अशोक मिश्र
पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में कमी आ रही है। इसमें सरकार का सख्त रवैया, पुलिस प्रशासन की सक्रियता और लोगों में अपराध होने पर शिकायत दर्ज कराने को लेकर जागरूकता जिम्मेदार है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आंकड़े संतोषजनक हैं। महिलाओं के साथ होने वाले अपराध में और भी कमी आनी चाहिए। सबसे ज्यादा सख्ती तो महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाले दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले बरतनी होगी क्योंकि दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले किसी भी महिला और बच्ची को जीवन भर दुख देते हैं।शरीर पर लगा घाव तो कुछ दिनों या महीनों में भर जाता है, लेकिन मन पर लगे घाव की पीड़ा उम्र भर सालती रहती है। किसी महिला या बच्ची के साथ किया गया दुष्कर्म दुनिया का सबसे जघन्यतम अपराध माना जाना चाहिए। आरोप सिद्ध होने पर दोषी को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। अक्टूबर महीने में कालेज से लौट रही एक छात्रा से आटो चालक ने दुष्कर्म किया था। उसका आरोपी अब जाकर गिरफ्तार किया गया है। दो दिन पहले ही फरीदाबाद में ही एक नाबालिग सहित दो खिलाड़ियों के साथ उनके कोच ने यौन उत्पीड़न किया। कोच ने यौन उत्पीड़न के दौरान खिलाड़ी को धमकी देते हुए कहा था कि यदि किसी को बताया तो जान से मार दूंगा।
नाबालिग खिलाड़ी काफी दिनों तक सदमे में रही। उसके बाद उसने अपनी मां को जानकारी दी, तब मामले का खुलासा हुआ। दरअसल सबसे बड़ी दिक्कत पुलिस के सामने यही है। अपने खिलाफ होने वाले अपराध की जानकारी पुलिस को देने में महिलाएं लापरवाही करती हैं। कई बार समाज में अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए महिलाएं चुप रह जाना बेहतर समझती हैं। इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। देर से पुलिस के पास शिकायत लेकर जाने का नुकसान यह होता है कि कई बार तो मौके का फायदा उठाकर अपराधी सारे सबूत मिटा चुका होता है। महिलाओं के शरीर पर लगने वाली चोट भी ठीक हो चुकी होती है।
यदि मामला तुरंत पुलिस के पास पहुंच जाए, तो पुलिस तुरंत डॉक्टरी कराएगी जो एक पुख्ता सबूत होगा। हरियाणा में दुष्कर्म की घटनाएं कम हो रही हैं, यह बात सही है, लेकिन बहुत सारे मामले तो पुलिस तक पहुंचते ही नहीं हैं। या तो समाज में बदनामी के डर से पीड़िता चुप रहती है या फिर अपराधी इतना डरा-धमका देते हैं कि वह अपनी जान बचाने के लिए चुप ही रह जाती हैं। एक आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2023 में हरियाणा में दुष्कर्म की कुल 1772 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 18 से 30 की उम्र की 1105 पीड़िताएं शामिल थीं। 30 से 45 साल की 606 महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी और 60 साल से ऊपर की छह महिलाओं का यौन शोषण किया गया।
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