Thursday, June 11, 2026

जहरीली गैसों से कब तक मरते रहेंगे सफाई कर्मचारी?

अशोक मिश्र

सरकार की ओर से रोक के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए बिना किसी सुरक्षा उपकरण के आज भी लोगों से काम लिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में काम करने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को ही फरीदाबाद के जीवन नगर में स्थित मेन पंपिंग स्टेशन के टैंक में उतरे दो ममेरे-फुफेरे भाइयों की मौत हो गई। यह दोनों भाई बिना सुरक्षा उपकरण लिए ही पंपिंग स्टेशन में सफाई करने उतरे थे। बिना सेफ्टी उपकरण सफाई करने उतरा आकाश गैस चढ़ने से बेहोश होकर टैंक में ही गिर गया। 

यह देखकर उसे बचाने के लिए अनमोल नीचे उतरा, तो उसकी भी गैस चढ़ने से मौत हो गई। आरोप है कि प्लांट से गंदे पानी से कचरा निकालने वाली मशीन काफी दिनों से खराब थी। इसके बारे में कई बार ठेकेदार से शिकायत की जा चुकी थी। लेकिन ठेकेदार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि दो लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन दोनों को बचाने के लिए नीचे उतरे तीसरे कर्मचारी की हालत गंभीर है। तीन घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और सीआरपीएफ ने शव को निकाला।

 हरियाणा में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुए हादसों में अब तक दर्जनों मजदूरों की जान जा चुकी है। संसद में इस संबंध में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच साल में 43 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है। वहीं गैर सरकारी आंकड़े 76 सफाईकर्मियों की मौत का दावा कर रहे हैं। पिछले साल मार्च महीने में गुरुग्राम में निमार्णाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दीवार गिरने से सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। हरियाणा सरकार ने सीवर की मैन्युअल (हाथ से) सफाई पर रोक लगा रखी है। 

इसके अतिरिक्त, दुर्घटनाओं को रोकने और मशीनीकृत सफाई (जेटिंग और सक्शन मशीनों) को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया लागू है। इसके बावजूद इस मामले में लापरवाही करते हैं। हर वर्ष प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से खबर आती है कि सीवर साफ करते समय जहरीली गैस से कई सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई। कुछ देर के लिए मीडिया में चर्चा होती है, प्रशासन दुख जताता है, नेता मुआवजे की घोषणा करते हैं और फिर मामला खत्म हो जाता है। 

लेकिन उन परिवारों के लिए जिंदगी कभी सामान्य नहीं होती। एक मजदूर की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों, बच्चों के भविष्य और घर की रोटी का अंत होती है। सबसे दुखद बात यह है कि इन मौतों को समाज ने लगभग सामान्य मान लिया है। जैसे यह कोई हादसा नहीं, बल्कि उनका तयशुदा भाग्य हो। सुरक्षा उपकरणों के बिना लोगों को जहरीले गटरों में उतार दिया जाता है। कई बार ठेकेदार और अधिकारी जानते हैं कि यह गैरकानूनी है, फिर भी यह सब जारी रहता है। 

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