अशोक मिश्र
बुद्ध ने हमेशा लोगों को सरल भाषा और जीवन से जुड़े संदर्भ में ही उपदेश दिए। यही कारण है कि उनके उपदेशों को सामान्य जन समझ सके और अपने जीवन में उसे उतार सके। वह हमेशा व्यावहारिक बात ही किया करते थे। एक बार की बात है। महात्मा बुद्ध धर्म सभा में लोगों को आत्म कल्याण का उपदेश दे रहे थे। उनके एक शिष्य ने पूछा कि भगवन! मनुष्य इतने प्रसंगों में उलझा रहता है, उसे उससे ही छुटकारा नहीं मिलता है।ऐसे में वह आत्म कल्याण कैसे करे? जीवन की राह बहुत कठिन प्रतीत होती है, फिर वह जीवन में मुक्ति का मार्ग कैसे पा सकता है? गौतम बुद्ध ने कहा कि आत्म शोध ही मनुष्य को अपने कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर ले जाने का एक मात्र रास्ता है। मनुष्य को अपने मन में विचार करना चाहिए कि उसमें किस तरह की कमियां हैं जिसके कारण वह आत्म कल्याण के पथ पर नहीं चल पा रहा है।
आत्म शोध की वह पथ है जिस पर चलकर मनुष्य न केवल अपने जीवन को सुखी बना सकता है, बल्कि अपना कल्याण कर सकता है। गौतम बुद्ध ने एक स्त्री का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि एक स्त्री रोज क्या करती है? वह सुबह उठकर सबसे पहले दर्पण में अपना चेहरा निहारती है।
वह अपने चेहरे को निर्मल और सुंदर बनाने का हर संभव प्रयास करती है। दर्पण में वह देखती है कि चेहरे पर यदि कहीं कोई गंदगी लगी है, तो वह उसे तुरंत हटाती है। नहीं हटा, तो वह साफ पानी से चेहरा धोती है, कपड़े से साफ करती है। इसी तरह मनुष्य को भी अपने भीतर और बाहर की बुराइयों का निरीक्षण करना चाहिए। यदि तनिक भी कमी दिख जाए, तो उसे प्रयत्न करके हटाना चाहिए। शरीर और मन को शुद्ध रखने का उपाय ही आत्म शोध है।


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