अशोक मिश्र
कोई भी व्यक्ति जैसा जीवन जीता है, उसके विचार भी वैसे ही होते हैं। यदि कोई व्यक्ति सादगी से रहता है, तो उसके विचार भी सादगीपूर्ण होंगे। विलासिता में जीवन बिताने वाले को सादगी भरा व्यवहार पसंद ही नहीं आएगा। इस बात को साबित करता है महाभारत का एक प्रसंग। कौरव और पांडवों के गुरु थे द्रोण। गुरु द्रोण अपने समय के सबसे बड़े अस्त्र-शस्त्र के ज्ञाता और धर्म प्रवीण थे।यही वजह है कि उन्होंने राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए नियुक्त किया गया था। गुरु द्रोण के सभी शिष्य मन लगाकर शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। शिक्षा देते हुए कई वर्ष बीत गए थे। एक बार गुरु द्रोण के मन में आया कि राजकुमारों की परीक्षा ली जाए कि उन्होंने मेरी शिक्षाओं को कितना ग्रहण किया है। उन्होंने सभी राजकुमारों को बुलाया और दुर्योधन से कहा कि तुम पूरी पृथ्वी में एक अच्छे आदमी को खोजकर लाओ। दुर्योधन चला गया। उसने अपने राज्य में सब जगह तलाशा लेकिन उसे कोई भी अच्छा आदमी नहीं मिला।
कुछ दिनों बाद दुर्योधन ने लौटकर बताया कि उसने सब जगह खोज लिया, उसे कोई अच्छा आदमी नहीं मिला। तब द्रोण ने युधिष्ठिर को बुलाया और कहा कि तुम किसी एक बुरे आदमी को खोज लाओ। यह सुनकर युधिष्ठिर भी चले गए। काफी दिनों बाद वह भी खाली हाथ लौटकर आए। गुरु द्रोण के सामने सिर झुकाकर बोले, गुरुजी! मुझे कोई बुरा आदमी नहीं मिला।
तब सभी शिष्यों ने पूछा कि गुरुजी! ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों को एक आदमी नहीं मिला। तब द्रोण ने कहा कि जो आदमी जैसा होता है, उसको पूरी दुनिया में हर आदमी वैसा ही दिखाई देता है। यही वजह है कि दोनों को एक आदमी नहीं मिला।

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