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Wednesday, May 27, 2026

तोता बोला, गुरु मिले तो बंधन छूटे


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गुरु के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती है। अज्ञानता का बंधन भी नहीं कटता है। सच्चा गुरु जीवन को सार्थक बना देता है। इस संबंध में एक बहुत ही रोचक कथा है। एक पंडित रोज अपने राज्य की रानी को कथा सुनाने जाया करता था। रानी उस पंडित पर बहुत विश्वास करती थीं क्योंकि पंडित काफी पढ़ा-लिखा और सरल स्वभाव का था। 

वह जब भी कोई कथा या प्रसंग सुनाता था, तो वह अंत में यही कहता था, राम कहे, तो बंधन टूटे। रानी के घर में  एक तोता पला हुआ था। वह भी इंसान की तरह बोलना जानता था। जब पंडित कहता कि राम कहे, तो बंधन टूटे। तभी तोता बोल उठता था, यो मत कहो रे पंडित झूठे। पंडित उसकी बात से बहुत परेशान होता था। वह उसकी बात समझ नहीं पाता था। 

एक दिन पंडित ने तोते की चर्चा अपने गुरु से की। गुरु जी तोते के पास पहुंचे और बोले, तुम यह क्यों कहते हो कि यो मत कहो, रे पंडित झूठे। तोते ने कहा कि पहले में स्वतंत्र रहता था। एक दिन एक गुरुकुल के पास की पेड़ पर बैठा था कि गुरुकुल के एक आचार्य ने मुझे पकड़ लिया। उसने मुझे पिंजरे में डाल दिया। उसने मुझे कुछ श्लोक भी रटवाए। मुझे बोलना सिखाया। 

फिर एक दिन नगर के व्यापारी ने मुझे देखा, तो उसने आचार्य को पैसा देकर मुझे खरीद लिया। अब मैं चांदी के पिंजरे में कैद हो गया। कुछ दिन बाद व्यापारी ने मुझे रानी को भेंट कर दिया, तो मैं सोने के पिंजरे में आ गया। अब आप बताएं कि राम कहे, तो बंधन टूटे कहां सच साबित हुआ। गुरु जी ने कहा कि कल तुम अपनी सांस रोककर यों ही पड़े रहना। अगले दिन रानी ने देखा कि तोता हिल डुल नहीं रहा है, तो उन्होंने समझा कि तोता मर गया है। उन्होंने तोते को निकालकर बाहर रख दिया। तोता मौका देखकर आकाश में उड़ गया और बोला, गुरु मिले तो बंधन छूटे।