Sunday, January 18, 2026

तुम किस बात की माफी मांग रहे हो


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अगर कोई इंसान अपनी कमियों को ताकत बना ले, तो वह असंभव काम को भी संभव बना सकता है। बस, उसे अपनी कमी का भान होना चाहिए और उस कमी को ताकत बनाने की प्रबल इच्छा होनी चाहिए। इस संदर्भ में एक बहुत ही रोचक कथा है। किसी गांव में किसान रहता था। वह अपने घर से कुछ दूर स्थित नदी से पानी लाता था। इसके लिए उसके पास दो घड़े थे। 

पानी भरने के बाद वह दोनों घड़ों को एक मजबूत डंडे से दोनों ओर बांध लेता था और डंडे को कंधे पर लेकर घर जाता था। मजे की बात यह है कि उनमें से एक घड़े में हलकी सी दरार थी जिसकी वजह से घर पहुंचते-पहुंचते उस घड़े में आधा पानी ही रह जाता था। इस बात से साबुत घड़े को अपने ऊपर बहुत घमंड था। दरार वाला घड़ा अपनी इस कमी पर शर्मिंदा भी रहता था। 

एक दिन दरार वाले घड़े ने किसान से कहा कि मुझे माफ कर दीजिए। किसान ने आश्चर्य से पूछा कि तुम किस बात के लिए माफी मांग रहे हो। घड़े ने कहा कि मुझमें हल्की सी एक दरार है जिसकी वजह से मैं पिछले दो साल से आधा पानी ही घर तक पहुंचा पा रहा हूं। यह सुनकर किसान ने कहा कि कल तुम नदी से आते समय अपनी ओर के रास्ते को ध्यान से देखना।
अगले दिन घड़े ने देखा कि जिस ओर उसका पानी गिरता था, उधर काफी सुंदर-सुंदर फूल खिले हुए हैं। किसान ने कहा कि तुममें हल्की सी दरार है, यह मैं पहले से ही जानता था। इसलिए रास्ते में मैंने फूलों के बीज बो दिए थे। तुमने रोज इनकी सिंचाई की, तो यह उग आए और अब फूल भी देने लगे हैं जिससे मैं कम से कम पूजा तो कर पाता हूं। कमी तो हर किसी में होती है। तुम्हारी कमी को मैंने उपयोगी बना दिया।

No comments:

Post a Comment