अशोक मिश्रनौतपा के आने से पहले ही पूरा उत्तर भारत गर्मी से बेहाल है। गर्मी ने लोगों का जीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। ऊपर से समय-समय पर लगने वाले बिजली कट ने और समस्या खड़ी कर दी है। प्रचंड गर्मी के कारण पानी संकट गहराता जा रहा है। गर्मियों में वैसे भी पानी की खपत बढ़ जाती है। पेयजल की जरूरत से बसे ज्यादा हो जाती है। जलस्तर बहुत तेजी से नीचे जाने लगता है क्योंकि जलदोहन तेज हो जाता है। लोगों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूगर्भ जल का दोहन कई गुना बढ़ जाता है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अगर जल संकट से उबरने में कोई सबसे ज्यादा सहायक होता है, तो वह है तालाब। कभी हमारे देश में तालाब ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा हुआ करते थे। उनकी जरूरतें गांवों के तालाबों से पूरी हो जाया करती थीं। तालाबों से जहां खेतों की सिंचाई होती थी, वहीं पशुओं को भी पेयजल इन तालाबों से ही मिलता था। गांवों में अधिक से अधिक तालाब होने से जलस्तर भी काफी ऊंचा रहता था। लेकिन धीरे-धीरे शहरों में अधिकतर तालाब अतिक्रमण के शिकार हो गए।
लोगों ने तालाबों को पाटकर वहां निर्माण कर लिए। गांवों या शहरों में जो तालाब बचे हैं, वह उपेक्षा के शिकार हैं। इन्हीं सब स्थितियों को देखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आदेश दिया है कि राज्य के तालाबों की स्थिति को सुधारा जाए। तालाबों के इर्द-गिर्द उगी झाड़ियों और घासफूस को साफ करके वहां बैठने और घूमने लायक व्यवस्था की जाए। वहां सोलर लाइट की व्यवस्था की जाए ताकि वहां आने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। सरकार ने तालाबों की मरम्मत व सौंदर्यीकरण के लिए प्रति तालाब दी जाने वाली राशि को पचास हजार से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया है।
हरियाणा में लगभग 20,039 तालाब हैं जिनमें 19,129 ग्रामीण और 910 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें से अधिकांश तालाब गंदे पानी और कचरे के कारण प्रदूषित थे। सैनी सरकार की तत्परता और प्रतिबद्धता के चलते, जल संरक्षण और भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार इनका कायाकल्प करवा रही है। अब तक 6,000 से अधिक तालाबों की सफाई पूरी हो चुकी है।
'अमृत सरोवर मिशन' के तहत हजारों तालाबों का कायाकल्प किया जा रहा है। हरियाणा सरकार का 'हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण' इनके संरक्षण, मछली पालन, और जल-पुनर्भरण पर काम कर रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गांवों के गंदे पानी को सीधे तालाबों में न छोड़ा जाए। इसके साथ ही बड़े तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि ग्रामीणों के लिए आय का साधन बन सके। इससे प्राप्त राशि का उपयोग तालाबों के रखरखाव में खर्च किया जाना है ताकि तालाब की स्थिति अच्छी रहे और जलस्तर में सुधार रहे।
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