बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
माता-पिता की सेवा करना, इनसान का परम कर्तव्य है। हमारे मां-बाप ने बहुत कष्ट उठाकर हमारा पालन-पोषण किया है। यदि हम उनके किसी काम न आए, तो फिर हमारा जीवन व्यर्थ है। एक बार की बात है। कुएं पर चार महिलाएं पानी भरने आईं। बात काफी पुरानी है। तब लोग पीने के पानी के लिए कुएं के पानी पर ही निर्भर रहते थे। चारों महिलाओं में बातचीत होने लगी।महिलाओं की बातचीत के दौरान चर्चा बेटों को लेकर चल निकली। एक महिला ने बड़े गर्व से अपने बेटे के बारे में बताते हुए कहा कि मेरा बेटा विश्वविद्यालय से पढ़कर आया है। पढ़ाई खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद उसे उसी विश्वविद्यालय में नौकरी मिल गई है। अब वह वहां पढ़ाने लगा है। तभी दूसरी महिला ने उसकी बात को काटते हुए कहा कि सुनो तो, मेरा बेटा वैज्ञानिक है। उसने विज्ञान की पढ़ाई की है।
पढ़ने में वह काफी तेज है। कुछ ही दिनों बाद वह अपनी मेहनत और लगन से एक बड़ा वैज्ञानिक बन जाएगा। पूरी दुनिया में उसका नाम होगा। मैं भी कितनी भाग्यशाली हूं कि मेरा बेटा वैज्ञानिक है। इतना कहकर दूसरी महिला चुप हुई, तो तीसरी महिला ने कहा कि मेरा बेटा भी पढ़ा-लिखा है। पड़ोस के गांव में पढ़ाता भी है। चौथी महिला चुप रही, तो महिलाओं ने उससे अपने बेटे के बारे में बताने को कहा।
चौथी महिला ने संकोच में कहा, मेरा बेटा पढ़ा-लिखा नहीं है। वह खेती करता है। चारों महिलाएं पानी का घड़ा लेकर चल दीं। रास्ते में तीनों महिलाओं के बेटे मिलें। उन्होंने नमस्ते किया और आगे बढ़ गए। तभी चौथी महिला का बेटा आया और उसने अपनी मां से घड़ा लेता हुआ बोला, मां! पानी की जरूरत थी, तो मैं ला देता। आपने इतनी तकलीफ क्यों की? उस लड़के की बात को सुनकर तीनों महिलाएं समझ गई कि अनपढ़ होते हुए भी यह लड़का आज्ञाकारी है। तीनों महिलाओं का सिर लज्जा से झुक गया।

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