सिंगल विंडो सिस्टम वाले राज्यों में उद्योगपति अपने उद्योग लगाने में बहुत ज्यादा रुचि लेते हैं। हरियाणा सरकार भी हर सेक्टर के उद्योगों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर रही है। ज्यादातर सेक्टरों में यह लागू भी हो चुका है। अब राज्य सरकार कारोबार और पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल बनाने की तैयारी में है ताकि अधिक से अधिक उद्योगों को राज्य में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
यही वजह है कि सैनी सरकार ने राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी 2015 में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं जिससे यह उम्मीद हो चली है कि प्रदेश में देशी और विदेशी उद्योगपति पूंजी निवेश के लिए आकर्षित होंगे।
सरकार ने फैसला किया है कि अब इंडस्ट्रियल क्षेत्र के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन क्षेत्र में भी औद्योगिक कालोनी स्थापित करने की इजाजत दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार एक नया और सरल विधेयक लाने की तैयारी में है। इतना ही नहीं, शहरों में अब 25 फीसदी तक इंडस्ट्रियल कालोनी बसाई जा सकेगी। इस फैसले से अब पूंजी निवेश करने वालों को कालोनी के लिए आसानी से जमीन उपलब्ध हो सकेगी।
यदि कोई पूंजी निवेश करने वाला शहरी आबादी क्षेत्र से पांच सौ मीटर की दूरी पर कृषि क्षेत्र में उद्योग लगाना चाहता है, तो वह अपने खर्चे पर वहां अन्य व्यवस्थाएं कर सकता है। बिजली, पानी और सड़क जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास में जो खर्च आएगा, उसे निवेशक को वहन करनी होगी। कल-कारखाने लगाने की मंजूरी के नियम भी सरल बनाए जाएंगे। सरकार ने निवेशकों को एक बहुत बड़ी राहत भी प्रदान की है। उसने एक्सटर्नल डेवलेपमेंट चार्ज के नियमों में भी बदलाव किया है।
यदि कृषि क्षेत्र में लगाया गया उद्योग कुछ साल बाद शहरी क्षेत्र के दायरे में आ जाता है, तो उसके निर्मित हिस्से पर एक्सटर्नल डेवलेपमेंट चार्ज नहीं वसूला जाएगा। हां, अगर जमीन का कोई हिस्सा अधूरा है या खाली पड़ा है और बाद में उस पर निर्माण किया जाता है, तो नियमानुसार उस पर चार्ज देना होगा। सरकार ने इतने सारे फैसले केवल इसलिए लिए हैं ताकि राज्य में निवेश को आकर्षित किया जा सके। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि निकट भविष्य में प्रदेश में पूंजी निवेश होगा और राज्य के विकास की नई गाथा लिखी जाएगी।

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