अशोक मिश्रसाइबर ठगी के मामले हरियाणा में बढ़ते जा रहे हैं। लोगों की जीवन भर की कमाई को साइबर ठग तकनीक का दुरुपयोग करके पल भर में उड़ा देते हैं। इस तरह की घटनाएं जिसके साथ होती हैं, वह टूट जाता है। किसी ने जीवन भर पैसे-पैसे जोड़कर रखा था कि बेटी का विवाह करें, लेकिन साइबर ठग पल भर में उनके सपनों को चकनाचूर कर देते हैं। घर में किसी परिजन की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए जुटाए गए पैसे को जब साइबर ठग चुरा लेते हैं, तो जिसके बैंकखाते से रकम चुराई गई होती है, वह असहाय हो जाता है।
बुढ़ापे के लिए बचाकर रखी गई रकम जब बैंकखाते से चोरी हो जाती है, तो लगता है कि जैसे आंखों के सामने अंधेरा छा गया हो। पीड़ित व्यक्ति समझ नहीं पाता है कि अब उसका बुढ़ापा कैसे कटेगा। वह कहां जाएगा और उसकी इस अवस्था में मदद कौन करेगा। साइबर ठगों को इससे कुछ लेना देना नहीं होता है। एक दिन पहले ही साइबर ठगों ने दो लोगों के फोन हैक करके 1.54 लाख रुपये उड़ा लिए। पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत तो दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक पुलिस साइबर ठगों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। बल्लभगढ़ की चावला कालोनी में एक व्यक्ति अपनी चतुराई से साइबर ठगों का शिकार होते होते रह गया, नहीं तो उसे कितने रुपये की चपत लगती, अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।
दरअसल, चावला कालोनी में रहने वाले एक दुकानदार के पास फोन आया कि वह एटीएस हेडक्वार्टर से बात कर रहा है। उसे उनके मोबाइल नंबर के खिलाफ जांच का आदेश मिला है। इसके बाद दुकानदार से तमाम जानकारियां मांगी गईं। दुकानदार को आभास हो गया कि यह फ्राड काल है। उसने पुलिस कमिश्नर के पास जाने की धमकी दी, तब जाकर उसका पिंड छूटा।
हालांकि दुकानदार ने पुलिस से इस मामले में शिकायत दर्ज करा दी है। सच बात तो यह है कि साइबर ठगों के चंगुल में ज्यादातर वही लोग फंसते हैं जो कम पैसे लगाकर ज्यादा कमाने के चक्कर में लगे रहते हैं। साइबर ठग इसी लालच का फायदा उठाते हैं। कुछ साइबर ठग तो पुलिस, सीबीआई, एनआईए जैसी एजेंसियों का सदस्य या अधिकारी बनकर लोगों को पहले डराते हैं। फिर समझौता करने के नाम पर मोटी रकम वसूल लेते हैं। उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लेते हैं।
पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इनका शिकार ज्यादातर वह लोग होते हैं, जो अमीर होते हैं और बुढ़ापे की ओर अग्रसर होते हैं। ऐसे लोगों को सरकारी संस्थाओं का नाम लेकर डराना आसान होता है। जब साइबर ठग या डिजिटल अरेस्ट करने वाले किसी को अपना टारगेट चुनते हैं, तो पहले वह अपने टारगेट के बारे में पूरी जानकारी जुटाते हैं। वह ऐसे लोगों को ज्यादा चुनते हैं जो एकाकी जीवन जी रहे हैं या उनके बच्चे बाहर रहते हैं।

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