अशोक मिश्रवृक्ष न केवल पर्यावरण को साफ सुथरा रखते हैं, वायु प्रदूषण को खत्म करते हैं, बल्कि पृथ्वी में जल संग्रहण में भी सहायक होते हैं। नदियों और नहरों के किनारे उगे पेड़ पौधे भूमि का कटाव भी बाढ़ के दिनों में रोकते हैं। वृक्ष मानव जीवन के लिए एक वरदान की तरह हैं, लेकिन इंसान इस वरदान को अभिशाप में बदलने की हठधर्मिता पाले हुए है। देश और विभिन्न प्रदेशों में अवैध पेड़-पौधों की कटान ने हमारी सांसों को कठिन कर दिया है। वायु प्रदूषण के चलते हर साल लगभग सत्रह लाख लोगों की मौत हो जाती है। हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या इन दिनों प्रदूषण ही है।
पिछले कई दशक से दिल्ली एनसीआर के इलाके भीषण वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। ऐसी स्थिति में यदि सरकारी नियमों और अधिकारियों की लापरवाही के चलते वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचता है, तो इसे प्रदेशवासियों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा। चंडीगढ़ में सेक्टर छह में कामर्शियल क्षेत्र विकसित करने के लिए 12 हजार वृक्षों की बलि दी जाने वाली है। हालांकि इसका मामले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। लेकिन मामले की जानकारी मिलने हाईकोर्ट ने काफी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि क्या आप लोग नहीं चाहते हैं कि आपके बेटे-बेटियां या पोते-पोतियां जीवित रहें।
हाईकोर्ट ने तत्काल 12 हजार पेड़ों की कटान पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया है। दरअसल मामला यह है कि चंडीगढ़ के सेक्टर छह में 23 साल पहले कामर्शियल क्षेत्र विकसित करने के लिए सन 2002 में भूमि अधिग्रहण किया गया था। इतने साल बीतने के बाद भी सेक्टर छह में वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित नहीं किया, तो प्राकृतिक रूप से वहां पर 12 हजार पेड़ उग आए। यह पेड़ करीब 21-22 साल पुराने और पूर्ण विकसित हैं। स्वाभाविक रूप से उगे इन पेड़ों को वन संरक्षण अधिनियम 1980 और हरियाणा सरकार की 18 अगस्त 2025 को जारी की गई अधिसूचना के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वन क्षेत्र की परिभाषा के अंतर्गत भी आता है।
इस वजह से इन पेड़ों को काटा नहीं जा सकता है। यही वजह है कि स्थानीय लोगो, पर्यावरणविद और प्रकृति प्रेमी वहां पेड़ों को काट करके वाणिज्यिक क्षेत्र विकसित करने का विरोध कर रहे हैं। वैसे भी केंद्र सरकार की अनुमति के बिना एक भी पेड़ काटा नहीं जा सकता है। सुप्रीमकोर्ट ने भी वन क्षेत्र की भूमिको व्यावसायिक क्षेत्र में बदलने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।
अफसोस की बात यह है कि 19 जनवरी से यहां पर कटान जारी थी। वन माफिया ने अरावली क्षेत्र के पेड़ पौधों को काट करके खाली कर दिया है। अरावली के वन क्षेत्र को वन माफियाओं ने बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इसका खामियाजा प्रदूषण के रूप में दिल्ली-एनसीआर को भुगतना पड़ रहा है।
No comments:
Post a Comment