Friday, June 12, 2026

राजा, मकड़ी और जंगली मक्खी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इस संसार में कोई भी वस्तु या जीव बेकार नहीं है। प्रकृति ने हर जीव-जंतु में कोई न कोई गुण जरूर दिया है। हां, इंसान की नजर में किसी जीव का गुण उसके लिए अवगुण हो सकता है। इंसान अपने हिसाब से जीवों के गुण-अवगुण को निर्धारित करता है। एक समय की बात है। 

एक राजा के मन में यह बात आई कि पता किया जाए कि किस जीव-जंतु या वस्तु में कोई गुण नहीं है। उसने यह बात अपने दरबार में कही, तो उसके दरबारियों ने यह पता करने के लिए कुछ समय मांगा। कुछ दिन बीतने के बाद दरबारियों ने राजा को बताया कि इस संसार में जंगली मक्खी और मकड़ी की कोई उपयोगिता नहीं है। इन दोनों जीवों का इस संसार में रहना या न रहना, कोई मायने नहीं रखता है। 

तब राजा ने सोचा कि इन दोनों जीवों का अपने राज्य से समूल नाश करा दिया जाए। वह अपनी योजना को लागू कर पाता कि इससे पहले पड़ोसी राजा ने उस पर हमला कर दिया। पड़ोसी राजा काफी दिनों से हमले की तैयारी कर रहा था। उसकी सेना भी काफी बड़ी थी, तो लड़ाई में पड़ोसी राजा जीत गया। पराजित राजा को अपनी जान बचाने के लिए जंगल में छिपना पड़ा। 

एक दिन जब वह थककर एक पेड़ के नीचे सो रहा था, तभी उसकी नाक पर जंगली मक्खी ने काट लिया। राजा ने चौंक कर देखा कि दुश्मन राजा के सैनिक आ रहे हैं। वह भागकर एक गुफा में छिप गया। उसी समय एक मकड़ी ने आकर वहां जाला बुन दिया। जब सैनिक उस गुफा के नजदीक पहुंचे, तो उन्होंने जाले को देखकर यहां कोई नहीं छिपा हो सकता है। वह आगे बढ़ गए। यह देखकर राजा ने मन ही मन कहा कि इस दुनिया में कोई भी वस्तु या जीव बेकार नहीं है। आज उसकी जान भी इन्हीं दो जीवों की वजह से बची है।

No comments:

Post a Comment