Sunday, January 25, 2026

पचास तक गिनती न लिख पाने पर पिता ने बेटी को दी मौत की सजा

एआई तस्वीर

 अशोक मिश्र

पिता इतना क्रूर हो सकता है, यह किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक पिता जो अपनी संतान का पालन-पोषण करने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देता है। पिता अपनी संतान के लिए कई बार चोरी करने पर भी मजूबर हो जाता है। कई बार वह खुद भूखा रहता है, उसके कपड़े फटे रहते हैं, लेकिन वह अपनी संतान को अच्छे से अच्छा खिलाने और अच्छे से अच्छा कपड़ा पहनाने की कोशिश करता है। 

एक पिता अपने बेटे-बेटी को देश और समाज का सभ्य नागरिक बनाने का हरसंभव प्रयास करता है। लेकिन अफसोस है कि इस समाज में कुछ पिता ऐसे भी पाए जाते हैं, जो अपनी संतान को मौत के मुंह में ढकेल देते हैं। वह उनकी हत्या तक कर देते हैं और उन्हें कोई पश्चाताप नहीं होता है। फरीदाबाद के झाड़सेंतली गांव में किराये के मकान में रहने वाले एक पिता ने पीट-पीटकर केवल इसलिए मार डाला क्योंकि वह पचास तक गिनती नहीं लिख पाई थी। 

पिता ने अपनी चार साल की बेटी को पचास तक गिनती लिखने को कहा था। कई बार कहने के बाद भी वह सही गिनती नहीं लिख पाई। इससे क्रोधित पिता ने अपनी बेटी को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। बेटी को लेकर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पत्नी और डॉक्टर से उसने यही बताया कि बेटी सीढ़ियों से गिर गई थी, लेकिन जब पत्नी ने अपनी बेटी की पीठ पर चोट के निशान देखे, तो उसने पुलिस से शिकायत कर दी। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। 

दरअसल, लोग जब अपने बच्चे की उम्र और क्षमता का ध्यान न रखते हुए जरूरत के ज्यादा अपेक्षा कर लेते हैं, तब ऐसी घटनाएं घटित होती हैं। जिस बेटी को पिता ने पीट-पीटकर मार डाला, उस की आयु चार साल थी। चार साल की बच्ची अगर पचास तक गिनती नहीं लिख पाई,तो इसमें गलत क्या था? हर बच्चे की क्षमता अलग अलग होती है। बहुत सारे बच्चे तो ढाई-तीन साल में ही सौ तक गिनती लिख लेते हैं। यह उन बच्चों की क्षमता है, कोई बच्चा सात साल की उम्र में भी सौ तक गिनती नहीं लिख पाता, यह उस बच्चे की क्षमता है। 

जब हम अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने लगते हैं, तो वहीं गलत हो जाते हैं। हम यह भूल जाते हैं कि सभी बच्चों की क्षमता एक समान नहीं होती है। यही वजह है कि आज बच्चों में कुंठा और उग्रता बढ़ती जा रही है। जब उनके मां-बाप अपने बच्चे की तुलना दूसरों से करते हैं, उन्हें अकेला छोड़ देते हैं, उनकी भावनाओं का ख्याल नहीं रखते हैं, ऐसी स्थिति में बच्चा मन ही मन घुटता रहता है, उसमें कुंठा पैदा हो जाती है। वह उग्र होने लगता है। कई बार बच्चे तो वह काम कर बैठते हैं जिसे देश और समाज अपराध मानता है। बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए बहुत संयम और शांति दिमाग की जरूरत होती है।

No comments:

Post a Comment