Friday, January 9, 2026

बाल विवाह रोकने के लिए लोगों का जागरूक होना बहुत जरूरी

अशोक मिश्र

भारत सरकार ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चला रखा है। देश के सभी राज्यों में लोगों को बाल विवाह के संबंध में जागरूक करने के लिए अभियान चलाया है। कई राज्यों में इसके बेहद सकारात्मक परिणाम आए हैं। हरियाणा में भी यह अभियान बड़े जोर-शोर से चलाया जा रहा है। बुधवार को फरीदाबाद में कई जगहों पर जिला प्रशासन की पहल पर विभिन्न कालोनियों, मंदिरों और मस्जिदों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। 

इन कार्यक्रमों में काफी संख्या में स्त्री, पुरुषों ने भाग लिया जिसमें स्त्रियों की संख्या ज्यादा बताई गई है। ऐसे कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में विभिन्न अवसरों पर चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद बाल विवाह मुक्त हरियाणा नहीं बन पाया है। हर साल कुछ घटनाएं जरूरत प्रकाश में आ जाती हैं। बाल विवाह रोकने के लिए कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं और सरकार को ऐसे विवाह होने की सूचना मिलती है, तो ऐसे विवाह को तुरंत रोकने का प्रयास किया जाता है। 

कई मामलों में तो दोनों पक्षों को समझा बुझाकर इस बात के लिए राजी किया जाता है कि जब लड़का और लड़की बालिग हो जाएंगे, तब इनका विवाह कराया जाएगा। कई मामले ऐसे भी सामने आ चुके हैं, जब लड़की या लड़के वाले बाल विवाह रोकने को राजी नहीं होते हैं, तब उन्हें कानून का भय दिखाया जाता है, उनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। कुछ लोग मान जाते हैं, कुछ मामलों में मजबूरीवश दोनों पक्षों या एक पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी है। कई बार तो लड़की ने खुद पुलिस या स्वयंसेवी संस्थाओं से संपर्ककर बाल विवाह रोकने की गुहार लगाई है। 

ऐसी लड़कियां शाबाशी और पुरस्कार की हकदार हैं। दरअसल, हमारे देश में बाल विवाह की परंपरा सदियों पुरानी है। किसी न किसी रूप में दुनिया के हर देश में बाल विवाह की परंपरा लागू रही है। तब समाज में बाल विवाह से होने वाले नुकसान के बारे में लोग जागरूक नहीं हुआ करते थे। बाल विवाह के कारण लड़कियों को आजीवन जो परेशानियां होती हैं, उसके बारे में परिचित नहीं थे। कुछ देशों में बाल विवाह को धार्मिक चोला पहनाकर जायज बना दिया गया था। कुछ देशों ने ऐसे मामलों में सफलता हासिल कर ली है और उनके यहां बाल विवाह पूरी तरह से प्रतिबंधित हो गया है। 

हमारे देश में भी धीरे-धीरे यह परंपरा दम तोड़ती नजर आ रही है। इसके बावजूद कुछ राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जारी है। हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्यों में अक्षय तृतीया को विवाह करने की प्रथा रही है। इस दिन विवाह करने के लिए किसी शुभ घड़ी का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती है। हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में बहुत कम संख्या में लोग अपनी नाबालिग बेटी या बेटे का विवाह कर देना, शुभ मानते हैं। ऐसे अवसर पर राज्य की संस्थाएं सतर्करहती हैं और बाल विवाह रोकने का भरसक प्रयाकस करती है।

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