अशोक मिश्रहरियाणा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। वायु प्रदूषण की वजह से लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। सर्दियों में घना कोहरा और धुआँ लोगों को बीमार बना रहा है। हरियाणा का भूगर्भ जल तक प्रदूषित हो चुका है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला रासायनिक कचरा नदियों और नालों के माध्यम से भूगर्भ जल में मिलता जा रहा है। सरकार भले ही इन कल कारखानों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहती हो, लेकिन कोई न कोई रास्ता अख्तियार करके कल-कारखानों के कर्ताधर्ता बच जाते हैं।
फैक्ट्रियों और छोटे-छोटे उद्योगों से निकला कचरा सीधे नालों के माध्यम से नदियों तक पहुंच रहा है। हरियाणा से निकलने वाली नदियां यमुना और घग्गर नदियां प्रदूषित हो चुकी हैं। औद्योगिक कचरे का बहाव, बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज, प्लास्टिक कचरा और खेती से निकलने वाला गंदा पानी जैसे कारणों से ही यमुना नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित हुई है। अभी हाल में हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन बोर्ड ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि फरीदाबाद से होकर गुजरने वाली बुढ़िया और गौंछी नाले यमुना को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहे हैं। इन नालों से बिना ट्रीटमेंट किए बहने वाला पानी यमुना नदी को जहरीला बना रहा है।
इनका पानी बिना ट्रीट मेंट किए सीधे यमुना नदी में डाला जा रहा है जिससे यमुना नदी के जल का उपयोग करने वाले लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हरियाणा के आठ जिलों में बहने वाले 11 नाले यमुना नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। जहां इन नालों का मिलन यमुना नदी से होता है, वहां आक्सीजन का लेबल शून्य हो जाता है। यमुना नदी के प्रदूषित होने का सबसे ज्यादा प्रभाव पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ रहा है। जब पानी में बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड का स्तर बढ़ता है, तो पानी से आक्सीजन खत्म होने लगती है। इसका परिणाम यह होता है कि ऐसे पानी में रहने वाले जीव जंतु मरने लगते हैं।
मछलियां, कछुए और अन्य जलचर बीओडी बढ़ने की वजह से सांस नहीं ले पाते हैं। इससे इन जीवों का प्रजनन तंत्र प्रभावित होता है और इनकी प्रजनन क्षमता नष्ट हो जाती है। प्रदूषित पानी में पनपने वाले सूक्ष्म जीव-जंतु जैसे काई आदि को जब यह मछलियां खाती हैं, तो जहर इनके शरीर में जमा हो जाता है। इन मछलियां का उपयोग करने वाले इंसान कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। बगुले इन मछलियों का खाने के कुछ दिनों बाद मर जाते हैं। हरियाणा में यमुना और घग्गर नदी सबसे ज्यादा प्रदूषित है।
काफी प्रयास करने के बाद भी यमुना और घग्गर को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सका है। इसमें सबसे बड़ी बाधा हैं वे उद्योग जो अपने अपशिष्ट को संशोधित नहीं करते हैं। अपने उद्योगों से निकला अपशिष्ट यमुना या घग्गर में सीधा प्रवाहित कर रहे हैं जिसकी वजह से इन नदियों के पानी को साफ करने के लिए लगे अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ईटीपी) विफल हो रहे हैं

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