बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
जीवन का हर पल कीमती है और उसका उपयोग करना चाहिए। जीवन का कोई भरोसा नहीं है, पता नहीं कब मौत आ जाए। संसार में वही लोग सुखी रहते हैं, जो अपने जीवन को सहजता से जीते हैं। एक बार की बात है।किसी राज्य का राजा किसी बात पर अपने मंत्री से नाराज हो गया। वैसे मंत्री ने कोई बड़ा अपराध नहीं किया था, लेकिन राजा ने अपने सैनिकों को बुलाकर कहा कि आज शाम तक मंत्री को फांसी पर लटका दो। राजा को मंत्री की कोई बात हृदय में चुभ गई थी, इसीलिए वह मंत्री से नाराज हो गया था।
राजा की बात सुनकर सारे दरबारी चकित रह गए क्योंकि मंत्री ने कई बार अपने अमूल्य सुझावों से राजा को फायदा पहुंचाया था। लेकिन राजा का आदेश कोई भला कैसे टाल सकता था। सैनिक उस मंत्री के घर पहुंचे, तो मंत्री अपने रिश्तेदारों और परिवार वालों के साथ उत्सव मना रहा था। उस मंत्री का उस दिन जन्मदिन था। सैनिकों ने जब राजा का आदेश सुनाया, तो परिवार और रिश्तेदार दुखी हो गए। उत्सव मनाना रोक दिया गया।
तब मंत्री ने कहा कि फांसी तो शाम को लगनी है। तब तक का समय तो है न हमारे पास। तो फिर उत्सव बंद क्यों किया जाए। लोगों ने उत्सव मनाना शुरू कर दिया। लेकिन मन ही मन सारे लोग उदास थे। यह बात जब सैनिकों ने राजा को बताई तो राजा को बहुत आश्चर्य हुआ।
उन्होंने मंत्री को बुलाया, तो मंत्री ने कहा कि आपने शाम तक का समय दिया,यह आपकी कृपा है। ऐसी स्थिति में मैं बचा हुआ समय अपने परिवार के साथ बिताना चाहता हूं। मेरे लिए एक-एक पल बहुत कीमती है। जब मौत होनी ही है, तो क्यों न खुशी से मौत का स्वागत किया जाए। यह सुनकर राजा ने मंत्री की सजा को माफ कर दिया।
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