अशोक मिश्रहरियाणा में बजट सत्र की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर प्री बजट तैयारियां कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न जिलों में बैठकें करके आम जनता से बजट के लिए सुझाव मांगे हैं। इन बैठक में शामिल न होने वाले लोग भी 31 जनवरी तक अपने सुझाव सरकार को भेज सकते हैं। अगर सरकार को लोगों के सुझाव पसंद आए या जनहित में लगे, तो उन्हें बजट में शामिल किया जा सकता है। पिछले काफी दिनों से वह प्रदेश के उद्यमियों से कारोबार से जुड़ी समस्याओं को जानने का प्रयास कर रहे हैं। वह यह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किन प्रावधानों से उनको कारोबार में दिक्कत हो रही है?
ऐसी कौन से व्यवस्था बनाई जाए जिससे उन्हें कारोबार करने में आसानी हो। उद्योगपति भी अपनी समस्याओं और सहूलियतों के बारे में बता रहे हैं। मुख्यमंत्री का विचार विमर्श केवल उद्योगपतियों तक ही सीमित नहीं है। वह किसानों, मजदूरों, महिलाओं और बच्चों तक से बजट के संबंध में राय लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह जानना चाहते हैं कि पिछली बार जो बजट पेश किया गया था, उसमें कौन सी कमियां रह गई थीं। पिछले बजट में किए गए कौन-कौन से वायदे पूरे हुए और कौन से वायदे पूरे होने से रह गए।
अगर रह गए, तो उनकी पीछे कारण क्या थे? यह सब कुछ जानने के बाद नया बजट बनाने में काफी सहूलियत होगी। अभी तक जो जानकारियां सामने आई हैं, उनके मुताबिक सीएम सैनी इस बार का बजट हरियाणा विजन@2047 को समर्पित हो सकता है। बजट में किसान, उद्योगपति, छोटे कारोबारी, असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, महिलाओं, विद्यार्थियों जैसे आमजन को समर्पित किया जा सकता है। प्री बजट के दौरान सीएम सैनी कई बार कह चुके हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 2047 में भारत को विकसित बनाने का संकल्प लिया है। हम सभी इस दिशा में सामूहिक प्रयास करे और देश व हरियाणा को विकसित बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग दो रास्ते नहीं बल्कि दो पहिए हैं, जो विकसित भारत और विकसित हरियाणा बनाने का सपना पूरा करेंगे।
यह बात सही है कि हरियाणा में बड़े-बड़े उद्योगों की आवश्यकता है। यह उद्योग ही प्रदेश के लोगों की अर्थव्यवस्था को सुधार सकते हैं। प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। बड़े उद्योग लगने से जहां बेरोजगारी कम होगी, वहीं लोगों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे उद्योग की भी बहुत आवश्यकता है। छोटे और मध्यम उद्योग जहां अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, वहीं रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बजट में अगर छोटे, लघु और मध्यम उद्योगों पर ध्यान दिया जाए, तो हरियाणा की वर्तमान तस्वीर बदल सकती है।

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