Sunday, January 18, 2026

लावारिस पशुओं और कुत्तों के हमले की बढ़ रही घटनाएं

अशोक मिश्र

जैसे जैसे धरती गर्म होती जा रही है, वैसे वैसे कुत्तों सहित कुछ पशुओं में आक्रामकता बढ़ती जा रही है। सड़कों पर लावारिस घूम रहे पशु बेवजह आक्रामक हो रहे हैं। तीन साल पहले हार्वर्ड मेडिकल स्कूल ने 70 हजार डॉग बाइट्स मामलों का अध्ययन करने के बाद निष्कर्ष निकाला था कि जैसे-जैसे धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है, कुत्तों में आक्रामकता बढ़ती जा रही है। निकट भविष्य में इसके कम होने के आसार नहीं हैं। गर्म, प्रदूषित और अधिक धूप वाले दिनों में डॉग बाइट्स की घटनाएं बढ़ जाती हैं। अत्यधिक गर्मी कुत्तों के शरीर का तापमान बढ़ा देती है जिसकी वजह से वह चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं। 

गर्मी के कारण कुत्तों में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे वे असामान्य व्यवहार करने लगते हैं, जैसे कि बेवजह भौंकना, काटना या आक्रामक होना। यही अन्य पशुओं के साथ भी होता है। ऐसी स्थिति में डॉग बाइट्स यानी कुत्तों के काटने की घटनाएं गर्मी के दिनों में बढ़ जाती हैं। कुत्तों से लोगों को होने वाली परेशानी और काटने की घटनाओं में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर सुप्रीमकोर्ट भी काफी चिंतित है। उसने उन लोगों को फटकार भी लगाई है जिन्होंने सड़कों से कुत्तों को हटाने और शेल्टर हाउसों में भेजने का विरोध किया है। 

कोर्ट ने तो सार्वजनिक तौर पर कुत्तों को खिलाने के मामले में भी कड़ी टिप्पणी की है। पिछले कुछ महीनों से यह मुद्दा देश में काफी गरमाया हुआ है। हरियाणा सरकार ने भी लावारिस पशुओं और कुत्तों के हमले से होने वाली मौतों का काफी गंभीरता से लिया है। पशुओं और कुत्तों के हमले से होने वाली मौत के लिए सरकार ने पांच लाख रुपये मुआवजा तय किया है। इसके लिए सरकार ने हर जिले में उपायुक्त के नेतृत्व में नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और लोकनिर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है जो ऐसे मामलों पर निगाह रखेगी और त्वरित कार्रवाई करेगी। दयालु 2 योजना के तहत पांच विभागों को एक मंच पर लाकर उन्हें समाधान की दिशा में सक्रिय कर दिया है। 

अब कुत्ते के काटने पर नब्बे दिनों के भीतर आनलाइन आवेदन करना होगा। सरकार उम्र के हिसाब से मुआवजा देगी। नवजात से लेकर चालीस साल की आयु के व्यक्ति की पशु या कुत्तों के हमले से मौत होती है, उसके परिजनों को पांच लाख रुपये तक मुआवजा दिया जाएगा। घायल होने पर उम्र के हिसाब से ही मुआवजा दिया जाएगा। वैसे सरकार के मामले में यह योजना पीड़ित परिवार को थोड़ा सा आर्थिक सहयोग तो देगी, लेकिन सरकार को चाहिए कि वह ऐसी घटनाओं को न्यूनतम करने का हर संभव प्रयास करे। इसके लिए जो भी संभव उपाय किए जा सकते हैं, वह करने चाहिए। मुआवजा देना समस्या का समाधान नहीं, थोड़ी राहत प्रदान करना है।

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