अशोक मिश्रअरावली पर्वतमाला का जलवायु संतुलन गड़बड़ा रहा है। इसका कारण अरावली क्षेत्र में दिनोंदिन बढ़ता अतिक्रमण, वनों की अवैध कटाई, अवैध खनन और शहरी संरचना का बढ़ता क्षेत्रफल माना जा रहा है। अरावली के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर सांकला फाउंडेशन में शोध किया है। इस शोध में भारत में डेनमार्कदूतावास और हरियाणा राज्य वन विभाग की भी भागीदारी रही।
इस शोध के नतीजे काफी चिंताजनक और चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध खनन, वनों की कटाई और अरावली के इर्द-गिर्द किए गए पक्के निर्माणों ने भूजल रिचार्ज, जैव विविधता, वायु गुणवत्ता और जलवायु संतुलन पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला है जिसकी वजह से अरावली पर्वत माला के पारिस्थितिक तंत्र बुरा असर डाला है। अरावली पर असर डालने वाले कारकों पर यदि रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
यह सच है कि चार राज्यों गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के 29 जिलों में फैली अरावली पर्वतमाला को पिछले कई दशकों से नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अवैध खनन, वनों की कटाई की वजह से चार राज्यों का फेफड़ा कहे जाने वाले अरावली पर्वत को भारी नुकसान पहुंचा है। अरावली पहले की तुलना में वाटर रिचार्ज अब बहुत कम कर पा रहा है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बने दरार और घना वन क्षेत्र जल संग्रहण का सबसे बड़ा जरिया हुआ करते थे, लेकिन अब पहले की तुलना में बहुत कम वाटर रिचार्ज हो रहा है।
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले पंद्रह साल में खनन माफिया ने आठ से दस किमी क्षेत्र में पूरी पहाड़ी को ही वीरान कर दिया। 2023 के दौरान राजस्थान में किए एक अध्ययन के मुताबिक 1975 से 2019 के बीच अरावली की करीब आठ फीसदी पहाड़ियां गायब हो गईं। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि अगर अवैध खनन और शहरीकरण ऐसे ही बढ़ता रहा तो 2059 तक यह नुकसान 22 फीसदी पर पहुंच जाएगा। नूंह के नहरिका, चित्तौड़ा और रावा आदि गांवों में मौजूद पहाड़ियों से आठ करोड़ मीट्रिक टन से ज्यादा खनन सामग्री गायब हो चुकी है। इससे हरियाणा को करीब 22 अरब रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
यह तो अच्छा हुआ कि सुप्रीमकोर्ट ने पिछले दिनों अपने ही सौ मीटर वाले फैसले के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, वरना ऐसी आशंका थी कि इससे अवैध खनन और वनों की कटाई और तेज हो जाती। सौ मीटर से कम ऊंचे पर्वत को अरावली क्षेत्र न मानने से खनन माफिया और वन माफिया आधे से ज्यादा अरावली क्षेत्र को तबाह कर देते। इसी आशंका के चलते चारों राज्यों में बड़े पैमाने पर लोग उठ खड़े हुए और उन्होंने सुप्रीमकोर्ट के फैसले का विरोध किया। सुप्रीमकोर्ट ने भी अपने ही फैसले पर रोक लगाकर एक सराहनीय कदम उठाया है।

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