बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
रंगभेद के खिलाफ नेल्सन मंडेलाने आजीवन संघर्ष किया। वह दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे। मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। मंडेला के पिता हेनरी म्वेजो कस्बे के जनजातीय सरदार थे। स्थानीय भाषा में सरदार के बेटे को मंडेला कहते हैं। नेल्सन मंडेला सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र गुट उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताये जहां उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था। घटना मंडेला के राष्ट्रपति बनने के बाद की है।
एक बार वह अपने मित्रों के साथ एक रेस्तरां में वह भोजन करने गए। रेस्तरां में पहुंचने के बाद वह अपनी सीट पर मित्रों के साथ बैठ गए। उन्होंने इधर-उधर नजर दौड़ाई, तो थोड़ी दूरी पर लगी सीट पर एक व्यक्ति बैठा नजर आया। मंडेला ने अपने सुरक्षा कर्मियों को बुलाया और उस व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए कहा कि जाकर उस व्यक्ति से कह दो कि वह आज हमारे साथ भोजन करे।
वह व्यक्ति मंडेला वाली टेबल पर आ गया। खाना परोसे जाने पर उसने कांपते हाथों से खाना खाया। उसके माथे पर बार-बार पसीना आ रहा था। वह चुपचाप खाता रहा और खाना खत्म होने पर चला गया। जब वह व्यक्ति चला गया, तो मंडेला के एक मित्र ने कहा कि शायद वह आदमी बीमार था। मंडेला ने कहा कि वह आदमी रॉबेन द्वीप के जेल का जेलर था। इस व्यक्ति ने 27 साल तक मुझ पर बहुत जुल्म ढाए थे। तब मित्रों ने कहा कि उसे सबक सिखाना चाहिए था। मंडेला ने कहा कि मेरा वैसा चरित्र नहीं है। मैंने उसे माफ कर दिया है। बदले की भावना से मैंने कभी कोई काम नहीं किया है।

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