अशोक मिश्र
हरियाणा पुलिस का दावा है कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ऐसा पुलिस विभाग द्वारा लागू की गई नीतियों के चलते हुआ है। वर्ष 2024 में जहां महिलाओं के खिलाफ होने वाले मामलों की संख्या 13,945 थी। वहीं, 2025 में यह घटकर 8,723 रह गई। पुलिस का आंकड़ा बताता है कि महिलाओं को राज्य में सुरक्षित माहौल मिल रहा है। राज्य में दुष्कर्म, अपहरण और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर अपराधों में लगातार गिरावट आई है।पुलिस ने महिला सुरक्षा को घर, कार्यस्थल, यात्रा और न्यायिक प्रक्रिया इन चार स्तरों पर मजबूत किया है। लेकिन आए दिन ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि राज्य में अभी पुलिस को थोड़ी और सतर्कता बरतने की जरूरत है। फरीदाबाद में ही दो युवकों ने कैमरे वाले चश्मे से सैलून चलाने वाली महिला की वीडियो बनाई और तस्वीरें खींची। फिर उसे मार्फ करके उस वीडियो और तस्वीरों को अश्लील बनाया और महिला को भेजकर दस हजार रुपये ठग लिए।
दोनों युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक स्टिंग आपरेशन देखकर ऐसा कदम उठाया था। इस तरह की घटनाएं लगभग हर प्रदेश में हो रही हैं। हरियाणा में भी हो रही हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल, सोशल मीडिया पर कुछ शातिर किस्म के लड़के या आदमी महिलाओं से संपर्क करते हैं, फिर उससे दोस्ती गांठते हैं। फिर महिला की वीडियो और तस्वीरों को अश्लील बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है। महिलाओं को ब्लैकमेल करने की घटनाओं में हाल के वर्षों में डिजिटल माध्यमों और निजी संबंधों के दुरुपयोग के कारण वृद्धि देखी गई है।
साइबर अपराध और व्यक्तिगत रंजिश के जरिए ब्लैकमेलिंग के मामले पुलिस और महिला आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। करीबी मित्र या प्रेमी द्वारा आपत्तिजनक वीडियो बनाकर महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। मई 2026 में पानीपत में एक महिला ने अपने प्रेमी द्वारा एक करोड़ रुपये की मांग और वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किए जाने के कारण आत्महत्या कर ली। इस तरह की घटनाओं को तब तक नहीं रोका जा सकता है, जब तक महिलाएं खुद सतर्क न हों। उनकी सतर्कता ही ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा सकती है। हरियाणा सरकार और पुलिस इन अपराधों को रोकने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है।
जहां भी संभव होता है, हरियाणा समय-समय पर स्कूलों, आफिसों और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं और बच्चों को ऐसी स्थिति से बचने के लिए सुझाव देती है। उन्हें बचाव के तरीके सिखाते हैं। अपराध करने वाले अक्सर नाबालिगों को ऐसे कृत्यों में शामिल करते हैं क्योंकि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत उन्हें हल्की सजा मिलती है। नाबालिगों को कानून का भी पता नहीं होता है।
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