Saturday, May 9, 2026

हरियाणा में गेहूं के अवशेष जलाकर किसानों ने बढ़ा दिया प्रदूषण

अशोक मिश्र

प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है। दुनिया के कई देश प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। इससे उन देशों की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जीडीपी गिर रही है। भारत में भी प्रदूषण की समस्या गहराती जा रही है। इसकी वजह से देश के कई हिस्सों में प्रदूषणजनित बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। इससे जहां परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, वहीं कार्यबल का भी नुकसान हो रहा है। 

हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोग प्रदूषण की मार झेल रहे हैं। हरियाणा में प्रदूषण को रोकने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, इसके बावजूद प्रदूषण से निजात नहीं मिल रही है। लोग धान की फसल के समय में पराली जलाने से बाज नहीं आते हैं, तो गेहूं की फसल के समय में गेहूं का फाना यानी उसके अवशेष डंठल जला रहे हैं। पिछले साल काफी प्रयास करने के बाद पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई थी। कुल 662 स्थानों पर धान की पराली जलाई गई थी।

लेकिन इस साल किसानों ने धान की पराली जलाने के मुकाबले में चार गुना ज्यादा गेहूं के अवशेष जला दिए हैं। पूरे प्रदेश में इस साल एक अप्रैल से छह मई के बीच 2683 स्थानों पर गेहूं के अवशेष जलाए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा 441 मामले तो जींद जिले में पाए गए हैं। प्रदेश सरकार ने पराली हो या गेहूं के अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगा रखा है। प्रदेश सरकार ने किसान गेहूं के डंठल न जलाने पाएं, इसके लिए अधिकारियों की टीम बनाई थी। इस टीम को किसानों पर नजर रखनी थी, इसके बावजूद इतने ज्यादा स्थानों पर गेहूं के अवशेष जलाए गए। 

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पिछले दिनों हरियाणा के अधिकारियों से इस मामले में जवाब भी मांगा था। पिछले पांच साल से प्रदेश सरकार के काफी प्रयास करने के बाद पराली जलाने के मामले में काफी कमी आई थी। पराली जलाने की घटनाएं 3626 स्थानों से घटकर 662 पर आ गई थीं। अब गेहूं के अवशेष जलाने की घटनाओं ने सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सामने एक नई चिंता पैदा कर दी है। 

गेहूं के अवशेष को खेत में जलाने से पर्यावरण और मिट्टी को काफी नुकसान पहुंचता है। इसके खेतों में रहने वाले वे कीट भी मर जाते हैं, जो खेती के लिए काफी लाभदायक साबित होते हैं। इससे खेत की उर्वरा शक्ति भी नष्ट हो जाती है। वैसे यदि किसान चाहें तो गेहूं के अवशेष का सदुपयोग कर सकते हैं। वह गेहूं के डंठल से कम्पोस्ट खाद बना सकते हैं। इसके अलावा खेत में जुताई करके इन्हें मिट्टी में मिलाकर खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं। 

राज्य सरकार ने खेत में गेहूं के अवशेष जलाने वाले 552 किसानों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो सीजन तक मंडियों में एमएसपी पर अनाज बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। खेत या खेत के बाहर पराली या गेहूं का अवशेष जलाना, अपराध है। किसानों को ऐसा करने से बचना चाहिए।

No comments:

Post a Comment