Sunday, May 31, 2026

भक्ति से ज्यादा महत्व सेवा का है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

हमारे धर्म ग्रंथों में सेवा को भक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है। कहते हैं कि समाज में उस व्यक्ति को ज्यादा सम्मान प्राप्त होता है, जो सेवा करता है। भक्ति करने वाला भी सम्मान का अधिकारी होता है, लेकिन सेवक और भक्त दोनों एक साथ हों, तो स्वाभाविक है कि सेवक को ज्यादा मान मिलेगा। 

इस संबंध में एक कथा है। कहते हैं कि किसी देश के राजा के दरबार में एक व्यक्ति ने एक सवाल पूछा कि राजन! किसी मनुष्य के जीवन में भक्ति और सेवा में किसका महत्व ज्यादा है? राजा और उनके दरबारी इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए। राजा ने उस व्यक्ति से कहा कि आप मुझे कुछ दिन का समय दें, मैं विचार करके आपके सवाल का जवाब दूंगा। 

इस घटना को कुछ दिन बीत गए। एक दिन राजा अकेले ही घूमने के लिए निकल पड़ा। उसने अपने साथ किसी भी अंगरक्षक को नहीं लिया। संयोग से राजा रास्ता भटक गया। दिन भर भटकने के बाद उसे बहुत तेज प्यास लगी। तभी कुछ दूरी पर उसे एक संत की कुटिया दिखाई दी। वह किसी तरह वहां पहुंचा और ‘पानी-पानी’ कहते हुए राजा मुर्छित हो गया। संत ने उस समय समाधि लगा रखी थी। 

संत के कानों में ‘पानी-पानी’ की पुकार पड़ी तो उसकी समाधि टूट गई। संत ने तत्काल पानी लाकर राजा को पिलाया। राजा को जब होश  आया, तो उसे पता चला कि उसकी वजह से संत की समाधि भंग हो गई है। उसने कहा कि अब मुझे प्रायश्चित करना होगा। 

तब संत ने कहा कि आपको प्रायश्चित करने की जरूरत नहीं है। मुझे आपको पानी पिलाने के बाद जो संतुष्टि मिली, वह समाधि लगाने के बाद भी नहीं मिलती। भक्ति करने से ज्यादा महत्वपूर्ण सेवा करना है। यह सुनकर राजा को उस व्यक्ति के सवाल का जवाब मिल गया।

अस्पताल गेट पर होने वाला प्रसव नारी गरिमा के साथ खिलवाड़

अशोक मिश्र

प्रकृति ने संतान को जन्म देने और वंश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मादाओं को सौंपी है। हर मादा को प्रकृति द्वारा सौंपा गया यह गुरुतर दायित्व उसे महान बनाता है। प्रसव नर जीवों पर मादा द्वारा किया गया सबसे बड़ा एहसान है। विज्ञान कहता है कि जब कोई स्त्री बच्चे को जन्म देती है, तो उसे 57 डेल दर्द (दर्द मापक इकाई) होता है। यह दर्द एक साथ बीस हड्डियों के टूटने के बराबर माना गया गया है। ऐसी स्थिति में अगर किसी महिला को प्रसव के दौरान उचित चिकित्सा सुविधा न मिले, तो कल्पना की जा सकती है कि उसने कितनी पीड़ा सही होगी। 

फरीदाबाद के सेक्टर तीन के प्रजनन एवं स्वास्थ्य शिशु केंद्र में 15-16 मई की रात एक महिला को अस्पताल के पार्किंग में बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजन जब गर्भवती स्त्री को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, तो अस्पताल का गेट बंद था। पीड़ा बढ़ने पर मजबूरन स्त्री को प्रसव के लिए पार्किंग एरिया में ले जाना पड़ा और टार्च की रोशनी में उसकी सास ने प्रसव कराया। प्रसव होने के करीब आधे घंटे बाद स्टाफ नर्स और अन्य लोग पहुंचे। मां बनना हर स्त्री का सपना होता है। मातृत्व सुख से बढ़कर किसी स्त्री के लिए दूसरा कोई सुख नहीं होता है। 

ऐसी स्थिति में महिला को यदि पार्किंग के खुले वातावरण में प्रसव के लिए मजबूर होना पड़े, तो उसके लिए कितना कष्टकारक रहा होगा। उस स्त्री की गरिमा को तार-तार होना पड़ा। किसी भी लोकतांत्रिक देश में गर्भवती स्त्री को प्रसव के लिए तत्काल, सुरक्षित और गरिमापूर्ण चिकित्सा सुविधा उसका मानवीय अधिकार होता है। अस्पताल में कार्यरत नर्स और चिकित्सकों की लापरवाही के कारण महिला की गरिमा को क्षति पहुंची। अब मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को लेकर सीएमओ को  नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा है। 

हर बार की तरह इस मामले में भी कुछ दिन हो-हल्ला मचेगा, फिर सब कुछ शांत हो जाएगा, लेकिन जिस महिला को यह कष्ट झेलना पड़ा है, वह इस घटना को आजीवन नहीं भूल पाएगी। आमतौर पर देखा जाता है कि सरकारी अस्पतालों के बाहर प्रसव (डिलीवरी) होने और अव्यवस्था की स्थिति का मुख्य कारण रात के समय आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही, चिकित्सा स्टाफ की कमी और उचित समन्वय का अभाव है। रात के समय अस्पतालों के आपातकालीन वार्ड या लेबर रूम भी बंद पाए जाते हैं।

 ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर जल्दी से गेट भी नहीं खुलता है जिसकी वजह से कई बार महिला को गेट पर ही या अस्पताल परिसर में ही कहीं खुले में प्रसव के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई मामलों में मरीज को समय पर एम्बुलेंस तक नहीं मिल पाती है जिससे ऐसी स्थिति पैदा होती है। कई बार अंतिम समय में बड़े अस्पताल के लिए रेफर करने पर हालात विकट हो जाते हैं और अस्पताल आने-जाने के दौरान रास्ते में ही प्रसव हो जाता है।

Saturday, May 30, 2026

डॉ. दुर्गा चरण नाग ने की मजदूरी

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्यों में स्वामी विवेकानंद के साथ-साथ डॉ. दुर्गा चरण नाग गिने जाते हैं। स्वामी विवेकानंद तो संन्यासी थे, लेकिन डॉ. दुर्गा चरण नाग गृहस्थ थे। डॉ. नाग अपने समय के प्रसिद्ध चिकित्सक थे, लेकिन वह रहते बड़े सादगी से थे। उनकी वेशभूषा से लोग यह अंदाजा नहीं लगा पाते थे कि वह इतने बड़े चिकित्सक हैं। 

स्वामी विवेकानंद और डॉ. नाग एक दूसरे के मित्र भी थे। दोनों का मानना था कि धर्म को सिद्धांतों से निकालकर व्यावहारिक जीवन में अपनाया जाना चाहिए। एक बार की बात है। कोलकाता में डॉ. नाग साधारण कपड़ों में अपनी क्लीनिक की ओर पैदल जा रहे थे। ज्यादातर वह पैदल ही चलना पसंद करते थे। उनके क्लीनिक के रास्ते में एक व्यक्ति ने छत डालने के लिए एक मजदूर को बुला रखा था, लेकिन काफी देर के बाद भी वह नहीं आया था। 

उसे अपने घर की छत डालनी थी। उसने जब डॉ. नाग को उधर से गुजरते देखा, तो वह उनके पास गया और बोला, मुझे अपने घर की छत डालनी है। मैंने एक मजदूर को सहायता के लिए बुला रखा था, लेकिन अभी तक वह आया नहीं है। अगर जल्दी छत डालने का काम शुरू नहीं किया गया, तो काम पूरा होते-होते रात हो जाएगी। क्या आप हमारी मदद करेंगे। मैं आपको मजदूरी भी दूंगा। डॉ. नाग मान गए। दोपहर में संयोग से उस रास्ते से एक बड़ा व्यापारी गुजरा। 

उसने डॉ. नाग को एक मजदूर की तरह काम करते देखा, तो कहा कि अरे डॉक्टर साहब, आप यहां क्यों काम कर रहे हैं। डॉ. नाग ने कहा कि मेरा मित्र विवेकानंद कहता है कि धर्म को व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहिए। आज मौका मिला है, तो उसे क्यों गंवा दूं। 

व्यापारी की बात सुनकर मकान का मालिक बड़ा शर्मिंदा हुआ। उसने डॉ. नाग से माफी मांगी। डॉ. नाग ने कहा कि आपको माफी मांगने की जरूरत नहीं है। फिर पूरे दिन डॉ. नाग ने काम किया और मजदूरी भी नहीं ली।

नदियों में जल प्रवाह कम होने से संकट में जलबिजली परियोजनाएं


अशोक मिश्र

मई महीने में पूरे उत्तर भारत को प्रचंड गर्मी झेलनी पड़ी। भीषण गर्मी का प्रकोप झेलने वाले राज्यों में हरियाणा भी शामिल रहा। भीषण गर्मी की वजह से जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा, वहीं नदियों का जल प्रवाह भी बाधित हुआ। नदियों के कम होते प्रवाह और भूगर्भ जलस्तर कम होने से जहां लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा, वहीं हरियाणा की जलविद्युत योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। घटते भूजल स्तर और नदियों के कम होते प्रवाह से राज्य की कृषि, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली (हाइड्रो-इलेक्ट्रिक) परियोजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। 

यह संकट मानसूनी बरसात होने तक बने रहने के आसार हैं। नदियों के जल का प्रवाह कम होने से विद्युत उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिसकी वजह से बिजली कटौती यूएचबीवीएनएल, यूएचबीवीएनएल को मजबूर होना पड़ा है। भीषण गर्मी में हथिनीकुंड बैराज के जलस्तर में लगातार कमी होने का असर पनबिजली परियोजनाओं और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने लगा है। इसकी वजह से पनबिजली परियोजना की इकाइयों को रोक-रोक कर चलाना पड़ रहा है।

हरियाणा में मुख्य रूप से मैदानी इलाका होने के कारण बड़े जलविद्युत संयंत्रों की गुंजाइश बहुत कम है, इसलिए राज्य में मुख्य रूप से नहर आधारित और माइक्रो-हाइडल परियोजनाएं संचालित हैं। इनसे बड़ी मात्रा में विद्युत उत्पादन नहीं हो पाता है। पश्चिमी यमुना नहर पनबिजली परियोजना हरियाणा की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। इसे हरियाणा पावर जेनरेशन कॉपोर्रेशन लिमिटेड द्वारा चलाया जाता है। इसकी स्थापित क्षमता 62.7 मेगावाट है। काकरोई माइक्रो जलविद्युत परियोजना सोनीपत जिले के काकरोई गाँव में पश्चिमी यमुना नहर पर स्थित है जिसकी स्थापित क्षमता 400 किलोवाट है। 

हथिनीकुंड बैराज परियोजना यमुनानगर जिले में यमुना नदी पर स्थित है। यह बैराज सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ पनबिजली उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। हथिनीकुंड पर एक बड़ा बांध बनाने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में 250 मेगावाट से अधिक पनबिजली उत्पन्न होगी। इन इकाइयों को चलाने के लिए कई हजार क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है। इतना पानी नदियों में नहीं है। पानी की कमी के चलते परियोजनाओं को रोक-रोक कर चलाना पड़ रहा है। 

यही वजह है कि राज्य में बार-बार अघोषित और घोषित बिजली कट लगाने पड़ रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में सिंचाई के लिए पानी मिलने में कठिनाई हो सकती है। राज्य की सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बिजली की निर्भरता कम करने के लिए हरियाणा सरकार पीएम कुसुम योजना और सौर ऊर्जा संचालित सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं पर भी तेजी से काम कर रही है। संभव है निकट भविष्य में राज्य की जनता को जल संकट और बिजली संकट से निजात मिल जाए।

Friday, May 29, 2026

क्रांतिकारी निर्मलकांत ने किया शिकार

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

देश को आजाद कराने के लिए हजारों युवकों ने अपना बलिदान दिया। किसी ने अंग्रेजों की गोलियों का सामना किया, किसी ने फांसी का फंदा चूमा, तो किसी ने जेल में  अगणित यातनाएं सही। इतने बलिदान के बाद ही देश स्वतंत्र हुआ। बंगाल में स्वाधीनता संग्राम के दौरान जो क्रांतिकारी किसी कारणवश पकड़े जाते थे, उन पर अंग्रेज बहुत जुल्म ढाते थे। कोलकाता में ऐसा ही एक पुलिस इंस्पेक्टर था नृपेंद्र नाथ घोष। 

वह क्रांतिकारियों से बहुत घृणा करता था। इससे पहले क्रांतिकारी कोलकाता के हेड कांस्टेबल हरिपद डे को मौत के घाट उतार चुके थे। नृपेन्द्रनाथ को पता लग गया था कि क्रांतिकारी अब उसके पीछे पड़ गये हैं। वह बहुत भयभीत हो गया था। अब वह चौकन्ना हो गया था। तब क्रांतिकारी प्रतुल गांगुली, रवि सेन, निर्मल राय तथा निर्मलकांत राय ने तय किया कि थोड़े दिन बीतने दिया जाए। 

कुछ समय बीतने पर जब वह असावधान हो जाएगा, तब उसका शिकार करना ठीक रहेगा। 19 जनवरी, 1944 को हर दिन की तरह इंस्पेक्टर नृपेन्द्रनाथ ने अपना काम निबटाया। उसने अपने कार्यालय से निकलकर घर जाने के लिए ट्राम पकड़ी। ट्राम रात के पौने आठ बजे ग्रे स्ट्रीट और शोभा बाजार चौराहे पर रुकी। नृपेन्द्रनाथ आराम से उतरकर अपने घर की ओर चल दिया। 

क्रांतिकारी  निर्मलकांत राय उस दिन उसका पीछा कर रहे थे। वह नृपेन्द्रनाथ के सामने आए और एक गोली उसके सिर में दाग दी।  नृपेन्द्रनाथ धरती पर गिर पड़ा, तो निर्मलराय ने दूसरी गोली उसके सीने पर मारी। नृपेन्द्रनाथ की वहीं मृत्यु हो गयी। निर्मलकांत शोर मचाने लगे, कोई हमारे साहब को बचाओ, हत्यारे का पकड़ो। फिर वह भीड़ में स्वयं छिपाया और फरार हो गए। आगे चलकर पुलिस ने संदेह में एक निर्दोष युवक को पकड़ा, उसे मारा-पीटा, लेकिन सबूत न होने से छूट गया।

महिलाओं की सतर्कता अपराधों पर लगा सकती है अंकुश

अशोक मिश्र

हरियाणा पुलिस का दावा है कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ऐसा पुलिस विभाग द्वारा लागू की गई नीतियों के चलते हुआ है। वर्ष 2024 में जहां महिलाओं के खिलाफ होने वाले मामलों की संख्या 13,945 थी। वहीं, 2025 में यह घटकर 8,723 रह गई। पुलिस का आंकड़ा बताता है कि महिलाओं को राज्य में सुरक्षित माहौल मिल रहा है। राज्य में दुष्कर्म, अपहरण और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर अपराधों में लगातार गिरावट आई है। 

पुलिस ने महिला सुरक्षा को घर, कार्यस्थल, यात्रा और न्यायिक प्रक्रिया इन चार स्तरों पर मजबूत किया है। लेकिन आए दिन ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि राज्य में अभी पुलिस को थोड़ी और सतर्कता बरतने की जरूरत है। फरीदाबाद में ही दो युवकों ने कैमरे वाले चश्मे से सैलून चलाने वाली महिला की वीडियो बनाई और तस्वीरें खींची। फिर उसे मार्फ करके उस वीडियो और तस्वीरों को अश्लील बनाया और महिला को भेजकर दस हजार रुपये ठग लिए। 

दोनों युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक स्टिंग आपरेशन देखकर ऐसा कदम उठाया था। इस तरह की घटनाएं लगभग हर प्रदेश में हो रही हैं। हरियाणा में भी हो रही हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल, सोशल मीडिया पर कुछ शातिर किस्म के लड़के या आदमी महिलाओं से संपर्क करते हैं, फिर उससे दोस्ती गांठते हैं। फिर महिला की वीडियो और तस्वीरों को अश्लील बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है। महिलाओं को ब्लैकमेल करने की घटनाओं में हाल के वर्षों में डिजिटल माध्यमों और निजी संबंधों के दुरुपयोग के कारण वृद्धि देखी गई है। 

साइबर अपराध और व्यक्तिगत रंजिश के जरिए ब्लैकमेलिंग के मामले पुलिस और महिला आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। करीबी मित्र या प्रेमी द्वारा आपत्तिजनक वीडियो बनाकर महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। मई 2026 में पानीपत में एक महिला ने अपने प्रेमी द्वारा एक करोड़ रुपये की मांग और वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किए जाने के कारण आत्महत्या कर ली। इस तरह की घटनाओं को तब तक नहीं रोका जा सकता है, जब तक महिलाएं खुद सतर्क न हों। उनकी सतर्कता ही ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा सकती है। हरियाणा सरकार और पुलिस इन अपराधों को रोकने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। 

जहां भी संभव होता है, हरियाणा समय-समय पर स्कूलों, आफिसों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं और बच्चों को ऐसी स्थिति से बचने के लिए सुझाव देती है। उन्हें बचाव के तरीके सिखाते हैं। अपराध करने वाले अक्सर नाबालिगों को ऐसे कृत्यों में शामिल करते हैं क्योंकि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत उन्हें हल्की सजा मिलती है। नाबालिगों को कानून का भी पता नहीं होता है।

Thursday, May 28, 2026

बांस अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को अपने किए गए कार्यों का परिणाम हासिल करने के लिए धैर्य रखना चाहिए। कुछ काम ऐसे भी होते हैं जिनके परिणाम काफी देर से दिखाई देते हैं। इससे कुछ लोग निराश हो जाते हैं और काम करना छोड़ देते हैं। किसी नगर में एक व्यक्ति रहता था। 

उसने जीवन भर काफी प्रयास किया, लेकिन उसे अपने काम में सफलता नहीं मिली। वह इस बात से निराश हो गया। निराशा के क्षणों में उसने घर छोड़ दिया और एक जंगल में जाकर रहने लगा। उसने अपने को पूरी तरह नकारा आदमी मान लिया था। संयोग से कुछ दिनों बाद जंगल में ही रहने वाले एक साधु से उसकी मुलाकात हुई। उस आदमी ने साधु को सारी बात बताई और पूछा कि आप एक भी कारण बताएं जिससे हार न मानूं। 

साधु ने धैर्य पूर्वक उस निराश व्यक्ति की बात सुनी। साधु ने निराश व्यक्ति को सामने की ओर लगे दो पेड़ों की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम सामने उगे फर्न और बांस के पेड़ को देख रहे हो? उस व्यक्ति ने कहा कि हां, मैं देख रहा हूं। फर्न का पेड़ काफी छोटा है, लेकिन बांस का पेड़ काफी लंबा है। तब साधु ने कहा कि मैंने इन दोनों पेड़ों के बीज को आज से पांच साल पहले एक साथ ही बोया था। 

दोनों को खाद और पानी समय-समय पर देता रहा। फर्न का पौधा कुछ ही दिनों बाद जमीन फाड़कर ऊपर आ गया। लेकिन बांस से कोई पौधा नहीं फूटा। लेकिन मैं लगातार बांस के पौधे को पानी देता रहा। चार साल बाद बांस से अंकुर फूटा और एक साल में ही वह फर्न से भी बड़ा हो गया। 

निराश व्यक्ति ने कहा कि यह कैसे हो गया? तब साधु ने कहा कि बांस का बीज बोये जाने के बाद ही अंकुरित हो गया था, लेकिन वह जमीन के नीचे ही अपनी जड़ों को मजबूत कर रहा था। तुमने भी अब तक अपनी जड़ों को मजबूत किया है। हो सकता है कि अब तुम्हें सफलता मिल जाए। यह सुनकर निराश व्यक्ति समझ गया कि उसे क्या करना है?

पाक का हरियाणा में आतंक की नर्सरी तैयार करने का मनसूबा नाकाम


अशोक मिश्र

आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है। इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी भारत है क्योंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान अपने यहां आतंकी संगठनों को प्रश्रय देकर भार
त के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए उकसाता रहता है। वह अपने देश में आतंकियों को न केवल ट्रेनिंग देता है, बल्कि हथियार उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक मदद मदद भी प्रदान करता है। पाकिस्तान की सीमा से सटे होने की वजह से जम्मू-कश्मीर और पंजाब को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है। 

पंजाब का पड़ोसी राज्य होने की वजह से हरियाणा में भी छिटपुट आतंकी घटनाएं होती रहती हैं। यह भी सही है कि हरियाणा में सीधे तौर पर किसी स्थानीय या पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन की सक्रियता या मजबूत आधार देखने को नहीं मिला है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर में छिपे बैठे आतंकी भागकर जरूर हरियाणा में आते हैं, लेकिन राज्य पुलिस और खुफिया विभाग की अति सतर्कता की वजह से उन्हें अपने मनसूबों में किसी प्रकार की कामयाबी नहीं मिली है। 

हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, राज्य में जैश-ए-मोहम्मद (खीट) और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे प्रतिबंधित अंतरराष्ट्रीय और खालिस्तानी आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल और नेटवर्क समय-समय पर सक्रिय पाए गए हैं। एनआईए ने सिरसा महिला थाने पर 25 नवंबर 2025 को हुए ग्रेनेड हमले के बारे में पंचकूला स्थित एनआईए अदालत में मंगलवार को चार्ज शीट पेश किया है। चार्ज शीट से पता चलता है कि पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी हरियाणा में आतंकियों की नर्सरी तैयार करने का प्रयास कर रहा था। 

लेकिन सिरसा में महिला थाने पर ग्रेनेड हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और हरियाणा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करके आतंकियों के मनसूबों पर पानी फेर दिया था। हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस के एक संयुक्त आॅपरेशन के दौरान फरीदाबाद से 350 किलो आरडीएक्स, दो एके 47 राइफल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद हुए थे। हरियाणा में आतंक संबंधी मामलों पर नियंत्रण के लिए सैनी सरकार एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड का गठन करने जा रही है। 

एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड की नीति 1 जून से प्रदेश में लागू हो सकती है। प्रदेश में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड के सक्रिय होते ही आतंकियों की रही-सही कमर भी तोड़ दी जाएगी। हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल ने बताया कि मुख्यमंत्री और पुलिस विभाग द्वारा तैयार नई नीति के अनुसार एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड का समूचा स्टाफ ट्रेंड, सभी संसाधनों से युक्त और एमएचए के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगा। राज्य में एटीएस का एक पुलिस थाना पंचकूला में और एक पुलिस थाना गुरुग्राम में बनाया जाएगा, जहां सभी टेरर संबंधी केसों को भेजा जाएगाष फिलहाल ऐसे मामलों को एसटीएफ और जिला पुलिस देख रही है।

Wednesday, May 27, 2026

तोता बोला, गुरु मिले तो बंधन छूटे


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गुरु के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती है। अज्ञानता का बंधन भी नहीं कटता है। सच्चा गुरु जीवन को सार्थक बना देता है। इस संबंध में एक बहुत ही रोचक कथा है। एक पंडित रोज अपने राज्य की रानी को कथा सुनाने जाया करता था। रानी उस पंडित पर बहुत विश्वास करती थीं क्योंकि पंडित काफी पढ़ा-लिखा और सरल स्वभाव का था। 

वह जब भी कोई कथा या प्रसंग सुनाता था, तो वह अंत में यही कहता था, राम कहे, तो बंधन टूटे। रानी के घर में  एक तोता पला हुआ था। वह भी इंसान की तरह बोलना जानता था। जब पंडित कहता कि राम कहे, तो बंधन टूटे। तभी तोता बोल उठता था, यो मत कहो रे पंडित झूठे। पंडित उसकी बात से बहुत परेशान होता था। वह उसकी बात समझ नहीं पाता था। 

एक दिन पंडित ने तोते की चर्चा अपने गुरु से की। गुरु जी तोते के पास पहुंचे और बोले, तुम यह क्यों कहते हो कि यो मत कहो, रे पंडित झूठे। तोते ने कहा कि पहले में स्वतंत्र रहता था। एक दिन एक गुरुकुल के पास की पेड़ पर बैठा था कि गुरुकुल के एक आचार्य ने मुझे पकड़ लिया। उसने मुझे पिंजरे में डाल दिया। उसने मुझे कुछ श्लोक भी रटवाए। मुझे बोलना सिखाया। 

फिर एक दिन नगर के व्यापारी ने मुझे देखा, तो उसने आचार्य को पैसा देकर मुझे खरीद लिया। अब मैं चांदी के पिंजरे में कैद हो गया। कुछ दिन बाद व्यापारी ने मुझे रानी को भेंट कर दिया, तो मैं सोने के पिंजरे में आ गया। अब आप बताएं कि राम कहे, तो बंधन टूटे कहां सच साबित हुआ। गुरु जी ने कहा कि कल तुम अपनी सांस रोककर यों ही पड़े रहना। अगले दिन रानी ने देखा कि तोता हिल डुल नहीं रहा है, तो उन्होंने समझा कि तोता मर गया है। उन्होंने तोते को निकालकर बाहर रख दिया। तोता मौका देखकर आकाश में उड़ गया और बोला, गुरु मिले तो बंधन छूटे।

डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से आमजनता, उद्योगपति परेशान


अशोक मिश्र

सोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई। इससे पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई। दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बढ़ोतरी है। दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये हो गई है। डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हो गए हैं। 

महंगाई दिनोंदिन बढ़ रही है। डीजल पेट्रोल की कीमतों में इजाफा होने से परिवहन महंगा हो गया है। थोड़ी दूरी के लिए जहां लोगों को दस रुपये खर्च करना पड़ता था, उतनी ही दूरी के लिए अब पंद्रह रुपये देने पड़ रहे हैं। महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीबों की जेब पर पड़ा है। उनकी कमाई तो बढ़ी नहीं, लेकिन सब्जी, दाल, आटा, चावल से लेकर मसाले तक महंगे हो गए हैं। 

दूध के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं, उस पर मिलावटी दूध, दही और छाछ बेचे जा रहे हैं।  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण ईंधन के दाम बढ़े हैं। इसके प्रभाव से हरियाणा में भी ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है जिससे रोजमर्रा की चीजों, सब्जियों और अनाज की ढुलाई लागत बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में सब्जियों से लेकर राशन, फल और मसाले आदि महंगे हो गए हैं। रसोई गैस में पहले से ही आग लगी हुई है। 

घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत एक हजार रुपये पार हो चुकी है। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत भी लगभग तीन हजार रुपये प्रति सिलेंडर के आस पास पहुंच गई है। इसलिए होटल, रेस्त्रां और ढाबों में खाना काफी महंगा हो गया है। राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। डीजल महंगा होने से खेतों की जुताई, सिंचाई (डीजल पंप) और फसलों को मंडियों तक ले जाने का खर्च काफी बढ़ गया है।  खेतों की सिंचाई के लिए अब किसानों को अपनी जेब से काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इन दिनों मंडियों में विभिन्न अनाज की खरीद हो रही है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने से किसानों को अपने घर से मंडी तक अनाज ले जाने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। 

ऐसी स्थिति में अनाजों का समर्थन मूल्य तो नहीं बढ़ा, लेकिन अनाज की लागत बढ़ गई। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले दस दिनों में चौथी बार डीजल पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की वजह से किसानों में ही नहीं, आम जनता में भी काफी रोष पनप रहा है। लोगों का कहना है कि उनकी आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही है, लेकिन लगातार महंगाई से घरेलू बजट बुरी तरह बिगड़ गया है। हरियाणा के उद्योगपतियों में भी महंगाई को लेकर काफी रोष है। उनका बजट बिगड़ने लगा है। कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसी स्थिति में उत्पादन लागत को काबू में रखना उनके लिए बहुत भारी पड़ रहा है।

Tuesday, May 26, 2026

‘सुबह होती है’

सन 1968 में मास्को में खींची गई मानव जी की तस्वीर

दिवंगत श्री रामेश्वर दत्त मानव

प्रात: उठ दुनिया जगती है।
पक्षी का कलरव होता है
फूलों का उत्सव होता है
भ्रमरों का गुंजन होता है
सब अपने कामों में लगते
मै भी बिकने चल देता हूं
शोषण की तपती भट्टी में
जलने सिकने चल देता हूं
कभी एक दिन को मैं बिकता
कभी एक हफ्ते बिकता हूं
कभी जरा महंगे बिकता हूं
कभी जरा सस्ते बिकता हूं
मै बिकता, मेरी मेहनत बिकती
इज्जत बिकती, अस्मत बिकती
मै क्या मेरी किस्मत बिकती

जी हां हम इंसान नही हैं
जी हां, हम भी चीज हो गये
फिर भी हमें क्रय नहीं करते
हम इतने नाचीज हो गये
एक पहर दिन बीत गया है
लेकिन कोई खरीदार न आया
अच्छा माटी के मोल खरीदोगे
बाबू क्या मुझे खरीदोगे
मैं अपने को बेच रहा हूं
बोलो क्या मुझे खरीदोगे।

जी हां मैं आदम का प्यारा
हब्बा के आंखों का तारा
परमेश्वर के पुत्र लाड़ले
ब्रम्हा का मैं गढ़ा संवारा
दुनिया आज बनी बाजार
चलता तेजी से व्यापार
रुपये से आदान प्रदान
दे दो रुपया लो ईमान

कविता कला नृत्य संगीत
प्रेमी प्रेयसी मन के मीत
नाता रिश्ता जग की रीत
बिना अर्थ के जुड़े न प्रीत
सब कुछ व्यर्थ निर्रथक बात
प्यारे करो अर्थ की बात

सर्वे:गुणा :कंचनमा श्रयन्ति
सुजना: रुदन्ति मूर्खा: हसंति

जिसके सोना उसकी चांदी
वर्ना बस समझो बर्बादी
आज रुपया सबका माप
चाहे हम हों चाहे आप
रुपया हो तो पुण्य खरीद
पापी होकर पुण्य खरीद
ज्ञान, कल्पना, सुख और आशा
बिकता है सब सरे बाजार

अर्थपूर्ण हैं नैन सभी के
अर्थपूर्ण हैं बैन सभी के
अर्थपूर्ण हैं सैन सभी के
अर्थपूर्ण हर एक इशारे
पहुंचो ऊंची जहां दुकान
और फीके हों पकवान
और खरीदो वेद कुरान
दे दो रुपया लो ईमान
अच्छा माटी के मोल खरीदोगे
बाबू क्या मुझे खरीदोगे।
मैं अपने को बेच रहा हूं
बोलो क्या मुझे खरीदोगे।

एक बार जब बिके हरिश्चन्द्र
हो गयी उनकी अमर कहानी।
रंगे गये पन्नों पर पन्ने
छोड़ गये वो अमर निशानी
धर्म ग्रंथ ने कहा धन्य हो
राजा हरिश्चन्द्र की जय हो
सत्य मार्ग पर बिकने वाले
राजा हरिश्चन्द्र की जय हो
उनकी विक्रय कथा अमर हो गयी

उनकी कथा हुई व्यापकतम
जन मन गन की व्यथा हो गयी
मै और मेरे अगणित भाई
रोज बिके पर किसने देखा
किसके मस्तक पर है आयी
चिंताओं की अविकल रेखा
कौन कहेगा कथा हमारी
कौन सुनेगा व्यथा हमारी
हम पापी गरीब जो ठहरे
कहने वाले हो गये गूंगे
सुनने वाले हो गये बहरे

शैव्या ने जब आंचल फाड़े
और रोहित को कफन ओढ़ाये
क्षीरोदधि में प्रलय मच गयी
दौड़े हुए स्वयं प्रभु आये
मेरी भी नारी ने अपने
बिना कफन के पूत बहाये
बिलख बिलख रोयी चिल्लायी
किन्तु नहीं परमेश्वर आये।
हम भक्तन के भक्त हमारे
प्रभु नहीं आये भक्त पुकारे
एक बार जब द्रुपद सुता की
दु:शासन ने खींची साड़ी
स्वमं चीर में समा गये प्रभु
बच गयी लाज चकित हुए प्राणी

देख असंख्यों दुपद सुता को
दु:शासन ने नग्न कर दिया
दुर्योधन हो रहा मगन
धर्मराज को भग्न कर दिया
डेढ़ हाथ की ओढ़नी ओढ़े
स्तन ढकै कि घूंघट काढ़े
अंगनैया में जेठ खड़े हैं
और ड्यौढ़ी पर सासुर ठाढे
इनको हे भगवान निहारो
ओ धन वालों मुझे खरीदोगे।
मैं अपने को बेच रहा हूं
बोलो क्या मुझे खरीदोगे।

सुनो स्वैद हमारे रक्त से ही
बस तुम्हारी जि़न्दगी है
अरे ओ पापी तुम हमारा
रक्त पीकर जी रहे हो
सुरा कामिनी कंचन नहीं
जीवन कहाता
श्रमफल छीनकर जीना
नहीं जीवन कहाता
रहे जो सर्द गरमी में
रहे गर्म सर्दी में
उसे कुछ इस करीने से
हमीं ने तो बनाया है
हमारी कला देखोगे
जरा देखो अजंता में
ऐलोरा में जरा घुसिये
अरे कुछ सांस तो रोको
यह कितनी भावमय मुद्रा
सरस यूं प्रेम की कविता
प्रस्तर में कि मानो
प्रेम का आवेश होता है
अभी ये बोल देंगे
यह अहसास होता है
कला श्रमजीवियों के
कृत्य से अमरत्व पाती है।
मैंने हिम किरणों से पूछा
तुमने कहीं तपन देखी है
हिम किरणें सकुचाकर बोलीं
जहां गये शीतलता पायी
तपन किसे कहते है बतलाना
मैंने सूरज से पूछा तुमने
कही अंधियारा देखा है
और सूरज के बोल न फूटे
विस्मित होकर वह बोला
मेरी असंख्य किरणों ने
जहां गयी उजियारा देखा
अंधियारा किसे कहते है बतलाना
मैने अपनी पत्नी से पूछा
तुमने सुख देखा है
विस्मित होकर बोली
नैहर देखा, सासुर देखा, सुख क्या है देख न पायी
मै बोला परदेस चला
दूर देश को मै जाउंगा कुछ दिन वहां रहूंगा
लेकिन सुख झोली में भर लाउंगा।
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मेरे पिता दिवंगत रामेश्वर दत्त ‘मानव’ की वर्ष 1965 में प्रकाशित लंबी कविता ‘सुबह होती है’ के कुछ अंश

सौंदर्य तो एक दिन मिट जाएगा, गुण रहेंगे

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जब संपूर्ण प्रकृति चिरस्थायी नहीं है तो फिर किसी व्यक्ति, वस्तु या प्रकृति की सुंदरता स्थायी कैसे हो सकती है। यह प्रकृति हमेशा से परिवर्तन शील रही है, भविष्य में भी रहेगी। ऐसी स्थिति में किसी को अपने रूप और सौंदर्य का अभिमान नहीं करना चाहिए। 

एक बार की बात है। चंद्रगुप्त और चाणक्य कहीं जा रहे थे। कहा जाता है कि चंद्रगुप्त बहुत ही सुदर्शन थे। उनके रूप की प्रशंसा करते हुए कविगण नहीं अघाते थे। अपने रूप पर चंद्रगुप्त को भी थोड़ा बहुत अभिमान था। वहीं चाणक्य असुंदर थे। रंग भी श्यामवर्ण था। ऊपर से संघर्ष ने उनकी काया को थोड़ा बहुत क्षीण भी कर दिया था। जब किसी काम के लिए दोनों एक साथ निकलते थे, तो लोग चंद्रगुप्त को ही देखते रह जाते थे। 

एक दिन की बात है। किसी समस्या पर विचार विमर्श करते हुए चाणक्य और चंद्रगुप्त वाटिका में टहल रहे थे। उसी समय चंद्रगुप्त ने कहा, गुरुदेव! आप में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आप जैसा विद्वान शायद ही कोई हो, लेकिन यदि भगवान ने आपको रूप दिया होता तो कितना अच्छा होता। चाणक्य समझ गए कि चंद्रगुप्त को अपने रूप का अभिमान हो गया है। 

चंद्रगुप्त को राजा भी चाणक्य ने बनाया था। मुंह से बात निकलने के बाद चंद्रगुप्त भी समझ गए कि उन्होंने गलत बात कह दी है। चाणक्य ने सेवक को बुलाकर मिट्टी और सोने के पात्र में पानी लाने को कहा। थोड़ी देर बाद जब चंद्रगुप्त को प्यास लगी, तो चाणक्य ने मिट्टी के पात्र का जल पीने को दिया। 

पानी पीकर चंद्रगुप्त ने कहा कि इस पात्र का जल मीठा और ठंडा है। उसके बाद स्वर्ण पात्र का जल उन्हें पीने को दिया गया। चंद्रगुप्त ने कहा कि इस पात्र का जल कोई विशेष नहीं है। तब चाणक्य ने कहा कि पात्र की खूबसूरती से जल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। गुणों का प्रभाव ही मायने रखता है। यह सुनकर चंद्रगुप्त ने लज्जा से अपना सिर झुका लिया।

धन संपत्ति का लालच परिवार के सदस्यों की जान का बना दुश्मन

अशोक मिश्र

हरियाणा में रहने वाले लोगों के पारिवारिक प्रेम और भाईचारे की मिसाल सदियों से दी जाती रही है। कुटुंब और गांव समाज के लोग एक दूसरे से मिलजुल कर रहते थे। गांवों में भाईचारा कायम रहता था। परिवार भी बड़े होते थे। संयुक्त परिवार होने की वजह से लोगों का आपस में प्रेम बना रहता था। दादी, दादा, ताया-ताई, चाचा-चाची, बुआ फूफा और चचेरे भाइयों में बहुत प्रेम हुआ करता था। 

मजाल है कि कोई बाहरी आदमी परिवार के किसी सदस्य को आंख दिखाकर सकुशल चला जाए। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। जब से एकल परिवार की अवधारणा ने हरियाणा में पैर फैलाना शुरू किया, परिवार का प्रेम कम होता चला गया। आज हालात तो यह है कि लोग धन-संपत्ति के लिए अपने ही परिवार के सदस्यों का खून करने पर आमादा हैं। भाई-भाई का हत्यारा बना हुआ है। 

हरियाणा में संपत्ति और धन के लालच में होने वाली हत्याएं एक गंभीर सामाजिक मुद्दा बनी हुई हैं। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां पारिवारिक विवाद, जमीन के सौदे और पैसों के लेनदेन के कारण हिंसक वारदात हुई हैं। शनिवार को ही अंबाला जमीन और मिट्टी खनन के ठेके के विवाद में एक युवक ने अपनी 95 वर्षीय दादी, सगे भाई और चाचा की गोली मारकर हत्या कर दी। चाची अस्पातल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। यह विवाद लंबे समय से चल रहे पारिवारिक संपत्ति बंटवारे से जुड़ा था। हत्या के आरोपी युवक के पिता को सेवानिवृत्त होने के बाद सारे फंड वगैरह मिलाकर 16 लाख रुपये मिले थे। 

इस पैसे और मिट्टी खनन के ठेके में युवक का बड़ा भाई अपना हिस्सा मांग रहा था। यह बात उसे स्वीकार नहीं थी। वह चाहता था कि सारे रुपये और मिट्टी खनन से होने वाली आय उसके या पिता के पास ही रहे। शनिवार को अंबाला के शहजादपुर प्रखंड के बिचपड़ी गांव में युवक ने धन और संपत्ति के लिए खूनी खेल खेला और हत्या के बाद से आरोपी युवक फरार है। स्वाभाविक है कि पुलिस कुछ ही दिनों में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लेगी। इस हत्याकांड के लिए उसे जेल में रहना पड़ेगा। 

तीन लोगों की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास या फांसी की सजा भी मिल सकती है। यह तो तय है कि जिस संपत्ति और धन के लिए उसने हत्याकांड को अंजाम दिया है, उसका उपभोग वह खुद नहीं कर पाएगा। अगर युवक अपने अंजाम के बारे में सोच लेता, तो शायद हत्याकांड सामने नहीं आता। भाई और चाचा का परिवार बरबाद नहीं होता। भाई और चाचा के बच्चे अनाथ नहीं होते। शहरीकरण और विकास परियोजनाओं के कारण हरियाणा में जमीन की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे छोटे-छोटे टुकड़ों के लिए भी खूनी संघर्ष हो रहे हैं। पुश्तैनी संपत्ति के बंटवारे में असमानता या असंतोष अक्सर हिंसा का रूप ले लेता है। 

Monday, May 25, 2026

बेटे का अंतिम संस्कार करने गए हैैं

प्रतीकात्मक चित्र
बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बिना किसी की परेशानी को जाने समझे उसे कोसना, कतई उचित नहीं है। कुछ लोग संकट आने पर बहुत ज्यादा अधीर हो जाते हैं। वह यह नहीं सोच पाते हैं कि दूसरा व्यक्ति भी उनसे कहीं ज्यादा संकट में हो सकता है। कुछ लोग तो सामने वाले व्यक्ति के कपड़ों, उसकी सामाजिक स्थिति को देखते हुए आकलन करने लगते हैं। 

एक बार की बात है। एक अमीर आदमी का बेटा बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया। उसे तत्काल सर्जरी की जरूरत थी। उस अस्पताल में एक बहुत ही काबिल डॉक्टर था, लेकिन वह उस समय अस्पताल में उपलब्ध नहीं था। अमीर आदमी ने अस्पताल प्रबंधन पर लगभग चीखते हुए कहा कि उस डॉक्टर को बुलाओ। जल्दी से जल्दी बुलाओ। 

अस्पताल प्रबंधन कहता रहा कि डॉक्टर को फोन कर दिया गया है। वह आते ही होंगे। थोड़ी देर बाद एक डॉक्टर हड़बड़ाते हुए आया। अमीर आदमी उस पर बरस पड़ा। तुम कितने लापरवाह डॉक्टर हो। मेरा बेटा जिंदगी और मौत से लड़ रहा है और तुम इतनी देर करके आ रहे हो। डॉक्टर ने विनम्रता से कहा कि मैं काफी दूर था। इसलिए आने में समय लग गया। 

अमीर आदमी ने कहा कि यदि तुम्हारा बेटा भी मर रहा होता, तो क्या तुम ऐसा ही करते। डॉक्टर उस आदमी को जवाब देने की जगह सर्जरी रूम में चला गया। दो घंटे बाद डॉक्टर बाहर निकला और उस आदमी से कहा कि तुम्हारा बेटा अब ठीक है। बाकी बातें नर्स तुम्हें समझा देगी। इतना कहकर डॉक्टर चला गया। अमीर आदमी ने नर्स से कहा कि यह डॉक्टर इतना घमंडी क्यों है?

नर्स ने कहा कि डॉक्टर के बेटे की कल मौत हो गई है। जब उन्हें फोन किया गया था, तब वह अपने बेटे का दाह संस्कार करने जा रहे थे।  आपके बेटे की हालत जानकर उन्होंने अंतिम संस्कार रोक दिया था। अब वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने गए हैं। यह सुनकर अमीर आदमी लज्जित हो गया।

सामूहिक टैंक योजना से सिंचाई कर बचाया जा सकता है गिरता जल स्तर

अशोक मिश्र

हरियाणा में जल संकट बढ़ता जा रहा है। कृषि के लिए पानी की भारी बर्बादी भी नहीं रुक रही है। हरियाणा में गिरते भूगर्भ जलस्तर का संकट बहुत गंभीर हो गया है। प्रदेश के 14 जिलों में स्थिति चिंताजनक है। प्रदेश के 141 ब्लॉकों में से लगभग 85 ब्लॉक 'डार्क जोन' की श्रेणी में आ चुके हैं। इनमें से 22 ब्लॉक अत्यधिक दोहन की स्थिति में हैं। राज्य में जल संकट का मुख्य कारण जहां दैनिक उपयोग में होने वाली पानी की बर्बादी है, वहीं कृषि क्षेत्र में फसलों की सिंचाई का पारंपरिक तरीका भी है। 

पारंपरिक नहरों या ट्यूबवेलों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाने की प्रक्रिया में रिसाव और वाष्पीकरण के कारण लगभग 30 से 40 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। कृषि में धान की खेती के लिए जरूरत से ज्यादा पानी निकालना और नहरों को पूरी तरह से पक्का (कंक्रीट) करने के कारण जमीन में पानी का प्राकृतिक रिसाव रुकना इन इलाकों में मुख्य रूप से जलस्तर गिरने के कारण हैं। यही वजह है कि सैनी सरकार ने राज्य में खेती की तस्वीर बदलने का फैसला किया है। अब सरकार ने पानी आधारित सबसे बड़ा ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल तैयार करना शुरू कर दिया है। आने वाले वर्षों में खेतों में खुले पानी से सिंचाई और ट्यूबवेल आधारित व्यवस्था को धीरे-धीरे सीमित कर माइक्रो इरिगेशन आधारित स्मार्ट सिंचाई मॉडल लागू किया जाएगा। 

इसकी शुरुआत प्रदेश के नौ जिलों से होगी, जहां किसानों के समूह बनाकर सामूहिक जल टैंक तैयार किए जाएंगे। सरकार ने पहले चरण में भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा को चुना है। इन जिलों में किसानों के समूहों को सामूहिक टैंक निर्माण पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। प्रत्येक 10 एकड़ या उससे अधिक भूमि के लिए किसानों के समूह बनाकर सामूहिक टैंक तैयार किए जाएंगे।

इन टैंकों को नहरों से पाइपलाइन के जरिए भरा जाएगा। फिर इन्हीं से खेतों तक टपका या फव्वारा सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। फव्वारा या टपका विधि से फसलों की सिंचाई करने पर पानी की बरबादी नहीं होती है और फसल को जरूरत का पानी भी मुहैया हो जाता है। फसल भी अच्छी होती है। सामूहिक टैंक योजना के तहत पानी के भंडारण से किसानों को व्यक्तिगत रूप से ट्यूबवेल लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 

वह सामूहिक टैंक में भरे हुए पानी का उपयोग अपने फसलों की सिंचाई के लिए कर सकते हैं। यदि मुख्यमंत्री की योजना के अनुसार किसानों ने अपने फसलों की सिंचाई की तो कम पानी और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के उपयोग से किसानों का सिंचाई खर्च न्यूनतम हो जाएगा और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी। बस जरूरत है राज्य के हर किसान को सामूहिक टैंक योजना से परिचित कराने और इसके फायदे बताने की।


Sunday, May 24, 2026

बेकार की वस्तुएं मत लाया कीजिए

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

‘संतन को कहा सीकरी सो काम’जैसी काव्य रचना करने वाले कुंभन दास अष्टछाप के प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। उनका जन्म मथुरा के जमनावतो गांव में 1468 ईस्वी में हुआ माना जाता है। पुराने जमाने के कवि, साहित्यकार और दार्शनिक अपनी रचनाओं में भी अपने बारे में कुछ भी लिखने से परहेज करते थे। ऐसी अवस्था में उनके बारे में बहुत सारी बातें उनके समकालीन लोगों के आधार पर तय करनी पड़ती है। 

कहा जाता है कि वह अपने गांव में खेती करते थे, उसी से परिवार को गुजारा होता था। खेती से कितनी आय होती रही होगी, इसका अंदाजा आज के किसानों को देखकर लगाया जा सकता है। श्रीनाथ जी के मंदिर में यह रोज नए-नए पद गाकर सुनाया करते थे। इनकी पत्नी के अलावा सात पुत्र, सात पुत्रवधुएं और एक विधवा भतीजी रहती थी। एक बार की बात है। राजा मान सिंह वेष बदलकर कवि कुंभनदास से मिलने पहुंचे। 

उस समय वह नहाने के बाद माथे पर तिलक लगाने जा रहे थे। उन्होंने अपनी बेटी को आवाज देते हुए कहा कि बेटी दर्पण दे जाओ, तिलक लगाना है। संयोग से दर्पण बेटी के हाथ से छूटा और गिरकर टूट गया। बेटी ने दर्पण टूटने की बात कही, तो कुंभनदास ने कहा कि कोई बात नहीं किसी बर्तन में पानी भरकर ले आओ। एक टूटे बर्तन में पानी आने पर उन्होंने प्रतिबिंब देखकर तिलक लगाया। 

अगले दिन राजा मान सिंह स्वर्ण जड़ित दर्पण लेकर कुंभनदास के समक्ष उपस्थित हो गए। कुंभनदास ने कहा कि अच्छा तो कल आप ही आए थे। आपका यहां आने का स्वागत है, लेकिन इन बेकार की वस्तुओं को लाने की जरूरत नहीं है। यह सुनकर राजा मान सिंह का हृदय भाव विभोर हो उठा।

अनियमित बिजली कटौती से लोग परेशान, उद्योगों को भारी नुकसान

अशोक मिश्र

दुनिया के 50 सबसे गर्म शहर भारत में ही पाए गए हैं। इसमें से 26 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी तीस डिग्री सेल्सियस के आसपास है। इतनी भीषण गर्मी में स्वाभाविक तौर पर बिजली की खपत अधिक हो जाएगी। लोग दिन रात पंखे, कूलर और एसी चला रहे हैं। 

गर्मी का हाल यह है कि एसी से भी गर्म हवा निकल रही है। ऐसी स्थिति में यदि बिजली की कटौती हो जाए, तो लोगों को बहुत अधिक परेशानी हो जाती है। राज्य के लगभग हर जिले में अघोषित बिजली कटौती से लोग काफी परेशान हो गए हैं। रात में तो सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। रातों में बिजली कटौती की वजह से लोग सो नहीं पा रहे हैं जिससे दिन में उनके काम बाधित हो रहे हैं। 

बिजली कटौती का कारण पहला तो यह है कि राज्य में जितनी बिजली की मांग है, उपलब्धता उससे कम है। भीषण गर्मी की वजह से लगातार चल रहे ट्रांसफार्मरों को भी राहत देने के लिए विभिन्न इलाकों में बिजली कटौती करनी पड़ती है। यदि थोड़े-थोड़े अंतराल पर बिजली कट न लगाए जाएं, तो ट्रांसफार्मर  और बिजली के तारों के फुंक जाने का खतरा हो जाता है। ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने के अन्य उपाय भी करने पड़ते हैं। 

प्रदेश में बढ़ती गर्मी की वजह बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी के साथ ही घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। दोनों बिजली वितरण निगमों में बिजली की आपूर्ति और खपत में भारी बढ़ोतरी हुई है। छह दिनों में बिजली खपत 30 लाख यूनिट से पार पहुंच चुकी है। इन दोनों सब डिविजनों में सबसे ज्यादा बिजली के अघोषित कट लग रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई है। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के 11 सर्कलों में पिछले बुधवार को बिजली की सप्लाई बढ़कर 1493.34 लाख यूनिट तक पहुंच गई थी। 

जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे एयर कंडीशनर और कूलर के उपयोग में तेजी आने से लोड लगातार बढ़ता जा रहा है। हरियाणा में गर्मी और धान के सीजन के दौरान बिजली की चरम मांग लगभग 11,000 मेगावाट से लेकर 13,231 मेगावाट (वर्तमान में) तक पहुंच जाती है। राज्य की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 11,000 से 12,000 मेगावाट के आसपास है, और इस मांग को पूरा करने के लिए पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदी जाती है। 

राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत लगभग 1,805 यूनिट है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। यही वजह है कि बिजली विभाग को बार-बार कट लगाने पड़ते हैं। इससे जहां लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं उद्योगों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है।


Saturday, May 23, 2026

टेरेसा ने कहा, क्षमा ही सबसे बड़ा मरहम है

 

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मदर टेरेसा को रोमन कैथोलिक चर्च ने कलकत्ता की संत मदर टेरेसा कहकर पुकारा था। 9 सितम्बर 2016 को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत की उपाधि से विभूषित किया था। मदर टेरेसा को मानव सेवा के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 

भारत सरकार ने भी उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा था। कहते हैं कि मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (अब मेसीडोनिया में) में हुआ था। मदर टेरेसा ने 1948 को भारत की नागरिकता ग्रहण की थी। इसके दो साल बाद ही उन्होंने कलकत्ता में मिशनरीज आफ चैरिटी की स्थापना की थी। 

एक बार की बात है। वह कलकत्ता की भीड़ भरी सड़कों पर जा रही थीं। उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग महिला सड़क के किनारे कूड़े के ढेर के पास पड़ी है। उसके आसपास से लोग आ जा रहे हैं, लेकिन कोई उसकी ओर ध्यान नहीं दे रहा है। महिला के शरीर पर घाव थे और उसको उस समय बहुत तेज बुखार था। सफेद साड़ी पहने मदर टेरेसा ने उस महिला को हलके से स्पर्श किया। 

बुजुर्ग महिला ने अपनी आंखें खोली और फिर बंद कर ली। मदर टेरेसा उस महिला को अपने निर्मल आश्रम ले आईं। उन्होंने उसे घावों पर मरहम लगाया। उसको खाने को दिया। ममता भरे स्पर्श से महिला की आंखों में आंसू निकल आए। टेरेसा ने उस महिला से पूछा कि क्या बहुत दर्द हो रहा है? 

महिला ने कहा कि नहीं। मुझे दुख है कि मैंने जिस बेटे को पैदा किया, उसने भी मुझे छोड़ दिया। मदर टेरेसा ने कहा कि क्षमा ही सबसे बड़ा मरहम है। उसे क्षमा कर दो। महिला ने अपने बेटे को क्षमा कर दिया। भारत में मदर टेरेसा पर धर्मांतरण के भी आरोप लगाए गए। इन आरोपों में कितनी सच्चाई थी, पता नहीं।

मानसून सीजन में लोगों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद


अशोक मिश्र

इन दिनों पूरे उत्तर भारत में आसमान से आग बरस रही है। दिन के साथ-साथ रातें भी अब गर्म हो चुकी हैं। इसका प्रभाव आम जनजीवन में काफी बुरा पड़ रहा है। हरियाणा में भी दिन का तापमान चालीस डिग्री सेंटीग्रेड से पार चला गया है। लोग अब तो यही कामना करने लगे हैं कि किसी तरह मानसून आ जाए और बरसात होने से लोगों को राहत मिले। लेकिन अभी हरियाणा में मानसून आने में लगभग एक महीने का समय बाकी है। बरसात के दिनों में अलग तरह की परेशानियां लोगों को होती हैं। 

कहीं जलभराव हो रहा है, तो कहीं नालियां जाम हो चुकी हैं जिसकी वजह से घरों, दुकानों और सड़कों पर पानी जमा हो गया है। ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सीएम नायब सिंह सैनी ने दो दिन पहले ही अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि नहरों, नालों, नालियों और सीवरेज से जुड़े जितने भी काम हैं, वह बीस जून तक पूरे कर लिए जाने चाहिए। यदि निर्धारित समय तक किसी भी क्षेत्र में काम पूरे नहीं हुए, तो संबंधित अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानकर उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। 

बरसात के दिनों में लोगों को किस तरह की परेशानी होती है, इस बात को शासन अच्छी तरह समझता है। यही वजह है कि इसी साल जनवरी में ही सीएम सैनी ने बरसात आने से पहले होने वाले कामों को उसी समय से शुरू करने का आदेश दिया था। उस समय दिए गए आदेश पर कितना अमल किया गया, यह तो नहीं मालूम है, लेकिन दो दिन पहले सीएम ने नहरों, नालों और नालियों की सफाई, नालों, नालियों और सीवरेज को दुरुस्त करने का एक बार फिर आदेश दिया था। 

मुख्यमंत्री नायब सिंह ने तो सभी निकाय आयुक्तों और प्रशासन को निर्देश दिए थे कि बीस जून से पहले नाले-नालियों की सफाई कर ली जाए। ताकि राज्य के लोगों को जलभराव की समस्या का सामना नहीं करने पड़े। सीएम सैनी ने कई बार कहा है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग पिट की  सफाई कराई जाए। यदि पिट ऊंचाई पर है, तो उसको नीचा किया जाए। यदि पिट की मरम्मत की जरूरत है, तो तत्काल उसकी मरम्मत की जाए ताकि बरसात के दिनों में पानी का संरक्षण किया जा सके। गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और हिसार कई ऐसे शहर हैं जहां पर थोड़ी सी ही वर्षा में जलभराव की समस्या हर साल लोगों को सहनी पड़ती है। 

हर साल बरसात आने से पहले नालों की सफाई के नाम पर करोड़ोरुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी इन जिलों में रहने वालों को परेशानी का सामना करना ही पड़ता है। हर साल प्रशासन लोगों को भविष्य में किसी किस्म की परेशानी न होने का आश्वासन देता है, लेकिन समय आने पर वही परेशानियां फिर सामने आ खड़ी होती हैं। सीएम सैनी की सक्रियता की वजह से उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार मानसून के मौसम में लोगों को जलभराव आदि समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी।


Friday, May 22, 2026

यदि आदमी कम हों, तो मुझे बुला लेना

चित्र साभार गूगल

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जार्ज वाशिंगटन को संयुक्त राज्य अमेरिका का संस्थापक कहा जाता है। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ चले युद्ध में उन्होंने भाग लिया था। वाशिंगटन का जन्म 22 फरवरी 1732 को वर्जीनिया में हुआ था। इनका अपने माता-पिता के साथ बहुत अच्छा संबंध नहीं था। वाशिंगटन अपने सौतेले भाई लारेंस के काफी करीब थे। वैसे इनके पिता आगस्टीन न्यायाधीश थे, लेकिन वाशिंगटन की शिक्षा-दीक्षा का वैसा प्रबंध नहीं किया जैसा उन्होंने अपनी पहली पत्नी से हुए बेटों का किया था।

 इनकी मां भी झगड़ालू थी। जार्ज वाशिंगटन संयुक्त राज्य अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे। पिता की मृत्यु के बाद इन्हें एक फेरी फार्म और दस गुलाम विरासत में मिले थे। राष्ट्रपति बनने के बाद एक दिन वह घोड़े पर बैठकर कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि कुछ मजदूर लकड़ी के एक बड़े से लट्ठे को ऊंचाई पर चढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। काफी देर से मजदूर प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें अपने काम में सफलता नहीं मिल रही थी। 

वहीं उनका ठेकेदार खड़ा हुआ मजदूरों पर नाराज हो रहा था। वह उन्हें कामचोर, आलसी कहकर कोस रहा था। यह देखकर जार्ज वाशिंगटन घोड़े से उतरे और ठेकेदार से कहा कि यदि तुम भी आगे बढ़कर मदद करते, तो यह काम कब का खत्म हो गया होता। उसने कहा कि मैं अधिकारी हूं, मेरा काम आदेश देना है। यह सुनकर जार्ज ने मजदूरों की मदद की और लट्ठा ऊपर पहुंच गया। 

जाते समय जार्ज ने उस ठेकेदार से कहा कि भविष्य में यदि एक आदमी कम हो, तो मुझे बता देना, मैं काम करने आ जाऊंगा। मेरा नाम जार्ज वाशिंगटन है। यह सुनकर ठेकेदार बहुत लज्जित हुआ और भविष्य में ऐसा करने की बात कहते हुए माफी मांगी। जार्ज मुस्कुराते हुए अपने रास्ते चले गए।

युवाओं में घटती सहनशीलता समाज के लिए एक चेतावनी

अशोक मिश्र

युवाओं में संयम घटता जा रहा है। वह थोड़ी थोड़ी सी बात पर उत्तेजित हो रहे हैं। इसी उत्तेजना में वह ऐसे कदम भी उठा रहे हैं जिससे उनके जीवन को खतरा पैदा हो रहा है। माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य की किसी बात पर नाराज युवा आत्महत्या तक कर रहे हैं। फरीदाबाद के पल्ला निवासी एक युवक ने आगरा नहर में केवल इसलिए छलांग लगा दी क्योंकि उसकी मां ने बाजार से लाए छोले-भटूरे को खाने से मनाकर दिया था। 

मां का कहना है कि इतनी गर्मी में बाजार से लाए छोले-भटूरे को खाने से तबीयत खराब हो सकती है। इसके बाद युवक घर से निकला और उसने आगरा नहर में छलांग लगा दी। आगरा नहर में छलांग लगाने के बाद परिवार वालों ने पुलिस को फोन किया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने लापरवाही बरती। काफी देर तक गोताखोरों की व्यवस्था नहीं हो पाई। युवक या उसके शव को पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। 

युवक कुछ दिनों से मोबाइल फोन को लेकर परिवार वालों से नाराज था। यह घटना इस बात की बानगी है कि युवाओं में सहनशीलता लगातार घट रही है। इसका कारण पिछले कई दशक से लगातार बढ़ती बेरोजगारी, अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव, अनिश्चित भविष्य और परिजनों के साथ लगातार घटता संवाद आदि है। युवाओं में थोड़ी-थोड़ी बात पर उत्तेजित होने या गुस्सा आने का कारण आधुनिक जीवनशैली, डिजिटल तनाव, मनोवैज्ञानिक बदलाव और सामाजिक दबाव का एक जटिल मिश्रण है। 

जीवन शैली में आए बदलाव ने युवाओं को काफी प्रभावित किया है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया से काफी जुड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट पर तत्काल प्रतिक्रिया आती है। लाइक्स और कमेंट की  भरमार देखते ही देखते हो जाती है। ज्यादातर सोशल मीडिया पर अपना समय बिताने की वजह से एक तरह की अधीरता युवाओं में पैदा होती जाती है। ऐसे में यदि परिवार उनके मन के मुताबिक व्यवहार नहीं करता है, तो वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। आज के युवाओं पर बहुत जल्दी सफल होने, अच्छा करियर बनाने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने का भारी दबाव होता है। 

जब वे अपनी उम्मीदों के अनुसार परिणाम प्राप्त नहीं कर पाते, तो उनके अंदर निराशा और कुंठा जन्म लेती है, जो अक्सर गुस्से के रूप में बाहर आती है। यह गुस्सा कई बार परिवार और खुद युवाओं के लिए घातक साबित होता है। संयुक्त परिवारों के टूटने और एकाकी जीवन की वजह से भी युवाओं में सहनशीलता कम होती जा रही है। सामाजिक दबाव बढ़ने के कारण युवाओं में विपरीत परिस्थितियों या असहमति को स्वीकार करने की क्षमता कम हो गई है। छोटी-मोटी विफलताएं या किसी की बात न मानना उन्हें व्यक्तिगत अपमान जैसा महसूस होने लगता है और वे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।

Thursday, May 21, 2026

सामाजिक उत्थान को समर्पित रहीं मेहरबाई

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

भारत में पारसी समुदाय की मेहरबाई टाटा का नाम बैटमिंटन खिलाड़ी के साथ-साथ महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने वाली महिलाओं में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है। मेहरबाई का जन्म 10 अक्टूबर 1879 में मुंबई में हुआ था। इनके पिता उच्च शिक्षित व्यक्ति थे। 14 फरवरी, 1898 को खूबसूरत मेहरबाई का विवाह जमशेदजी एन. टाटा के सबसे बड़े पुत्र दोराबजी टाटा से हुआ। 

दोराबजी को 1900 में अपनी नवविवाहित दुल्हन को 245.35 कैरेट का विशाल जुबली हीरा उपहार में देने के लिए जाना जाता है, जिसे वह महत्वपूर्ण सार्वजनिक समारोहों में गर्व से पहनती थीं। मेहरबाई ने छोटी उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। बात 1924 को पेरिस में हुए समर ओलंपिक्स की है। दुनियाभर के टेनिस खिलाड़ी वहां जमा हुए थे। खेल के दौरान टेनिस खेलने के लिए जब मेहरबाई टाटा मैदान में उतरीं, तो वहां उपस्थित लोगों की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं। 

मेहरबाई साड़ी पहनकर टेनिस खेलने के लिए मैदान में आई थीं। उन्हें अपने भारतीय पोशाक साड़ी पर गर्व था। जिस चुस्ती फुर्ती के साथ उन्होंने तेज सर्विस की, लोगों ने आश्चर्य से अपनी अंगुली दांतों तले दबा ली। साड़ी पहनकर टेनिस खेल कर मेहरबाई ने दुनिया भर को यह संदेश दिया कि यदि अपने खेल के प्रति जोश और जुनून हो, तो किसी भी खेल में पोशाक कोई मायने नहीं रखता है। 

मेहरबाई टाटा आजीवन समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहीं।  उन्होंने बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके संघर्ष करने से भारतीय समाज में जागरूकता भी आई। ल्यूकेमिया से पीड़ित मेहरबाई टाटा का 18 जून 1931 में निधन हो गया।

तालाबों के रखरखाव और प्रबंधन से भूगर्भ जलस्तर सुधारने की योजना


अशोक मिश्र

नौतपा के आने से पहले ही पूरा उत्तर भारत गर्मी से बेहाल है। गर्मी ने लोगों का जीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। ऊपर से समय-समय पर लगने वाले बिजली कट ने और समस्या खड़ी कर दी है। प्रचंड गर्मी के कारण पानी संकट गहराता जा रहा है। गर्मियों में वैसे भी पानी की खपत बढ़ जाती है। पेयजल की जरूरत से बसे ज्यादा हो जाती है। जलस्तर बहुत तेजी से नीचे जाने लगता है क्योंकि जलदोहन तेज हो जाता है। लोगों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूगर्भ जल का दोहन कई गुना बढ़ जाता है। 

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अगर जल संकट से उबरने में कोई सबसे ज्यादा सहायक होता है, तो वह है तालाब। कभी हमारे देश में तालाब ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा हुआ करते थे। उनकी जरूरतें गांवों के तालाबों से पूरी हो जाया करती थीं। तालाबों से जहां खेतों की सिंचाई होती थी, वहीं पशुओं को भी पेयजल इन तालाबों से ही मिलता था। गांवों में अधिक से अधिक तालाब होने से जलस्तर भी काफी ऊंचा रहता था। लेकिन धीरे-धीरे शहरों में अधिकतर तालाब अतिक्रमण के शिकार हो गए। 

लोगों ने तालाबों को पाटकर वहां निर्माण कर लिए। गांवों या शहरों में जो तालाब बचे हैं, वह उपेक्षा के शिकार हैं। इन्हीं सब स्थितियों को देखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आदेश दिया है कि राज्य के तालाबों की स्थिति को सुधारा जाए। तालाबों के इर्द-गिर्द उगी झाड़ियों और घासफूस को साफ करके वहां बैठने और घूमने लायक व्यवस्था की जाए। वहां सोलर लाइट की व्यवस्था की जाए ताकि वहां आने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार ने तालाबों की मरम्मत व सौंदर्यीकरण के लिए प्रति तालाब दी जाने वाली राशि को पचास हजार से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया है।

हरियाणा में लगभग 20,039 तालाब हैं जिनमें 19,129 ग्रामीण और 910 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें से अधिकांश तालाब गंदे पानी और कचरे के कारण प्रदूषित थे। सैनी सरकार की तत्परता और प्रतिबद्धता के चलते, जल संरक्षण और भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार इनका कायाकल्प करवा रही है। अब तक 6,000 से अधिक तालाबों की सफाई पूरी हो चुकी है। 

 'अमृत सरोवर मिशन' के तहत हजारों तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। हरियाणा सरकार का 'हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण' इनके संरक्षण, मछली पालन, और जल-पुनर्भरण पर काम कर रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गांवों के गंदे पानी को सीधे तालाबों में न छोड़ा जाए। इसके साथ ही बड़े तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि ग्रामीणों के लिए आय का साधन बन सके। इससे प्राप्त राशि का उपयोग तालाबों के रखरखाव में खर्च किया जाना है ताकि तालाब की स्थिति अच्छी रहे और जलस्तर में सुधार रहे।