Thursday, May 28, 2026

बांस अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

इंसान को अपने किए गए कार्यों का परिणाम हासिल करने के लिए धैर्य रखना चाहिए। कुछ काम ऐसे भी होते हैं जिनके परिणाम काफी देर से दिखाई देते हैं। इससे कुछ लोग निराश हो जाते हैं और काम करना छोड़ देते हैं। किसी नगर में एक व्यक्ति रहता था। 

उसने जीवन भर काफी प्रयास किया, लेकिन उसे अपने काम में सफलता नहीं मिली। वह इस बात से निराश हो गया। निराशा के क्षणों में उसने घर छोड़ दिया और एक जंगल में जाकर रहने लगा। उसने अपने को पूरी तरह नकारा आदमी मान लिया था। संयोग से कुछ दिनों बाद जंगल में ही रहने वाले एक साधु से उसकी मुलाकात हुई। उस आदमी ने साधु को सारी बात बताई और पूछा कि आप एक भी कारण बताएं जिससे हार न मानूं। 

साधु ने धैर्य पूर्वक उस निराश व्यक्ति की बात सुनी। साधु ने निराश व्यक्ति को सामने की ओर लगे दो पेड़ों की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम सामने उगे फर्न और बांस के पेड़ को देख रहे हो? उस व्यक्ति ने कहा कि हां, मैं देख रहा हूं। फर्न का पेड़ काफी छोटा है, लेकिन बांस का पेड़ काफी लंबा है। तब साधु ने कहा कि मैंने इन दोनों पेड़ों के बीज को आज से पांच साल पहले एक साथ ही बोया था। 

दोनों को खाद और पानी समय-समय पर देता रहा। फर्न का पौधा कुछ ही दिनों बाद जमीन फाड़कर ऊपर आ गया। लेकिन बांस से कोई पौधा नहीं फूटा। लेकिन मैं लगातार बांस के पौधे को पानी देता रहा। चार साल बाद बांस से अंकुर फूटा और एक साल में ही वह फर्न से भी बड़ा हो गया। 

निराश व्यक्ति ने कहा कि यह कैसे हो गया? तब साधु ने कहा कि बांस का बीज बोये जाने के बाद ही अंकुरित हो गया था, लेकिन वह जमीन के नीचे ही अपनी जड़ों को मजबूत कर रहा था। तुमने भी अब तक अपनी जड़ों को मजबूत किया है। हो सकता है कि अब तुम्हें सफलता मिल जाए। यह सुनकर निराश व्यक्ति समझ गया कि उसे क्या करना है?

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