में धूप तो निकल रही है, लेकिन रात में हवा चलने और पाला गिरने से लोगों को कई तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है। ऐसी ठंडक में सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और बूढ़े हो रहे हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों और बूढ़ों के लिए भारी पड़ रही है। इन दिनों सर्दी बढ़ जाने की वजह से रूखी त्वचा, एक्जिमा, खुजली, जलन और लाल चकत्तों की शिकायत लेकर लोग सिविल अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीज बहुतायत में पाए जा रहे हैं। 

इसका कारण ठंडक के साथ-साथ हवा में घुला प्रदूषण है। ठंड और प्रदूषित हवा के चलते लोगों को फेफड़े से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। हार्ट अटैक की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा ठंडक के दिनों में बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्यादा सर्दी का पड़ना, कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। ऐसी स्थिति में इन रोगों के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। रूखी त्वचा ज्यादा सर्दी पड़ने और हवा के प्रदूषित होने से एक्जिमा का रूप ले लेती है। 

यह समस्या महिलाओं, बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों में अधिक दिखाई देती है। कुछ लोग सर्दी ज्यादा पड़ने पर हाथ-पैर की अंगुलियों में सूजन की समस्या को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। महिलाओं में यह दिक्कत ज्यादा देखने को मिल रही है क्योंकि उन्हें आमतौर पर पुरुषों की अपेक्षा ठंडे पानी के संपर्क में ज्यादा रहना पड़ता है। कपड़े धोने, बर्तन आदि मांजने जैसे तमाम काम ज्यादातर महिलाएं करती हैं, इस वजह से उनको ज्यादा परेशानी हो रही है।

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