Saturday, May 30, 2026

नदियों में जल प्रवाह कम होने से संकट में जलबिजली परियोजनाएं


अशोक मिश्र

मई महीने में पूरे उत्तर भारत को प्रचंड गर्मी झेलनी पड़ी। भीषण गर्मी का प्रकोप झेलने वाले राज्यों में हरियाणा भी शामिल रहा। भीषण गर्मी की वजह से जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा, वहीं नदियों का जल प्रवाह भी बाधित हुआ। नदियों के कम होते प्रवाह और भूगर्भ जलस्तर कम होने से जहां लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा, वहीं हरियाणा की जलविद्युत योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। घटते भूजल स्तर और नदियों के कम होते प्रवाह से राज्य की कृषि, पेयजल आपूर्ति और पनबिजली (हाइड्रो-इलेक्ट्रिक) परियोजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। 

यह संकट मानसूनी बरसात होने तक बने रहने के आसार हैं। नदियों के जल का प्रवाह कम होने से विद्युत उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिसकी वजह से बिजली कटौती यूएचबीवीएनएल, यूएचबीवीएनएल को मजबूर होना पड़ा है। भीषण गर्मी में हथिनीकुंड बैराज के जलस्तर में लगातार कमी होने का असर पनबिजली परियोजनाओं और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने लगा है। इसकी वजह से पनबिजली परियोजना की इकाइयों को रोक-रोक कर चलाना पड़ रहा है।

हरियाणा में मुख्य रूप से मैदानी इलाका होने के कारण बड़े जलविद्युत संयंत्रों की गुंजाइश बहुत कम है, इसलिए राज्य में मुख्य रूप से नहर आधारित और माइक्रो-हाइडल परियोजनाएं संचालित हैं। इनसे बड़ी मात्रा में विद्युत उत्पादन नहीं हो पाता है। पश्चिमी यमुना नहर पनबिजली परियोजना हरियाणा की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। इसे हरियाणा पावर जेनरेशन कॉपोर्रेशन लिमिटेड द्वारा चलाया जाता है। इसकी स्थापित क्षमता 62.7 मेगावाट है। काकरोई माइक्रो जलविद्युत परियोजना सोनीपत जिले के काकरोई गाँव में पश्चिमी यमुना नहर पर स्थित है जिसकी स्थापित क्षमता 400 किलोवाट है। 

हथिनीकुंड बैराज परियोजना यमुनानगर जिले में यमुना नदी पर स्थित है। यह बैराज सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ पनबिजली उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। हथिनीकुंड पर एक बड़ा बांध बनाने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि भविष्य में 250 मेगावाट से अधिक पनबिजली उत्पन्न होगी। इन इकाइयों को चलाने के लिए कई हजार क्यूसेक पानी की आवश्यकता होती है। इतना पानी नदियों में नहीं है। पानी की कमी के चलते परियोजनाओं को रोक-रोक कर चलाना पड़ रहा है। 

यही वजह है कि राज्य में बार-बार अघोषित और घोषित बिजली कट लगाने पड़ रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में सिंचाई के लिए पानी मिलने में कठिनाई हो सकती है। राज्य की सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बिजली की निर्भरता कम करने के लिए हरियाणा सरकार पीएम कुसुम योजना और सौर ऊर्जा संचालित सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं पर भी तेजी से काम कर रही है। संभव है निकट भविष्य में राज्य की जनता को जल संकट और बिजली संकट से निजात मिल जाए।

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