Tuesday, October 13, 2026

वैभव त्याग साध्वी बनी आम्रपाली

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

आम्रपाली वैशाली साम्राज्य की नगरवधू थी। अनुपम सौंदर्य की स्वामिनी, संगीत और नृत्य कला में प्रवीण आम्रपाली को प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों की भी उस समय कमी नहीं थी। वह आम्र पेड़ के नीचे पाई गई थी, इसलिए उसके पालक माता-पिता ने उसे आम्रपाली नाम दिया था। कहा तो यह भी जाता है कि अंधेरी रात में यदि आम्रपाली कहीं मौजूद हो, तो वहां उजाला हो जाया करता था। 

आम्रपाली नगरवधू होने की वजह से किसी की पत्नी, प्रेमिका या मां नहीं बन सकती थी। उसने बहुत ज्यादा धनार्जन भी किया था। एक बार वह महात्मा बुद्ध का उपदेश सुनने गई, तो वह उनसे बहुत ज्यादा प्रभावित हुई। उसने आत्मचिंतन किया। फिर उसने अपने आपको भिक्षुणी बनने का संकल्प लिया। वह साधारण वेशभूषा में महात्मा बुद्ध के आश्रम की ओर चल पड़ी। लोग चकित रह गए। 

बुद्ध ने उसे भिक्षुणी बनने की अनुमति दे दी।  अब सवाल उठा कि उसने जो नृत्य, गायन और संगीत से अकूत धन कमाया है, उसका क्या उपयोग किया जाए। महात्मा बुद्ध ने भी उसे समझाया कि जो समय बीत गया है, उसको छोड़कर जो समय बचा है, उसको सुधारा जाए। अपना जीवन सुधारने के साथ-साथ दूसरे लोगों को भी आत्म सुधार की ओर प्रवृत्त किया जाए। 

आम्रपाली ने अपना सारा धन बौद्ध संघ को समर्पित कर दिया। इस धन से कई बौद्ध संघारामों का निर्माण किया गया। गौतम बुद्ध की प्रेरणा से उसने गहन साधना की और समाज में उच्च स्थान प्राप्त किया। साधनारत होकर उसने परम साध्वी का पद प्राप्त किया। उसके अकूत धन का उपयोग भी समाज निर्माण में किया गया। इस तरह बौद्ध साहित्य में स्थान पाकर आम्रपाली देश-विदेश में अमर हो गई?

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