अशोक मिश्र
जल ही जीवन है। यह लगभग सभी लोग बचपन से ही रटते आए हैं। पहली और दूसरी कक्षा में भी टीचर्स बच्चों को यह सूत्र वाक्य रटा देती हैं। उनका उद्देश्य यह है कि बच्चा अभी से जल की महत्ता को समझे और जीवन में जल को बरबाद न होने दे। कुछ बच्चे इस बात को याद रखते हैं, जीवन में जल की महत्ता को समझते हुए उसका संरक्षण करने की कोशिश करते हैं।कुछ बच्चे नहीं समझते और जीवन भर जल को बरबाद होते हुए देखते हैं, लेकिन जल संरक्षण की दिशा में कोई प्रयास नहीं करते हैं। जल जीवन है, यह बात उस समय लोगों को समझ में आती है, जब 38-40 डिग्री तापमान में कंठ सूख रहा होता है और एक घूंट पीने लायक ठंडा पानी मिल जाता है। जल सचमुच जीवन है। पूरा उत्तर भारत इन दिनों तप रहा है। हरियाणा में भी कई जिलों में औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास है। कई जिलों में पानी को लेकर लोग चिंतित हैं।
घरों में पानी की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो रही है। बड़ी-बड़ी कालोनियों में रहने वाले लोग पानी के बिना परेशान हैं। जो लोग आज पानी को लेकर हायतौबा मचा रहे हैं, वह लोग सर्दी और बरसात के दिनों में पानी की चिंता ही नहीं करते हैं। उनके घर या कालोनी की सड़क के किनारे लगा नल खुला है और पानी बह रहा है, तो उन्हें कोई चिंता नहीं होती है। उनसे यह भी नहीं होता है कि वह रुककर बहते पानी को रोक दें। उन्हें अपने काम पर जाना है और फिर सड़कों पर नल से बह रहे पानी को रोकना उनका काम तो है नहीं। वह किसी के नौकर हैं क्या? जो दूसरों का काम करें।
ऐसे लोग अगर बस एक मिनट का कष्ट उठा लें, तो नल से बहने वाले सैकड़ों लीटर पानी को बरबाद होने से बचा सकते हैं। यह उनका नागरिक कर्तव्य है कि अगर किसी ने गलती से या जानबूझकर नल को खुला छोड़ दिया है, तो वह अपना थोड़ा सा समय खर्च करके पानी को बरबाद होने से रोक दें। सर्दियों और बरसात के दिनों में पानी की जरूरत कम हो जाती है। बरसात के दिनों में नालियों के माध्यम से बह जाने वाले पानी को यदि किसी तालाब, कुंडों और बावड़ियों में संरक्षित कर लिया जाए, तो उसका उपयोग गर्मी के दिनों में किया जा सकता है।
बरसात में आसमान से बरसने वाले पानी को यदि पूरी तरह संरक्षित कर लिया जाए, तो इससे भूगर्भ जल स्तर भी बढ़ेगा और गर्मियों में पानी की किल्लत भी नहीं होगी। बरतन और कपड़े धोने के बाद उस पानी का उपयोग पेड़-पौधों को सींचने में किया जा सकता है। यदि घर के सामने पार्क हो और उसमें फल-फूल वाले पौधे लगे हों, तो उस पानी का उपयोग सिंचाई में किया जा सकता है। आरओ से वेस्ट के रूप में निकलने वाले पानी का उपयोग कपड़े, बर्तन धोने के साथ-साथ अन्य कामों में किया जा सकता है। अधिकतर लोग इस पानी को नाली में बहा देते हैं।

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