अशोक मिश्र
हरियाणा में वायु प्रदूषण के चलते सांस लेना भी दूभर होता जा रहा है। राज्य के औद्योगिक और शहरी इलाकों में हवा में घुली अमोनिया गैस लोगों की सांस घोट रही है। इसकी वजह से लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। अमोनिया गैस के संपर्क में आने वाले लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने के साथ-साथ खांसी, गले में जलन और छाती में जकड़न होती है। हवा में घुली अमोनिया गैस आंखों और त्वचा के लिए भी हानिकारक है।इसकी वजह से आंखों में तेज जलन पैदा होती है जिससे आंखों से पानी आने लगाता है। त्वचा में लालिमा आ सकती है जिससे खुजली भी हो सकती है। यही नहीं, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक अमोनिया के संपर्क में रहे, तो वह दमा जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है। निमोनिया और फेफड़ों में पानी जमा होना आम बात है। इनसान के तंत्रिका तंत्र पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
आंकड़े बताते हैं कि गुरुग्राम में हर दूसरा बच्चा श्वसन समस्याओं से जूझ रहा है। इसका बड़ा कारण प्रदूषित हवा है। रैस्पायर लिविंग साइंसिज की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गुरुग्राम का सेक्टर-51 में कूड़े-कचरे के अंबार से बन रही जहरीली अमोनिया गैस का बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है। राज्य में पी. एम. 2.5 और पीएम 10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से भी अधिक दर्ज किया गया है जबकि अमोनिया के स्तर में आठ फीसदी की बढ़ोतरी सामने आई है। गुरुग्राम के कुछ इलाके कूड़े के ढेरों और औद्योगिक कचरे के कारण अमोनिया के हॉटस्पॉट बन गए हैं।
इतना ही नहीं, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, मानेसर और सोनीपत की औद्योगिक पट्टी इंसानों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही है। इंसानों के स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का बहुत बुरा असर हो रहा है। खेतों में यूरिया आधारित उर्वरकों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हवा में अमोनिया गैस को बढ़ावा दे रहा है। खेतों में डाला गया उर्वरक बाद में हवा के संपर्क में आने के बाद अमोनिया गैस बनने का कारण है। पानीपत और सोनीपत के औद्योगिक बेल्ट में कपड़ा रंगाई इकाइयों और अन्य कारखानों से बिना उपचारित रसायन युक्त पानी यमुना नदी में छोड़ा जा रहा है जो हवा में अमोनिया का एक बड़ा स्रोत है।
राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमा कूड़े के अंबार से अमोनिया गैस का रिसाव होता है। कूड़े में पड़े अपशिष्ट जब सड़ने लगते हैं या उन पर सूरज की किरणें पड़ने से अपशिष्ट गर्म होता है, तब उससे अमोनिया गैस निकलती है। पशुधन अपशिष्ट से भी अमोनिया वायुमंडल में मिल रही है। ऐसी स्थिति में अगर बदलाव नहीं आया तो निकट भविष्य में लोगों को कई तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ सकता है। राज्य सरकार ऐसी स्थिति से बचने के लिए कई तरह के उपाय कर रही है। इसके बावजूद उद्योगों को भी इस काम में मदद करनी चाहिए और अपशिष्ट को नदी या खुले में फेंकने से बचना चाहिए।

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