बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
बौद्ध ग्रंथों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, गौतम बुद्ध की मृत्यु (महापरिनिर्वाण) 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर (कुशीनारा) में 80 वर्ष की आयु में हुई थी। बौद्ध ग्रंथों (जैसे महापरिनिर्वाण सुत्त) के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान पावा नगर में 'चुंद' नामक लोहार ने गौतम बुद्ध को भोजन कराया था। इस भोजन में 'सूकर-माद्दव' नामक एक विशेष खाद्य पदार्थ था।इस भोजन के बाद महात्मा बुद्ध को पेचिश, पेट में दर्द और रक्तस्राव होने लगा था जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। कुछ विद्वानों का मानना है कि सूकर माद्दव सुअर का मांस नहीं बल्कि मशरूम था जो विषैला हो गया था। कहा जाता है कि जब गौतम बुद्ध की तबीयत बिगड़ गई तो उनके साथ चल रहे तमाम शिष्य चिंतित हो उठे। आनंद ने उनकी सेवा-सुश्रुषा की, इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे।
इस बीच जिसको भी गौतम बुद्ध के बारे में पता चला, वह भागता हुआ कुशीनगर पहुंचा। एक भारी भीड़ जमा हो गई। तभी एक जिज्ञासु सुभद्र बहुत दूर से चलकर अपनी कुछ शंकाओं के समाधान के लिए वहां पहुंचा। उसने आनंद से गौतम बुद्ध के बारे में पूछा और मिलने की विनती की। आनंद ने सुभद्र को सारा हाल कह सुनाया और बुद्ध से मिलाने से इंकार कर दिया। कुटिया के भीतर बुद्ध यह वार्तालाप सुन रहे थे।
उन्होंने आनंद को बुलाया और कहा कि मेरे जीवित रहते किसी जिज्ञासु को निराश होकर यहां से जाने देना ठीक नहीं है। सुभद्र ने जब यह जाना तो उसने गौतम बुद्ध से मिलना उचित नहीं समझा। उसने बुद्ध की महानता को मन ही मन प्रणाम किया और बिना कुछ उपदेश सुने ही वह परिव्राजकों की शिष्ट टोली में जाकर बैठ गया।


No comments:
Post a Comment