Wednesday, January 21, 2026

व्यापारी की चारों बहुओं में होने लगा झगड़ा

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जहां आपसी प्रेम होता है, वहां सुख-समृद्धि अपने आ जाती है। कलह की वजह से परिवार बिखर जाते हैं। वहीं प्रेम बिखरे परिवार को भी जोड़कर एक कर देता है। किसी नगर में एक सेठ रहता था। उसने जीवन भर कठिन मेहनत करके काफी संपत्ति जोड़ ली थी। 

वह नगर का सबसे बड़ा व्यापारी था। वह लोगों से बहुत अच्छे से बात करता था। समय पड़ने पर लोगों की छोटी-मोटी सहायता भी किया करता था। उसके चार बेटे थे। जब यह बेटे जवान हो गए, तो सेठ ने अपने चारों बेटों का विवाह करा दिया। बेटों का विवाह करने के बाद कुछ दिनों तक सभी बड़े प्रेम से रहे, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद बहुओं में झगड़ा होने लगा। घर की कलह धीरे-धीरे बढ़ती गई। चारों बहुएं एक दूसरे को देखना तक नहीं चाहती थीं। 

पारिवारिक कलह से सेठ भी परेशान रहने लगा। एक दिन जब वह रात को सो रहा था कि उसने सपने में देखा कि एक सुंदर स्त्री उसके घर से जा रही है। उसने पूछा कि तुम कौन हो? उस स्त्री ने जवाब दिया कि मैं लक्ष्मी हूं। अब तुम्हारे घर में नहीं रह सकती हूं क्योंकि जहां कलह और आपसी ईर्ष्या द्वेष होता है, वहां मैं नहीं रहती हूं। लेकिन तुम अच्छे और गुणवान व्यक्ति हो, मैं तुमसे प्रसन्न हूं। तुम एक वरदान मांग सकते हो। 

व्यापारी ने कहा कि मुझे यही वरदान दीजिए कि मेरे परिवार के सारे लोग मिलजुलकर रहें। तथास्तु कहकर लक्ष्मी उसके घर से चली गईं। कुछ दिन बाद उसने देखा कि लक्ष्मी दोबारा उसके घर में प्रवेश कर रही हैं। नगर सेठ ने जब उनसे लौटने का कारण पूछा, तो लक्ष्मी ने कहा कि अब जब सब लोग मिलकर रहने लगे हैं, तो मैं फिर से लौट आई हूं। जहां लोग प्रेम से रहते हैं, लक्ष्मी वहीं रहती है।

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