Monday, June 1, 2026

निरंतर बहते और चलते रहना ही जीवन

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हार और जीत जीवन के दो पहलू हैं। दोनों का समान रूप से स्वागत करना चाहिए। हारने पर निराश होकर बैठ जाना कतई उचित नहीं है, लेकिन सफलता मिलने पर इतराना और घमंड करना भी गलत है। एक बार की बात है। एक लड़का हाई स्कूल की परीक्षा में फेल हो गया। 

फेल होने पर उसके सहपाठियों ने उसका खूब मजाक उड़ाया। स्कूल से जब वह घर लौटा तो बहुत हताश था। साथियों का उपहास उड़ाना उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। इसके चलते वह भारी तनाव में आ गया। उसके पिता ने जब उसकी हालत देखी तो समझाया कि बेटा! जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं। ऐसी परिस्थितियों से विचलित होकर जो हताश हो जाते हैं, वह जीवन में कुछ नहीं कर पाते हैं। 

तुम फेल होने पर इतने दुखी मत हो। विफलता सिखाती है कि जीवन में कैसे सफल हुआ जाए। इसलिए तुम परेशान होने की जगह नए जोश के साथ जुट जाओ और अगली परीक्षा में सफल होकर दिखाओ। लेकिन इतने से भी लड़के को संतोष नहीं हुआ। एक दिन आत्महत्या करने के इरादे से घर से निकल गया। रास्ते में उसे एक बौद्ध मंदिर दिखाई पड़ा जिसके अंदर से आवाज आ रही थी। 

वह उत्सुकतावश मंदिर के अंदर गया। मंदिर में एक भिक्षुक कह रहा था कि पानी गंदा क्यों नहीं होता है, क्योंकि वह बहता रहता है। पानी की बूंदें झरने से निकलकर नदी में, नदी से महानदी में और महानदी से समुद्र में मिल जाती हैं क्योंकि वह बहता रहता है। कोई भी बाधा पानी को नहीं रोक पाती है क्योंकि पानी बहता रहता है। बहना और चलना ही जीवन है। 

यह सुनकर लड़के ने आत्महत्या का विचार त्याग दिया और मन में ठान लिया कि वह सफल होकर दिखाएगा। आगे चलकर वह एक बहुत प्रसिद्ध राजनेता बना।

महामारी की तरह बढ़ता जा रहा महिलाओं-पुरुषों में मोटापा

अशोक मिश्र

हरियाणा में महिला और पुरुष दोनों मोटापे का शिकार हो रहे हैं। अभी हाल में ही जारी की गई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की छठी रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, वह चिंताजनक है। प्रदेश की हर तीसरी किशोरी और महिला तथा हर चौथा पुरुष और किशोर का वजन तयशुदा पैमाने से अधिक है। सन 2019 से 21 में जहां 15 से 49 साल के आयुवर्ग में हरियाणा में करीब 33.1 प्रतिशत महिलाएं मोटापे की शिकार थीं, तो वहीं अब 37.3 प्रतिशत महिलाएं मोटापे की समस्या से जूझ रही हैं।

यही हाल हरियाणा के पुरुषों का है। राज्य के 33.9 प्रतिशत पुरुष मोटापे की मार से त्रस्त हैं। पुरुषों और महिलाओं में मोटापा बढ़ने का कारण मधुमेह और रक्तचाप जैसी बीमारी है। माना जाता है कि रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों का कारण लोगों की बदलती जीवन शैली है। मोटापा, मधुमेह (डायबिटीज) और रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। सबसे पहला कारण तो यह है कि हरियाणा में जंकफूड का इस्तेमाल दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। 

जंकफूड का सेवन करने से शरीर और रक्तनलिकाओं में वसा का जमाव बढ़ता जा रहा है। इससे मोटापे के साथ-साथ रक्तचाप की समस्या बढ़ती जाती है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं और शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है। प्रदेश में जब जंकफूड का चलन नहीं था, तो लोग अपने घर में बना हुआ ताजा भोजन करते थे। इस भोजन में संतुलित तेल और घी का उपयोग किया जाता था। दूध-दही का सेवन भरपूर किया जाता था। 

संतुलित भोजन करने से स्त्री और पुरुष को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या नहीं होती थी। लोग चुस्त दुरुस्त रहते थे। वह दिनभर मेहनत करते थे। जिसकी वजह से शरीर में गया वसा खर्च हो जाता था। पुरुष बाहर मेहनत करता था, तो महिलाएं घर का काम करती थीं। लेकिन जैसे-जैसे समाज बदला, खान-पान बदल  गए। लोगों की दिनचर्या बदल गई। पहले जहां लोग सुबह उठकर सैर करने जाते थे। उसके बाद खेतों में, कार्य स्थल पर खूब कड़ी मेहनत करते थे। 

उसके बाद समय में मिला तो लोग विभिन्न तरह के खेलों में भाग लेते थे। इससे उनके शरीर में विषाक्त तत्व निकल जाते थे और शरीर भी अच्छा बना रहता था। महिलाएं भी घर बाहर के काम करते हुए खूब परिश्रम करती थीं। लेकिन जैसे ही दिनचर्या बदली, कई तरह की परेशानियों ने शरीर में घर कर लिया। सुबह उठने की जगह सूरज निकलने पर उठने और देर रात तक जागने की आदत ने शरीर को रोगी बना दिया। शारीरिक श्रम से तो जैसे पीछा ही छुड़ा लिया गया। अब अगर पांच सौ मीटर दूर चलना है, तो लोग स्कूटर, कार पर जाते हैं। पैदल चलने की आदत ही नहीं रही। हरियाणा में नशीले पदार्थ के सेवन ने हालात को और भी ज्यादा खराब कर दिया।