अशोक मिश्रदिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद के मूल में आयोजन का स्थान, समय और उसके संभावित प्रभाव को लेकर किए जा रेह अलग-अलग दावे हैं। एक तरफ तो इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया जा रहा है। दूसरी तरफ इसे राजधानी के जनजीवन के लिए एक बड़ी असुविधा के तौर पर देखा जा रहा है। रैली के समर्थन में दिया जाने वाला पहला तर्क संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा है।
वैसे तो यह बात काफी हद तक सही है कि किसी भी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने, जनता को जुटाने और सरकार के सामने अपनी मांगें रखने का अधिकार है। दिल्ली देश की राजधानी है। इसके नाते यह स्वाभाविक है कि सामाजिक-राजनीतिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यक्तिगत तौर पर लोग धरना-प्रदर्शन करने दिल्ली ही आते हैं। रैली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाई गई है।
कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों, खासकर पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। पार्टी इसे वोट चोरी बताते हुए देशभर से लोगों को दिल्ली बुला रही है और दावा कर रही है कि इस महारैली में दस लाख तक लोग जुट सकते हैं। दिल्ली पुलिस ने पहले ही इस आयोजन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया है, जिससे कांग्रेस को वैधता का आधार मिल गया है।
वहीं रैली के विरोध में भी कई व्यावहारिक और राजनीतिक तर्क दिए जा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर सबसे बड़ी चिंता यातायात और कानून व्यवस्था को लेकर है। एक नवंबर को त्योहारों के आसपास का समय है, जब दिल्ली में पहले से ही भीड़ और प्रदूषण का दबाव रहता है। दीपावली और धनतेरस जैसे त्यौहार भी नजदीक होंगे, ऐसे में लाखों लोगों के एक जगह जुटने से मध्य दिल्ली और नई दिल्ली के बड़े हिस्से में जाम, मेट्रो पर अतिरिक्त भार और आम लोगों के कामकाज में बाधा आने की आशंका जताई जा रही है।
इसके अलावा त्योहारी सीजन का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। दीपावली, धनतेरस और छठ जैसे त्योहारों के बीच यह रैली दिल्ली के व्यापारियों के कारोबार को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। चैंबर आॅफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री जैसे संगठनों ने आशंका जताई है कि यातायात व्यवस्था प्रभावित होने और भीड़ के कारण करीब दस हजार करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने रैली को भाई दूज के बाद स्थगित करने की अपील की है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों साथ-साथ चलते हैं।


No comments:
Post a Comment