Wednesday, June 3, 2026

अरावली क्षेत्र में चेकडैम बनाकर रोका जा सकता है बरसाती पानी

अशोक मिश्र

अरावली क्षेत्र को बचाने की मुहिम काफी दिनों से चलाई जा रही है। अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन और पेड़ों की कटाई की वजह से बरसात के दिनों में पानी बहकर नालों और नदियों में बह जाता है। पहले अरावली पर्वत पर उगे पेड़-पौधे और पहाड़ों में पड़ी दरारें बरसाती पानी को सोखकर इलाके को रिचार्ज करती रहती थीं। लेकिन जैसे-जैसे पेड़ों की कटान होती गई और छोटी-छोटी पहाड़ियों को अवैध रूप से खनन करके मिटाया गया भूमि का रिचार्ज होना बंद हो गया। 

ऐसी स्थिति में अरावली क्षेत्र में बरसाती पानी के सरंक्षण के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने बहुत अच्छी योजना बनाई है। उसने बुढ़िया नाले पर छोटे बांध बनाकर जल का प्रबंधन करने की योजना तैयार की है। बुढ़िया नाले में चेक डैम बनाने से पहले उसका विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद चेकडैम बनाने की योजना तैयार की जाएगी। यह कदम अरावली क्षेत्र में जल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। पूरे अरावली क्षेत्र में आने वाले गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, चरखीदादरी, नारनौल और रेवाड़ी जैसे शहरों में लगातार भू-जल दोहन के चलते भू जल स्तर बहुत अधिक नीचे चला गया है। 

कई दशक पहले तक इन शहरों के भू जल स्तर को अरावली की पहाड़ियां रिचार्ज करती थीं, लेकिन जैसे-जैसे पहाड़ियां अवैध खनन और पेड़ों की अवैध कटाई की वजह से बरबाद होती गईं, भूमि का रिचार्ज होना कम होता गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली पर्वतमाला में प्रतिवर्ष होने वाली वर्षा का एक तिहाई हिस्सा अवशोषित करने की क्षमता है। पहाड़ियों से वर्षा जल का 10-12 प्रतिशत हिस्सा बहकर निकल जाता है। पहाड़ियों से बहकर निकला यह पानी आसपास के इलाकों के लिए भूजल पुनर्भरण का काम करता है। 

अरावली पर्वतमाला से बहने वाले वर्षा जल को अवशोषित करने और वाष्पीकरण के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए, ढलान वाले इलाकों से बहने वाले पानी को संग्रहित करने के लिए वर्षा जल संरचनाएं बनाई जाती हैं। हरियाणा उन क्षेत्रों में आता है जहां भूजल का स्तर बहुत तेजी से घट रहा है। इन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए लगभग 60-70 लाख रुपये की औसत लागत से लगभग 300 जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए। 

अरावली क्षेत्र में हर साल बह जाने वाले पानी को यदि चेकडैम के जरिये रोका जाए, तो इससे न केवल भूजल स्तर में सुधार हो सकता है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में जल की उपलब्धता भी बढ़ाई जा सकती है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की यही करने की योजना है। यदि इस योजना को गुरुग्राम,रेवाड़ी, नूंह, नारनौल जैसे जिलों में लागू किया जाए, तो बरसात के दिनों में बह जाने वाले पानी के एक बड़े हिस्से को संरक्षित किया जा सकता है।

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