अशोक मिश्रफरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत से लेकर दिल्ली के आनंद विहार, जहांगीरपुरी, द्वारका तक कई जगहों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में पहुंच चुका है। आंखों में जलन, गले में खराश और सुबह की सैर पर निकले बुजुर्गों की सांस फूलना अब आम शिकायत बनती जा रही है। असल सवाल यही है कि आखिर हर साल अक्टूबर आते-आते हमारी हवा सांस लेने लायक क्यों नहीं रह जाती।
प्रदूषण का कोई एक मूल कारण नहीं है, बल्कि यह कई कारणों के एक साथ मिलने से बना एक जहर है। इसका सबसे बड़ा स्रोत हमारे रोजमर्रा के जीवन में छिपा है। दिल्ली एनसीआर में लगभग एक करोड़ से ज्यादा वाहन सड़कों पर हैं। इनसे निकलने वाला धुआं, खासकर डीजल वाहनों और पुराने वाहनों का उत्सर्जन, हवा में पीएम 2.5 और नाइट्रोजन आॅक्साइड की मात्रा को लगातार बढ़ाता है। दूसरा बड़ा कारण धूल है। पूरे एनसीआर में हजारों निर्माण स्थल चल रहे हैं, सड़कों की खुदाई चल रही है।
खुले में पड़ी मिट्टी और मलबा हवा में घुल जाता है। इसमें उद्योगों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा जलाने से उठने वाला जहरीला धुआं और घरों में इस्तेमाल होने वाले ठोस ईंधन भी मिल जाते हैं। पटाखे इस पहले से ही भरी हुई हवा में एक तात्कालिक विस्फोट की तरह हैं, जो दो-तीन दिन के लिए स्थिति को बेहद गंभीर बना देते हैं। इस जहरीली हवा की सबसे बड़ी कीमत हमारे घर के सबसे कमजोर लोग चुका रहे हैं, हमारे बच्चे और हमारे बुजुर्ग। डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, उनकी सांस लेने की गति बड़ों से तेज होती है, इसलिए वे प्रति किलो वजन के हिसाब से ज्यादा प्रदूषित हवा अंदर लेते हैं।
साल भर खराब हवा में रहने से उनके फेफड़ों की क्षमता कम होने लगती है, अस्थमा, एलर्जी और बार-बार सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं बचपन से ही घर कर जाती हैं। जो बच्चा आज हांफ रहा है, उसका भविष्य में खिलाड़ी बनने, खुलकर दौड़ने का सपना भी इसी हवा में धुंधला पड़ रहा है। नौनिहालों का जीवन संवारना है तो हमें उन्हें साफ हवा का बचपन लौटाना होगा। यह काम केवल प्रदूषण कम करने का नहीं, बल्कि उनके फेफड़ों को मजबूत करने का भी है।
बच्चों को पौष्टिक भोजन, जिसमें विटामिन सी और एंटीआॅक्सीडेंट भरपूर हों, देना, उन्हें अंदरूनी खेलों के साथ-साथ साफ हवा वाले समय में सांस के व्यायाम सिखाना, और सबसे बढ़कर उन्हें यह बताना कि पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना कितना जरूरी है, ये सब मिलकर उनके भविष्य को सुरक्षित करेगा। इस मामले में सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती, जब तक हम लोग अपनी आदतें नहीं बदलते।
No comments:
Post a Comment