Friday, May 15, 2026

जीजा के साथ गोवा चली जाऊंगी


14 मई 2026 को दैनिक प्रभात खबर में प्रकाशित।
व्यंग्य

अशोक मिश्र

‘ना मानूं, ना मानूं, ना मानूं। मैं आपकी किसी कोई बात नहीं मानूंगी। आप झूठ बोलते हैं, फिर बहाना बनाकर निकल जाते हैं।’ घरैतिन नेता प्रतिपक्ष की तरह हाथ नचा-नचाकर बोल रही थीं। दरअसल, मैं भी गठबंधन के सहारे चल रही सरकार के मुखिया की तरह सिर झुकाए बैठा हुआ था। पत्नी और बेटा-बेटी का समर्थन लिए मेरी गृहस्थी रूपी सरकार चल भी नहीं सकती थी। गृहस्थी चलानी है, तो इन तीनों का सहयोग और समर्थन चाहिए। यह सभी जानते हैं कि दुनिया में सबसे कठिन काम पति होना है। पति और पिता को न जाने कितने समझौते करने पड़ते हैं। सुबह से ही मेरे घर में आपात बैठक चल रही थी। पत्नी, बेटा और बेटी तीनों गठबंधन धर्म का निर्वाह कर रहे थे। मेरे ही खिलाफ आक्रोश प्रदर्शन कर रहे थे।

मेरी आसंदी यानी जहां मैं बैठा हुआ था, वहां आकर मेरी बेटी मेरा कंधा झकझोरकर कह चुकी थी कि छुट्टियों में अगर आप हम सबको शिमला घुमाने नहीं ले गए, तो वह समर्थन वापस ले लेगी और मम्मी से कहकर मौसा जी के साथ गठबंधन करके नई सरकार बना लेगी।

पत्नी गोवा जाने की जिद पर अड़ी हुई थी। कह रही थी कि पिछले साल भी आपने गोवा ले जाने को कहा था। आखिरी समय पर आफिस का बहाना बनाकर टाल गए थे। इस बार अगर आपने आनाकानी की, तो मैं बच्चों को लेकर अपने जीजा के साथ गोवा घूमने चली जाऊंगी। बेटा बस इतना चाहता था कि इस बार की छुट्टियों में कहीं घूमने चला जाए, कोई स्थान विशेष उसकी च्वाइस में नहीं थी। मैं कई बार घरैतिन को समझा चुका था कि मेरी हालत पाकिस्तान जैसी है। वह तो अपनी गरीबी से  उबरने के लिए शराब बेच सकता है, लेकिन मेरे पास तो ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे बेचकर बच्चों को कहीं घुमाने ले जा सकूं। मेरी अर्थव्यवस्था सेंसेक्स की तरह ऊपर चढ़ ही नहीं रही है। महंगाई ने कमर तोड़ रखी है। मुद्रा अवमूल्यन रोज होता जा रहा है। बारह साल पहले जो सैलरी मिलती थी, उतनी ही मूल्य की सैलरी आज भी मिलती है। लेकिन परिवार वाले मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं थे। उन्हें तो लग रहा था कि भारत की तरह मेरी अर्थव्यवस्था पांच से सात ट्रिलियन डॉलर के बीच है। मैं दुनिया का सबसे अमीर आदमी हूं।

मेरी बेटी ने अपनी मां से कहा, मम्मी! बड़े मौसा जी से बात कीजिए। पूछिए कि वह हम सबको गोवा घुमाने ले जाने के लिए तैयार हैं? मौसी के साथ गोवा घूमने में मजा आ जाएगा। मैं तो जिंदगी में पहली बार समुद्र देखूंगी, कितना मजा आएगा। मैंने उस हालत में वॉक आउट करना ही उचित समझा। शाम को जब घर लौटा, तो पता चला कि घरैतिन ने अपने सहयोगी दलों यानी बेटा-बेटी को लेकर अपने जीजा-जीजी के साथ नई सरकार के गठन पर बातचीत करने के लिए गोवा जाने का फैसला किया है। मैं समझ गया कि मेरी अल्पमत की सरकार खतरे में है। मैंने चुप रहने में ही भलाई समझी।

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