Wednesday, January 28, 2026

मूर्ख किसान! तू दिशाशूल की ओर जा रहा है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जो व्यक्ति अपने कर्म पर विश्वास करता है, वह भाग्य के भरोसे नहीं रहता है। कर्मशील व्यक्ति के लिए हर दिन एक समान होते हैं। वह किसी भी दिन को बेहतर या खराब नहीं समझता था। महाराज वसुसेना को ज्योतिष पर बहुत ज्यादा भरोसा था। उनके राज ज्योतिषी ने उन्हें ज्योतिष के मामले में इतना ज्यादा उलझा दिया था कि वह हर काम में मुहूर्त और शुभ समय का ध्यान रखने लगे। 

जब उनका राज ज्योतिषी बताता कि महाराज, यह समझ अनुकूल नहीं है, तो वह उस समय में वह काम कतई नहीं करते थे। जब उनकी इस कमजोरी का पता पड़ोसी राज्य के राजाओं को चला तो वह ऐसे अवसर की फिराक में रहने लगे कि जब राजा राज्य में न हो या ज्योतिष के हिसाब से राजा के लिए अनुकूल न हो। एक दिन की बात है। राजा वसुसेना अपने राज ज्योतिषी के साथ नगर के बाहर निकले। 

राज ज्योतिषी ने देखा कि एक किसान अपने हल बैल के साथ खेत जोतने जा रहा था। राज ज्योतिषी ने अपना पांडित्य प्रदर्शन करने के लिए उस किसान से कहा, अरे मूर्ख! तू जिस दिशा में जा रहा है, उस  ओर आज दिशाशूल है। तेरा सर्वनाश हो जाएगा। उस किसान ने अपने बैलों को रोकने के बाद पसीना पोछते हुए कहा, पंडित जी, मैं रोज इसी दिशा में आता-जाता हूं। हो सकता है कि किसी दिन दिशाशूल हो। अगर ऐसा हो, तो मेरा अब तक सर्वनाश हो जाना चाहिए था। लेकिन नहीं हुआ। 

ज्योतिषी ने कहा कि अपने हाथ दिखा। किसान ने उल्टा हाथ उसके सामने कर दिया। ज्योतिषी ने कहा कि हाथ सीधे करो। किसान ने कहा कि मैंने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। हाथ वह फैलाते हैं जो किसी से कुछ मांगते हैं। मेरे लिए तो साल का हर दिन पवित्र है। यह सुनकर राजा वसुसेना की आंख खुल गई। इसके बाद उनका समय लोगों की भलाई में बीतने लगा।

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