अशोक मिश्रएक ओर जहां हरियाणा जल की कमी से जूझ रहा है, वहीं राज्य में पेयजल की गुणवत्ता काफी खराब हो चुकी है। पानी में रसायन घुल जाने की वजह से कई तरह की घातक बीमारियां फैल रही हैं। हालात कितने खराब हो चुके हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 3489 गांवों में पानी पीने लायक नहीं रहा है। यदि पानी ही प्रदूषित और विषैला होगा, तो स्वास्थ्य समस्याओं का जन्म लेना निश्चित है।
जल में घातक रसायन घुले होने की वजह से लोगों में कैंसर, त्वचा, हृदय रोग और मधुमेह सहित कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। प्रदेश के 20 जिलों के 136 गांव भूजल में फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा पाई गई है जिसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो रही हैं। जनस्वास्थ्य एवं आपूर्ति विभाग या अन्य स्रोतों द्वारा सप्लाई किया जा रहा पेयजल हो या फिर भूमिगत जल, निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में मौजूद रसायनिक पदार्थ इसे जहरीला बना रहे हैं। जल संसाधन, कृषि एवं भूजल विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक संगठन केंद्रीय भूजल बोर्ड की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक न हो।
विभिन्न स्थानों पर फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक और यूरेनियम के साथ ही ईसी (विद्युत चालकता) की अत्यधिक मात्रा चिंताजनक है। भूजल में अपशिष्ट पदार्थों का मिश्रण बढ़ने से ब्लड प्रेशर, पथरी, दिमागी कमजोरी, शरीर में दर्द, पेट के रोग, पीलिया की शिकायतें बढ़ी हैं। यह स्थिति काफी बड़े संकट की ओर इशारा कर रही है। यदि हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो पूरा प्रदेश गंभीर बीमारियों की चपेट में होगा। इसके लिए सबसे पहले कृषि क्षेत्र में उपयोग किए जा रहे रासायनिक उर्वरकों पर रोक लगानी होगी। किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा ताकि मिट्टी में कम से कम रसायन घुले।
अधिक उपज लेने के लिए किसान बिना सोचे समझे हर साल रासायनिक उर्वरकों की मात्रा बढ़ाते जा रहे हैं। इससे न केवल पैदा किए गए अनाज में रसायन घुल रहा है, बल्कि मिट्टी के जरिये भारी मात्रा में रसायन पानी में घुल रहा है। इसी पानी का उपयोग लोग अपने दैनिक जीवन में कर रहे हैं और किसान फसलों की सिंचाई में कर रहा है। किसानों के साथ-साथ प्रदेश में चलने वाले छोटे-बड़े उद्योग भी राज्य के पानी को दूषित करने के लिए जिम्मेदार हैं। उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक कचरा बिना संशोधित किए सीधे नदियों और नालों में डाला जा रहा है। इससे नदियां प्रदूषित हो रही हैं।
बहुत सारे उद्योग अपने यहां पैदा होने वाले अपशिष्टों को गड्ढा खोदकर जमीन में दबा देते हैं। धीरे-धीरे अपशिष्टों में मौजूद रसायन और कचरा जमीन के नीचे मौजूद जल में मिल जाता है। बाद जब इसका उपयोग किया जाता है, तो यह इंसानों और पशुओं के लिए काफी खतरनाक साबित होता है। यदि राज्य के लोगों को साफ पानी उपलब्ध नहीं कराया गया,तो निकट भविष्य में प्रदेश में तमाम घातक रोग महामारी की तरह फैलेंगे।


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