अशोक मिश्र
कई हजार साल पहले जब इंसान ने अपने को असुरक्षित महसूस किया, तो उसने परिवार नामक संस्था को जन्म दिया। परिवार को वर्तमान स्वरूप में आने में भी कई शताब्दियां लगीं। परिवार का मतलब होता है, हर प्रकार की समस्याओं और दिक्कतों को मिलजुलकर हल करना। परिवार ने न केवल विभिन्न प्रकार की विपत्तियों से इंसान की सुरक्षा की, बल्कि उसे सुकून का एहसास भी दिलाया। लेकिन पिछले दिनों से परिवार में जिस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं, उससे परिवार संस्था खुद संकटग्रस्त नजर आती है।परिवार की वजह से ही समाज में तमाम रिश्तों का निर्माण किया गया। हर रिश्ते की एक मर्यादा कायम की गई। लेकिन अब रिश्तों में कड़वाहट घुलती जा रही है। परिवार में कलह बढ़ती जा रही है। सोमवार को फरीदाबाद के दयालपुर गांव में एक व्यक्ति ने पहले अपने पांच साल के बच्चे की हत्या की और फिर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जाता है कि मरने वाला अपनी पत्नी सहित अपने माता-पिता और भाई से झगड़ा करता था। उन सबसे मारपीट करता था जिसकी वजह से आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के मां-बाप, भाई और उसकी पत्नी अपने पांच साल के बेटे के साथ अलग रहते थे।
मरने वाला व्यक्ति अपने पुस्तैनी घर में अकेला रहता था। दरअसल, ऐसी घटनाएं अब आम हो चली हैं। परिवार में पति-पत्नी, मां-पिता, भाई-बहनों के बीच सामंजस्य घटता जा रहा है। लोग छोटी-छोटी बातों पर उग्र हो रहे हैं। हत्या या आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। जब से समाज में एकल परिवार का चलन बढ़ा है, तब से लड़के और लड़कियों में महत्वाकांक्षाओं ने उड़ान भरनी शुरू कर दी है। शिक्षित होना, अपने पैरों पर खड़ा होना, धन कमाने की लालसा होना किसी भी रूप में गलत नहीं है।
लेकिन जब इसके चलते संबंधों में दरार आने लगे, तो परिवार के लोगों को सतर्क हो जाना चाहिए। आज पति हो या पत्नी, सबको अपने-अपने हिसाब से स्वतंत्रता चाहिए। कमाऊ महिलाएं अपनी कमाई को अपने मन मुताबिक खर्च करना चाहती हैं, लेकिन यदि पति इसमें बाधा डालता है, तो मनमुटाव हो जाता है। यही मनमुटाव बाद में एक ग्रंथि का रूप धारण कर लेता है।
इससे परिवार में मारपीट, कहा सुनी और कई बाहर हत्या या आत्मघात जैसी घटनाओं में परिणत हो जाती है। जैसे-जैसे समाज में खुलापन आता जा रहा है, स्त्री-पुरुष की नजरों में परिवार और यौन संबंधों के मायने बदलते जा रहे हैं। अवैध संबंध रखना, शादीशुदा होते हुए भी गर्लफ्रेंड या ब्यायफ्रेंड रखना जैसी बातें सामान्य चलन मानी जाने लगी हैं। ऐसी स्थिति में परिवार में तनाव बढ़ना लाजिमी है। गरीबी, बेकारी जैसी समस्याओं के कारण भी परिवार में कलह मची रहती है। परिवार का कोई सदस्य अतिमहत्वाकांक्षी भी हो सकता है जिसकी वजह से परिवार में अनबन हो सकती है।


No comments:
Post a Comment