Friday, January 23, 2026

जिम हेंसन की रोती, हंसती, गाती कठपुतलियां


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

यदि कल्पनाशील व्यक्ति चाहे, तो अपनी लगन, हिम्मत और कला के सहारे समाज में काफी बदलाव ला सकता है। आज की यह रंग-बिरंगी दुनिया कल्पनाओं का ही परिणाम है। कल्पना जब साकार होती है, तो वह बदलाव लाती है। मनोरंजन और टेलिविजन की दुनिया में ऐसा ही बदलाव लाए थे जिम हेंसन। जिम हेंसन का जन्म अमेरिका के मिसिसिपी में 24 सितंबर 1934 को हुआ था। 

वह सबसे अधिक प्रसिद्ध अमेरिकी कठपुतली कलाकार थे। उन्होंने कल्पना के सहारे अपने पात्रों को इतना जीवंत बना दिया कि लोग उसे एक पात्र की जगह अपना दोस्त मानने लगे थे। कहा जाता है कि जब वह बच्चे थे, तो वह सामान्य बच्चों की तरह खेलते कूदते नहीं थे। वह कपड़ों की कतरन, धागा, सुई लेकर कुछ न कुछ बनाते रहते थे। वह किसी तरह स्कूली शिक्षा पूरी करके कालेज पहुंचे, तो उन्होंने सैम एंड फ्रेंड्स नाम से छोटा सा कठपुतली शो बनाया। 

भारतीय कठपुतलियों की तरह हेंसन की कठपुतलियां भी रोती थीं, गाती थीं, हंसती थी और अपने भावों को व्यक्त करती थीं। भारत की कठपुतलियां ऐतिहासिक और पौराणिक पात्रों का अभिनय करती थीं, लेकिन अमेरिका में कठपुतलियां तब तक वर्तमान समय के हिसाब से ही बन रही थीं। अमेरिकी टीवी नेटवर्क्स ने उनके शो द मपेट शो को यह कहकर नकार दिया कि यह न बच्चों का शो है और न बड़ों का। 

इससे निराश होकर हेंसन ब्रिटेन आए और ब्रिटिश टीवी चैनल्स ने उन्हें हाथों हाथ लिया। इसके बाद इनका यह शो पूरी दुनिया में छा गया। अब अमेरिका वालों को उनके शो की अहमियत समझ में आई। अपने कठपुतली पात्रों से दुनियाभर में नाम कमाने वाले इस महान कलाकार की 16 मई 1990 में मौत हो गई।

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