बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
भारत में पारसी समुदाय की मेहरबाई टाटा का नाम बैटमिंटन खिलाड़ी के साथ-साथ महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करने वाली महिलाओं में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है। मेहरबाई का जन्म 10 अक्टूबर 1879 में मुंबई में हुआ था। इनके पिता उच्च शिक्षित व्यक्ति थे। 14 फरवरी, 1898 को खूबसूरत मेहरबाई का विवाह जमशेदजी एन. टाटा के सबसे बड़े पुत्र दोराबजी टाटा से हुआ।दोराबजी को 1900 में अपनी नवविवाहित दुल्हन को 245.35 कैरेट का विशाल जुबली हीरा उपहार में देने के लिए जाना जाता है, जिसे वह महत्वपूर्ण सार्वजनिक समारोहों में गर्व से पहनती थीं। मेहरबाई ने छोटी उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। बात 1924 को पेरिस में हुए समर ओलंपिक्स की है। दुनियाभर के टेनिस खिलाड़ी वहां जमा हुए थे। खेल के दौरान टेनिस खेलने के लिए जब मेहरबाई टाटा मैदान में उतरीं, तो वहां उपस्थित लोगों की आंखें आश्चर्य से फटी रह गईं।
मेहरबाई साड़ी पहनकर टेनिस खेलने के लिए मैदान में आई थीं। उन्हें अपने भारतीय पोशाक साड़ी पर गर्व था। जिस चुस्ती फुर्ती के साथ उन्होंने तेज सर्विस की, लोगों ने आश्चर्य से अपनी अंगुली दांतों तले दबा ली। साड़ी पहनकर टेनिस खेल कर मेहरबाई ने दुनिया भर को यह संदेश दिया कि यदि अपने खेल के प्रति जोश और जुनून हो, तो किसी भी खेल में पोशाक कोई मायने नहीं रखता है।
मेहरबाई टाटा आजीवन समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहीं। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनके संघर्ष करने से भारतीय समाज में जागरूकता भी आई। ल्यूकेमिया से पीड़ित मेहरबाई टाटा का 18 जून 1931 में निधन हो गया।

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