Sunday, January 11, 2026

जापानी कवि इगुचि की दयालुता


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जापान में एक कवि हुए हैं इगुचि। यह सचमुच पैदा हुए थे या जापान की लोककथाओं में किसी लेखक द्वारा पैदा किए गए एक पात्र हैं, यह नहीं मालूम है। जापानी साहित्य में वह एक पात्र के रूप में जाने जाते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि वह एक दार्शनिक,कवि और गरीबों की मदद करने वाले थे। वह अपने पास से पैसे खर्च करके लोगों की मदद किया करते थे। 

कहा जाता है कि वह बहुत ही मनमौजी स्वभाव के थे। लोगों को हंसाने और किसी भी बात की चिंता करने के लिए वह बहुत प्रसिद्ध थे। एक बार की बात है। एक आदमी अपनी गरीबी से बहुत परेशान था। तीन-चार दिन से उसके परिवार ने खाना नहीं खाया था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करे। जब उसे कुछ नहीं सूझा, तो उसने तय किया कि वह आत्महत्या कर लेगा। 

आत्महत्या करने के लिए वह एक जगह गया। वह आत्महत्या करने ही वाला था कि उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा। उसने घूमकर देखा कि एक व्यक्ति पीछे खड़ा मुस्कुरा रहा है। वह कवि इगुचि थे। इगुचि ने कहा कि आत्महत्या करने के लिए यह अनमोल जीवन नहीं मिला है। उस व्यक्ति ने इगुचि को अपनी सारी पीड़ा बताई। यह भी बताया कि उसके परिवार को तीन दिन से खाना नहीं मिला है। यह सुनकर इगुचि बहुत द्रवित हुए। उन्होंने उस व्यक्ति मदद की और उसे मरने से बचा लिया। 

इसके बाद उन्होंने नगर में एक गुप्तदान की पेटी रख दिया। पेटी पर लिख दिया कि जो सचमुच जरूरत मंद हो वह इसमें से नि:संकोच पैसे निकाल कर अपना काम चला सकता है। जो कोई जरूरतमंद ऐसा करेगा, मुझे बहुत खुशी होगी। इसके बाद पूरे जापान में कवि इगुचि प्रसिद्ध हो गए।

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