Friday, May 8, 2026

क्लर्क ने कहा, सबूत दो, तुम्हीं एमा काल्वे हो

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

स्वामी विवेकानंद की एक पुस्तक है मेमोरीज आफ यूरोपियन ट्रैवल। इसमें वह लिखते हैं कि एमा गरीब थीं लेकिन अद्भुत प्रतिभा संपन्न थीं। अपने सौंदर्य, यौवन, प्रतिभा और पवित्र आवाज की वजह से वे आज पश्चिम की सबसे कामयाब गायिका हैं। तकलीफों और मुफलिसी ने उन्हें सिखाया।

स्वामी जी ने जिस एमा के बारे में अपनी पुस्तक में लिखा है, वह थीं रोजा एमा काल्वे। इनका जन्म 15 अगस्त 1858 को एवेरान में हुआ था। इनके पिता एक इंजीनियर थे। यह फ्रांसीसी ओपेरा गायिका थीं। प्रसिद्ध होने के बाद उन्होंने बहुत धन कमाया,लेकिन 1894 में शिकागो में कार्यक्रम पेश करने के दौरान एमा की इकलौती पुत्री की आग लगने से मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने चार बार आत्महत्या का प्रयास किया। 

इसी बीच उनकी मुलाकात स्वामी विवेकानंद से हुई और उन्होंने उन्हें अवसाद से बाहर निकाला। कहते हैं कि जब वे अपने प्रसिद्धि के सर्वोच्च शिखर पर थीं, तो कैलिफोर्निया के एक छोटे शहर पहुंची। वह एक रजिस्टर्ड डाक आने वाली थी। पोस्टआफिस में पहुंचने पर उन्होंने डॉक के बारे में पूछताछ की और बताया कि वह एमा काल्वे हैं। पोस्ट आफिस के क्लर्कने उनसे उनके एमा काल्वे होने का सबूत मांगा। उन्होंने उस क्लर्क से विनम्रतापूर्वक कहा कि वही हैं एमा काल्वे। लेकिन क्लर्क नहीं माना। 

उसने कहा कि वह काल्वे जैसी नहीं दिखती हैं क्योंकि कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में उसने उन्हें देखा है। एमा ने बताया कि कार्यक्रम के समय मैं अधिक सुंदर दिखती हूं। इसके बाद एमा ने उस क्लर्क को वही गीत गाकर सुनाया। पूरा पोस्ट आफिस चकित रह गया। उस क्लर्क ने बाद में उनसे क्षमा मांगी और पत्र उन्हें सौंप दिया।

No comments:

Post a Comment